Happy Guru poornima, 2018- गुरु पूर्णिमा २०१८ के सम्मान में

Guru can not be defined, praised, described, advertised or forcefully made. Guru is in the form of one’s own self. How can that be praised or described in anyway. Guru can only be experienced.

The same happened to Premyogi vajra. He is totally dumb regarding a Guru. He has only experiential account that he cannot describe in anyway. When he tries to describe Guru as something special, then he loses his essence totally. It is just like as if anyone can taste the sweet but cannot describe the sweetness in a true form. When he tries to describe sweetness, he loses that’s joy suddenly. Guru is a friend, not a friend, both of these and neither of these. Guru is a well wisher, not a well wisher, both of these and neither of these. Guru helps in spiritual progress, not helps in spiritual progress, both of these and neither of these. Guru has a specific age, not has a specific age, both of these and neither of these. Guru has a specific set of qualities, don’t have a specific set of qualities, both of these and neither of these. Guru is spiritually advanced, not spiritually advanced, both of these and neither of these. Guru is beloved, not beloved, both of these and neither of these. Guru is too respected, not too respected, both of these and neither of these. Guru is well known and established socially, not well known and established socially, both of these and neither of these. Guru loves his disciple, don’t love his disciple, both of these and neither of these. Guru showcases himself as a Guru, doesn’t showcase himself as a Guru, both of these and neither of these. Guru can be searched for or one can be made as a Guru deliberately/forcefully, can not be searched for or one can not be made as a Guru deliberately/forcefully, both of these and neither of these. Guru appears in one’s life through his attraction towards one’s tantric consort, it doesn’t happen so, both of these and neither of these. Guru itself searches his disciple, it’s not so, both of these and neither of these. Guru is non dual, he is dual, both of these and neither of these. Guru takes credit of his disciple’s spiritual progress, he doesn’t do so, both of these and neither of these. Guru is a family member, not a family member, both of these and neither of these. Guru is an elder one, not an elder one, both of these and neither of these. Guru is selfish and want to solve his purpose, it’s not like this, both of these and neither of these. Guru is must in life, it’s not so, both of these and neither of these. Guru is a special God gift, it’s not so, both of these and neither of these. Guru is punishing, he is not punishing, both of these and neither of these. Guru is everywhere, he is no where, both of these and neither of these. Guru is one’s second mother for he gives one second birth into an enlightened life, it’s not so, both of these and neither of these. Guru is must for awakening, he is not must for awakening, both of these and neither of these. Guru is everything, he is nothing, both of these and neither of these. Guru accepts one when he is rejected from everywhere, it’s not so, both of these and neither of these. One can be fully sure if who one is his Guru, it’s not so, both of these and neither of these. Guru is one’s Kundalini/focused mental image that can be lifted up most easily through tantra, it’s not so, both of these and neither of these. Guru doesn’t provide mere knowledge but love and mental support too for mere knowledge can also be provided by Google, it’s not so, both of these and neither of these. It is a long list and covers every humanely attributes.

Actually, Guru is indescribable just like God. Majority of people who go on beating the drums outside for Guru actually don’t know even the ABC of Guru. Guru is made in heart. Guru is made in mind. Actually not made deliberately but all happen spontaneously in a love full social environment. People who don’t know what is love, they can’t understand Guru. No one can exposé one that is hardly attached to the heart. No one can exposé one that is hardly attached to the mind.

गुरु को परिभाषित, प्रस्तावित व विज्ञापित नहीं किया जा सकता; और न ही किसी को जबरदस्ती गुरु बनाया जा सकता है। गुरु तो किसी के अपने स्वयं के / आत्मा के रूप में ही होते है। भला अपना रूप कैसे किसी के द्वारा वर्णित या प्रशंसित किया जा सकता है। गुरु केवल अनुभव ही किए जा सकते हैं।

