Identifying Kundalini image- कुण्डलिनी छवि को पहचानना

Nondual Tantra helps to identify and subsequently enrich the mental Kundalini image.

Most of the people even many Yogis do not know how to identify a suitable mental image as a kundalini/life-boat to cross over, inside the vast ocean of their mental formations and subsequently to give initial boost to her in their mind, before the proper sitting meditation.

Actually, everybody has most preferred image inside their mind but that is obscured due to their duality/attachment filled lifestyle. One has to take support of non duality for some time to make that image prominent. Non duality should be adopted along with a fully functional worldly life, not a sedentary one. One would see then that the most preferred mental image would come to the surface and would roam his mind regularly, the image having a strength/expression proportionate to the intensity of the non duality. In this way, one would identify and mark his kundalini image. He would then start the sitting meditation twice a day regularly, in which he would concentrate on that selected kundalini image on his various body Chakras. He would succeed soon then. Kundalini image should be preferably a personified image. It can be a mental image of a Guru/teacher/friend/grandfather/lover/devata. Most preferred mental image is that of a person who is a loving and friendly too. Image of god or passed one is preferred for concentrating on the image of a living being may produce changes in the life of that living being likewise, although it rarely happens for one’s outer appearance is always different than his inner or real appearance. In fact, one should listen to his mind and decide likewise. Many of the Boddhaas are great meditating beings. They select their kundalini image as early as in their childhood and keep on concentrating on her for their lifetime. For practical and real time detail, Love story of a yogi can be followed.

Not selecting a correct kundalini image or not selecting at all appears one of the reason due to which many of the kundalini yogis do no succeed.

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अद्वैत तंत्र से मानसिक कुंडलिनी छवि को पहचानने और फिर उसे समृद्ध करने में मदद मिलती है।

अधिकांश लोग और यहाँ तक कि कई योगी भी नहीं जानते हैं कि एक उपयुक्त मानसिक छवि को कुंडलिनी / जीवनरक्षक नाव के रूप में कैसे परिवर्धित किया जाए, जिससे चित्र-विचित्र मानसिक संरचनाओं के विशाल महासागर को पार किया जाए, और फिर बैठकपूर्ण योगसाधना से पहले उसे किस तरह से प्रारंभिक बढ़ावा दिया जाए।

दरअसल, हर किसी के मन में सबसे पसंदीदा छवि अवश्य होती है लेकिन वह उनकी द्वैतपूर्ण / अनासक्तिपूर्ण जीवनशैली के कारण अस्पष्ट रहती है। उस छवि को प्रमुख रूप से स्पष्ट बनाने के लिए व्यक्ति को कुछ समय के लिए अद्वैत का समर्थन करना पड़ता है। अद्वैत को पूर्णरूप के कार्यात्मक सांसारिक जीवन के साथ अपनाया जाना चाहिए, न कि एक निष्कर्मक / निठल्ले जीवन के साथ, तभी अद्वैत का पूर्ण लाभ मिलता है। ऐसा करने पर हम देखेंगे कि हमारी सबसे पसंदीदा मानसिक छवि सतह पर आ जाएगी और नियमित रूप से हमारे दिमाग में घूमने लगेगी। उस छवि की स्पष्टता / अभिव्यक्ति / तीव्रता हमारे द्वारा अपनाए गए अद्वैत की तीव्रता के समानान्तर / अनुरूप होगी। इस तरह, एक व्यक्ति अपनी कुंडलिनी छवि को पहचान कर उसे चिन्हित कर पाएगा। फिर वह नियमित रूप से दिन में दो बार बैठकमय साधना / सिटिंग मेडिटेशन का अभ्यास शुरू करेगा, जिसमें वह अपने विभिन्न शरीर-चक्रों पर विराजमान उस चयनित कुंडलिनीछवि पर ध्यान केंद्रित करेगा। वह जल्द ही सफल हो जाएगा। कुंडलिनी छवि अधिमानतः एक प्रिय व्यक्तित्व की छवि होनी चाहिए। वह एक गुरु / शिक्षक / दोस्त / दादा / प्रेमी / देवता आदि, किसी की भी मानसिक छवि हो सकती है। सबसे पसंदीदा मानसिक छवि उस व्यक्ति की बनी होती है, जो एक प्रेमपूर्ण तरीके से मित्रवत व्यवहार करता है। ध्यान केंद्रित करने के लिए ईश्वर की छवि या स्वर्गारोहित व्यक्ति / अधिमानतः पूर्वज  की छवि को प्राथमिकता दी जाती है, क्योंकि सैद्धांतिक रूप से जीवित व्यक्ति की छवि पर ध्यान लगाने से उसके जीवन में ध्यानानुसार परिवर्तन उत्पन्न हो सकता है, हालांकि यह शायद ही कभी होता हो, क्योंकि किसी का बाहरी स्वरूप हमेशा ही उसके भीतर के या वास्तविक स्वरूप से अलग होता है। वास्तव में, किसी भी व्यक्ति को अपने दिमाग का सुनना चाहिए, और उसके अनुसार ही शुभ फैसला लेना चाहिए। बोद्धों में से कई लोग महान ध्यानयोगी होते हैं। वे अपने बचपन में ही अपनी कुंडलिनी छवि का चयन कर लेते हैं, और अपने पूरे जीवनभर उसके ऊपर ध्यान केंद्रित करते रहते हैं। इससे सम्बंधित व्यावहारिक और वास्तविक समय के पूर्ण ज्ञान के लिए, इस वेबसाईट पर प्रस्तुत सत्यकथा ” एक योगी की प्रेमकथा” /  Love story of a yogi का अनुपालन किया जा सकता है।

