वेबसाईट का निर्माण, प्रबंधन व विकास, भाग-6; Website creation, management and development, part-6

वेबसाईट का निर्माण, प्रबंधन व विकास, भाग-6 (please browse down or click here to view this post in English)

पेज जम्प लिंक भी साधारण लिंक एड्रेस के साथ अतिरिक्त कोड डालकर बनाए जाते हैं। सामान्य तौर पर लिंक को दबाने से लिंकड पेज के टॉप पर ही लेंडिंग होती है। यदि हम पेज के बीच में किसी विशेष पेराग्राफ पर सीधे ही लेंड करना चाहें, तो उसके लिए पेज जम्प लिंक बनाया जाता है। उसके लिए लिंकड पेज के एडिट मोड (एचटीएमएल में, विजुअल में नहीं) में जाकर लक्षित पेराग्राफ के प्रारम्भ में “स्टाईल” अंगरेजी के शब्द के बाद सिंगल स्पेस देकर यह कोड लिखा जाता है, id=“कुछ भी लिखो” सिंगल स्पेस——पोस्ट की सामग्री—। फिर जब उस लिंकड पेज का वेब एड्रेस भरा जाता है, तब उसके अंत में, कहीं पर भी बिना कोई स्पेस दिए, हेशटेग के  निशान के साथ  वही कोड लिखा जाता है, अर्थात #कुछ भी लिखो(जो id के साथ लिखा था)। यह मार्कर कुछ भी व किसी भी भाषा में लिखा जा सकता है, यद्यपि दोनों जगह पर यह एकसमान (समान स्पेसिंग के साथ) होना चाहिए, उपरोक्त लक्षित पेराग्राफ पर भी व उपरोक्त लिंक-निर्माण की एड्रेस बार में भी। अच्छा रहता है यदि पेज से सम्बंधित शब्द ही लिखे जाएं। जैसे कि कुण्डलिनी से सम्बंधित पेज में पहले पेज जम्प लिंक के लिए ‘कुण्डलिनी1’ व दूसरे के लिए ‘कुण्डलिनी2’ आदि-2। इसी पेज जम्प लिंक से ही एक ही पेज पर इधर से उधर एक क्लिक मात्र से जा सकते हैं, आवश्यकता के अनुसार, जैसे कि ‘गो टू टॉप ऑफ़ पेज’ आदि-2।

वेबसाईट का नाम वैसा रखना चाहिए, जो वेबसाईट की सामग्री से सर्वाधिक जुड़ा हुआ हो। हफ्ते-दस दिन के अंतराल पर नई व पर्याप्त लम्बी पोस्ट को डालते रहना चाहिए। उससे पाठकों की संख्या बढ़ी हुई रहती है। एक पोस्ट कम से कम 500 सब्दों की तो होनी ही चाहिए। वर्डप्रेस की यदि एक पोस्ट 1500 शब्दों से बड़ी हो, तो उसके टेग में ‘Longreads’ शब्द जोड़ देना चाहिए, क्योंकि लम्बी पोस्टों के अलग ही दीवाने होते हैं। आप किसी  भी आदमी को अपनी वेबसाईट से जुड़ने के लिए न्यौता दे सकते हैं। आप उसे फोलोवर, राईटर, एडमिन आदि कुछ भी बना सकते हैं।

मुझे तो लगता है कि सभी लोगों को अपनी एक वेबसाईट व एक पुस्तक बनानी चाहिए। इससे एक-दूसरे के विचारों का व जिन्दगी का पूरा पता चलता है। वेबसाईट किसी भी त्रुटि से पूर्णतया सुरक्षित रहती है। यदि लिखने में कोई त्रुटि हो जाए, तो उसे हम बिना दिक्कत के कभी भी दूर कर सकते हैं। किसी भी वेबपेज के एडिट मोड में टॉप पर एक हिस्टरी बटन बना होता है। उस पर वेबसाईट के कई हफ्तों-महीनों के सभी परिवर्तित रूप विद्यमान रहते हैं। हम किसी भी रूप में कभी भी वापिस लौट सकते हैं। यह सुविधा डेस्कटॉप पर ही विद्यमान होती है, मोबाईल डिवाईस पर नहीं। इसी तरह, हम किसी भी वेबपेज को कभी भी ट्रेश बिन में डाल सकते हैं। वह रिसाईकल बिन की तरह ही होता है, और उससे हम वेबपेज को कभी भी वापिस प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि एक महीने के बाद ट्रेशबिन  खुद ही खाली हो जाता है।

पूर्वोक्तानुसार, टॉप लेफ्ट के मुख्यरूप W-My site बटन के ड्राप डाऊन मीनू के अंत में एक सेटिंग बटन भी होता है। उसमें 5 हैड होते हैं। राईटिंग हैड में जाकर हम अवांछित पोस्ट-केटेगरी को डिलीट कर सकते हैं। डिस्कशन हैड में हम चुन सकते हैं कि हमें कब-२ ई-मेल के माध्यम से नोटिफाई किया जाए—अगली पोस्ट में जारी—

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Website creation, management and development, part-6

Page Jump Links are also created by adding additional code with simple link address. Normally, the link is lending only at the top of the link page by clicking the link. If we want to lend directly to a particular paragraph in the middle of the page, then the page jump link is created for it. For this, by entering the single space after the word “style” in the beginning of the targeted paragraph, in the edit mode of the ‘to be linked page’ (in the HTML, not in visual), this code is written, id=”Write anything” single space– —- Content of the post —. Then when the web address of that ‘to be linked page’ is filled, then at the end of it, the same code is written without any spaces with hash tag, that is, #write anything (which is written with the above said id). This marker can be written in anything and in any language, although it should be in uniform (with the same spacing) in both places, that is, on the targeted paragraph as told above and in the address bar of the above link building. It is good if words related to pages are written. For example, Kundalini 1 for the first page jump link in the page related to Kundalini and ‘Kundalini 2’ for the second etc. The same page can jump from one paragraph to another on the same page from Jump Link only, as per the requirement, such as ‘go to top of page’ etc.

The name of the website should be kept that, which is most linked to the contents of the website. New and substantial long post should be posted in the intervals of ten days. With that, the number of readers keeps increasing. A post must have at least 500 words. If a post is bigger than 1500 words in Word press, then the word ‘longreads’ should be added in its tag, because the long posts have different junkies. You can invite any person to join your website. You can make him a follower, writer, admin etc.

I feel that all people should have their own website and a book. This gives complete understanding of each other’s thoughts and lives. The website is completely secure from any error. If there is an error in writing, then we can overcome it without any difficulty. On top of any webpage in edit mode, there is a history button. There are many variations of the website for several weeks and months. We can return to any form anytime. This feature exists on the desktop, not on the mobile device. Similarly, we can put any webpage in the trash bin anytime. It is like a recycling bin, and we can get it back to the webpage anytime. However, after a month the trash bin itself is empty.

As aforementioned, there is a ‘setting’ button at the end of the drop-down menu of the main ‘W-My site’ button of the top left. There are five heads in it. We can delete unwanted post-category by visiting the Writing Head. In the Discussion Head, we can choose to notify us for which contents via e-mail—-continued in next post—-

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होली त्यौहार व तंत्र का आपस में रिश्ता- Tantra versus Holi festival

होली त्यौहार व तंत्र का आपस में रिश्ता (please browse down or click here to view this post in English)

होली है………। सभी मित्रों को होली की बहुत-२ शुभकामनाएँ। “होली” नाम ही तांत्रिक है। “ल” अक्षर को तंत्र में कामप्रधान माना गया है। मूलाधार का बीजाक्षर “लं” है, व उसी का बीजमंत्र “क्लीं” है। दोनों में ही “ल” अक्षर है। मूलाधार चक्र को भी कामप्रधान माना जाता है। प्रेमयोगी वज्र के साथ भी बीजाक्षर से सम्बंधित घटना हुई थी। वह जिस ऑनलाईन कुण्डलिनी-ग्रुप का सदस्य था, उसमें बहुत से लोगों के नाम “ल” अक्षर वाले थे। कई के नाम में तो दो “ल” भी थे। उदाहरण के लिए “ल्लो”, “लीं”, व “लि” आदि। उन “ल” अक्षर के नाम वाले लोगों के साथ ही उसका अधिकाँश वार्तालाप होता था। उससे उसका मूलाधार चक्र अनजाने में ही जागृत हो गया। उससे उसमें तांत्रिक योग की प्रवृत्ति जागृत हुई, जिससे शीघ्र ही उसकी कुण्डलिनी जागृत हो गई। साथ में, उनके चेहरे भी लाल रंग लिए हुए थे। लाल रंग भी कामोत्तेजक माना जाता है। उससे भी प्रेमयोगी वज्र को सहयोग मिला।