प्रेमयोगी वज्र के साथ भी यही हुआ। वह गुरु के बारे में पूरी तरह से गूंगा है। उसके पास केवल अनुभवात्मक विवरण है, जिसे वह किसी भी तरह से वर्णित नहीं कर सकता है। जब वह गुरु को किसी विशेष रूप में वर्णित करने का प्रयास करता है, तो वह उसका सार पूरी तरह से खो देता है। यह ऐसे होता है, जैसे कोई भी व्यक्ति मीठा स्वाद तो ले सकता है, लेकिन मिठास को एक वास्तविक रूप में वर्णित नहीं कर सकता है। जब वह व्यक्ति मधुरता का वर्णन करने की कोशिश करता है, तो वह अचानक उसकी खुशी / मिठास को खो देता है। गुरु एक दोस्त है, दोस्त भी नहीं, इनमें से दोनों भी है, और इनमें से कोई भी नहीं। गुरु एक शुभचिंतक है, नहीं भी है, दोनों भी है, और इन दोनों में से कोई भी नहीं। गुरु आध्यात्मिक प्रगति में मदद करता है, नहीं भी करता है, दोनों भी सत्य हैं, इन दोनों में से कोई भी सत्य नहीं है। गुरु की एक विशिष्ट उम्र है, उसकी कोई भी विशिष्ट उम्र नहीं है, इनमें से दोनों भी, और कोई भी नहीं। गुरु के अन्दर विशिष्ट गुणों का एक समूह होता है, नहीं भी होता है, इनमें से दोनों भी, और इनमें से कोई भी नहीं है। गुरु आध्यात्मिक रूप से उन्नत है, आध्यात्मिक रूप से उन्नत नहीं भी है, इनमें से दोनों भी है, और इनमें से कोई भी नहीं। गुरु प्रिय हैं, प्रिय नहीं भी हैं, इनमें से दोनों, और इनमें से कोई भी नहीं। गुरू बहुत सम्मानित हैं, नहीं भी हैं, इनमें से दोनों भी हैं, और इनमें से कोई भी नहीं है। गुरु अच्छी तरह से जाना-माना होता है, और सामाजिक रूप से अच्छी तरह से स्थापित होता है, अच्छी तरह से ज्ञात और सामाजिक रूप से स्थापित नहीं भी होता, इनमें से दोनों भी, और इनमें से कोई भी नहीं। गुरु अपने शिष्य से प्यार करते हैं, प्यार नहीं भी करते, इनमें से दोनों भी, और इनमें से कोई भी नहीं। गुरु खुद को गुरु के रूप में दिखाता है, नहीं भी दिखाता है, इन दोनों में से दोनों ही, और इनमें से कोई भी नहीं। गुरु की खोज की जा सकती है, या किसी को जानबूझकर / बलपूर्वक गुरु के रूप में बनाया जा सकता है; उसे नहीं भी खोजा जा सकता है, या जानबूझकर / बलपूर्वक नहीं भी बनाया जा सकता है, इन दोनों में से दोनों ही, और दोनों में से कोई भी नहीं। गुरु किसीके जीवन में उसकी तांत्रिक प्रेमिका / प्रेमी के प्रति आकर्षण के माध्यम से प्रकट होता है, ऐसा नहीं भी होता है, इनमें से दोनों भी, और इनमें से कोई भी नहीं। गुरु स्वयं ही अपने शिष्य की खोज करता है, ऐसा नहीं है, इनमें से दोनों भी, और इनमें से कोई भी नहीं। गुरु द्वैतमयी नहीं है, वह द्वैतमयी है भी, इनमें से दोनों भी, और इनमें से कोई भी नहीं। गुरु अपने शिष्य की आध्यात्मिक प्रगति का श्रेय स्वयं को देते हैं, वह ऐसा नहीं करते हैं, इनमें से दोनों भी, और इनमें से कोई भी नहीं। गुरु एक परिवार का सदस्य है, वह शिष्य के परिवार का सदस्य नहीं है, इनमें से दोनों भी, और इनमें से कोई भी नहीं। गुरु एक वृद्ध व्यक्ति हैं, ऐसा नहीं है, इनमें से दोनों भी, और इनमें से कोई भी नहीं। गुरु स्वार्थी हैं, और अपने उद्देश्य को हल करना चाहते हैं; ऐसा नहीं है, इनमें से दोनों भी, और इनमें से कोई भी नहीं। गुरु जीवन में जरूरी है, ऐसा नहीं है, इनमें से दोनों भी, और इनमें से कोई भी नहीं। गुरु भगवान का दिया हुआ एक विशेष उपहार है, ऐसा नहीं है, इनमें से दोनों भी, और इनमें से कोई भी नहीं। गुरु दंडित करते हैं, वह दण्डित नहीं करते हैं, इनमें से दोनों, और इनमें से कोई भी नहीं। गुरु हर जगह है, वह कहीं नहीं है, इनमें से दोनों भी, और इनमें से कोई भी नहीं है। गुरु एक दूसरी मां है, क्योंकि वह एक दूसरे जन्म को एक प्रबुद्ध जीवन के रूप में देता है, ऐसा नहीं है, इनमें से दोनों भी, और इनमें से कोई भी नहीं। गुरु आत्मजागृति के लिए जरूरी है, जरूरी नहीं है,  इन दोनों में से दोनों भी, और इनमें से कोई भी नहीं। गुरु सब कुछ है, वह सब कुछ नहीं है, इनमें से दोनों भी है, और इनमें से कुछ भी नहीं है। जब कोई व्यक्ति हर जगह से खारिज कर दिया जाता है, तो गुरु उसको स्वीकार करता है, ऐसा नहीं है, इनमें से दोनों भी, और इनमें से कोई भी नहीं। कोई पूरी तरह से सुनिश्चित कर सकता है कि कौन उसका गुरु है, ऐसा नहीं है, इनमें से दोनों भी, और इनमें से कोई भी नहीं। गुरु एक कुंडलिनी / केंद्रित मानसिक छवि है, जिसे तंत्र के माध्यम से मूलाधार से सबसे आसानी से उठाया जा सकता है, ऐसा नहीं है, इनमें से दोनों भी हैं, और इनमें से कोई भी नहीं है। गुरु केवल ज्ञान ही प्रदान नहीं करते हैं, बल्कि ज्ञान के साथ प्यार और मानसिक सहायता / सहानुभूति भी, क्योंकि खाली ज्ञान तो Google / गूगल के द्वारा भी प्रदान किया जा सकता है; ऐसा नहीं है, इनमें से दोनों बातें भी सत्य हैं, और इनमें से कोई भी सत्य नहीं। यह एक लंबी सूची है, जो हर मानवीय विशेषताओं को शामिल करती है।

