आज के समय में ब्लॉग की प्रासंगिकता – Blog’s relevance in today’s time

आज के समय में ब्लॉग की प्रासंगिकता (please browse down or click here to view this post in English)

मसूद अजहर के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव पेश होने के एक दिन पहले ही न्यूयार्क टाईम्स में छपे एक लेख ने अंतर्राष्ट्रीय मीडिया के एजेंडे को फिर से उजागर कर दिया है। इसमें पुलवामा घटना पर एक विचित्र व तथ्यहीन लेख उजागर हुआ है। उस लेख के शीर्ष में ही उस हमले को आतंकवादी हमला नहीं, अपितु एक विस्फोट बताया गया है। विस्फोट तो दीपावली व क्रिसमस को पटाखों में किए जाते हैं। उनसे जान-माल की कोई हानि नहीं होती। परन्तु पुलवामा के आतंकवादी हमले में तो 40 से अधिक सैनिक शहीद हुए थे।

अंतर्राष्ट्रीय व प्रख्यात मीडिया हाऊसों द्वारा पूर्वाग्रहों से भरे हुए एजेंडे चलाना कोई नई बात नहीं है। ख़बरों को तोड़-मरोड़ कर अपने पक्ष में किया जाता है। मुझे क्वोरा टॉप राईटर-2018 का सम्मान मिला था। उसके साथ ही मुझे एक वर्ष के लिए न्यूयार्क टाईम्स का निःशुल्क सबसक्रिप्शन दिया गया था। मुझे उस पत्रिका की सामग्री जरा भी पसंद नहीं आई। मुझे उसकी भाषा भी विचित्र, बनावटी, बेमतलब के धूम-धड़ाके वाली, अहंकार से भरी हुई, व एजेंडे से भरी हुई लगी। मैंने उसे कुछ दिनों बाद ही अनसबसक्राईब कर दिया। मैंने अपने दोस्तों के सामने इच्छा जाहिर की कि उससे अच्छा क्वोरा वाले मुझे भागवत पुराण (एक धार्मिक ग्रन्थ) दे देते। न्यूयार्क टाईम्स को विश्व की प्रतिष्ठित पत्रिका माना जाता है। उसे बहुत से अवार्ड भी मिले हैं।

पहले भी इस पत्रिका में एक भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिक को एक गाय के साथ अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष-समुदाय के कक्ष में प्रविष्ट होते हुए दिखाया गया था। एक बार एक भारतीय रेलगाड़ी को हाथी के द्वारा खींचते हुए दिखाया गया था। भारत को सपेरों व जादूगरों का देश कहा जाता है। इसे योगियों का देश भी तो कहा जा सकता है। नकारात्मक ही क्यों? भारत के अपने अन्दर ही बहुत से नकारात्मक लोग बैठे हैं। उन्हीं की देखा-देखी में विदेशी मीडिया भी वैसा ही रुख अपनाने लगता है। हंसते हुए व जोक में तो कुछ भी कहा जा सकता है। परन्तु जोक का अलग ही तरीका होता है। उससे मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध बढ़ते हैं, घटते नहीं। उससे हीनता की भावना नहीं उत्पन्न होती, अपितु गर्व के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। यदि नकारात्मक पक्ष ही बार-बार दोहराया जाता रहे, तब तो उसे जोक नहीं कह सकते।

इसके विपरीत, ब्लॉग में कोई एजेंडा नहीं होता। इसमें एक व्यक्तिगत राय होती है। अधिकाँश ब्लोगर व्यावसायिक भी नहीं होते। इसलिए वे अपने प्रचार की अंधी दौड़ में शामिल नहीं होते। पत्रिकाएँ तो अपने प्रचार के लिए कुछ भी कुत्सित हथकंडा अपना सकती हैं। ये जनता के मन को दूषित कर सकती हैं। लोगों का इन पर अँधा विश्वास होता है। वे न चाहकर भी उन पर पूरा यकीन कर लेते हैं। इसका एक कारण यह भी है कि पत्रिकाओं को वे पैसा चुका कर खरीदते हैं। परन्तु ब्लॉग को कोई भी व्यक्ति ब्लोगर की निजी राय बताकर ठुकरा भी सकता है। साथ में, वह कमेन्ट में उसका तर्कों व प्रमाणों के साथ खंडन भी कर सकता है। इससे सभी का ज्ञान उत्तरोत्तर बढ़ता ही जाता है। पत्रिका के लेख को तो ना चाहकर भी स्वीकार करना ही पड़ता है, क्योंकि खंडन करने के लिए उसमें अवसर ही नहीं दिया गया होता है। ये तो इस प्रकार की बात हुई कि “आप हमारी बात मानो या न मानो, पर आपको माननी ही पड़ेगी”। साथ में, ब्लॉग ओनलाईन होता है, और उसे कभी भी एडिट या दुरस्त किया जा सकता है। इसके विपरीत, लाखों की संख्या में एकसाथ छपने वाली पत्रिकाओं के कारण, उन्हें दुरस्त करने का मौका ही नहीं मिलता। वे एकदम से लाखों ग्राहकों तक पहुँच जाती हैं। जब तक उनकी गलती को ठीक करते हुए हल्का सा जवाब बनाया जाता है, तब तक वे पाठकों पर अपना असर दिखा गई होती हैं। ओनलाईन मैगजीन में भी यही दिक्कत होती है।

