पुलवामा के आतंकी हमले में शहीद सैनिकों के लिए सैद्धांतिक श्रद्धांजलि- Theological tribute to martyr soldiers in the Pulwama terror attack

पुलवामा के आतंकी हमले में शहीद सैनिकों के लिए सैद्धांतिक श्रद्धांजलि (please browse down or click here to view this post in English)

इतिहास गवाह है कि हमलावर ही अधिकाँश मामलों में विजयी हुआ है। यदि वह जीतता है, तब तो उसकी कामयाबी सबके सामने ही है, परन्तु यदि वह हारता है, तब भी वह कामयाब ही होता है। इसके पीछे गहरा तांत्रिक रहस्य छिपा हुआ है। हमला करने से पहले आदमी  ने मन को पूरी तरह से तैयार किया होता है। हमले के लिए मन की पूरी तैयारी का मतलब है कि वह मृत्यु के भय को समाप्त कर देता है। मृत्यु का भय वह तभी समाप्त कर पाएगा, यदि उसे जीवन व मरण, दोनों बराबर लगेंगे। जीवन-मरण उसे तभी बराबर लगेंगे, जब वह मृत्यु में भी जीवन को देखेगा, अर्थात मृत्यु के बाद जन्नत मिलने की बात को दिल से स्वीकार करेगा। दूसरे शब्दों में, यही तो अद्वैत है, जो सभी दर्शनों व धर्मों का एकमात्र सार है। उसी अद्वैतभाव को कई लोग भगवान्, अल्लाह आदि के नाम से भी पुकारते हैं। तब सीधी सी बात है कि हरेक हमलावर अल्लाह का बन्दा स्वयं ही बन जाता है, चाहे वह अल्लाह को माने, या ना माने। अगर तो वह भगवान या अल्लाह को भी माने, तब तो सोने पे सुहागा हो जाएगा, और दुगुना फल हासिल होगा।

अब हमला झेलने वाले की बात करते हैं। वह मानसिक रूप से कभी भी तैयार नहीं होता है, लड़ने व मरने-मारने के लिए। इसका अर्थ है कि वह द्वैतभाव में स्थित होता है, क्योंकि वह मृत्यु से डरता है। वह जीवन के प्रति आसक्ति में डूबा होता है। इसका सीधा सा प्रभाव यह पड़ता है कि वह खुल कर नहीं लड़ पाता। इसलिए अधिकाँश मामलों में वह हार जाता है। यदि कभी वह जीत भी जाए, तो भी उसका डर व द्वैतभाव बना रहता है, क्योंकि विजयकारक द्वैत पर उसका विश्वास बना रहता है। सीधा सा अर्थ है कि वह हार कर भी हारता है, और जीत कर भी हार जाता है। बेहतरी से अचानक का हमला झेलने में वही सक्षम हो सकता है, जो अपने मन में हर घड़ी, हर पल  अद्वैतभाव बना कर रखता है। अर्थात जो मन से साधु-संन्यासी की तरह की अनासक्ति से भरा हुआ जीवन जीता है।  तभी तो भारत ने हजारों सालों तक ऐसे हमले झेले, और हमलावरों को नाकों चने भी चबाए। तभी भारत में  शुरू से ही धर्म का, विशेषतः  अद्वैत-धर्म का बोलबाला रहा है। इसी धर्म-शक्ति के कारण ही  भारत को  कभी भी किसी के ऊपर हमला करने की आवश्यकता नहीं पड़ी। अपने धर्म को मजबूत करने के लिए हमला करने की आवश्यकता उन्हें पड़ती है, जो अपने दैनिक जीवन में शांतिपूर्वक ढंग से  धर्म को धारण नहीं कर पाते। यह केवलमात्र सिद्धांत ही नहीं है, बल्कि तांत्रिक प्रेमयोगी वज्र का अपना स्वयं का अनुभव भी है। जीवन के हरेक पल को अद्वैत से भरी हुई, भगवान की पूजा बनाने के लिए ही उसने इस वेबसाईट को बनाया है।