उस फोरम पर उसका नाम हृदयेश था। इसका अर्थ है, “हृदय का स्वामी”। एक परिपक्व व स्वस्थ हृदय ही मूलाधार को लम्बे समय तक क्रियाशील रख सकता है। बहुत मेहनती होने के कारण, उसका नाभि-चक्र भी क्रियाशील था। हृदय-चक्र व मूलाधार चक्र, दोनों को शक्ति की बहुत आवश्यकता होती है। नाभि चक्र दोनों के लिए शक्ति की आपूर्ति कर रहा था। इसलिए हम नाभि चक्र को अनाहत चक्र व मूलाधार चक्र को आपस में जोड़ने वाला पुल भी कह सकते हैं।

इसी तरह देवी भागवत पुराण में भी एक कथा आती है कि किसी जंगल में एक व्यक्ति के मुख से किसी भय के कारण अनायास ही बीजाक्षर वाले बोल निकले थे, क्योंकि वह मानसिक रूप से व वाणी से दिव्यांग भी था। उसी बीजाक्षर के बल से उसे देवी सिद्ध हो गई, और वह हर प्रकार से उन्नति करने लगा।

तंत्र के साथ होली के सम्बन्ध को उजागर करने वाला दूसरा कारक लाल रंग है। हम सभी जानते हैं कि होली का मुख्य रंग लाल रंग ही है। यह रंग होली वाला जोश भी पैदा करता है। आपको यह जानकार हैरानी होगी कि जो कुंकुम आम जनजीवन में सर्वाधिक प्रयोग किया जाता है, वह हल्दी ही होता है। 95 भाग हल्दी-चूर्ण को 5 भाग चूने (पानी में घोलकर) के साथ मिलाकर जब छाया में सुखाया जाता है, तब वह सुर्ख लाल हो जाता है। चूने की मात्रा बहुत कम होने से इस तरह से निर्मित कुंकुम शरीर के लिए हानिकारक भी नहीं होता। परन्तु सिन्दूर बहुत भिन्न होता है। वह पारे व सीसे का यौगिक होता है, इसलिए स्वास्थ्य के लिए हानि भी पहुंचा सकता है, यदि ढंग से प्रयोग में न लाया जाए। उसका रंग संतरी होता है। हनुमान के ऊपर लगे हुए लाल रंग को आप सिन्दूर समझें। इसी तरह, गुलाल भी कई रंगों के होते हैं, व प्राकृतिक होते हैं। लाल गुलाब लाली वाले पौधों से, नीले रंग का गुलाल इंडिगो से आदि-२। होली के रंग खुद ही बनाने चाहिए। बाजार में तो अधिकाँश तौर पर सिंथैटिक रंग मिलते हैं, जो शरीर के लिए हानिकारक होते हैं। उपरोक्त कारणों से ही तंत्र के मूलाधार चक्र का रंग भी लाल ही होता है।

होलिका दहन भी तंत्र के अनुसार ही है। हम जानते हैं कि यज्ञादि अनुष्ठान अधिकाँश तौर पर तांत्रिक   होते हैं। यज्ञ में जल रही अग्नि के बीच में तांत्रिक अपनी कुण्डलिनी को अनुभव करता है। इससे उसकी  कुण्डलिनी बहुत पुष्ट हो जाती है, क्योंकि वह अग्नि के तेज से जगमगा जाती है।

होली के दिन एक दूसरे पर सीधे तौर पर व पिचकारी से रंग उड़ेलना भी तंत्र के अनुसार ही है। हम सभी जानते हैं कि सभी को अपने किए हुए  कर्मों का भोग करना ही पड़ता है। तांत्रिक योग से यह प्रक्रिया सरल हो जाती है। उससे फल देने वाले कर्म के संस्कार निरंतर के अभ्यास से इतने क्षीण हो जाते हैं कि या तो वे सीधे ही नष्ट हो जाते हैं, या मामूली सा फल देकर नष्ट हो जाते हैं। होली के रंगों से शरीर का विकृत होना एक प्रकार से पूर्व के किए हुए कुकर्मों से शरीर को दंड मिलना ही है। हो सकता है कि किसी के पिछले कर्मों के अनुसार उसके शरीर को गंभीर चोट लगनी हो। होली के रंग से जब उसका शरीर कुरूप हो जाता है, तो होनी उसे शरीर की क्षति समझ लेती है, जिससे उससे सम्बंधित कुकर्म क्षीण हो जाता है। तांत्रिक योगाभ्यास की अतिरिक्त सहायता से वह नष्ट ही हो जाता है। इसी तरह किसी को पानी में डुबो कर मार सकने वाला कुकर्म पानी की एक पिचकारी मात्र से शांत हो जाता है। होली के दिन चलने वाले हल्के-फुल्के मजाक व वाद-विवाद से भी इसी सिद्धांत के अनुसार ही पिछले कुकर्म शांत हो जाते है। अब ज़रा सोचें, बरसाने की लट्ठमार होली से तो पुराने कुकर्मों का भण्डार ही ढीला पड़ जाता होगा।

अब जो पुरानी कथा है कि होली के दिन प्रहलाद को मारने की मंशा रखने वाली उसकी बहन होलिका स्वयं ही दहन हो गई थी, उसमें वास्तव में हिरण्यकशिपु के कुकर्म को ही होलिका कहा गया है। कहा जाता है कि पिता के कुकर्म पुत्र को भोगने पड़ते हैं। वे कुकर्म (हिरण्यकशिपु की पुत्री व प्रहलाद की बहन के रूप में वर्णित) होली के तांत्रिक प्रभाव से नष्ट हो गए, अर्थात होलिका जल गई।

वास्तव में, होली के दिन चारों ओर कामदेव का तेज विद्यमान होता है, क्योंकि सभी लोग एकसाथ मिलकर काम को बढ़ा रहे होते हैं। उससे मूलाधार चक्र को बहुत बल मिलता है। यह तांत्रिक सिद्धांत है कि मूलाधार की क्रियाशीलता के समय किया गया कोई भी कार्य अनेक गुना फलदायी होता है। तभी तो होली का दिन तांत्रिक सिद्धि के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। अगर उस दिन तंत्रयोगी की कुण्डलिनी न भी जागृत हो पाए, तो भी कुण्डलिनी को बहुत अधिक बल मिलता है। वास्तव में, कुण्डलिनी की क्रियाशीलता को भी उतना ही अहम् माना जाता है, जितना की कुण्डलिनी-जागरण को।

कई लोग होली का प्रारम्भ कृष्ण-राधा के प्रेम से बताते हैं। इसमें तो होली की काम-प्रधानता स्वयं ही सिद्ध हो गई। तंत्र भी तो काम प्रधान ही है।

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Tantra versus Holi festival

Holi hai ………. Lots of good luck of Holi to all friends. The name “Holi” is tantric. The letter “L” is considered to be a romantic in Tantra. The seed-syllable of the root chakra is “Lm”, and the seed-mantra of it is “Kleem”. Both have the same letter “L”. Mulaladar chakra is also considered as pro-romantic. There was also an incident related to seed-syllable with Premyogi vajra. He was a member of the online Kundalini-group, in which many people had names containing the alphabet “L”. There were also two “L” in many names. For example, “Llo”, “Lee”, and “li” etc. He had most of his conversations with those people having names bearing “L” in any form. From this, his root chakra was awakened itself. From that, the tendency of tantric sexual activity was awakened in him, so that soon his kundalini awoke. Together, their faces were also red in color. Red color is also considered to be erotic. Premyogi vajra got support from that too.

His name was Hridayesh on that forum. It means “lord of the heart”. A mature and healthy heart can keep the mooladhara active for a long time. Due to being very diligent, his navel-chakra was also functional. Heart-chakra and Muladhadara chakra both require a lot of power. Navel Chakra was supplying power for both. Therefore, we can also call the Naval Chakra as a bridge connecting the Anahata Chakra and Muladhadra Chakra together.

In the same way, in the Goddess Bhagwat Puran, there is a story that in a forest, from the mouth of a person, due to fear, some seed syllables emanated itself, because he was also handicapped mentally and verbally as well. With the help of the same seed syllable, Goddess was pleased, due to which he started progressing in every way.

The second factor to highlight Holi’s relationship with tantra is red color. We all know that Holi’s main color is red color. This color also produces the passion of Holi. You must be surprised to know that the kunkum (sacred red color powder), which is most commonly used in the general life, that is turmeric only. Mix 95 part turmeric powder with five parts lime (dissolved in water) and when it is dried in the shade, then it becomes red. Since the amount of lime is very low, this form made in this way is not harmful to the body. However, vermilion is very different. It is a compound of mercury and lead, hence can also cause harm to the health, if not used in the manner. Its color is orange. Think of the red color shown on the Hanuman as vermilion. Similarly, gulals are also of many colors, and are natural. Red gulal from reddish plants, blue gulal from indigo etc. Holi colors should be made by themselves. In the market, there are mostly synthetic colors, which are harmful to the body. For the above reasons only the color of the root chakra of tantra is red.

