BURNING RAVANA- DEEP SECRET HIDDEN INSIDE / रावण दहन- एक रहस्यात्मक प्रथा

It is Dushehara festival of Hindus / descendants of Aryans today. Ravana, a human-rascal of Ramayana-period is burnt on this day. Many people see it superficially and think that it is merely a ancient happening. However the truth is that it has deep meaning inside. I do not rule out the truth of the ancient story, but I see more truth in the collateral non dual- tantric message that it gives. Actually, the entire nature is present in the form of a beautiful woman. Whatever there is happening inside the body of a woman, that all is happening in a similar way inside the nature too, nothing else. It is a tantric and vedic truth thad has been further proved scientifically by Premyogi vajra in his tantric book, Shareeravigyaan darshan. Ignorant people exploit this nature in a bad manner and with a bad attitude. God Rama always in union with his nature can not tolerate this and thus never allow such people to gain self realization to enter his abode. Therefore such people are burnt by physical fire on there demise for they being deeply identified with their physical bodies. So the message is clear that love the nature and its creatures. The entire Aryan civilization is based on this fundamental guideline. God can never be approached directly without satisfying his nature. It is a deep tantric secret that also demystifies Kundalini more or less. That is why nature-worship is so much abundant in Aryan lifestyle. Today, the world is in great danger. The nature has been over exploited by the human. The result of it is global warming. If it continues, there would be disasters in every field of life. Beautiful Venice city would be submerged fully inside the ocean. So all the coastal areas. Therefore it is right time now to adopt Aryan practices and to worship the nature like those. May be the nature along with her consort, God become pleased and give us the right direction to follow, and also dilute down the disasters little or more.

The ancient story that Ravana had stolen Seetaa, the wife of Lord Rama is a metaphor type. The one disrespecting woman or nature can not please the God. Hanuman, the monkey god and servant of Seetaa is the metaphor of creatures inside the nature. He helped god Rama means that all creatures except of willfully ignorant human beings are innocents. Rama took help of Hanuman to save Seetaa means that when nature is exploited by human, then invisible God makes the other creatures outnumbered thus creating problems for selfish human beings. In this way, God teaches a good lesson to human and so he starts saving the nature. It is entirely similarly seen today, what was happening there thousands of years ago, in the Ramayana-age .

So very-2 happy Dushehara to all of you.

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आज आर्यों के वंशजों / हिन्दुओं  का त्यौहार दशहरा है। रावण, रामायण काल ​​का मानव-राक्षस इस दिन जला दिया जाता है। बहुत से लोग इसे सतही रूप से देखते हैं, और सोचते हैं कि यह केवल एक प्राचीन घटना है। हालांकि सच यह है कि इसमें गहरा अर्थ छुपा हुआ है। मैं प्राचीन कहानी की सच्चाई से इंकार नहीं करता हूं, लेकिन मैं इसे संपार्श्विक अद्वैत-तंत्र के उस संदेश के रूप में अधिक सत्य देखता हूं, जो यह देता है। असल में, पूरी प्रकृति एक सुंदर महिला के रूप में मौजूद है। किसी भी महिला के शरीर में जो भी हो रहा है, वह सब प्रकृति के अंदर भी इसी तरह से हो रहा है, और कुछ नहीं। यह एक तांत्रिक और वैदिक सत्य है, जिसे प्रेमयोगी वज्र ने अपनी तांत्रिक पुस्तक, शरीरविज्ञान दर्शन में वैज्ञानिक रूप से बखूबी साबित कर दिया है। अज्ञानी लोग इस प्रकृति का खराब तरीके से और बुरे व्यवहार के साथ शोषण करते हैं। भगवान राम जो हमेशा अपनी प्रकृति के साथ मिलकर रहते हैं, वे इसे बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं, और इस तरह ऐसे लोगों को कभी भी अपने निवास में प्रवेश करने के लिए आत्मज्ञान प्राप्त करने की इजाजत नहीं देते हैं। इसलिए ऐसे लोगों को अंत में भौतिक आग से जला दिया जाता है, क्योंकि वे अपने भौतिक निकायों / शरीरों के साथ गहराई से / आसक्ति से चिपके होते हैं। तो संदेश स्पष्ट है कि प्रकृति और उसके प्राणियों से प्यार करना चाहिए। संपूर्ण आर्य सभ्यता इस मौलिक दिशानिर्देश पर ही आधारित है। भगवान को उनकी प्रकृति को संतुष्ट किए बिना, सीधे प्राप्त नहीं किया जा सकता है। यह एक गहरा तांत्रिक रहस्य है, जो कुण्डलिनी को भी रहस्योद्घाटित करता है। यही कारण है कि आर्य जीवनशैली में प्रकृति-पूजा इतनी प्रचुर मात्रा में है। आज दुनिया बहुत खतरे में है। प्रकृति का मानव द्वारा शोषण किया गया है। इसका परिणाम ग्लोबल वार्मिंग है। यदि यह जारी रहता है, तो जीवन के हर क्षेत्र में आपदाएं होंगी। सुंदर वेनिस शहर समुद्र के अंदर पूरी तरह से डूब जाएगा। सभी तटीय क्षेत्रों के साथ ऐसा ही होगा। इसलिए आर्यन प्रथाओं को अपनाने और उनकी तरह प्रकृति की पूजा करने के लिए यह सही समय है। हो सकता है कि प्रकृति व उसके सदैव साथ रहने वाले उसके प्रेमी, भगवान प्रसन्न हो जाएं, और हमें प्रकृति को बचाने में सही दिशा-निर्देशन प्रदान करें, और आपदाओं से भी थोड़ी राहत दे दें।