दरअसल, गुरु भगवान की तरह अवर्णनीय है। गुरु के मामले में बाहरी प्रचार के ड्रम / ढोल को बजाने वाले अधिकांश लोग वास्तव में गुरु के एबीसी / कखग को भी नहीं जानते हैं। गुरु दिल में बना होता है। गुरु को दिमाग में बनाया गया होता है। वास्तव में गुरु को जानबूझकर नहीं बनाया गया होता है, लेकिन वे एक पूर्ण सामाजिक व प्रेमभरे वातावरण में सहजता से स्वयं ही मस्तिष्क में प्रतिष्ठित हुए होते हैं। जो लोग नहीं जानते कि प्यार क्या है, वे गुरु को नहीं समझ सकते हैं। कोई भी उस व्यक्ति को उजागर नहीं कर सकता, जो दिल से मजबूती के साथ जुड़ा हुआ होता है। कोई भी उस व्यक्ति को एक्सपोज़ नहीं कर सकता है, जो दिमाग / मन से मजबूती के साथ जुड़ा हुआ होता है।

ANIMAL CASE REPORT

Gun shot injury in a cow

A cow presented with a gun shot injury inside the deep jungle. Ice packs were applied at the inflamed areas and strong anti inflammatory drugs were administered at high dozes, but no improvement was noticed. Cow went into comma through reversible shock. Immediately, tracheal window(tracheotomy) was made to aid in respiration that resulted in that’s quick regain of sense and that stood up for one and half hours. Cow succumbed before arrival of the intensive fluid therapy.

Animal- Jersey cross cow. adult age.

Place ant time- village Tepra, p.o. Namhol, district Bilaspur, state Himachal pradesh, India. 26/02/2008

History- Sound of two gun shots with smoke and cow rushing from jungle to that’s shed located nearby. That was bleeding at cheeks profusely.

Signs- One hole on left side of cheek below ear having about 1.5 cm diameter. Second hole on right side at same level having 3 cm diameter. One very small hole on left side of neck that was shallow. Blood was not coming out through holes at that time. Face and neck were very large and swollen. Snoring and very fast respiration @ 50-60 was there. Cow was standing.

Diagnosis- Laryngeal compression due to ongoing oedematous swelling causing difficulty in respiration. Also body fluid depletion through shock and excessive hemorrhages.

Treatment- Continuous bathing of inflamed area with ice cold water, injection Meloxicam @30 ml i/m at two sites, injection streptopenicillin @2.5 g i/m. There was no effect of treatment. Animal started aimless wandering into obstacles due to cerebral hypoxia. Then cow fell down with tongue protruding out and became unconscious. Tracheal(trachea/windpipe) small incision was given to make a ball pen size window in that for by pass respiration along with rapid pressing and releasing of chest(resurrection). The air flow started through the window vigorously/noice fully and the cow drawn back that’s tongue into that’s mouth. Cow rose up to sitting position from being laterally recumbent earlier. Cow became conscious again. Tracheal incision was perfect and no hemorrhages except for a little from overlying muscles for few minutes was noticed. May be this was due to low blood pressure. cow remained alert for next one and half hours. Then stood up and started aimless wandering. She also started kitting (kit-kit sound) of teeth. After 15 minutes, cow fell down and died soon before arrival of the intensive fluid therapy in that remote area. Total course of disease in our presence was about 2.5 to 3 hours. Local police was informed by the owner. On request of police, postmortem of cow was performed.

Cause of death- Traumatic/hypovolumic/hemorrhagic shock and acute respiratory distress syndrome(ARDS) due to systemic inflammatory responce syndrome(SIRS).