Holika Dahan is also according to the tantra. We know that yajna rituals are mostly tantric. Tantric experiences his kundalini in the middle of the fire burning in Yajna. This makes his kundalini very strong, because that is shining with the shine of fire.

On the day of Holi, it is according to the tantra the ritual of coloring directly each other or with water mixed colors. We all know that everybody has to enjoy the deeds done by him. With Tantric Yoga, this process becomes simpler. The mental imprints of the actions that give phala become so weak with the practice of tantric yoga that either these are destroyed directly, or are destroyed by giving slightest phala or results. Being distorted from the colors of Holi, there is a way to get punishment for the body from the pre-existing misdeeds. It may be that according to past deeds someone has to bear serious injuries to his body. When the body becomes deformed with the color of Holi, then it is considered to be the loss of the body, due to which the karma associated with it becomes lose. With the additional help of Tantric Yoga, it is fully destroyed. Similarly, a karma that is able to drown someone through water immersion becomes calm with only one stream of colored water on Holi. According to the same principle, the past misdeeds become calm after the light joke and debate that runs on Holi. Now think, the Lath mar Holi (stick-fight) of Barsana can loosen even the storage of old misdeeds.

Now the old story is that on Holi, his sister Holika, who had the intention to kill her brother Prahlad, had become combusted herself. In reality, misdeeds of his father Hiranyakashipu have been called as Holika. It is said that the son has to suffer the misdeeds of his father. Those misdeeds (described as the daughter of Hiranyakashipu and sister of Prahlad) were destroyed with the tantric influence of Holi that means Holika was burnt.

In fact, the passion and shine of Kamdeva (god of romance) is present all around on the day of Holi, because all people are working together to grow romance. It gives a lot of force to the Mooladhar Chakra. It is the tantric theory that any work undertaken during the activation of the Muladhara is fruitful many folds. Only then is Holi’s day considered as the best for tantric accomplishment. Even if the Kundalini of Tantric Yogi cannot be awakened on that day, then too, Kundalini gets very much strength. In fact, the activity of Kundalini is also considered that much important, as much as its awakening.

Many people think the historical start of Holi with the love of Krishna-Radha. In this, Holi’s romantic nature is itself proved. Tantra is also romantic in nature.

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आज के समय में ब्लॉग की प्रासंगिकता – Blog’s relevance in today’s time

आज के समय में ब्लॉग की प्रासंगिकता (please browse down or click here to view this post in English)

मसूद अजहर के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव पेश होने के एक दिन पहले ही न्यूयार्क टाईम्स में छपे एक लेख ने अंतर्राष्ट्रीय मीडिया के एजेंडे को फिर से उजागर कर दिया है। इसमें पुलवामा घटना पर एक विचित्र व तथ्यहीन लेख उजागर हुआ है। उस लेख के शीर्ष में ही उस हमले को आतंकवादी हमला नहीं, अपितु एक विस्फोट बताया गया है। विस्फोट तो दीपावली व क्रिसमस को पटाखों में किए जाते हैं। उनसे जान-माल की कोई हानि नहीं होती। परन्तु पुलवामा के आतंकवादी हमले में तो 40 से अधिक सैनिक शहीद हुए थे।

अंतर्राष्ट्रीय व प्रख्यात मीडिया हाऊसों द्वारा पूर्वाग्रहों से भरे हुए एजेंडे चलाना कोई नई बात नहीं है। ख़बरों को तोड़-मरोड़ कर अपने पक्ष में किया जाता है। मुझे क्वोरा टॉप राईटर-2018 का सम्मान मिला था। उसके साथ ही मुझे एक वर्ष के लिए न्यूयार्क टाईम्स का निःशुल्क सबसक्रिप्शन दिया गया था। मुझे उस पत्रिका की सामग्री जरा भी पसंद नहीं आई। मुझे उसकी भाषा भी विचित्र, बनावटी, बेमतलब के धूम-धड़ाके वाली, अहंकार से भरी हुई, व एजेंडे से भरी हुई लगी। मैंने उसे कुछ दिनों बाद ही अनसबसक्राईब कर दिया। मैंने अपने दोस्तों के सामने इच्छा जाहिर की कि उससे अच्छा क्वोरा वाले मुझे भागवत पुराण (एक धार्मिक ग्रन्थ) दे देते। न्यूयार्क टाईम्स को विश्व की प्रतिष्ठित पत्रिका माना जाता है। उसे बहुत से अवार्ड भी मिले हैं।

पहले भी इस पत्रिका में एक भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिक को एक गाय के साथ अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष-समुदाय के कक्ष में प्रविष्ट होते हुए दिखाया गया था। एक बार एक भारतीय रेलगाड़ी को हाथी के द्वारा खींचते हुए दिखाया गया था। भारत को सपेरों व जादूगरों का देश कहा जाता है। इसे योगियों का देश भी तो कहा जा सकता है। नकारात्मक ही क्यों? भारत के अपने अन्दर ही बहुत से नकारात्मक लोग बैठे हैं। उन्हीं की देखा-देखी में विदेशी मीडिया भी वैसा ही रुख अपनाने लगता है। हंसते हुए व जोक में तो कुछ भी कहा जा सकता है। परन्तु जोक का अलग ही तरीका होता है। उससे मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध बढ़ते हैं, घटते नहीं। उससे हीनता की भावना नहीं उत्पन्न होती, अपितु गर्व के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। यदि नकारात्मक पक्ष ही बार-बार दोहराया जाता रहे, तब तो उसे जोक नहीं कह सकते।

इसके विपरीत, ब्लॉग में कोई एजेंडा नहीं होता। इसमें एक व्यक्तिगत राय होती है। अधिकाँश ब्लोगर व्यावसायिक भी नहीं होते। इसलिए वे अपने प्रचार की अंधी दौड़ में शामिल नहीं होते। पत्रिकाएँ तो अपने प्रचार के लिए कुछ भी कुत्सित हथकंडा अपना सकती हैं। ये जनता के मन को दूषित कर सकती हैं। लोगों का इन पर अँधा विश्वास होता है। वे न चाहकर भी उन पर पूरा यकीन कर लेते हैं। इसका एक कारण यह भी है कि पत्रिकाओं को वे पैसा चुका कर खरीदते हैं। परन्तु ब्लॉग को कोई भी व्यक्ति ब्लोगर की निजी राय बताकर ठुकरा भी सकता है। साथ में, वह कमेन्ट में उसका तर्कों व प्रमाणों के साथ खंडन भी कर सकता है। इससे सभी का ज्ञान उत्तरोत्तर बढ़ता ही जाता है। पत्रिका के लेख को तो ना चाहकर भी स्वीकार करना ही पड़ता है, क्योंकि खंडन करने के लिए उसमें अवसर ही नहीं दिया गया होता है। ये तो इस प्रकार की बात हुई कि “आप हमारी बात मानो या न मानो, पर आपको माननी ही पड़ेगी”। साथ में, ब्लॉग ओनलाईन होता है, और उसे कभी भी एडिट या दुरस्त किया जा सकता है। इसके विपरीत, लाखों की संख्या में एकसाथ छपने वाली पत्रिकाओं के कारण, उन्हें दुरस्त करने का मौका ही नहीं मिलता। वे एकदम से लाखों ग्राहकों तक पहुँच जाती हैं। जब तक उनकी गलती को ठीक करते हुए हल्का सा जवाब बनाया जाता है, तब तक वे पाठकों पर अपना असर दिखा गई होती हैं। ओनलाईन मैगजीन में भी यही दिक्कत होती है।

उपरोक्त पुलवामा-लेख को लिखने वाले 7 लोग हैं। उनमें से 4 लोग तो भारत के ही हैं। उसमें हमलावर आतंकवादियों को नौजवान आत्मघाती कहा गया है। वह लेख आतंकवाद के चेहरे को जवानी के पीछे छुपाने की कोशिश कर रहा है। उन्हें ऐसे पक्षपाती मीडिया के द्वारा मिलिटेंट कहा जाता है, आतंकवादी नहीं। साथ में, बिना प्रमाण के यह कहा गया कि बालाकोट में भारतीय सेना का अभियान संभवतः असफल रहा, और केवल उससे भारतीय सेना को ही नुक्सान हुआ। तथ्य यह है कि पाकिस्तान ने बालाकोट में किसी को जांच ही नहीं करने दी। वहीं पर इटली की एक पत्रकार ने गुप्त सूत्रों के हवाले से बताया कि वहां से कम से कम 30-35 लाशों के बाहर निकलने की पक्की सूचना है। उनमें कई तो मुख्य आतंकवादी भी थे। साथ में, न्यूयार्क टाईम्स का वह लेख कहता है कि मोदी जी ने वह अभियान चुनावी-सफलता के लिए किया। वास्तविकता इसके विपरीत है। ऐसा लगता है कि पाकिस्तान ने मोदी को चुनाव में हराने के लिए ही पुलवामा में धार्मिक रंग से रंग हुआ आतंकवादी हमला करवाया। मोदी ने तो केवल जवाबी कार्यवाही ही की। मैं यह बात स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि मैं किसी राजनीतिक दल विशेष का पक्ष नहीं ले रहा हूँ। राजनीति में मेरी अधिक दिलचस्पी नहीं है। मैं केवल देश व सच्चाई का पक्ष ले रहा हूँ।