प्राचीन कहानी कि रावण ने भगवान राम की पत्नी सीता को चुरा लिया था, एक रूपक प्रकार की है। जो महिला या प्रकृति का अपमान करता है, वह भगवान को  प्रसन्न नहीं कर सकता है। हनुमान, बंदर-देवता और सीता का नौकर, प्रकृति के भीतर प्राणियों का रूपक है। उसने भगवान राम की मदद की, इसका अर्थ है कि जानबूझकर अनजान बने मनुष्यों को छोड़कर सभी प्राणी निर्दोष हैं। राम ने सीता को बचाने के लिए हनुमान की मदद ली, इसका मतलब है कि जब मनुष्य द्वारा प्रकृति का शोषण किया जाता है, तो अदृश्य भगवान अन्य प्राणियों को अधिक से अधिक बनाता है, जिससे स्वाभाविक ही मनुष्यों के लिए अधिक से अधिक समस्याएं पैदा हो जाती हैं। उसे उससे अच्छा सबक मिलता है, और वह प्रकृति को बचाने लग जाता है। यह पूरी तरह से आज भी वैसा ही देखा जा रहा है, जैसा कि हजारों साल पूर्व के रामायण-काल में घटित हो रहा था।

इसलिए आप सभी को दशहरे की हार्दिक शुभकामनाएं।

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Identifying Kundalini image- कुण्डलिनी छवि को पहचानना

Nondual Tantra helps to identify and subsequently enrich the mental Kundalini image.

Most of the people even many Yogis do not know how to identify a suitable mental image as a kundalini/life-boat to cross over, inside the vast ocean of their mental formations and subsequently to give initial boost to her in their mind, before the proper sitting meditation.

Actually, everybody has most preferred image inside their mind but that is obscured due to their duality/attachment filled lifestyle. One has to take support of non duality for some time to make that image prominent. Non duality should be adopted along with a fully functional worldly life, not a sedentary one. One would see then that the most preferred mental image would come to the surface and would roam his mind regularly, the image having a strength/expression proportionate to the intensity of the non duality. In this way, one would identify and mark his kundalini image. He would then start the sitting meditation twice a day regularly, in which he would concentrate on that selected kundalini image on his various body Chakras. He would succeed soon then. Kundalini image should be preferably a personified image. It can be a mental image of a Guru/teacher/friend/grandfather/lover/devata. Most preferred mental image is that of a person who is a loving and friendly too. Image of god or passed one is preferred for concentrating on the image of a living being may produce changes in the life of that living being likewise, although it rarely happens for one’s outer appearance is always different than his inner or real appearance. In fact, one should listen to his mind and decide likewise. Many of the Boddhaas are great meditating beings. They select their kundalini image as early as in their childhood and keep on concentrating on her for their lifetime. For practical and real time detail, Love story of a yogi can be followed.

Not selecting a correct kundalini image or not selecting at all appears one of the reason due to which many of the kundalini yogis do no succeed.