Legal guidelines- The jacket of bullet should be preserved as it provides the vital clues about the type of gun/rifle used. Since the exit hole was wider than the entrance hole, so that appeared as if an expanding type(lead) of bullet because lead(in anterior part of jacket, naked) being soft expands due to impact of soft tissues. Other bullet types are fragmenting types which become fragmented to many pieces after penetration thus increasing the tissue injury. Any type of bullet can disintegrate at light contact with the skin so making many holes. Lead type of bullet has lead inside the jacket(made up of copper) and some part of it is naked at anterior part of the jacket so that it can expand to cause maximum tissue injury. Copper jacket is specific for the specific barrels/rifles so that should be preserved. Other fragments/pieces of the bullet are also to be preserved to be presented in the court of law.

Animal(buffalo) case report

Actinobacillosis in a buffalo unresponsive to streptomycin

There was a buffalo case having chronic Actinobacillosis with only mild symptoms of the disease. That created confusion, first causing wrong diagnosis that was done as Ketosis at first time, unresponsive/simple Actinobacillosis at second time  and liver damage on third occasion. It lastly recovered with potassium iodide oral therapy @ 7g od for 7 days.

Date and place

village Tepra, p.o. Namhol, district Bilaspur, state Himachal pradesh, India. dated 26-02-2008

Animal

Species-Bovine-buffalo, age-adult/full mouth.

History

There was a gradual weakness since calving about 5 months ago. Rapid weakness and oligophagia/reduced appetite since about 12-13 days along with constant dribbling of saliva. No total refusal of food. Selective eating of grass avoiding dry but eating lush green. Frequent up-down shaking of head while picking up grass to mouth. Rumination type movements of jaws but no froth seen to outside, although a clear stingy saliva visible. Animal used to lick the hands of owner when being healthy but now stopping that all together.

Clinical signs

Pulse rate-60/normal, respiration rate- normal, rectal temperature- 99-100 degree F showing weakness, conjuctival mucous membrane-bright pink/normal, oral cavity-no shear molars, no grass entangled between teeth and cheek, no foreign body between molars and anywhere inside buccal cavity. Tongue appeared somewhat enlarged posteriorly. On anterior side of tongue, blackish spots(size of pin head) distributed. Body condition- very much emaciated and hide bound. Reduced from the original size of 400 kg to 200 kg.

Diagnosis number 1

Ketosis. Treatment done- Injection dexamethasone @20 mg i/m and bolus albendazole orally but to no effect.

Diagnosis number 2

Actnobacillosis. Treatment done- Injection Streptomycin @ 2.5 g i/m o.d. for 3 days and injection liver extract for 2 days but to no effect.

Diagnosis number 3

Liver damage due to facioliasis or any other reason. Treatment done- Injection liver extract at a rate 5 times the normal doze rate for 4 days/up to one day more of stoppage of salivation and initiation of tongue movement(by the effect of KI) including injection B-complex for two days. Potassium iodide was also administered in the last 2 days of above course, orally without hope for its effect but only to satisfy the owner/for hit and trial @ 7 g daily for 7 days. Miracle type occured and salivation stopped after 2 days of potassium iodide therapy.

Conclusion- It appears that the above described disease in buffalo was a chronic form of Actinobacillosis that was unresponsive to Streptomycin.

 

Tantric Guru and tantric consort- तांत्रिक गुरु और तांत्रिक प्रेमिका

The permanent stationing of guru inside one’s mind is best achieved through sexual tantra, just as happened with Premyogi vajra as described on Home-2 webpage. His first exposure with his sexual consort(non marital)/Queen during he being in loving company of his guru(the same spiritual old man) was pure mental/one time indirect initiation/indirect tantra based as told in detail on webpages, love story of a yogi, scattered throughout. Therein queen was as if his activated kundalini and was led through the wonderful/too rich romantic lures in his mind to his enlightenment in too short time of 2 years by the spontaneous grace of his pauranic(who reads puranas/collections of ancient Indian spiritual stories in Sanskrit, daily) guru’s company, even without her awakening. On second occasion, his that and then demised physical guru’s mental image as his second kundalini was enriched too much with his non dual life style and that image’s connection with the repeatedly remembered image of the first consort(indirectly sexual) in about 15 years. Then in the last, Premyogi vajra lifted up that kundalini to  her awakening with the help of the direct sexual tantra with his second consort(marital), as described on the same homepage in brief and love story of a yogi-7 in detail.

