योग व तंत्र-एक तुलनात्मक अध्ययन (तंत्र के बारे में कुछ रोचक तथ्य, तंत्र व इस्लाम के बीच में समानता)- Yoga and Tantra- A comparative study (some interesting facts about the tantric system, Tantra versus Islam)

तंत्र में प्रारंभ से ही एक व्यक्ति अपने आपको देहपुरुष की तरह अद्वैतपूर्ण, मुक्त व अनासक्त समझते हुए ही समस्त व्यवहार करता है। परन्तु योग में एक व्यक्ति पहले अपनी कुण्डलिनी को जगाता है। उससे उसे अद्वैत से जुड़े हुए महान आनंद का अनुभव होता है। उस कुन्डलिनीजागरण के आनंद के वशीभूत होकर ही वह अनायास ही अद्वैतमयी आचरण प्रारम्भ करता है, और धीरे-२ तांत्रिक की तरह अद्वैतपूर्ण बन जाता है—–continue reading