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अद्वैत तंत्र से मानसिक कुंडलिनी छवि को पहचानने और फिर उसे समृद्ध करने में मदद मिलती है।

अधिकांश लोग और यहाँ तक कि कई योगी भी नहीं जानते हैं कि एक उपयुक्त मानसिक छवि को कुंडलिनी / जीवनरक्षक नाव के रूप में कैसे परिवर्धित किया जाए, जिससे चित्र-विचित्र मानसिक संरचनाओं के विशाल महासागर को पार किया जाए, और फिर बैठकपूर्ण योगसाधना से पहले उसे किस तरह से प्रारंभिक बढ़ावा दिया जाए।

दरअसल, हर किसी के मन में सबसे पसंदीदा छवि अवश्य होती है लेकिन वह उनकी द्वैतपूर्ण / अनासक्तिपूर्ण जीवनशैली के कारण अस्पष्ट रहती है। उस छवि को प्रमुख रूप से स्पष्ट बनाने के लिए व्यक्ति को कुछ समय के लिए अद्वैत का समर्थन करना पड़ता है। अद्वैत को पूर्णरूप के कार्यात्मक सांसारिक जीवन के साथ अपनाया जाना चाहिए, न कि एक निष्कर्मक / निठल्ले जीवन के साथ, तभी अद्वैत का पूर्ण लाभ मिलता है। ऐसा करने पर हम देखेंगे कि हमारी सबसे पसंदीदा मानसिक छवि सतह पर आ जाएगी और नियमित रूप से हमारे दिमाग में घूमने लगेगी। उस छवि की स्पष्टता / अभिव्यक्ति / तीव्रता हमारे द्वारा अपनाए गए अद्वैत की तीव्रता के समानान्तर / अनुरूप होगी। इस तरह, एक व्यक्ति अपनी कुंडलिनी छवि को पहचान कर उसे चिन्हित कर पाएगा। फिर वह नियमित रूप से दिन में दो बार बैठकमय साधना / सिटिंग मेडिटेशन का अभ्यास शुरू करेगा, जिसमें वह अपने विभिन्न शरीर-चक्रों पर विराजमान उस चयनित कुंडलिनीछवि पर ध्यान केंद्रित करेगा। वह जल्द ही सफल हो जाएगा। कुंडलिनी छवि अधिमानतः एक प्रिय व्यक्तित्व की छवि होनी चाहिए। वह एक गुरु / शिक्षक / दोस्त / दादा / प्रेमी / देवता आदि, किसी की भी मानसिक छवि हो सकती है। सबसे पसंदीदा मानसिक छवि उस व्यक्ति की बनी होती है, जो एक प्रेमपूर्ण तरीके से मित्रवत व्यवहार करता है। ध्यान केंद्रित करने के लिए ईश्वर की छवि या स्वर्गारोहित व्यक्ति / अधिमानतः पूर्वज  की छवि को प्राथमिकता दी जाती है, क्योंकि सैद्धांतिक रूप से जीवित व्यक्ति की छवि पर ध्यान लगाने से उसके जीवन में ध्यानानुसार परिवर्तन उत्पन्न हो सकता है, हालांकि यह शायद ही कभी होता हो, क्योंकि किसी का बाहरी स्वरूप हमेशा ही उसके भीतर के या वास्तविक स्वरूप से अलग होता है। वास्तव में, किसी भी व्यक्ति को अपने दिमाग का सुनना चाहिए, और उसके अनुसार ही शुभ फैसला लेना चाहिए। बोद्धों में से कई लोग महान ध्यानयोगी होते हैं। वे अपने बचपन में ही अपनी कुंडलिनी छवि का चयन कर लेते हैं, और अपने पूरे जीवनभर उसके ऊपर ध्यान केंद्रित करते रहते हैं। इससे सम्बंधित व्यावहारिक और वास्तविक समय के पूर्ण ज्ञान के लिए, इस वेबसाईट पर प्रस्तुत सत्यकथा ” एक योगी की प्रेमकथा” /  Love story of a yogi का अनुपालन किया जा सकता है।

एक सही कुंडलिनी छवि का चयन नहीं करना या बिल्कुल चयन नहीं करना एक मुख्य कारण है, जिससे कुंडलिनी योगी सफल नहीं हो पाते हैं।

SHAVID versus Taoism- शविद और ताओवाद

SHAVID(shareervigyaan darshan/body science philosophy- SHAVID-Shareeravigyaan darshan/Body science philosophy) may be termed as the theistic Taoism for it also incorporates God inside it, although not in a religious way. This aids up in the quick spiritual growth just as Patanjali has also pointed out that a Proper belief in God reinforcers the yogic practices.