अब एक सर्वोत्तम तरीका बताते हैं। यदि अद्वैत-धर्म का निरंतर पालन  करने वाले लोग दुष्टों पर हमला करके भी अद्वैत-धर्म की शक्ति प्राप्त करने लग जाए, तब तो सोने पर सुहागे वाली बात हो जाएगी। विशेषकर उन पर तो हमला किया ही जा सकता है, जिनसे अपने को खतरा हो, और जो अपने ऊपर हमला कर सकते हों। हमारा देश आज ऐसे ही मोड़ पर है। यहाँ यह तरीका सबसे सफल सिद्ध हो सकता है। भारत के सभी लोगों को ऋषियों की तरह जीवन बिताना चाहिए। भारत के सैनिकों को ऋषि बन जाना चाहिए, और हर-हर महादेव के साथ उन आततायियों पर हमले करने चाहिए, जो धोखे से हमला करके देश को नुक्सान पहुंचाते रहते हैं। एक बार परख लिया, दो बार परख लिया, चार बार परख लिया। देश कब तक ऐसे उग्रपंथियों को परखता रहेगा?

भगवान करे, उन वीरगति-प्राप्त सैनिकों की आत्मा को शांति मिले।

इस पोस्ट से सम्बंधित अन्य पोस्टों को आप निम्नलिखित लिंक पर जाकर पढ़ सकते हैं-

https://demystifyingkundalini.com/2018/12/23/योग-व-तंत्र-एक-तुलनात्मक-अ

https://demystifyingkundalini.com/2018/07/18/religious-extremism

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Theological tribute to martyr soldiers in the Pulwama terror attack

History is the witness that the attacker has won in most of the cases. If he wins, then his success is in front of everyone, but if he loses, he still succeeds. The deep tantric mystery is hidden behind this. Before attacking other, man had prepared the mind completely. The complete preparation of the mind for the attack means that he eliminates the fear of death. He will be able to destroy the fear of death only if both life and death will be equal for him. Life and death will be equal to him, when he will see life in death also, that means, after death, he will accept the matter of getting the Paradise. In other words, this is the Advaita (non-duality), which is the only essence of all philosophies and religions. Many people call the same adwaita as the name of God, Allah etc. Then it is a straightforward thing that every attacker is the man of Allah itself, whether he believe in Allah or does not believe. If he also obeys God or Allah, then he will be blessed with borax on gold, means double reward will be achieved.

Now talk about the attacked. He is never mentally prepared regarding fighting and do or die. This means that he is present inside duality, because he is afraid of death. He is immersed in attachment to life. Its direct effect is that he does not openly fight. Therefore, in most cases he loses. Even if he wins, even then his fear and duality will remain, because his faith remains on the victorious duality. Straightforward it means that he loses even after defeating, and also loses by winning. He can be able to withstand the sudden attack better, who keeps non-duality in his mind at each moment of his life. That means, the mind that lives in a way filled with non-attachment like a Sage-Sannyasi. Only then did India take such attacks for thousands of years, and even shown stars in the daytime to the attackers. Only then India has religion dominated, especially Advaita Dharma (non duality-religion). Because of this same power, India never needed to attack anyone. Those need to attack to strengthen their own religion, who cannot hold religion in peace in their daily life. It is not only a mere theory, but also a tantric, Premyogi Vajra has this type of own experience. He has created this website to make every moment of one’s life full of Advaita, the unique and real worship of God.

Now tell a best way. If people, who constantly follow the Advaita Dharma, also continue to get the power of Advaita Dharma by attacking the evil ones, then there will be again borax over the gold. Especially those attackers can be attacked, who are a threat to one’s security, and those who can attack suddenly. Our country is on the same twist today. Here this method can be proven most successful. All people of India should spend life like sages. The soldiers of India should become sages, and with slogan of Har- Har Mahadev, they should attack those terrorists, who continue to harm the country by attacking deceptively. Once those have been tested, tested twice, tested four times. How long will the country test such extremists?

May God bestow peace to the departed soul of those martyrs.

