कुंडलिनी के साथ चक्र-संतुलन संतुलित जीवन की कुंजी है, जिससे तनाव खुद ही घट जाता है

दोस्तों, आजकल जीवन बहुत संघर्षपूर्ण व स्पर्धात्मक हो गया है। रिश्तों की पेचीदगियां भी आजकल बहुत बढ़ गई हैं। ऐसे में दिमाग में बोझ का बढ़ जाना स्वाभाविक ही है। आज हम इस पर और कुंडलिनी की सहायता से इससे बचाव के ऊपर चर्चा करेंगे।

दिमाग का अनियंत्रित बोझ ही अधिकांश समस्याओं का मूल कारण है

दिमाग के अनियंत्रित बोझ से आदमी में बहुत से व्यावहारिक परिवर्तन आते हैं। वह चिड़चिड़ा व गुस्सैल बन जाता है। इससे उसका तनाव बढ़ जाता है। तनाव बढ़ने से उसकी कार्य करने की क्षमता घट जाती है, और वह विभिन्न रोगों का शिकार होने लग जाता है। इन सभी से उसका पारिवारिक, सामाजिक और व्यावसायिक जीवन गड़बड़ाने लग जाता है। उसकी साँसें भी रुकने सी लगती हैं, और अनियमित भी हो जाती हैं। इससे शरीर में ऑक्सीजन की कमी भी होने लगती है। 

चक्र साधना तनाव को कम करने में सहायक

सभी चक्रों का समान रूप से उपयोग न होने से प्राणशक्ति सभी चक्रों के बीच में बराबर मात्रा में विभक्त नहीँ हो पाती। इससे जिन चक्रों को जरूरत से ज्यादा प्राणशक्ति मिलती है, वे काम के बोझ से दुष्प्रभावित हो जाते हैं; और जिन चक्रों को जरूरत से कम प्राणशक्ति मिलती है, वे भी पर्याप्त काम न मिलने से दुष्प्रभावित हो जाते हैं। इसीलिए कहा जाता है कि योग से स्वास्थ्य लाभ मिलता है। वास्तव में सही ढंग से किए जाने वाले कुंडलिनी योग से सभी चक्र स्वस्थ व क्रियाशील बने रहते हैं। इससे जीवन संयमित व संतुलित बन जाता है। हमने अक्सर देखा है कि प्रकृति के बीच में काम करने वाले बुद्धिजीवी लोग आकर्षक व्यक्तित्व वाले होते हैं। उनकी जीवनशैली संतुलित होती है। इसका यही कारण है कि दिमाग के काम से उनके मस्तिष्क के चक्र स्वस्थ रहते हैं, और शारीरिक कार्यों से शरीर के अन्य चक्र। यदि वैसे लोग भी कुंडलिनी योग करेंगे तो उन्हें भी लाभ होगा, फिर आलस्यपूर्ण जीवनशैली वाले शहरी लोगों को भला क्योंकर नहीं होगा।

कुंडलिनी प्राणशक्ति के वाहक के रूप में काम करती है

प्राणशक्ति तो अदृश्य होती है। उसे तो हम आसानी से अनुभव भी नहीं कर सकते। फिर उसे चक्रों पर कैसे घुमाया जाएगा। वास्तव में, कुंडलिनी प्राणशक्ति के लिए एक हैन्डल का काम करती है। जहाँ भी कुंडलिनी जाती है, प्राणशक्ति वहाँ खुद चली जाती है। इसीलिए चक्रों पर केवल कुंडलिनी को ही घुमाया जाता है।

दिमाग के अनावश्यक बोझ को एकदम से कम करने वाला एक व्यावहारिक नुस्खा

जीभ को तालु के साथ सटा कर रखा जाता है। जीभ और तालु के संपर्क को ध्यान में रखा जाता है। मस्तिष्क में विचारों की हलचलों को यथावत चलने दें, और उन पर भी ध्यान बना कर रखें। शरीर के फ्रंट चैनल और बैक चैनल पर भी ध्यान बना कर रखें। यदि संभव हो तो सभी पर एकसाथ ध्यान बनाएं, अन्यथा ध्यान को एक-दूसरे पर शिफ्ट करते रहें। ऐसा करने पर कुंडलिनी अचानक मस्तिष्क में प्रकट हो जाएगी, और अन्य फालतू विचार धीमे पड़ जाएंगे। कुंडलिनी सभी चक्रों पर घूमते हुए आनन्द के साथ लगातार मस्तिष्क में बनी रहेगी, और मस्तिष्क का अनावश्यक बोझ भी कम हो जाएगा। बैक चैनल की कल्पना एक फन उठाए हुए शेषनाग के रूप में कर सकते हैं, जिसकी केंद्रीय रेखा पर कुंडलिनी चलती है। पेट से लंबे और गहरे साँस लेने से भी कुंडलिनी को चैनेल में चलने की शक्ति प्राप्त होती है। सीधे भी कुंडलिनी ध्यान को किसी विशेष चक्र पर केंद्रित किया जा सकता है, और साथ में यह भी ध्यान में रखा जा सकता है कि मस्तिष्क से उस चक्र तक फ्रंट चैनल के माध्यम से प्राणशक्ति स्वयं नीचे उतर जाएगी। इससे थोड़ी देर में ही मस्तिष्क की प्राणशक्ति भी उस चक्र पर पहुंच जाती है। उससे चक्र पर ऐंठन के साथ और आनन्द के साथ कुंडलिनी तेजी से चमकने लगती है। मस्तिष्क का बोझ एकदम से हल्का हो जाता है। यह ऐसे ही होता है जैसे कि इलेक्ट्रिक करेंट विद्युतचुम्बकीय तरँग के रूप में एकदम से लक्ष्य पर पहुंच जाता है, जबकि इलेक्ट्रॉनों को पहुंचने में ज्यादा समय लगता है।

चाय पीकर भूख को बढ़ाना

अक्सर देखा जाता है कि चाय पीकर भूख घट जाती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि चाय से प्राणशक्ति मस्तिष्क को चली जाती है। तभी तो चाय पीने के बाद दिमाग में रंग-बिरंगे विचार उमड़ने लगते हैं। इससे पाचनतंत्र में प्राणशक्ति की कमी हो जाती है। कई बार मैंने चाय से दिमाग में बढ़ी हुई प्राणशक्ति को कुंडलिनी योग के माध्यम से नीचे उतारा, और उसे विशेषकर नाभि चक्र पर स्थापित किया। उससे मेरी भूख अचानक से बढ़ गई। इसी तरह प्राणशक्ति को अन्य चक्रों पर भी केंद्रित किया जा सकता है। इसे हम चाय योगा कह सकते हैं। इससे सिद्ध होता है कि हम कुण्डलिनी योग के माध्यम से अपने शरीर की बहुत सी चयापचय क्रियाओं को नियंत्रित कर सकते हैं।

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demystifyingkundalini by Premyogi vajra- प्रेमयोगी वज्र-कृत कुण्डलिनी-रहस्योद्घाटन

I am as natural as air and water. I take in hand whatever is there to work hard and make a merry. I am fond of Yoga, Tantra, Music and Cinema. मैं हवा और पानी की तरह प्राकृतिक हूं। मैं कड़ी मेहनत करने और रंगरलियाँ मनाने के लिए जो कुछ भी काम देखता हूँ, उसे हाथ में ले लेता हूं। मुझे योग, तंत्र, संगीत और सिनेमा का शौक है।

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