भारत के पास इसके सबूत हैं कि विंग कमांडर अभिनन्दन ने पाकिस्तान का f-16 लड़ाकू विमान गिराया, तब बहुत सी देशी-विदेशी पत्रिकाएँ यह दावा क्यों कर रही हैं कि f-16 को नहीं गिराया गया। यह हथियारों की अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों के पक्ष में दलाल मीडिया की तरफ से दुष्प्रचार नहीं, तो क्या है? पाकिस्तान तो इस मामले में झूठ ही बोलेगा, क्योंकि उसने अमरीका के साथ की हुई संधि को तोड़ा है। दुनिया उसकी बात पर कैसे विश्वास कर सकती है? झूठ, हिंसा, षडयंत्र व दुष्प्रचार फैलाने के मामले में तो पाकिस्तान को वैसे भी महारत हासिल है।

इस लेख के छपने के एक दिन बाद ही संयुक्त राष्ट्र में मसूद अजहर के खिलाफ लाया गया प्रस्ताव गिर गया। इसका अर्थ है कि दुनिया के बड़े देश आपस में पहले से ही मिले हुए थे। उन्होंने पहले लेख-पत्रिकाओं के माध्यम से आतंकवादियों के पक्ष में माहौल बनाया, जिससे मसूद अजहर को बचाने में अतिरिक्त सहयोग मिल गया। दुनिया के देश आतंकवाद के खिलाफ केवल जुबानी जंग ही लड़ते हैं। असली जंग तो भारत को खुद ही लड़नी होगी। और हाँ, दुर्भाग्य से न्यूजीलेंड में जो ताजा आतंकवादी हमला हुआ, उसे क्या बुद्धिजीवी लोग “भटके हुए लोगों द्वारा धांय-धांय” कह पाएंगे? आखिर आतंकवाद पर दोहरा मापदंड क्यों? यहां तक कि यह प्रतिशोध का मामला भी है। विश्व को यह देखना चाहिए कि आतंकवाद की शुरुआत किससे होती है, और फिर पहले उसे सुधारे।

हाल यह है कि दुर्भाग्य से कुछ दिनों पहले अमरीकी कंपनी बोईंग द्वारा निर्मित इथोपिया एयरलाईन्स का विमान क्रेश हुआ। उसमें 150 से अधिक लोग मारे गए। यह हादसा उसी सेंसर की खराबी की वजह से बताया जा रहा है, जिससे लगभग छः महीने पहले भी एक हादसा हुआ था। यदि समय रहते उसमें सुधार किया गया होता, तो इतने लोगों की जान बच जाती। लगता नहीं है कि न्यूयॉर्क टाईम्स ने इस सम्बन्ध में कोई कड़ा लेख लिखा होगा।

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Blog’s relevance in today’s time

A day before the resolution was to be proposed in the United Nations against Masood Azhar, an article in New York Times has rekindled the international media agenda. In this, a strange and fact less article has been exposed on the Pulwama incident. At the top of that article, the attack was not described as a terrorist attack, but an explosion. Deepawali and Christmas are celebrated with the explosions through the firecrackers. These do not have any harm to life and property. However, in Pulwama’s terrorist attack, more than 40 soldiers became martyred.

Running agendas filled with prejudices by international and eminent media houses is not new. The news is broken up in its favour. I got the honour of Quora Top writer-2018. Along with that, I was given a free subscription of New York Times for one year. I did not like the contents of that magazine. It appeared to me as filled with eccentricity, useless displaying, arrogance, and agenda. I unsubscribed it after a few days. I expressed my desire to my friends that it had been better if the Quora would give me a Bhagwat Puran (a religious text). The New York Times is considered as the world’s premier magazine. It has also received many awards.

Earlier in this magazine, an Indian space scientist was shown entering the room of the International Space-Community with a cow. Once an Indian train was shown as being dragged by an elephant. India is called the country of snake charmers and magicians. It can also be called a country of Yogis. Why negative? Many negative people are sitting within India itself. Seeing them, foreign media seems to adopt the same approach. Laughing and joke can be anything. However, there is a different way of Joke. These grow friendly relationships, do not decrease. It does not generate a sense of inferiority, but helps to be motivated to move forward with self-pride. If the negative side is repeated repeatedly, then it cannot be called as a Joke.

Conversely, the blog does not have any agenda. There is a personal opinion in it. Most of the bloggers are not professionals. Therefore, they do not participate in the blind race of their campaign. Magazines can do anything for the sake of their publicity. They can pollute the minds of the people. People have a blind faith on them. They do not escape from believing these completely. However, any person can even turn the blog down saying it as personal opinion of blogger. Together, a reader can also contradict a blog article with his comment. With this, knowledge of everyone increases progressively. Blog-articles can be edited or corrected at any time unlike the mass-published magazines. The article of the magazine has to be acknowledged even by one who does not want it, because there is no opportunity given to him for its refutation. Additionally, he has purchased it. It is such a thing that “you do not believe or think it, but you will have to believe it”. Magazines are published in millions of copies that are read by readers almost instantly. When a low voiced answer regarding its mistake arrives, till then it has imprinted its effect on the readers.

Seven people wrote the above pulwama-article. 4 of them are from India. In it, the attacking terrorists have been called as the youth suicide-killer. This article is trying to hide the face of terrorism behind youth. They are called militants by such biased media, not terrorists. Together, it was said without proof that the Indian Army’s campaign in Balakot could have been unsuccessful, and only the Indian Army itself was damaged. The fact is that Pakistan did not allow anyone to check in Balakot. On the other hand, a journalist from Italy told from the secret sources that at least 30-35 dead bodies have been confirmed from there. Many of them were also main terrorists. Together, that article from the New York Times says that Modi ji did that campaign for electoral success. The reality is the opposite. It seems that Pakistan used religion-oriented terrorists to attack people in Pulwama to defeat Modi in the elections. Modi has only done counter-response. I want to make it clear that I am not taking any side of any political party. I am not interested in politics. I am only taking the side of the country and the truth.

India has evidence that Wing Commander Abhinandan dropped Pakistan’s F-16 fighter plane, then why do so many native and foreign magazines claim that the f-16 has not been dropped. If this is not propaganda of the broker media in favour of international companies of arms, then what is this? Pakistan will lie in this case because it has broken the treaty with the United States. How can the world believe its point? In matters of spread of lies, violence, conspiracy, propaganda, and ill advances, Pakistan is a master already.

A day after the publication of this article, the proposal brought against the Masood Azhar in the United States fell. This means that the big countries of the world have hands in glove, and they had already met among themselves. At first, they created an atmosphere in favor of the terrorists through the articles-journals, which provided additional support in saving Masood Azhar. The countries of the world fight only the verbal war against the terrorism. The real battle must be fought by India itself. And yes, unfortunately, regarding the latest condemterrorist attack in New Zealand, will the intellectuals be able to say, “Fire play by the strayed people”? After all, why double standards on terrorism? Even that is the case of retaliation. World should see what initiates the terrorism, and then correct that first.

It is a matter of unfortunate time that the crash of the Ethiopia Airlines’ plane that was manufactured by American company Boing occurred a few days ago. More than 150 people died in that. This incidence is being reported because of the same sensor’s malfunction, which resulted in an accident almost six months earlier. If there had been improvement in time, then the lives of so many people would be saved. It does not seem to be that the New York Times wrote a hard article about this.