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https://demystifyingkundalini.com/2018/12/23/योग-व-तंत्र-एक-तुलनात्मक-अ

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वेबसाईट का निर्माण, प्रबंधन व विकास, भाग-4; Website creation, management and development, part-4

वेबसाईट का निर्माण, प्रबंधन व विकास, भाग-4 (please browse down or click here to view this post in English)

पिछली पोस्ट में हम वेबपोस्ट को लिखने के बारे में बता रहे थे, जो इस पोस्ट में भी जारी है। कुछ फोटो / वीडियो आदि डालने के लिए टॉप के बाएँ कोने का प्लस निशान दबा कर आए मीडिया बटन को दबाया जाता है।

पूर्वोक्त स्टेटस बटन से हम यह भी देख सकते हैं कि हमारी वेबसाईट की तरफ लोगों को रेफर / निर्देशित करने वाला स्रोत क्या है। जैसे कि क्वोरा या फेसबुक या ट्विटर आदि। वास्तव में प्रारम्भ में रेफरल ट्रेफिक का ही सहारा लेना पड़ता है, क्योंकि सर्च इंजन से ट्रेफिक लगभग शून्य ही होती है। इसके लिए हर सोशल मीडिया पर, फोरम पर, वार्तालाप पर व कमेन्ट पर अपनी वेबसाईट का लिंक डालकर रेफरेंस देते रहना चाहिए। सबसे अच्छा तरीका तो क्वोरा पर प्रश्नों के उत्तर दें, क्योंकि आजकल क्वोरा नंबर एक की प्रश्नोत्तरी वेबसाईट है। वहां पर वेबसाईट का लिंक डालने की सबसे अधिक छूट है, और वहां से रेफरल ट्रेफिक एकदम से मिलनी शुरू हो जाती है, और लम्बे समय तक मिलती रहती है। इसी तरह हम ओनलाईन एप से वेबसाईट का सर्च-रेंक व बेकलिंक स्टेटस भी जान सकते हैं। सर्च इंजन रेंक का मतलब है कि वेबसाईट में स्थित किसी कीवर्ड को गूगल पर सर्च करने पर वह वेबसाईट कौन से पेज पर व कौन से नंबर पर आ रही है। एक पेज पर 10 वेबसाईटें होती हैं। इस तरह के 10 पेज ही सर्च में शो होते हैं। यदि पहले पेज पर वेबसाईट आए तो अच्छी बात है, यदि उस पर भी प्रथम / टॉप की तीन वेबसाईटों में आए तो सर्वोत्तम। की-वर्ड यदि मशहूर होगा, तभी लोग उसे सर्च करेंगे। उदाहरण के लिए, यदि “कुण्डलिनी” शब्द प्रथम पृष्ठ पर आए, तो सर्वोत्तम ट्रेफिक मिलेगी, क्योंकि कुण्डलिनी शब्द बहुत मशहूर है। पर यदि “कुण्डलिनी का रहस्योद्घाटन”, यह शब्द-समूह / की-वर्ड प्रथम पेज पर आए, तो कोई विशेष लाभ नहीं, क्योंकि इस की-वर्ड को खोजने वाले लोग बहुत कम हैं।

सर्च-रेंकिंग वियूशिप से बढ़ती है, और वह वियूशिप भी गूगल सर्च से ही आनी चाहिए, रिफेरल सोर्स से नहीं। वियूशिप का अर्थ है कि प्रति विजिट कितने वियू हैं। यदि वियूशिप कम है, तो इसका अर्थ है कि वेबसाईट बोरिंग है। वास्तव में, सर्च इंजन से आई हुई ट्रेफिक का वियूशिप ही वेबसाईट-रेंकिंग बढ़ाता है, रिफेरल ट्रेफिक का नहीं। इसी तरह बेकलिंक से भी बहुत अधिक ट्रेफिक मिल सकती है, विशेषतः यदि बेकलिंक प्रसिद्द वेबसाईट से मिला है। बेकलिंक का अर्थ है कि दूसरी वेबसाईट हमारी वेबसाईट को लिंक कर रही है।