मन के अन्दर गुरु के स्थायी रख-रखाव को यौन तंत्र के माध्यम से सबसे अच्छी तरह से हासिल किया जा सकता है, जैसा कि होम -2 वेबपृष्ठ पर वर्णित प्रेमयोगी वज्र के साथ हुआ था। अपनी प्रथम यौनप्रेमिका / प्रथम देवीरानी (अविवाहित) से संपर्क में रहने के दौरान वह अपने गुरु (वही आध्यात्मिक बूढ़े आदमी) की निरंतर प्रेमपूर्ण संगति में भी बना हुआ था। प्रथम देवीरानी के साथ वह संपर्क शुद्ध मानसिक / एकबार के अप्रत्यक्ष तांत्रिक प्रारम्भ (इनिशिएशन) / अप्रत्यक्षतंत्र से प्रेरित था। यह सारा वर्णन वेबपेजिस “love story of a yogi” पर किया गया है। वही देवीरानी उसकी सक्रिय कुंडलिनी के रूप में थी, और उसके दिमाग में उसके उपरोक्त पौराणिक गुरु द्वारा पढ़ी गई कथाओं की सहज कृपा से अत्यद्भुत / बहुत ही समृद्ध रोमांटिक लालचों के माध्यम से, 2 वर्षों के बहुत कम समय में उसके आत्मज्ञान के लिए चरम मानसिक अभिव्यक्ति तक ले जाई गई, उन्हीं गुरु की संगति से, जो प्रतिदिन प्राचीन भारतीय आध्यात्मिक कहानियों के संग्रह / पुराण पढ़ा करते थे, उस कुण्डलिनी की सैद्धांतिक जागृति के बिना ही। दूसरे मौके पर, उन्होंने अपनी दूसरी कुंडलिनी के रूप में अपने उन्हीं भौतिक गुरु की मानसिक छवि को अपनी अद्वैतपूर्ण जीवन शैली के साथ समृद्ध किया, और पहली देवीरानी (परोक्ष रूप से यौनसम्बन्धी) की बार-बार याद की गई छवि के साथ अपने गुरु की छवि का संबंध जुड़ा होने के कारण, गुरु की छवि भी काफी समृद्ध हो गई, लगभग 15 वर्षों में। फिर आखिर में, प्रेमयोगी वज्र ने अपनी दूसरी कंसोर्ट / प्रेमिका (वैवाहिक) के साथ सीधे / प्रत्यक्ष यौनतंत्र की मदद से अंतिम जागृति के लिए उस कुंडलिनी को उठाया, जैसा कि उपरोक्त होमपेज पर ही संक्षेप में और “love story of a yogi-7” में विस्तार से वर्णित है।

 

Yoga versus Religious extremism- योग और धार्मिक कट्टरता

Yoga versus Religious extremism (हिंदी में पढ़ने के लिए कृपया पोस्ट को नीचे की तरफ ब्राऊज करें)

I think, science became developed spontaneously to save the world from the religious extremism. People died of religious cause were born as advanced people in their next birth. The feeling of insecurity remained in those as such due to the long lasting effect of great agony of their previous birth. So there mind was itself diverted towards advanced weaponry for their self protection. There appears enough declines in the massacres on the basis of religion after the science took hold of its foot. People became too busy in their own business/work and there was no extra time/stamina to think of these things too seriously enough. Advanced warfare technologies became developed to take control of the outnumbered and frenzied religious mobs/religion driven dreadful warriors by the handful of security forces. But unfortunately those warfare technologies were not controlled in a sensible way, that resulted in world wars, other regional conflicts, their pass over to the terrorists/dictators/religiously driven warriors and insurgents(external link/quora); thus defying the main and sole purpose of the warfare technologies to save the humanity. Religious extremism/radicalism/intolerance is the so good example of the dualism/non spiritualism. Only Yoga can save the world from the religious extremism/intolerance.

Actually, Yoga and the non dual lifestyle, both nourish kundalini in a similar way. Premyogi vajra experienced all of it practically. He is a mystic man whose mystic experiences including his concluding vision can be read at  Mystic Premyogi vajra and his divine love story can be read at  Love story of a Yogi . When he adopted a non dual attitude in his too busy physical as well as mental life style through the help of his home made tantric philosophy named SHAVID, he found his kundalini as too live and growing. Similarly, when he practiced kundalini yoga in his sedentary lifestyle, then also he found his kundalini even more live and growing. So it is self obvious that Yoga produces non duality through the medium of Kundalini for kundalini and non duality love to live together. We also know that people with Sedentary lifestyle or those lacking a lot of work to do are more violent/aggressive/agitated for their tons of energy have no way to go. They are more prone to be religiously intolerant/extremists/radicals. If they do Yoga, then they will become non dual and all the problems will be solved for the non duality is the best antidote for the religious poisoning that is the outgrowth of the duality filled lifestyle.

Why one wants to destroy other’s religion. Because he doesn’t like that. Why he doesn’t like that. Because he has duality in mind and considers his religion as better/different than that of others. Now the problem here is the double standard. He tries to destroy other’s religion in the name of God/non duality. God is nothing but non-duality, I think so. In this way, he performs the act that is full of duality while considering himself as non dual or man of god. If he is really non dual or a man of god, then what is the need of destroying anything for a non dual is happy with everything, just as Premyogi vajra became after his glimpse enlightenment. It means he is a liar/cheater, speaking/thinking something and doing the opposite thing. These types of people may become too dangerous for they may be too unpredictable. This clarifies the famous statement that the crimes covered with the religious blanket are too difficult to eradicate. Until this double standard is removed ant the religions are fully disconnected from the anti humanity, till then the organized and well planned crimes are difficult to prevent. So it is better to be a human than a religious one.