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वेबसाईट का निर्माण, प्रबंधन व विकास, भाग-5; Website creation, management and development, part-5

वेबसाईट का निर्माण, प्रबंधन व विकास, भाग-5 (please browse down or click here to view this post in English)

वर्डप्रेस के तीन प्लान हैं, पर्सनल, प्रीमियम, व बिजनेस। पर्सनल प्लान की कीमत 2400 रुपए प्रतिवर्ष है, प्रीमियम प्लान की लगभग 4000 रुपए, व बिजनेस प्लान की लगभग 8000 रुपए । अधिकाँश लोगों के लिए पर्सनल प्लान पर्याप्त है। जो बहुत अधिक आडियो व विडियो पोस्ट लिखते हैं, इंटरनेट पर कुछ बेचकर पेमेंट रिसीव करते हैं, विज्ञापनों से कमाई करते हैं, व ज्यादा ही तड़क-भड़क वाली वेबसाईट-थीम को पसंद करते हैं, केवल उन्हीं के लिए दूसरे प्लान की आवाश्यकता होती है। छोटे प्लान से ट्रेफिक भी अधिक मिलती है, क्योंकि वह जल्दी लोड होती है, और वह सिंपल भी होती है। मुझे तो पर्सनल प्लान ही सर्वश्रेष्ठ लगा। वर्डप्रेस डॉट कॉम के पास एक निःशुल्क प्लान भी होता है, जिसमें वह अपने विज्ञापन डालती रहती है, और कस्टमर केयर की सपोर्ट भी नहीं देती। निःशुल्क प्लान तो कभी नहीं लेना चाहिए, सीखने के लिए भी नहीं, क्योंकि उसमें डाटा गुम होने का डर हमेशा बना रहता है। मेने तो शुरू के 5-6 महीने के लिए निःशुल्क प्लान ही लिया था। जब मेरी ट्रेफिक कुछ बढ़ गई, और डाटा भी बड़ा हो गया, तब मैंने उसे पर्सनल प्लान में अपग्रेड करवाया। उसमें मुझे एक महीने का विंडो-टाईम मिला, जिसमें पुनः डाऊनग्रेड करने पर मुझे पूरा रिफंड वापिस मिलना था। जब मेरी वेबसाईट पूर्णतः तैयार हो गई, तब मैंने उसे प्रीमियम प्लान में अपग्रेड करवाया (उसमें भी एक महीने का विंडो-टाईम था)। पर मैं उसमें छः महीने तक काम करता रहा, और जब मेरा मन भर गया, और उसे निरर्थक समझा, तब मैंने उसे डाऊनग्रेड करवा दिया। अपवाद–स्वरूप मुझे पूरा रिफंड वापिस मिल गया।

अब हम पोस्ट के व वेबपेज के निर्माण के बारे में बात करते हैं। पोस्ट में केटेगरी व टैग बनाने का विकल्प होता है। केटेगरी से पाठकों / वेबसाईट-विजिटरों के लिए पोस्ट तक पहुँचना आसान हो जाता है। जैसे कि कविताओं के लिए कविता नाम से केटेगरी बना कर उसमें सभी कवितायेँ डाली जाती हैं। एक पोस्ट की एक से अधिक केटेगरी भी हो सकती हैं। टैग के रूप में कीवर्ड को लिखा जाता है। जैसे कि कुण्डलिनी से सम्बंधित पोस्ट के लिए कुण्डलिनी, योग, अध्यात्म आदि शब्द टैग के रूप में डाले जाते हैं। टैग से सर्च इंजन को पोस्ट खोजने में आसानी होती है। इसी तरह कमेन्ट, पिन्जबेक, व ट्रेकबेक को एनेबल या डिसेबल करने का विकल्प भी होता है। वेबसाईट में लिंक बनाना बहुत महत्त्वपूर्ण होता है। लिंक से ही वेबसाईट पूरी दुनिया से जुड़ती है। पोस्ट के एडिट मोड में जाकर सर्वप्रथम एंकर टेक्स्ट को सेलेक्ट किया जाता है। एंकर टेक्स्ट पोस्ट का वह वाक्य या शब्द होता है, जिस पर लिंक की हुई सामग्री जुड़ी होती है, और जिस पर कर्सर रखने से हाथ का निशान बनता है, और जिसको क्लिक करने से लिंकड सामग्री वाला पेज खुल जाता है। एंकर टेक्स्ट को सेलेक्ट करने के बाद टॉप मीनू बार में लिंक के निशान पर क्लिक किया जाता है। उससे वह लिंकड पेज का यू-आर-एल (जो पेज के टॉप वाली गूगल-सर्च-बार में होता है) एड्रेस मांगता है। उस एड्रेस को वहां कोपी-पेस्ट करके सेव कर लिया जाता है। “लिंकड पेज को अलग टेब पर खोलें” वाले विकल्प को न चुनें। इसी लिंक बनाने की कला से ही “नेक्स्ट पेज”, “प्रीवियस पेज” आदि क्लिकेबल बटन बनाए जाते हैं। अगली पोस्ट में हम पेज जम्प लिंक के बारे में बताएँगे——अगली पोस्ट पर जारी——

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Website creation, management and development, part-5

There are three plans of WordPress.com. These are personal, premium, and business. The price of personal plan is 2400 INR per year, about 8000 INR is the price for premium plan, and approximately 8000 inr for the business plan. Personal plan for most people is enough. Those who write a lot of audio and video posts, sell something on the internet, receive payments, earn money from ads, and like more snappy website-themes, they only need another plan. Traffic is also much higher with the simple plan, because it loads quickly, and it is simple in design. I thought it was best to have a personal plan. WordPress.com also has a free plan, in which it keeps sending its ads, and does not even support customer care. Free plans should never be taken, not even for learning, because there is always the fear of losing data. I had only taken a free plan for 5-6 months of the start. When my traffic increased, and the data grew too, then I upgraded it to the personal plan. I got one-month window-time in which I had to get the entire refund back once I again downgraded that. When my website was completely ready, then I upgraded it to the premium plan (it also had a one-month window-time). However, I kept working for six months in it, and when my mind was full, and considered it as nonsensical, then I downgraded it. With the exception, I got the full refund back.

Now we talk about the creation of posts and web pages. Post has the option to create categories and tags. The category makes it easy for readers / website-visitors to access posts. For poetry, ‘poetry’ is named after category and all poems are inserted in it. There may be more than one category for a post. The keywords are written as tags. As for the post related to Kundalini, Kundalini-Yoga, Spirituality etc., kundalini or/and yoga words are put in the form of tags. The tag makes search engines easy to find posts. Similarly, there is an option to enable comment, Pingback, and Trackback. Making a link in the website is very important. The link connects the whole world with the post / website. First, the anchor text is selected by going into the edit mode of the post. The anchor text is the sentence or word of the post that the linked material is attached to, and putting mouse on which the hand mark evolves, and clicking on which opens the page with the link contents. After selecting anchor text, the link mark is clicked in the top editor bar. From that, it asks for the link-page URL (which is in the top of the to be linked page, in Google-search-bar). Copying that address, it is pasted in editor and saved. Do not select the option “Open the link page on a separate tab”. Clickable buttons are created from the art of creating link, like “Next page”, “Previous page” etc. In the next post we will tell about the page jump link —— contd. on next post ——

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शिव-अराधना से सर्वधर्मसमभाव- Love and brotherhood between all religions through Shiva-worship

पावन शिवरात्रि के अवसर पर सभी मित्रों को बहुत-२ शुभकामनाएं। (please browse down or click here to view this post in English)

आशुतोष शंकर बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। इसका अर्थ है कि उनके द्वारा उपदिष्ट तंत्र-साधना अतिशीघ्र मुक्ति प्रदान करती है। तंत्रसाधना हमारे दैनिक जीवन की गतिविधियों को आध्यात्मिक रूप देकर ही बनी है। उदाहरण के लिए निपुण तंत्रयोगियों का शरीर स्वयं ही मुड़ता, सिकुड़ता, फैलता व ऊपर की ओर उठता हुआ सा रहता है। ऐसा कुण्डलिनी को चक्रों पर स्थापित करने के लिए स्वयं ही होता रहता है। जब थकान होती है या कन्फ्यूजन होता है, तब भी ऐसा होता है, जिससे कुण्डलिनी मस्तिष्क-चक्र पर स्वयं ही प्रतिष्ठित हो जाती है। उससे एकदम चैन के साथ एक लम्बी सांस शरीर के अन्दर स्वयं ही प्रविष्ट होती है। नींद आने पर या बोरियत होने पर शरीर के उठने जैसे (अंगड़ाई) के साथ जम्हाई आने के पीछे भी यही रहस्य छिपा हुआ है।

शिव की मूर्ति मानवाकार होती है। इसका अर्थ है कि उस मूर्ति के अन्दर की कोशिकाएं (देहपुरुष) भी वैसी ही होती हैं, जैसी हमारे अपने शरीर के अन्दर की। इसका अर्थ है कि शिवमूर्ति की पूजा के समय हम उसमें स्थित देहपुरुष की ही पूजा कर रहे होते हैं। उस अद्वैतस्वरूप देहपुरुष को हमने अपनी मानसिक कुण्डलिनी का रूप दिया होता है। सीधा सा अर्थ है कि शिव-पूजन से भी कुण्डलिनी ही पुष्ट होती है। कुण्डलिनी-रूपी मानसिक चित्र किसी की व्यक्तिगत रुचि के अनुसार शिव का रूप लिए हुए भी हो सकता है, गुरु का रूप लिए भी हो सकता है, या प्रेमी / प्रेमिका का रूप लिए भी हो सकता है। कई बार तो कुण्डलिनी-चित्र शिव के जैसी वेशभूषा में भी अनुभव होता है, जैसे की बैल पर सवार, गले में सर्प की माला के साथ व डमरू के साथ, एक औघड़ तांत्रिक की तरह आदि-2। ऐसा शिव-पूजन के प्रभाव से होता है।