वर्डप्रेस डॉट ओर्ग (ओर्ग- ऑर्गेनाईजेशन) के माध्यम से उपलब्ध वर्डप्रेस वास्तव में लाएनेक्स के फ्री विन्डोज़ ऑपरेटिंग सोफ्टवेयर की तरह वेबसाईट बनाने के लिए एक सार्वजनिक व निःशुल्क सोफ्टवेयर है। इसे ओपन सोर्स सोफ्टवेयर भी कहते हैं। यह वेबसाईट के लिए ऐसे ही है, जैसे कम्पयूटर के लिए विंडोज सोफ्टवेयर है। उसे कोई भी सोफ्टवेयर विशेषग्य अपनी कला से सुधार सकता है। इसीलिए वेबसाईट बनाने में कोई खर्चा नहीं आता। परन्तु उससे सम्बंधित कायदे-कानूनों का ज्ञान तो होना ही चाहिए, जैसे कि गूगल को साईट मेप उपलब्ध करवाते रहना, गूगल एनालीटिक को इंस्टाल करना, एसईओ (सर्च इंजन ओपटीमाईजेशन) आदि-२। साथ में, होस्टिंग सर्विस के लिए तो किसी कंपनी को चुन कर, उसे तो शुल्क अदा करना ही पड़ता है। वह कंपनी वेबसाईट का सारा डाटा सुरक्षित रूप से स्टोर करके रखती है, और वेब पर उपलब्ध करवाती है। इन सभी परेशानियों को देखते हुए, वर्डप्रेस डॉट कोम (कोम- कोमर्शियल) नाम की कंपनी बनाई गई। उस कंपनी ने निःशुल्क वेबसाईट सेवाप्रदाता के वर्डप्रेस प्लेटफोर्म के साथ अन्य सभी सेवाएं प्रदान कीं। इससे लोगों को कुछ सस्ते में ही सभी परेशानियों से छुटकारा मिल गया। उनका काम फिर वेबसाईट पर लिखना मात्र ही रह गया। जैसे कि पहले भी बताया गया है कि उनके तीन प्लान हैं——अगली पोस्ट में जारी——

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Website creation, management and development, part-4

 

In the previous post we were talking about writing a web post, which is also in this post. To insert some photo / video etc., pressing the plus sign of the top left corner causes the media button pop out.

From the aforementioned ‘Stats’ button, we can also see what is the source of referring / directing people towards our website. Such as quora or facebook or twitter etc. In fact, referrals have to be resorted to in the beginning, because traffic from the search engines is almost zero. For this, on every social media, on the forum, on the conversation and comment, reference of website should be given by putting a link of your website. Answering the questions on Quora is the best way, because now quora is the number one quiz website. There is the maximum discount for putting a link of the website on quora, and from there the referral traffic starts immediately, and it lasts for a long time. Similarly, we can also find the website’s search-rank and backlink status from the online apps. Search Engine Rank means that on which page and on which position the website is positioned, when searching any keyword of website in the search engine. There are 10 websites on one page. Such 10 pages are shown only in search. If the first page is reserved to the website then it is a good thing, if it comes in the first / top three positions, then the best. If the keyword is famous, then only people will search it. For example, if the keyword “kundalini” brings website to the first page, then the best traffic will be obtained, because the word Kundalini is very popular. But if “the revelation of Kundalini”, this keyword-group / key phrase brings the website on the first page, then there is no special advantage, because people searching for this word-group are very few.

Search-Ranking increases with viewship, and that should also come from Google search, not from referral sources. Viewship means how many views per visit are there. If the viewship is low, it means that the website is boring. In fact, the traffic from the search engines increases website-ranking, not the referral traffic. Similarly, there may be more traffic from backlink, especially if the backlink is from the popular website. Backlink means that the other website is linking to our website.

WordPress available through WordPress.org (org- organization) is actually a public and free software for creating websites like Linux’s free Windows operating software. It is also called open source software. This is there to run the website, just as Windows software is there to run the computers. It can be improved by any software expert through his art. That’s why there is no cost to make the website. But there must be knowledge of the laws and rules related to it, such as providing the site map to Google, installing Google Analytics, SEO (Search Engine Optimization) etc. Together, by choosing a company for the hosting service, one has to pay the fee. The company keeps all the data stored on its cloud service safely, and makes it available on the web. Looking at all these problems, the WordPress.com (com-commercial) was created. The company provided all other services with the free WordPress platform. With this, people got rid of all the hassles in some cheap way. Their work was left to write on the website only. As mentioned earlier, they have three plans ———————————-continued in next web post———

