Geetaa philosophy dictated by Lord Krishna is a wonderful treatise of worldwide spirituality. Every religion, philosophy, spirituality seems to be emerging out of it. It’s Karmyoga is an amazing gift to the world. Today, it’s most necessary for people are becoming more and more lethargic, workless and paranoiac/depressed due to today’s mechanized work style. Many types of strange diseases like diabetes, heart ailments, thyroid ailments etc. are gaining their strong foot hold.

Actually, karmyoga teaches us how to be busy physically and mentally along with the development of spirituality round the clock. It helps in achieving worldly as well as spiritual goals, both together in a quickest possible time. Karmayoga is equal to tantra, but with additional sexual element added in tantra for super fast spiritual success. Lord Krishna was also a tantric. Keeping so many gopa-girls happy and even arranging raas in the lonely night with too many of them isn’t possible without tantra.

In karmyoga/tantra, one need to maintain non duality/mental awareness every moment. This is done through practices of vedas-puranas, shareervigyaan darshan/body science philosophy or any other suitable means. It’s a psychic principle that non duality, kundalini and bliss remains always together and enrich each other. So, there are four options for karmayogi. Either enrich kundalini with Kundalini yoga or enrich non duality through philosophical contemplation or through increasing his bliss through humanely relationships or all of these. Last is the best for it incorporates all the spiritual fundamentals. For detailed experiential information, please visit this website.

श्रीकृष्ण के द्वारा उच्चारित गीता दुनियाभर में आध्यात्मिकता का एक अद्वितीय खजाना है। प्रत्येक प्रकार का धर्म, दर्शन, आध्यात्मिक जीवन इससे निकलता हुआ प्रतीत होता है। इसका कर्मयोग दुनिया के लिए एक अद्भुत तोहफा है। आजकल यह सर्वाधिक प्रासंगिक है, क्योंकि आजकल के मशीनी युग में लोग सुस्त, कर्महीन, आलसी व अवसादग्रस्त से हो रहे हैं, जिसकी वजह से मधुमेह, उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल आदि विचित्र बीमारियां बढ़ रही हैं।

वास्तव में, कर्मयोग हमें सिखाता है कि कैसे हमने शारीरिक व मानसिक रूप, दोनों से दिन-रात व्यस्त रहना है, और साथ में अवसाद खत्म करके आध्यात्मिक विकास भी तीव्रतम गति से करना है। कर्मयोग से सर्वाधिक शीघ्रता से भौतिक व आध्यात्मिक विकास, दोनों हो जाते हैं। कर्मयोग व तन्त्र एक ही चीज है, यद्यपि तंत्र में अतिरिक्त भाग के रूप में यौनसंबंध भी जुड़ा होता है, ताकि आध्यात्मिक विकास तीव्रतम वेग से हो जाए।

अद्वैत, कुंडलिनी व आनंद , तीनों एकसाथ रहते हैं, और एक -दूसरे को बढ़ाते रहते हैं। इसलिए  आध्यात्मिक विकास की चार विधियाँ मुख्य है। कुंडलिनी योग से कुंडलिनी को बढ़ाओ या वेद-पुराणों, शरीरविज्ञान दर्शन आदि उचित अद्वैतकारी दर्शनों के अभ्यास से निरंतर अद्वैत को धारण किया जाए या मानवीय व्यवहारों से आनंद बढ़ाया जाए या तीनों प्रयासों को एकसाथ किया जाए। अन्तिम विधि सर्वाधिक बलवान है, क्योंकि इसके अंदर अध्यात्म के सभी मूलभूत सिद्धांत हैं।

वास्तव में भगवान श्रीकृष्ण एक तांत्रिक भी थे। इतनी सारी गोप कन्याओं को खुश रखना, व उनमें से अनेकों के साथ रात्रि के एकांत में रास रचाना तंत्र ज्ञान के बिना संभव नहीं है।

अतरिक्त व अनुभवात्मक जानकारी के लिए कृपया इस वेबसाइट को प्रारंभ से व विस्तार से पढ़ें।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s