शविद और ताओवाद

शविद (शरीरविज्ञान दर्शन) को ईश्वरवादी ताओवाद भी कहा जा सकता है, क्योंकि इसमें भगवान को भी शामिल किया जाता है, हालांकि धार्मिक तरीके से नहीं। यह त्वरित आध्यात्मिक विकास में सहायता करता है, जैसे कि पतंजलि ने भी बताया है कि भगवान में उचित विश्वास योगाभ्यास-क्रियाओं को मजबूत करता है।

Is vegetarianism must for awakening- क्या आत्मजागरण के लिए शाकाहारी होना जरूरी है

Many people ask me such questions if they should continue or leave the non veg  to get awakened. Actually it’s not the non vegetarianism that is harmful but mental attitude adopted with that. This is tantra if attitude is nondual. You can read  Understanding non duality. Panchmakaras ie. Five Ms of tantra including the non vegetarianism are the most powerful source of mental energy. That energy if directed with the nondual attitude to the kundalini, then awaken her, otherwise bury her further deep. Nondual attitude demands a balance in life and likewise makes a life balanced too if adopted. So then a man with it uses the non veg as per his minimum body needs and not as per his two inches long tongue only.

क्या आत्मजागरण के लिए शाकाहारी होना जरूरी है

बहुत से लोग मुझसे ऐसे प्रश्न पूछते हैं कि क्या उन्हें जागृत होने के लिए नॉनवेज / मांसाहार को जारी रखना चाहिए या छोड़ देना चाहिए। दरअसल यह मांसाहार नहीं है, जो अधिक हानिकारक है, अपितु यह मानसिक द्वैत-दृष्टिकोण है, जो खराब है। यदि इसके साथ रवैया अद्वैतात्मक है, तब यह तंत्र है। आप अद्वैत को समझना चाहते हैं, तो इस पूर्वोक्त लिंक पर पढ़ सकते हैं। पंचमाकर यानी मांसाहार समेत तंत्र के पांच एम मानसिक ऊर्जा के सबसे शक्तिशाली स्रोत हैं। उनसे उद्भूत वह प्रचंड मानसिक ऊर्जा अगर अद्वैतपूर्ण दृष्टिकोण के साथ कुंडलिनी के ऊपर निर्देशित होती है, तो उसे जागृत कर देती है, अन्यथा उसे और अधिक गहराई में दफन कर देती है। अद्वैतपूर्ण रवैया जीवन में संतुलन की मांग करता है, और इसी तरह वह जीवन को भी संतुलित बना देता है, यदि उसे अपनाया जाए। इसलिए उस अद्वैतपूर्ण-दृष्टिकोण के साथ एक आदमी अपने शरीर की न्यूनतम जरूरतों के अनुसार ही आमिषाहार का उपयोग करता है, न कि केवल दो इंच की लंबी अपनी जीभ के अनुसार।

Women is revered in tantra- महिलाओं को तन्त्र में पूजित किया जाता है

There is a misbelief that in the tantra, woman is exploited and used as a toy to work for the spiritual uplifting of a man (Woman in Tantra). Actually in tantra a man becomes fully sage like in every respect. Can a sage even think of exploiting anyone? Taoism also recommends for a sage to be a sexual sage, not a simple sage due to the same reason. Actually, religiously extremist people who misused tantric powers for the inhumane practices, they exploited the woman violently but the blame came to the real tantra.

महिलाओं को तन्त्र में पूजित किया जाता है

एक मिथ्या विश्वास है कि तंत्र में महिला का शोषण किया जाता है, और एक पुरुष के आध्यात्मिक उत्थान (तंत्र में महिला) के लिए उसका एक खिलौने के रूप में उपयोग किया जाता है। असल में तंत्र में एक आदमी पूरी तरह से ऋषि के समान बन जाता है। क्या ऋषि किसी का भी शोषण करने के बारे में कभी सोच भी सकता है? ताओवाद भी ऋषि के लिए एक यौन-क्रियाशील ऋषि बनने की सिफारिश करता है, एक साधारण ऋषि बनने की नहीं। असल में, धार्मिक रूप से चरमपंथी लोग, जिन्होंने अमानवीय प्रथाओं के लिए तांत्रिक शक्तियों का दुरुपयोग किया, उन्होंने ही महिला का हिंसक तरीके से शोषण किया, लेकिन दोष वास्तविक तंत्र के ऊपर आ गया।

Non duality- अद्वैत

Only chanting non duality doesn’t solve any purpose but only wastes one’s time. All time non dual attitude is to be made for which Body science philosophy is best for our own body is nearest to us.

अद्वैत

केवल अद्वैत का जप करना किसी भी उद्देश्य को हल नहीं करता है, बल्कि केवल समय ही बर्बाद करता है। हर समय अद्वैत रवैया बना कर रखना पड़ता है, जिसके लिए शरीरविज्ञान दर्शन हमारे लिए सबसे अच्छा है, क्योंकि हमारा अपना शरीर ही हमारे सर्वाधिक निकट है।