एक सही कुंडलिनी छवि का चयन नहीं करना या बिल्कुल चयन नहीं करना एक मुख्य कारण है, जिससे कुंडलिनी योगी सफल नहीं हो पाते हैं।

Tantralaya in place of Vaishyalaya/वैश्यालय के स्थान पर तंत्रालय

Prostitute centres/vaishyalaya should be socialised and channelized/transformed into the spiritual/kundalini realm with help of tantra, just as the household sexual activities are transformed by it. In this way, number one misconduct would become as a number one kundalini uplifting machine. Honor of woman would also be saved, she being appearing as tantra-godess in this way. With help of the present time health screening and health check ups, tantra yoga would become fully safe unlike that in old times when diseases used to spread to each others during such tantric feasts. There should be appointed well qualified tantric gurus in those community tantra centres. Illegal sexual relationships with accompanied crimes would automatically come down. Many psychological diseases due to restricted sexuality would come down. There would be done nothing additional to the present scenario but the proustite centres already existing would be transformed only.

वेश्यालय केंद्र / वैश्यालय को सामाजिक सहायता और चैनलिंग की मदद से आध्यात्मिक / कुंडलिनी क्षेत्र में परिवर्तित / रूपांतरित किया जाना चाहिए, जैसे कि घरेलू यौन गतिविधियों को इसके द्वारा बदल दिया जा सकता है। इस तरह, नंबर एक दुर्व्यवहार एक कुंडलिनी उत्थान मशीन के रूप में बन जाएगा। महिला का सम्मान भी बचाया जाएगा, वह इस तरह से तंत्र-देवी के रूप में दिखाई देगी। वर्तमान समय में स्वास्थ्य जांच और स्वास्थ्य जांच की सहायता से, तंत्र योग उस पुराने समय की अपेक्षा पूरी तरह से सुरक्षित हो जाएगा, जब यौनसंबंध बीमारियों को एक दूसरे के बीच में फैलाता था। उन समुदाय-तंत्र-केंद्रों में अच्छी तरह से योग्य तांत्रिक गुरु नियुक्त किया जाना चाहिए। इसके साथ ही अपराधों के साथ अवैध यौन संबंध नीचे आ जाएंगे। प्रतिबंधित कामुकता के कारण होने वाले कई मनोवैज्ञानिक रोग नीचे आ जाएंगे। वर्तमान परिदृश्य के लिए कुछ भी अतिरिक्त नहीं किया जाएगा, लेकिन पहले से मौजूद वैश्यावृत्ति-केंद्र केवल तब्दील हो जाएंगे।

 