Gautama Buddha has well said even much  before the advent of the truly extremist religions, though near the silent  footprints of those through his intuitive guess of the future course that not accepting his wrong doings by one is much more dangerous than the wrong doings itself for the later one can improve himself but former one can never improve himself for he considers himself as if right.

योग और कट्टर धर्मिता

मुझे लगता है कि धार्मिक कट्टरपंथियों के धार्मिक उन्माद से दुनिया को बचाने के लिए विज्ञान स्वचालित रूप से विकसित हो गया था। धार्मिक कारणों से मरने वाले लोग अपने अगले जन्म में उन्नत लोगों के रूप में पैदा हुए थे। वह असुरक्षा की भावना उन लोगों में बनी रही, जो उनके पिछले जन्म की बड़ी पीड़ा के लंबे समय तक चलने वाले प्रभाव के कारण थी। तो फिर वहां प्रकृति द्वारा उनको अपने स्वयं के संरक्षण के लिए उन्नत हथियारों की तरफ मोड़ दिया गया था। विज्ञान के पैर पसारने के बाद धर्म के आधार पर नरसंहार में पर्याप्त गिरावट दिखाई देती है। क्योंकि लोग अपने व्यवसाय / काम में बहुत व्यस्त हो गए, और अमानवीय चीजों को बहुत गंभीरता से सोचने के लिए कोई अतिरिक्त समय / शक्ति नहीं थी। सुरक्षा बलों के द्वारा बड़े पैमाने पर और उन्मत्त धार्मिक मोब्स / हिंसक भीड़ के डरावने योद्धाओं को नियंत्रित करवाने के लिए उन्नत युद्ध तकनीकों का विकास किया गया। लेकिन दुर्भाग्यवश उन युद्ध तकनीकों को एक समझदार तरीके से नियंत्रित नहीं किया गया, जिसके परिणामस्वरूप विश्व युद्ध व अन्य क्षेत्रीय संघर्ष हुए; और आतंकवादियों / तानाशाहों / धार्मिक रूप से संचालित योद्धाओं और विद्रोहियों (बाहरी लिंक / क्वारा) तक उन तकनीकों को प्रसारित कर दिया गया। इस प्रकार मानवता को बचाने के लिए युद्ध-प्रौद्योगिकियों के मुख्य और एकमात्र उद्देश्य को काफी हद तक खारिज कर दिया गया। धार्मिक अतिवाद / कट्टरतावाद / असहिष्णुता आदि दुर्गुण द्वैतवाद / गैर-आध्यात्मिकता के इतने अच्छे उदाहरण हैं। केवल योग ही धार्मिक अतिवाद / असहिष्णुता से दुनिया को बचा सकता है।

असल में, योग और अद्वैतमयी जीवनशैली, दोनों कुंडलिनी को एक ही तरह से पोषित करते हैं। प्रेमयोगी वज्र ने इसे व्यावहारिक रूप से अनुभव किया। वह एक रहस्यवादी व्यक्ति है, जिसके रहस्यमय अनुभवों को उनके अंतिम दृष्टिकोण समेत इसी वेबसाईट के गृह-पृष्ठों पर पढ़ा जा सकता है, और उसकी दिव्य / योगिक प्रेम कहानी को “एक योगी की प्रेम कहानी / love story of a yogi” नामक वेबपृष्ठों पर पढ़ा जा सकता है। जब उन्होंने शविद / शरीरविज्ञान दर्शन नामक अपने घर के / स्वयंनिर्मित तांत्रिक दर्शन की मदद से अपने व्यस्त शारीरिक और मानसिक जीवन शैली में एक अद्वैतपूर्ण रवैया अपनाया, तो उन्होंने अपनी कुंडलिनी को भी जीवित और बढ़ते हुए पाया। इसी तरह, जब उन्होंने अपनी आसन्न / बैठकमयी जीवनशैली में कुंडलिनी योग का अभ्यास किया, तब भी उन्होंने अपनी कुंडलिनी को और भी जीवित और बढ़ते हुए पाया। तो यह स्वयं स्पष्ट है कि योग कुंडलिनी के माध्यम से अद्वैत को पैदा करता है, क्योंकि कुण्डलिनी और अद्वैत एक साथ रहने के लिए ललायित रहते हैं / एकसाथ रहते हैं। हम यह भी जानते हैं कि सेडेंटरी / बैठकपूर्ण लाइफस्टाइल / जीवनशैली वाले लोग या वे जो अनथक रूप से काम को प्राप्त करने में असमर्थ रहते हैं, उनके पास अपनी प्रचंड व संचित ऊर्जा को हिंसक / आक्रामक / उत्तेजित / अमानवीय  रास्तों पर ले जाने के अतिरिक्त और कोई रास्ता नहीं बचता है। वे धार्मिक असहिष्णु / चरमपंथी / कट्टरपंथी बनने के लिए अधिक बाध्य हो सकते हैं। यदि वे योग करते हैं, तो वे स्वयं ही अद्वैतमयी बन जाएंगे, और उस अद्वैत के द्वारा सभी समस्याओं का हल कर दिया जाएगा, क्योंकि अद्वैत ही उस धार्मिक विषाक्तता के लिए सबसे अच्छा प्रतिरक्षा-उपाय है, जो द्वैत से भरी जीवनशैली का विस्तार ही तो है।

