वेबसाईट का निर्माण, प्रबंधन व विकास; भाग-12 (पेमेंट और बैकअप)

वैबसाईट पर पेमेंट

वर्डप्रेस वेबसाईट पेपाल या क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड के थ्रू पेमेंट करती है, और वेबसाईट रिन्यू करने के लिए पेमेंट लेती है। यद्यपि कार्ड अंतर्राष्ट्रीय होना चाहिए। जैसे कि वह भारतीय रुपे कार्ड को एक्सेप्ट नहीं करती। इन्टरनेट बेंकिंग से पेमेंट नहीं होती। कार्ड को कंपनी बैंक से कन्फर्म करती है। बेंक से वह मेसेज वेबसाईट मालिक को आ जाता है, यदि उसका मोबाईल नंबर बेंक में दर्ज हो।

होस्ट को बदलना

वैबसाईट के लिए होस्टिंग (घर/जगह) देने वाली बहुत सी कम्पनियां हैं। सबका अलग-२ रेट है। यदि किसी को अपनी वर्तमान होस्टिंग महंगी या गलत लग रही हो, तो वह अपनी उसी वैबसाईट के लिए दूसरी होस्टिंग भी ले सकता है। इसके लिए उसे अपनी वैबसाईट का बेकप लेकर उसे दूसरे होस्ट की खाली वेबसाईट पर इम्पोर्ट करना पड़ता है। इसके लिए उसे नए होस्ट में अपना अकाऊंट बनाना होता है।

वैबसाईट को एक्सपोर्ट करना

पर्सनल प्लान में वैबसाईट का फुल बेकप नहीं बना सकते। पर उसको एक्सपोर्ट कर सकते हैं। सेटिंग के अंतर्गत एक बटन (कस्टमाईजर बटन) होता है। उस पर क्लिक करने से सारा टेक्स्ट कंटेंट एक जिप्ड फोल्डर के रूप में आ जाएगा, जिसे वहीँ पर डाऊनलोड किया जा सकता है। ईमेल पर भी वह आ जाता है, जो वहां 7 दिन तक के लिए रहता है। उसमें मीडिया और अपलोडीड डॉकुमेंट नहीं होते। उसके लिए साथ ही में एक्सपोर्ट मीडिया का एक दूसरा बटन होता है। वैसे तो पेमेंट वाली सभी वैबसाईट्स बहुत सुरक्षित रखी जाती हैं। फिर भी यदि कुछ अनहोनी घटना हो जाए, तो उस एक्सपोर्ट फाईल से हम वैबसाईट को पुनः प्राप्त कर सकते हैं। यद्यपि थीम व वैबसाईट कस्टमाईजेशन नए सिरे से करनी पड़ती है, क्योंकि इसमें कस्टमाईजेशन का बेकप नहीं हो पाता। इसलिए एक्सपोर्ट फाईल को क्लाऊड में, हार्ड डिस्क में आदि कई स्थानों में संभाल कर रखना चाहिए।

वैबसाईट की सुरक्षा के अन्य तरीके

इसके लिए एक और ऑफलाइन तरीका है। अपने वैबसाईट के पेजस की एक इ-बुक बनाओ, और उसे केडीपी पर सेल्फ पब्लिश कर लो। 10000 शब्दों से शुरू कर सकते हो। उसकी कोपी भी क्लाऊड पर स्टोर कर लो। सबसे सुरक्षित तरीका है। आप बोलोगे कि जो हर हफ्ते आप पोस्ट छापते हो, वह कैसे इ-बुक में आएगी। इसके लिए पोस्टों को इकटठा करके आप एक और ई-बुक बना लो, और उसे पब्लिश कर दो। हर हफ्ते की पोस्ट आप उसमें एड करते रहो, और केडीपी पर अपलोड करते रहो। बन गई न बात। आपकी वैबसाईट और पुस्तक, दोनों एक साथ ग्रो करेंगे।

एक और सबसे कारगर तरीका बताता हूँ। ई-दुनिया इतनी स्थिर नहीं है, जितनी कागजी दुनिया। जब ई-दुनिया संकट में आएगी, उस समय भी कागजी दुनिया घर के कोने में पड़े संदूकों में सही-सलामत रहेगी। आप प्रिंट ओन डिमांड की सहायता से अपनी उपरोक्त ई-पुस्तकों की प्रिंट पुस्तकें बनाकर संभाल कर रख लो। इसमें पब्लिशिंग का खर्चा भी नहीं लगेगा। केवल कुछ थोड़े से कमीशन के साथ कागज़ व बाइंडिंग की कीमत ही चुकानी होगी। जरूरत पड़ने पर इन कागजी पुस्तकों से आप ओसीआर की मदद से टेक्स्ट फाईल पुनः बना सकते हो। इससे आप अपनी वैबसाईट स्क्रेच से पुनः व आसानी से खड़ी कर सकते हो।

उपरोक्त तरीके से ही मेरी निम्नलिखित पुस्तकें मेरी इसी वैबसाईट से बनी हैं-

1) कुण्डलिनी विज्ञान- एक आध्यात्मिक मनोविज्ञान

2) ई-रीडर पर मेरी वैबसाईट

एक पुस्तक तो मेरी क्वोरा पोस्ट से भी बनी है, जिसका नाम है, “कुण्डलिनी रहस्योद्घाटित- प्रेमयोगी वज्र क्या कहता है”।

  Please click on this link to view this post in English (Website creation, management and development, part-12)

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demystifyingkundalini by Premyogi vajra- प्रेमयोगी वज्र-कृत कुण्डलिनी-रहस्योद्घाटन

I am as natural as air and water. I take in hand whatever is there to work hard and make a merry. I am fond of Yoga, Tantra, Music and Cinema. मैं हवा और पानी की तरह प्राकृतिक हूं। मैं कड़ी मेहनत करने और रंगरलियाँ मनाने के लिए जो कुछ भी काम देखता हूँ, उसे हाथ में ले लेता हूं। मुझे योग, तंत्र, संगीत और सिनेमा का शौक है।

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