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वेबसाईट का निर्माण, प्रबंधन व विकास, भाग-3; Website creation, management and development, part-3

वेबसाईट का निर्माण, प्रबंधन व विकास, भाग-3 (please browse down or click here to view this post in English)

(4) साईट पेजस- यह हरेक वेबपेज को एक सूचि में दिखाता है। वहां पर हरेक पेज पर उसके एडिट करने का, उसका स्टेट जानने का व उसे ट्रेश में डालने का विकल्प होता है। ट्रेश एक रिसाईकल बिन की तरह होता है, जहाँ से हम वेबपेज को पुनः प्राप्त कर सकते हैं। इसलिए ट्रेश बिन को कभी खाली नहीं करना चाहिए। उस पर एक पेज को एड (जोड़) करने का भी विकल्प होता है। (5) ब्लॉग posts- वहां पर सभी पोस्टों की सूचि होती है। उन सभी की जांच-परख  (एडिट आदि) भी हम उपरोक्तानुसार ही कर सकते हैं। (6) मीडिया- उस पर वेबसाईट के सभी चित्रों की सूचि  कुछ क्रियाकलापों के साथ दिखती है। (7) कमेंट्स- इसमें सभी कमेंट्स (पिन्जबेक व ट्रेकबेक के साथ) होते हैं। वहां हम उन्हें एप्रूव या डीस्प्रूव कर सकते हैं। यदि कोई कमेन्ट झूठा / स्पाम लगे, तो उसे एप्रूव नहीं करना चाहिए। वैसे भी ऐसे कमेन्ट खुद ही स्पाम फोल्डर में चले जाते हैं। पिन्जबेक व ट्रेकबेक भी कमेन्ट ही होते हैं, जो तब मिलते हैं, जब कोई हमारी वेबसाईट को अपनी वेबसाईट से लिंक करता है (हमारी वेबसाईट के यूआरएल लिंक एड्रेस को अपनी वेबसाईट पर कोपी-पेस्ट करके)। पिंजबेक व ट्रेकबेक की सहायता केवल वर्डप्रेस नामक सेवाप्रदाता कंपनी ही देती है। (8) फीडबेक- इस  पर सभी संदेशों का पूर्ण ब्यौरा होता है, जो कभी भी लोगों ने वेबसाईट को प्रेषित किए हों। (9) वर्डएड्स- जैसा कि पहले भी बताया जा चुका है। (10) शेयरिंग- इस पर वेबसाईट ब्लॉग को अपने फेसबुक, ट्विटर, गूगल अकाऊंट आदि से कनेक्ट या डिसकनेक्ट किया जाता है। कनेक्ट करने से सभी लिखी गईं ब्लॉग पोस्ट एकदम से सभी कनेक्टीड सोशल मीडिया अकाऊंट पर खुद ही शेयर हो जाती हैं।

यह ध्यान रहे कि आजकल पूर्ण वेबसाईट का प्रचलन है। इसमें वेबसाईट व ब्लॉग-पोस्ट, दोनों का लाभ एकसाथ मिलता है। कोई वेबसाईट सिर्फ वेबसाईट ही हो सकती है। इसी तरह कोई ब्लॉग साईट सिर्फ ब्लॉग साईट ही भी हो सकती है। यद्यपि ये कुछ सस्ती हो सकती हैं, पर इनसे मन नहीं भरता। वर्डप्रेस पूर्ण वेबसाईट की सुविधा देती है। उसमें कुछ स्टेटिक पेज वेबसाईट को निर्मित करते हैं, और अन्य पेज ब्लॉग पोस्ट के लिए रखे होते हैं। (11) पीपल- इसमें ये सूचि होती है- टीम (इसमें एडमिन, एडिटर, औथर, कन्ट्रीब्यूटर लोगों का ब्यौरा होता है। हम इन्हें विस्तार दे सकते हैं), फोलोवर (सभी फोलोवर लोगों का ब्यौरा), इन्वाईटी (बाहर से निमंत्रित किए गए लोग व उनके रोल का ब्यौरा। हम कभी भी किसी को भी इनवाईट करके उसे उपर्युक्त कोई भी रोल दे सकते हैं)।