क्यों कोई दूसरे के धर्म को नष्ट करना चाहता है? क्योंकि वह उसे पसंद नहीं करता है। वह उसे पसंद क्यों नहीं करता है? क्योंकि उसके मन में द्वैत है, और इसलिए अपने धर्म को दूसरों के मुकाबले बेहतर / अलग मानता है। अब समस्या यहाँ डबल स्टेंडर्ड / दोगलेपन की है। वह भगवान के / अद्वैत के नाम पर दूसरों के धर्म को नष्ट करने की कोशिश करता है। भगवान कुछ भी नहीं, बल्कि अद्वैत ही तो है, मुझे तो ऐसा लगता है। इस तरह, वह उस कार्य को निष्पादित करता है, जो द्वैत से भरा होता है, जबकि वह खुद को अद्वैतशाली या ईश्वर के बन्दे के रूप में मानता है। यदि वह वास्तव में अद्वैत या ईश्वर का आदमी है, तो कुछ भी नष्ट करने की क्या ज़रूरत है, क्योंकि अद्वैतवान हर स्वाभाविक स्थिति में व हर स्वाभाविक चीज से प्रसन्न रहता है, जैसे कि प्रेमयोगी वज्र अपने झलकमयी आत्मज्ञान के बाद रहता था। इसका मतलब है कि वह परधर्मद्वेषी झूठा / धोखाधड़ी-पूर्ण है, बोल / सोच कुछ और रहा है, और कर उसके बिलकुल विपरीत रहा है। इस प्रकार के लोग बहुत खतरनाक हो सकते हैं, क्योंकि वे बहुत अप्रत्याशित हो सकते हैं। यह इस प्रसिद्ध बयान को स्पष्ट करता है, कि धार्मिक कंबल से ढके अपराधों को खत्म करना बहुत मुश्किल होता है। जब तक इस डबल मानक को हटा नहीं दिया जाता है, और जब तक धर्म को अमानवता से पूरी तरह से डिस्कनेक्ट / पृथक नहीं कर दिया जाता है, तब तक संगठितसमूहों द्वारा किए गए और अच्छी तरह से अंजाम में लाए गए योजनाबद्ध अपराधों को रोकने में मुश्किल होगी। इससे निष्कर्ष निकालता है कि एक सच्चा इंसान एक धार्मिक व्यक्ति से बेहतर होता है।

गौतम बुद्ध ने वास्तव में चरमपंथी धर्मों के आगमन से पहले ही उनके बारे में बहुत कुछ कहा है, हालांकि संभवतः उनके चुपचाप आते हुए पैरों के निशान को वे शुरू में ही भांप गए थे। उन्होंने कहा है कि जो गलत लोग अपनी गलतियों को स्वीकार नहीं करते हैं, उनके लिए गलत कर्मों की तुलना में वह नकारने का भाव कहीं अधिक खतरनाक है, क्योंकि गलती करने वाला बाद में खुद को सुधार भी सकता है, लेकिन की हुई गलती को नकारने वाला व्यक्ति खुद को कभी भी सुधार नहीं सकता, क्योंकि वह खुद को सही मानते रहने की भूल करता ही रहता है।

Psychotropic drugs with meditation-ध्यान के साथ PSYCHOTROPIC / अवसादरोधी ड्रग्स / दवाएं

I think as if natural psychic drugs have become developed spontaneously to solve some specific purpose at this time. If these are taken at right time and in right schedule during the meditation, it can help in Kundalini awakening. But the present research is not concluding enough. In ancient days, sages used to consume bhaang(Hindi), a narcotic plant to get psychic help in their meditation. Perhaps they knew the right doze, right course and right time of that’s use. People today misuse psychotropic drugs, so get harm instead of any benefit. Premyogi vajra(The hero of demystifyingkundalini) had used a prescribed psychotropic drug continuously for one month that produced a change in his personality. He started meditation after one year of that’s use and got a kundalini awakening. I think, these drugs prime a person for meditation by making him cool, peaceful and satisfied. These qualities are there in meditating being too. This appears as the only role of these drugs for the success is only achieved through the meditation itself. May be that these drugs give additional boost to the meditation if used properly and cautiously, avoiding their side effects. Enough research is there to be done regarding this.