भगवान शिव दुनिया के सभी लोगों व धर्मों के आराध्य हैं। शिव-पूजन से दुनिया में सर्वधर्मसमभाव स्थापित हो सकता है। इससे धार्मिक उन्माद, कट्टरपंथ, व आतंकवाद पर रोक लग सकती है। सभी धर्म व दर्शन शिव से ही निकले हैं। इसका प्रमाण है कि भगवान शिव खान-पान के मामले में, पूजा के विधि-विधान के मामले में किसी से भेदभाव नहीं करते। उन्हें भूत-प्रेतों जैसे लोग भी उतने ही प्रिय हैं, जितने देवता जैसे लोग। वे सभी को प्रेम से व समान भाव से स्वीकार करते हैं, चाहे कोई किसी भी धर्म आदि का क्यों न हो। उनके द्वारा प्रदत्त तांत्रिक-साधना से यह स्पष्ट हो जाता है। शिवप्रदत्त तांत्रिक साधना ही सर्वाधिक वैज्ञानिक, प्रासंगिक, आधुनिक, सामाजिक, कर्मठतापूर्ण व मानवतापूर्ण है।

शिव-शक्ति अवधारणा सभी धर्मों में किसी न किसी रूप में मानी जाती है। जो सत्य है, वह शिव है। वही पूर्ण है। उसमें सभी भाव-अभाव हैं। उसमें स्त्रीभाव व पुरुषभाव, दोनों एकसाथ विद्यमान हैं। एक प्रकार से शिव का स्वरूप मनुष्य के उस रूप के करीब है, जिसमें वह समाधि में स्थित रहता है। यह सभी जानते हैं कि सर्वाधिक मजबूत समाधि तांत्रिक यौनसंबंध के साथ ही लगती है। अतः एक ही भगवान शिव को शिव-पार्वती के रूप में काल्पनिक रूप से विभक्त किया गया है, ताकि समझने में आसानी हो। वास्तव में शिव-पार्वती सदैव एकाकार ही हैं, इससे यह भी कल्पित हो जाता है कि शिव-पार्वती सदैव पूर्णरूप से तांत्रिक-साधना में लीन रहते हैं। शिवलिंग इस साधना का प्रतीक है।

रशिया में भी इसी तरह की एक लोककथा प्रचलित है कि आदमी कभी पूर्ण हुआ करता था। उससे देवताओं का राजा डर गया और उसने आदमी को दो हिस्सों में बाँट दिया। एक हिस्सा पुरुष बना, और एक हिस्सा स्त्री बना। तभी से लेकर दोनों हिस्से एकाकार होने के लिए व्याकुल होते रहते हैं, ताकि पुनः पूर्ण होकर देवताओं पर राज कर सकें।

कई लोगों को शंका हो सकती है कि शिव तो हमेशा ही तांत्रिक साधना में लीन रहते हैं, फिर उन्हें कामारि, यह नाम क्यों दिया गया है? वास्तव में, एक तांत्रिक ही यौन-दुर्भावना को जीत सकता है। यौनता से दूर भागने वाला आदमी यौन-दुर्भावना को नहीं जीत सकता। उसके अन्दर यौनता के प्रति इच्छा बहुत बलवान होती है, बेशक वह बाहर से उससे अछूता होने का दिखावा करता रहे। काम को वही जीत सकता है, जो काम के रहस्य को समझता हो। काम के रहस्य को एक सच्चे तांत्रिक से अधिक कोई नहीं समझ सकता।

भगवान शिव को भूतनाथ भी इसीलिए कहते हैं, क्योंकि वह उन तांत्रिकों का नाथ भी होता है, जो बाहर के आचारों-विचारों से भूत-प्रेत की तरह ही प्रतीत होते हैं। यद्यपि अन्दर से वे शिव की तरह ही पूर्ण होते हैं।

भगवान शिव को भोला इसलिए कहा जाता है, क्योंकि वह अपनी नित्य तांत्रिक-साधना के बल से पूर्ण अद्वैत-भाव में स्थित रहते हैं। अर्थात वे एक बच्चे की तरह होते हैं। उनके लिए काष्ठ, लोष्ठ व स्वर्ण आदि सब कुछ एकसमान है। यद्यपि वे जीवन-व्यवहार के लिए ही बाहर से भेदभाव का प्रदर्शन करते हैं, अन्दर से नहीं।

मुझे एक बार भगवान स्शिव स्वप्न में दिखे थे। वे एक ऊंचे चबूतरे जैसी जगह पर बैठे हुए थे। वे कुछ गंभीर यद्यपि शांत लग रहे थे, एक औघड़ व अर्धवृद्ध तांत्रिक की तरह। साथ में वे मस्त-मौले जैसे भी लग रहे थे। फिर भी, उनका पहरावा शिव के जैसा लग रहा था। उनके चारों तरफ बहुत से भूत-प्रेत धूम-धड़ाके व जोर के हो-हल्ले के साथ नाच-गा रहे थे। वह आवाज जोर की व स्पष्ट थी। वह विशेष, रोमांचकारी, व संगीतमयी आवाज (खासकर ढोल की डिगडिगाहट) मुझे आजतक कुछ याद सी आ जाती है। उन भूत-प्रेतों से तनिक भी डर नहीं लग रहा था, अपितु बहुत आनंद आ रहा था। ऐसा लगा कि मेरे कुछ जानने में आने वाले व दिवंगत लोग भी उस भूत-प्रेतों के टोले में शामिल हो गए थे। उस स्वापनिक घटना से मेरी कुण्डलिनी को बहुत शक्ति मिली, और उसके लगभग डेढ़ से दो वर्षों के बाद वह जागृत भी हो गई।

इसी तरह, लगभग 30 वर्ष पूर्व मैं अपने चाचा की बरात के साथ जा रहा था। एक बड़े पहाड़ के नीचे से गुजरते हुए मुझे भगवान शिव एक अर्धवृद्ध के रूप में शांति से एक बड़ी सी चट्टान पर पालथी लगा कर बैठे हुए दिखे। वहां पर लोग फूल-पत्ते चढ़ा रहे थे, क्योंकि उसके थोड़ा ऊपर व पेड़ों के पीछे एक शिव-पार्वती का मंदिर था, जो वहां से दिखाई नहीं देता था। मैंने भी पत्ते चढ़ाए, तो मुझे उन्होंने प्रसाद के रूप में कुछ दिया, शायद चावल के कुछ दाने थे, या वहीँ से कुछ पत्ते उठाकर दे दिए थे। मुझे पूरी तरह से याद नहीं है। वे मुस्कुराते हुए, कुछ गंभीर जैसे, साधारण वेशभूषा में, व एक औघड़-गुरु के जैसे लग रहे थे। फिर भी वे एक साधारण मनुष्य ही लग रहे थे। तभी तो शायद मैंने उनसे बात नहीं की। वैसे भी, तंग पगडंडी पर लोगों की लम्बी पंक्ति में जल्दी-२ चलते हुए बात करने का समय ही नहीं था।

भगवान शिव की महिमा का कोई अंत नहीं है, पर निष्कर्ष के रूप में यही कह सकते हैं, शिव है तो सब कुछ है; शिव नहीं है तो कुछ नहीं है।

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Best wishes to all friends on the occasion of holy Shivratri.

Ashutosh Shankar becomes happy very easily. It means that the tantra-oriented technique provided by him gives liberation very quickly. The tantric techniques are made of the simple activities of our daily lives by giving those a spiritual shape. For example, the body of skilled tantric turns, shrinks, spreads and remains rising upward (tucking) itself. Such happen for kundalini to be installed on the chakras itself. When there is fatigue or confusion, this happens, due to which the Kundalini becomes distinguished itself on the cerebral chakra. With this, a long breath is drawn inside the body itself with a sudden relief. This secret is hidden behind the yawning with the body’s rise (body tucking up), when it comes to relieve of sleep or boredom.

Shiva’s idol is a human-form. It means that the cells (dehpurush) inside the body of that idol are also similar, as those in the inside of our own body. It means that while worshiping Shiva-idol, we are worshiping the non-dual dehpurush inside it. We have given the form of our mental Kundalini to that  dehpurush having non-dual attitude. It means straightforward that the Kundalini becomes strong even from Shiva-worship. Kundalini (mental image) can be having a form of Shiva according to somebody’s personal interest, can also be the form of a guru, or the form of boyfriend / girlfriend too. Many times, Kundalini-image is also experienced in Shiva-like costumes, such as one riding a bull, with a snake’s necklace and with a damroo (special drum), like a soft tantric etc. This happens with the influence of Shiva-Pooja (worship).