Tantric Guru and tantric consort- तांत्रिक गुरु और तांत्रिक प्रेमिका

The permanent stationing of guru inside one’s mind is best achieved through sexual tantra, just as happened with Premyogi vajra as described on Home-2 webpage. His first exposure with his sexual consort(non marital)/Queen during he being in loving company of his guru(the same spiritual old man) was pure mental/one time indirect initiation/indirect tantra based as told in detail on webpages, love story of a yogi, scattered throughout. Therein queen was as if his activated kundalini and was led through the wonderful/too rich romantic lures in his mind to his enlightenment in too short time of 2 years by the spontaneous grace of his pauranic(who reads puranas/collections of ancient Indian spiritual stories in Sanskrit, daily) guru’s company, even without her awakening. On second occasion, his that and then demised physical guru’s mental image as his second kundalini was enriched too much with his non dual life style and that image’s connection with the repeatedly remembered image of the first consort(indirectly sexual) in about 15 years. Then in the last, Premyogi vajra lifted up that kundalini to  her awakening with the help of the direct sexual tantra with his second consort(marital), as described on the same homepage in brief and love story of a yogi-7 in detail.

मन के अन्दर गुरु के स्थायी रख-रखाव को यौन तंत्र के माध्यम से सबसे अच्छी तरह से हासिल किया जा सकता है, जैसा कि होम -2 वेबपृष्ठ पर वर्णित प्रेमयोगी वज्र के साथ हुआ था। अपनी प्रथम यौनप्रेमिका / प्रथम देवीरानी (अविवाहित) से संपर्क में रहने के दौरान वह अपने गुरु (वही आध्यात्मिक बूढ़े आदमी) की निरंतर प्रेमपूर्ण संगति में भी बना हुआ था। प्रथम देवीरानी के साथ वह संपर्क शुद्ध मानसिक / एकबार के अप्रत्यक्ष तांत्रिक प्रारम्भ (इनिशिएशन) / अप्रत्यक्षतंत्र से प्रेरित था। यह सारा वर्णन वेबपेजिस “love story of a yogi” पर किया गया है। वही देवीरानी उसकी सक्रिय कुंडलिनी के रूप में थी, और उसके दिमाग में उसके उपरोक्त पौराणिक गुरु द्वारा पढ़ी गई कथाओं की सहज कृपा से अत्यद्भुत / बहुत ही समृद्ध रोमांटिक लालचों के माध्यम से, 2 वर्षों के बहुत कम समय में उसके आत्मज्ञान के लिए चरम मानसिक अभिव्यक्ति तक ले जाई गई, उन्हीं गुरु की संगति से, जो प्रतिदिन प्राचीन भारतीय आध्यात्मिक कहानियों के संग्रह / पुराण पढ़ा करते थे, उस कुण्डलिनी की सैद्धांतिक जागृति के बिना ही। दूसरे मौके पर, उन्होंने अपनी दूसरी कुंडलिनी के रूप में अपने उन्हीं भौतिक गुरु की मानसिक छवि को अपनी अद्वैतपूर्ण जीवन शैली के साथ समृद्ध किया, और पहली देवीरानी (परोक्ष रूप से यौनसम्बन्धी) की बार-बार याद की गई छवि के साथ अपने गुरु की छवि का संबंध जुड़ा होने के कारण, गुरु की छवि भी काफी समृद्ध हो गई, लगभग 15 वर्षों में। फिर आखिर में, प्रेमयोगी वज्र ने अपनी दूसरी कंसोर्ट / प्रेमिका (वैवाहिक) के साथ सीधे / प्रत्यक्ष यौनतंत्र की मदद से अंतिम जागृति के लिए उस कुंडलिनी को उठाया, जैसा कि उपरोक्त होमपेज पर ही संक्षेप में और “love story of a yogi-7” में विस्तार से वर्णित है।

 

SHAVID versus Taoism- शविद और ताओवाद

SHAVID(shareervigyaan darshan/body science philosophy- SHAVID-Shareeravigyaan darshan/Body science philosophy) may be termed as the theistic Taoism for it also incorporates God inside it, although not in a religious way. This aids up in the quick spiritual growth just as Patanjali has also pointed out that a Proper belief in God reinforcers the yogic practices.