Rest of the detail can be found at Quora, Advising someone who has got kundalini awakening with drugs but relapsing.

ध्यान के साथ PSYCHOTROPIC / अवसादरोधी ड्रग्स / दवाएं

मुझे लगता है कि इस समय कुछ विशिष्ट उद्देश्य को हल करने के लिए ही प्राकृतिक मानसिक दवाएं स्वचालित रूप से विकसित हो गई हैं। यदि ध्यान के दौरान सही समय पर, सही मात्रा में और सही schedule / नियम के साथ इन्हें लिया जाता है, तो ये कुंडलिनी-जागृति में मदद कर सकती हैं। लेकिन वर्तमान शोध पर्याप्त निष्कर्ष नहीं निकाल पा रहा है। प्राचीन दिनों में ऋषि विशेषतः शैव सम्प्रदाय के योगी-बाबा लोग भांग (हिंदी), एक नशीले पदार्थ के पौधे का उपयोग करते थे, ताकि वे उससे ध्यान में मानसिक सहायता प्राप्त कर सकते। शायद वे उसके सही उपयोग, उसके उपयोग के सही तरीके, और उसके उपयोग के सही समय को जानते थे। लोग आज मनोविज्ञान दवाओं का दुरुपयोग करते हैं, इसलिए किसी भी लाभ के बजाय अक्सर नुकसान ही प्राप्त करते हैं। प्रेमयोगी वज्र (डेमिस्टिफाइंगकुंडलिनी / demystifyingkundalini के नायक) ने एक महीने के लिए एक निर्धारित मनोविज्ञान दवा का उपयोग किया था, जिसने उसके व्यक्तित्व में बदलाव कर दिया था। फिर उन्होंने उसके उपयोग के एक वर्ष बाद ध्यान-साधना / कुण्डलिनी-साधना को शुरू किया, और अंततः कुंडलिनी-जागृति प्राप्त की। मुझे लगता है, ये दवाएं एक व्यक्ति को शांत, अवसादरहित और संतुष्ट बना कर, ध्यान-साधना में उसकी मदद करती हैं। ये गुण ध्यान-साधना करने वालों में भी विद्यमान होते हैं। ऐसा लगता है कि इन दवाओं का यही प्रेरणादायक व सहायक रोल होता है, क्योंकि आध्यात्मिक सफलता तो केवल ध्यान-साधना के माध्यम से ही हासिल की जाती है। हो सकता है कि ये दवाएं ध्यान के लिए अतिरिक्त बढ़ावा भी दें, अगर इनके दुष्प्रभावों से परहेज करते हुए, कोई इनका सही ढंग से और सतर्कता से उपयोग करता है। इसके बारे में पर्याप्त शोध किया जाना अभी बाकि है।

शेष विवरण क्वोरा में मिल सकता है, जो कि उसे एक सलाह के रूप में है, जिसकी कुंडलिनी अवसादरोधी दवाओं के साथ जागृत हो गई हो, लेकिन वह फिर से दवा के दुष्प्रभाव में आ गया हो।

Why tongue is touched with soft palate during YOGA practice

Tongue is touched with soft palate to activate the parasympathetic system that produce saliva, calmness and focused mind concentration. The same phenomenon occur when we are hungry, on fast or eating food. Parasympathetic system remains active under these types of conditions. Strengthened and activated parasympathetic nervous system produces power in the digestive system including the salivation. It also empowers the brain. It also produces the mental calmness, bliss, focused concentration and good judgement. The same system is activated during a romantic love affair that is why mouth becomes watery at those times. Also there is experienced a profound bliss, calmness, brain working and focused concentration. Opposite system is the sympathetic nervous system that is also called as the fight or flight system. It has all the actions as opposite to that of the sympathetic nervous system. It is activated during the stress of any kind, at peak of romance; near, during and after the ejaculation. It depresses appetite, digestive functions and brain functions. Depression is caused by it due to a loss of mindfulness. It damages the body in a severe way by keeping the blood pressure high. By creating mindfulness, Yoga activates the parasympathetic nervous system in an indirect way. This results in an improvement in the appetite and alleviation of the depression. Blood pressure is also improved. Body is rejuvenated and its energy is conserved to fulfill the good purposes in one’s life. The same tactic is employed in the tantric sexual YOGA( Sexual Yoga, a myth or a reality  )too. Romantic love affair is sustained for very long without an ejaculation. This results in the sustained and prolonged activation of the parasympathetic nervous system, not allowing the sympathetic nervous system to raise it’s hood up. It results in the quickened spiritual development and growth.

Also, with little practice of touching tongue with soft palate works like an one way valve for kundalini. Through that valve, Kundalini can pass easily downward only, not upward. So Kundalini from tired and confused brain travel to lower chakras mainly naval chakra. That results into stabilization of concentration on Kundalini there without tiredness and confusion of brain. A spiritual relief is immediately regained.