Lord Shiva is adorable of all people and religions of the world. Shiva-poojan can establish universal harmony in the world. It can prevent religious mania, fundamentalism, and terrorism. All religions and philosophies have come from Shiva. Its proof is that Lord Shiva does not discriminate against anyone in the case of eating-drinking and in the case of law and order of worship. He loves the people who are like the ghosts just equal to those people who are like God. He accepts all with love and with the same emotion, no matter how religious one is or what type the religion one has. It is clear from the tantric-sadhana given by him. Shiva-provided Tantric Sadhana is the most scientific, relevant, modern, social, productive, and humanistic.

Shiva-Shakti concept is considered in some form in all religions. That which is truth that is Shiva. That is the whole thing. There are all emotions in it. In it, both femininity and maleness are present together. In a sense, the nature of Shiva is close to that form of man, in which he lives in Samadhi. All of us know that the strongest Samadhi (meditation) seems to be accompanied by tantric sexual intercourse. Therefore, the only Lord Shiva has been conceptually divisible in the form of Shiva-Parvati that is easy to understand. In fact, Shiva-Parvati is always united as one, but it is also assumed that Shiva-Parvati are always completely absorbed in tantric-sadhana. Shiva lingam is a symbol of this sadhana.

In Russia, a similar folktale is prevalent that a man used to be perfect. From him the king of the gods was scared and he divided the man into two halves. One part is made of man, and one part becomes a woman. From then on, both sides are anxious to be united, so that they can rule over the gods once they are completed again.

Many people may doubt that Shiva is always absorbed in Tantric meditation, then why he has been given this name as kamari? In fact, only a tantric can conquer sex-malice. A man escaping sexuality cannot win sexually ill thought. His desire for sex in him is very strong, of course, he pretends to be untouched from the outside. Only one can win the sexuality, who understands its secret. Nobody can understand the secret of sexuality more than a true tantric.

Bhootnath (lord of ghosts) is also a name given to Lord Shiva, because he is also the master of those tantrics, who seem to be like ghosts from outside. Although from inside they are fulfilled just like Shiva.

Lord Shiva is also called as Bhola (innocent), because he is situated in full Advaita Bhava (non-dual attitude) with the force of his daily Tantric-Sadhana. That is, he is like a child. For him wood, lumber, and gold etc. everything is the same. Although he demonstrates discrimination from outside to live a mundane life-style, not having it inwardly.

I once saw Lord Shiva in my dream. He was sitting at a place like a table-type rock. He looked somewhat quiet though, like a soft, and semi-old Tantric. Together he seemed like a mast man (easy going). Even so, his dress looked like Shiva. Around him, many of the ghosts were dancing, singing with loud, and mast sound. That voice was loud and clear. That particular exhilarating musical voice (especially low pitch beats of the drum) makes me remember that a little today. I was not feeling frightened at all from those ghosts, but I was feeling very happy and a bliss. It seemed that the people who came to know me and were the departed ones also joined the group of those ghosts. My Kundalini got very much power from that automatic incident, and after about one and half a year to two years, she became awakened too.

Likewise, about 30 years ago, I was going with my uncle’s marriage procession. Passing under a big mountain, I saw Lord Shiva sitting in squatting posture in peace on a big rock in the form of a half-old man. There people were offering flowers and leaves, because there was a Shiva-Parvati temple behind the trees and a little above that place, which was not visible from there. I also offered him the leaves, then he gave me something in the form of a gift maybe that was in the form of some grains of rice or he picked up some leaves. I do not remember completely. He was smiling, looking like something serious, in ordinary costumes, and like a softhearted guru. Yet he seemed to be an ordinary man. Then maybe I did not talk to him. Anyway, there was no time to talk about while moving in the long line of people on the tight footpath for early running.

There is no end to the glory of Lord Shiva, but in the form of conclusions it can be said, Shiva is everything; if there is no Shiva, then there is nothing.

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अभिनन्दन को अभिनन्दन- Abhinandan (Congratulations) to Abhinandan

अभिनन्दन को अभिनन्दन (please browse down or click here to view this post in English)

भारत-पाकिस्तान की निगरानी के लिए अंतर्राष्ट्रीय (संयुक्त राष्ट्रसंघ) पर्यवेक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई है। यदि हुई है, तो वह नाकाफी है, या पक्षपातपूर्ण है। मैं यह बात बता देना चाहता हूँ कि यह बहुत ही ऊंचे स्तर की बात है, जिसकी सम्पूर्ण कूटनीति को समझना मेरे बस की बात नहीं है। फिर भी मैं अपने विचार प्रकट कर रहा हूँ, यह जानने के लिए कि सब कुछ जानते हुए भी संयुक्त राष्ट्रसंघ मूकदर्शक क्यों बना रहता है। तभी तो पाकिस्तान नित-नए झूठ के रंग-बिरंगे बादल उड़ाता रहता है, दुनिया भर में। वह ऐसा हमेशा से ही करता आया है। वह रोज सीजफायर का उल्लंघन करता है, और हमारे रिहायशी इलाकों को अपना निशाना बनाता रहता है, जिसे दुनिया या संयुक्त राष्ट्रसंघ देख ही नहीं पाता। भारत केवल आतंकी शिविरों को ही अपना निशाना बनाता है, सैनिक व नागरिक क्षेत्रों को नहीं। पाकिस्तान केवल सैनिक व नागरिक क्षेत्रों पर ही हमले करता है। और करेगा भी कहाँ, क्योंकि हमारे देश में आतंकवादी हैं ही नहीं।

एक बात जरूर है कि शिमला समझौते के बाद अंतर्राष्ट्रीय पर्यवेक्षक का प्रश्न ही पैदा नहीं होता। पर यह सवाल भी सच है कि पाकिस्तान ने समझौतों का पालन किया ही कब? जो समझौतों को माने, वह पाकिस्तान ही कैसा? भारत-पाक सीमा पर अंतर्राष्ट्रीय पर्यवेक्षक रखने का पाक का सुझाव भी साजिश से भरा हुआ लगता है। आजकल के अटैक हाईटेक होते हैं। उन पर सड़क पर दौड़ने वाली यूएनओ की गाड़ी कैसे नजर रख पाएगी। एलओसी बहुत बड़ी है। उस पर एकसाथ नजर रखना आसान काम नहीं है। पाकिस्तान को तो वैसे भी झूठ, दुष्प्रचार व साजिश को रचने में महारत हासिल है। ऐसा वह अनगिनत बार कर चुका है। अतः यह कैसे माना जा सकता है कि वह यूएनओ की टीम का ब्रेनवाश नहीं कर देगा? वह तो उन्हें आतंकवादियों का डर दिखा कर उनसे झूठी रिपोर्टें भी बनवा सकता है। जान बचाने के लिए आदमी क्या काम नहीं कर सकता? आजकल तो आकाशीय उपग्रहों का युग है। एलओसी पर उपग्रहों से क्यों नजर नहीं रखी जाती। उसके लिए तो किसी की अनुमति की आवश्यकता भी नहीं है। उस पर खर्चा भी कम आएगा, और त्रुटि की संभावना भी नहीं होगी। आजकल के उपग्रह तो छत के ऊपर लगी पानी की टंकी को भी स्पष्ट दिखा सकते हैं। क्या वे एलओसी का निरीक्षण नहीं कर पाएंगे?