शविद और ताओवाद

शविद (शरीरविज्ञान दर्शन) को ईश्वरवादी ताओवाद भी कहा जा सकता है, क्योंकि इसमें भगवान को भी शामिल किया जाता है, हालांकि धार्मिक तरीके से नहीं। यह त्वरित आध्यात्मिक विकास में सहायता करता है, जैसे कि पतंजलि ने भी बताया है कि भगवान में उचित विश्वास योगाभ्यास-क्रियाओं को मजबूत करता है।

Is vegetarianism must for awakening- क्या आत्मजागरण के लिए शाकाहारी होना जरूरी है

Many people ask me such questions if they should continue or leave the non veg  to get awakened. Actually it’s not the non vegetarianism that is harmful but mental attitude adopted with that. This is tantra if attitude is nondual. You can read  Understanding non duality. Panchmakaras ie. Five Ms of tantra including the non vegetarianism are the most powerful source of mental energy. That energy if directed with the nondual attitude to the kundalini, then awaken her, otherwise bury her further deep. Nondual attitude demands a balance in life and likewise makes a life balanced too if adopted. So then a man with it uses the non veg as per his minimum body needs and not as per his two inches long tongue only.

क्या आत्मजागरण के लिए शाकाहारी होना जरूरी है

बहुत से लोग मुझसे ऐसे प्रश्न पूछते हैं कि क्या उन्हें जागृत होने के लिए नॉनवेज / मांसाहार को जारी रखना चाहिए या छोड़ देना चाहिए। दरअसल यह मांसाहार नहीं है, जो अधिक हानिकारक है, अपितु यह मानसिक द्वैत-दृष्टिकोण है, जो खराब है। यदि इसके साथ रवैया अद्वैतात्मक है, तब यह तंत्र है। आप अद्वैत को समझना चाहते हैं, तो इस पूर्वोक्त लिंक पर पढ़ सकते हैं। पंचमाकर यानी मांसाहार समेत तंत्र के पांच एम मानसिक ऊर्जा के सबसे शक्तिशाली स्रोत हैं। उनसे उद्भूत वह प्रचंड मानसिक ऊर्जा अगर अद्वैतपूर्ण दृष्टिकोण के साथ कुंडलिनी के ऊपर निर्देशित होती है, तो उसे जागृत कर देती है, अन्यथा उसे और अधिक गहराई में दफन कर देती है। अद्वैतपूर्ण रवैया जीवन में संतुलन की मांग करता है, और इसी तरह वह जीवन को भी संतुलित बना देता है, यदि उसे अपनाया जाए। इसलिए उस अद्वैतपूर्ण-दृष्टिकोण के साथ एक आदमी अपने शरीर की न्यूनतम जरूरतों के अनुसार ही आमिषाहार का उपयोग करता है, न कि केवल दो इंच की लंबी अपनी जीभ के अनुसार।

Women is revered in tantra- महिलाओं को तन्त्र में पूजित किया जाता है

There is a misbelief that in the tantra, woman is exploited and used as a toy to work for the spiritual uplifting of a man (Woman in Tantra). Actually in tantra a man becomes fully sage like in every respect. Can a sage even think of exploiting anyone? Taoism also recommends for a sage to be a sexual sage, not a simple sage due to the same reason. Actually, religiously extremist people who misused tantric powers for the inhumane practices, they exploited the woman violently but the blame came to the real tantra.

महिलाओं को तन्त्र में पूजित किया जाता है

एक मिथ्या विश्वास है कि तंत्र में महिला का शोषण किया जाता है, और एक पुरुष के आध्यात्मिक उत्थान (तंत्र में महिला) के लिए उसका एक खिलौने के रूप में उपयोग किया जाता है। असल में तंत्र में एक आदमी पूरी तरह से ऋषि के समान बन जाता है। क्या ऋषि किसी का भी शोषण करने के बारे में कभी सोच भी सकता है? ताओवाद भी ऋषि के लिए एक यौन-क्रियाशील ऋषि बनने की सिफारिश करता है, एक साधारण ऋषि बनने की नहीं। असल में, धार्मिक रूप से चरमपंथी लोग, जिन्होंने अमानवीय प्रथाओं के लिए तांत्रिक शक्तियों का दुरुपयोग किया, उन्होंने ही महिला का हिंसक तरीके से शोषण किया, लेकिन दोष वास्तविक तंत्र के ऊपर आ गया।