कुंडलिनी बनाम धर्म

कुंडलिनी एकमात्र ऐसी चीज है, जो सभी धर्मों और दर्शनों को एक साथ जोड़ सकती है। इस दुनिया में सब कुछ केवल कुंडलिनी के लिए है। जब प्रत्येक धर्म कुण्डलिनी के साथ अपने संबंध का पता लगाएगा, तो दुनिया में स्वयं ही शांति और सद्भाव होगा। यही कारण है कि मैंने अपनी वेबसाइट का नाम demystifyingkundalini.com रखा। उसमें हर प्रकार के लोगों के लिए गुंजाइश है। सभी धर्मों को मानना इससे बेहतर है कि किसी धर्म को न मानें।
कोई यह कह सकता है कि कुंडलिनी को किसी धर्म से बंधा हुआ नाम क्यों दिया जाना चाहिए, किसी वैज्ञानिक या संस्कृति की तरह का गैर धार्मिक आदि नाम क्यों नहीं।

ऐसा इसलिए है, क्योंकि ये और अन्य सभी शब्द भी क्षेत्र विशेष से सम्बंधित हैं। कोई भी शब्द ऐसा नहीं है, जो किसी क्षेत्र या परंपरा से जुड़ा न हो। यदि कोई नया शब्द खोजा जाता है, तो उसमें खोजकर्ता का टैग लगा होगा। यदि कोई समिति एक नया शब्द बनाती है, तो उसमें समिति के प्रमुख का टैग लगा होगा। आप संबंधित टैग से बच नहीं सकते। फिर कुंडलिनी शब्द को इसी तरह क्यों नहीं रखा जाना चाहिए, जैसा कि है, क्योंकि यह सबसे पुराने धर्म से सम्बंधित है, पुराने युगों से लेकर पहले से ही योग से जुड़ा हुआ है, और इस प्रकार सकारात्मक मनोवैज्ञानिक प्रभावों की अधिकता अपने अन्दर समेटे हुए है। आखिर “कुण्डलिनी” शब्द का विरोध क्यों?

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