विकिलीक ने खुलासा किया है कि अमरीका को बालाकोट के आतंकवादी-शिविरों के बारे में बहुत पहले से पता था। जब उसे पता था, तब उसने उनको अपना लक्ष्य क्यों नहीं बनाया? उसने भारत को भी उस बारे में सतर्क करते हुए, उसकी सहायता भी क्यों नहीं की। यह एक विचारणीय विषय है। डेविड हेडली जो मुंबई हमले की योजना का हिस्सा था, उसका पता अमरीका को पहले से ही था, पर उसने बताया नहीं। यह सबको पता है कि अमरीका ने रशिया के खिलाफ पाकिस्तान के आतंकवाद को पोषित भी किया था। जब वर्ड ट्रेड सेंटर पर हमला हुआ, तब अमरीका को समझ आई। देर से आए, दुरस्त आए। जब जागो, तभी सवेरा। परन्तु आतंकवाद के विरुद्ध अमरीका के प्रयास नाकाफी प्रतीत होते हैं। अमरीका ने बच्चे की तरह पाकिस्तान को पाल-पोस कर बड़ा किया है। उससे आतंकवाद भी खुद ही फलता-फूलता गया। अमरीका जैसे चतुर देश की आंख में कोई धूल नहीं झोंक सकता। पाकिस्तान द्वारा उसकी आँखों में धूल झोंकने की बात करना तो एक बहाना मात्र है, सच्चाई कुछ और ही लगती है। हाल ही में पाकिस्तान ने भारत के सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमले के लिए एफ-16 विमान का प्रयोग किया, जिसे परमवीर विंग कमांडर अभिनन्दन ने मार गिराया। पाकिस्तान ने ऐसा करके अमेरिका के साथ की हुई संधि को तोड़ा है। लगता नहीं है कि अमरीका उसके खिलाफ कोई सख्त एक्शन लेगा। यह भी हो सकता है कि यदि अमरीका भारत का खुल कर साथ दे, तो चीन पाकिस्तान का खुल कर साथ देगा। गुपचुप तरीके से तो वह अभी भी दे रहा है। चीन को यह समझ लेना चाहिए कि बुराई का साथ देकर उसका कभी भी भला नहीं हो सकता। प्रकृति बहुत बलवान है, और वह बड़ों-२ को झुका देती है। अमरीका कहता है कि भारतीय सेना को अफगानिस्तान में नियुक्त करना चाहिए। यहाँ हाल यह है कि भारत के 40 से अधिक सैनिक पाकिस्तान ने मार दिए, और अमरीका ने उस पर एक भी हवाई हमला नहीं किया। यदि वह ऐसा करता, तब हम मानते कि भारतीय-सैनिकों का वास्तव में वह हित चाहता है, और अफगानिस्तान में भी वह उन्हें सुरक्षित रहने में मदद करेगा। जब अपने देश भारत में ही भारतीय-सैनिक सुरक्षित नहीं हैं, तब अफगानिस्तान में वे कैसे सुरक्षित रह सकते हैं। वहां पर तो आतंकवादियों का खुला बोलबाला है। अगर पाकिस्तान के पास परमाणु बम है, तो भारत के पास भी है। भारत के पास तो वह हवा, जल व स्थल, तीनों जगह पर तैनात है, और अब तो वे परमाणु-पनडुब्बी पर भी तैनात कर दिए गए हैं। चीन पाकिस्तान की मदद केवल अपने स्वार्थपूर्ण हितों के लिए कर रहा है। वह विश्व के हितों को अनदेखा कर रहा है।

कश्मीर से धारा 370 व धारा 35-ए को तुरंत हटा दिया जाना चाहिए, क्योंकि वे आतंकवाद का पोषण करती हैं। सिन्धु जल समझौते को भी रद्द कर देना चाहिए। पाकिस्तान भी कोई समझौता नहीं मानता। केवल अपने हिस्से का पानी रोक देने से ही कुछ विशेष नहीं होने वाला है। यदि इसके बदले में चीन भारत का पानी रोकता है, तो उससे विशेष फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि भारत एक बहुत बड़ा देश है। परन्तु पाकिस्तान तो लगभग प्यासा ही हो जाएगा। पाकिस्तान के साथ कोई भी मैच नहीं खेलना चाहिए। क्रिकेट विश्वकप से भी पाकिस्तान का बहिष्कार करवा देना चाहिए, क्योंकि वहां पर भारत की सबसे अधिक चलती है, और सबसे अधिक कमाई भी भारत से ही होती है। कश्मीर को सेना के हवाले कर देना चाहिए। देशद्रोहियों के लिए मृत्युदंड का प्रावधान हो। उनके लिए व आतंकवादियों के लिए विशेष फास्ट ट्रेक कोर्ट बनाने चाहिए, ताकि कांधार-अपहरण जैसी घटना दुबारा न घटे। यदि मसूद अजहर को तुरंत फांसी दे दी गई होती, तो उसके चेले-चांटे उसे छुड़वाने के लिए हमारे विमान का अपहरण न करते। यह नियम है कि जख्म का इलाज करते समय उसके आसपास के स्वस्थ भाग भी कुछ न कुछ दुष्प्रभावित हो ही जाते हैं। सेना उच्च कोटि के हेलमेट व बुलेटप्रूफ जेकेट पहन कर कश्मीर में घर-2 की तलाशी जारी रखे। भारत ने पाकिस्तान के आतंकी-शिविरों को ध्वस्त करके दुनिया के भले के लिए महान काम किया है। इसलिए बदले में दुनिया के अन्य देशों को भारत के लिए अत्याधुनिक हथियार व सैनिक मुफ्त में मुहैया करवा देने चाहिए, ताकि भारत यह कार्यवाही उत्तम तरीके से जारी रख सके।

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अंत में, वीर अभिनन्दन को अभिनन्दन।

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Abhinandan (Congratulations) to Abhinandan

International (United Nations) supervisors have not been appointed to oversee India-Pakistan. If it has happened, then it is inadequate, or biased. I want to tell you that it is a very high-level thing to talk about, whose whole diplomacy is not under my understanding. Still I am expressing my views, to know why the United Nations remains a mute spectator even knowing everything. Pakistan continues to flutter the colorful clouds of ever new lies around the world. It has always been doing this always. It violates the ceasefire every day, and continues to target our habitats, which the world or the United Nations cannot see. India only targets militant camps, not soldiers and civilian areas. Pakistan attacks only on soldiers and civilian areas. And where will it target, because there are not terrorists in our country.

One thing is certain that the question of international observer does not arise after the Shimla Agreement. However, this question is also true that when Pakistan has followed agreements? Who follows agreements, how can that be a Pakistan? The suggestion of Pakistan to keep an international observer on the Indo-Pak border seems to be full of conspiracy. Nowadays, attacks are high-tech. How to track those from a road-laden UNO car? LOC is too big. Keeping an eye on it together is not easy. Pakistan is well mastered to create lies, misrepresentation, and conspiracy anyway. He has done so many times. So how can it be assumed that it will not brainwash the UNO team? He could also make fake reports through them by showing them the fear of terrorists. What can a man not do to save his life? Nowadays, there is an era of celestial satellites. Why are not satellites put to observe the Loc? There is no need for anyone’s permission for that. There will be less expenditure on that, and there will be no possibility of error. Today’s satellites can also show the water tank on top of the roof clearly. Will not they be able to inspect the Loc?

Wiki leaks have disclosed that America knew about Balakot’s terrorist camps long ago. When it knew this, then why did not it make its goal to destroy those? It also did not warn India about that, leave alone the help. This is a considerable topic. David Headley, who was part of the Mumbai attacks plan, was already in the US, but it did not disclose it. It is known to all that America also funded Pakistan’s terrorism against Russia. When the World Trade Center was attacked, then the US came to understand. When understanding comes late, it comes better. When you wake up, then only the morning is there. However, America’s efforts against terrorism seem insignificant. America has raised Pakistan like a naughty child. From it, terrorism itself flourished. There is no dust in the eye of a clever country like America. Talking of dust in its eyes through Pakistan is only an excuse; the truth seems to be something else. Recently Pakistan used the F-16 aircraft to attack Indian military installations, which Paramveer Wing Commander Abhinandan shot down. Pakistan has broken treaty of its use with America. It does not seem that the US will take some tough action against it. It may also be that if the United States opens his heart towards India fully, then China will open its doors to Pakistan. In secretly, it is still supporting Pakistan. China should understand that it could never be good by supporting evil. Nature is very strong, and it bends even the big gamers. The US says that the Indian army should be appointed in Afghanistan. The situation here is that more than 40 soldiers of India were killed by Pakistan, and the United States did not have an air strike on it. If it had done that, then we would have believed that Indian soldiers really under its security, and even in Afghanistan, it would help them stay safe. When Indian soldiers are not safe in their own country, then how can they stay safe in Afghanistan? There the openness of the terrorists is over and above anywhere else. If Pakistan has nuclear bombs, then India also has it. In India, it is stationed at air, water and space, all three places, and now these have been deployed on nuclear submarines also. China is helping Pakistan only for its selfish interests. It is ignoring the interests of the world.

Section 370 and Section 35-A from Kashmir should be removed immediately because these nurture terrorism. The Sindhu Water Treaty should also be canceled. Pakistan also does not accept any agreement. Only by stopping the water of our own part is nothing special. If China inhibits the water of India in return, it will not make any difference because India is a big country. However, Pakistan will be almost thirsty. No mach should be played with Pakistan. The Cricket World Cup should also boycott Pakistan, because there is India’s largest contribution, and the highest earning is from India only. Kashmir should be handed over to the army. Provision of capital punishment for traitors should be there. For them and for the terrorists, special fast track courts should be created so that incident like Kandahar-abduction does not happen again. If Masud Azhar were hanged immediately, then his disciples would not kidnap our plane to rescue him. It is a rule that while treating the wound, healthy areas around it also get some side effects. Army continues the search of every home in Kashmir by wearing high quality helmets and bulletproof jackets. India has done great work for the good of the world by destroying Pakistan’s terrorist camps. Therefore, in return, other countries of the world should provide state-of-the-art weapons and soldiers for free, so that India can continue this action in a best way.

To go deep into patriotism, be sure to read the book (Hindi) available at the link below

Finally, congratulations to Veer Abhinandan.

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