उपरोक्त ही बटन अधिकाँश व मुख्य होते हैं।

वर्डप्रेस पर ब्लॉग-पोस्ट लिखना- जैसा कि पहले भी बताया जा चुका है कि किसी भी वेबपेज के टॉप पर प्लस के निशान वाले कागज़ को प्रेस करके पोस्ट लिखने के लिए एक खाली वेबपेज खुलता है। उसमें सबसे ऊपर टाईटल के लिए अलग जगह होती है। उस पर लिखे गए शब्द खुद ही बड़े आकार में होते हैं। फिर पोस्ट का पहला पहरा हेडिंग-2 में लिखना चाहिए, यदि हिंदी में हो, अन्यथा केवल ब्लोक लेटर में ही लिखना चाहिए, क्योंकि हेडिंग में आने पर अंगरेजी के शब्द केपिटल बन जाते हैं। पूरे लेख को जस्टीफाईड एलाईनमेंट दें, यदि कविता हो तो सेन्ट्रल अलाईनमेंट दें।  एमएस वर्ड की तरह वहां पर लिखने की सभी सुविधाएं होती हैं। अच्छा रहेगा यदि मूल पोस्ट  को पहले एमएस वर्ड में बना लो, फिर उसे ब्लॉग पेज पर कोपी-पेस्ट करो। फिर छोटी-मोटी कमियाँ वहां पूर्ण करते रहो। ऐसा इसलिए, क्योंकि ब्लॉग पेज पर स्पेलिंग व ग्रामर को ठीक करने की सुविधा नहीं होती, और कई बार तो बीच में लिखने पर पहले से लिखे गए अक्षर कटने भी लग जाते हैं। कुछ —- अगली पोस्ट पर जारी—-

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Website creation, management and development, part-3

(4) Sites pages – This shows each webpage in a list. There is an option to edit it on each page, to know its state and put it in trash. Trash is like a recycling bin, from which we can retrieve the webpage. Therefore, the trash bin should never be made empty. There is also an option to add a page to it. (5) Blog posts – There is a list of all posts on there. We can also examine them all as per the above. (6) Media – The list of all the pictures of the website is displayed on it with some activities. (7) Comments- It contains all the comments (with Pingback and Trackback). We can approve or dispose these pings there. If a statement is false / spam, then it should not be approved. Anyway, such comments themselves go to the spam folder. Pingback and Trackback are also the comments, which are received when someone links our website to his website (by copying the URL link address of our website to his website). PingBack and Trackback is only provided by a service provider named WordPress. (8) Feedback – There is full details of all the messages on this, which have ever been sent to the website. (9) WordAds – as has been said before. (10) Sharing – By this, the website blog is connected to or disconnected to your Facebook, Twitter, Google Account etc. By connecting, all written blog posts are automatically shared on all the connected social media accounts.

Keep in mind that nowadays the full website is famous. In this, the benefits of both the website and the blog get together. Only a website can be a website. Similarly, a blog site can be just a blog site. Although these may be cheap, but do not appeal to mind much. WordPress offers full website support. Some Static Pages make up the website in it, and the other pages are kept for blog posts. (11) People – This list contains – Team (This includes the details of the Admin, Editor, Author, Contributor, We can extend them), Follower (Details of all the Follower people), Invitee (Invited from outside, the details of the invited people and their role, we can give any invitee any role as above).

The above buttons are mostly and main.

Writing a blog-post on WordPress- As already mentioned, a blank webpage opens to write a post by pressing the plus-mark paper on the top of any of the webpage. At the top there is a separate place for the title. The words written on it are themselves in large size. Then the first paragraph of the post should be written in the heading-2, if it is in Hindi, otherwise it should be written in the block letter only, because English words become capitals when in heading. Give the whole article a justified alignment, central if it is a poem. Like MS Word, there are all the facilities for writing. It would be good if you made the original post first in MS Word, then post it on the blog page. Then keep undoing small defects there. That’s because the blog page does not have the ability to fix spelling and grammar, and sometimes it gives a cut in the already written text if some text added afterwards. Something —- Continued on next post—-

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