उपरोक्त पुलवामा-लेख को लिखने वाले 7 लोग हैं। उनमें से 4 लोग तो भारत के ही हैं। उसमें हमलावर आतंकवादियों को नौजवान आत्मघाती कहा गया है। वह लेख आतंकवाद के चेहरे को जवानी के पीछे छुपाने की कोशिश कर रहा है। उन्हें ऐसे पक्षपाती मीडिया के द्वारा मिलिटेंट कहा जाता है, आतंकवादी नहीं। साथ में, बिना प्रमाण के यह कहा गया कि बालाकोट में भारतीय सेना का अभियान संभवतः असफल रहा, और केवल उससे भारतीय सेना को ही नुक्सान हुआ। तथ्य यह है कि पाकिस्तान ने बालाकोट में किसी को जांच ही नहीं करने दी। वहीं पर इटली की एक पत्रकार ने गुप्त सूत्रों के हवाले से बताया कि वहां से कम से कम 30-35 लाशों के बाहर निकलने की पक्की सूचना है। उनमें कई तो मुख्य आतंकवादी भी थे। साथ में, न्यूयार्क टाईम्स का वह लेख कहता है कि मोदी जी ने वह अभियान चुनावी-सफलता के लिए किया। वास्तविकता इसके विपरीत है। ऐसा लगता है कि पाकिस्तान ने मोदी को चुनाव में हराने के लिए ही पुलवामा में धार्मिक रंग से रंग हुआ आतंकवादी हमला करवाया। मोदी ने तो केवल जवाबी कार्यवाही ही की। मैं यह बात स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि मैं किसी राजनीतिक दल विशेष का पक्ष नहीं ले रहा हूँ। राजनीति में मेरी अधिक दिलचस्पी नहीं है। मैं केवल देश व सच्चाई का पक्ष ले रहा हूँ।

भारत के पास इसके सबूत हैं कि विंग कमांडर अभिनन्दन ने पाकिस्तान का f-16 लड़ाकू विमान गिराया, तब बहुत सी देशी-विदेशी पत्रिकाएँ यह दावा क्यों कर रही हैं कि f-16 को नहीं गिराया गया। यह हथियारों की अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों के पक्ष में दलाल मीडिया की तरफ से दुष्प्रचार नहीं, तो क्या है? पाकिस्तान तो इस मामले में झूठ ही बोलेगा, क्योंकि उसने अमरीका के साथ की हुई संधि को तोड़ा है। दुनिया उसकी बात पर कैसे विश्वास कर सकती है? झूठ, हिंसा, षडयंत्र व दुष्प्रचार फैलाने के मामले में तो पाकिस्तान को वैसे भी महारत हासिल है।

इस लेख के छपने के एक दिन बाद ही संयुक्त राष्ट्र में मसूद अजहर के खिलाफ लाया गया प्रस्ताव गिर गया। इसका अर्थ है कि दुनिया के बड़े देश आपस में पहले से ही मिले हुए थे। उन्होंने पहले लेख-पत्रिकाओं के माध्यम से आतंकवादियों के पक्ष में माहौल बनाया, जिससे मसूद अजहर को बचाने में अतिरिक्त सहयोग मिल गया। दुनिया के देश आतंकवाद के खिलाफ केवल जुबानी जंग ही लड़ते हैं। असली जंग तो भारत को खुद ही लड़नी होगी। और हाँ, दुर्भाग्य से न्यूजीलेंड में जो ताजा आतंकवादी हमला हुआ, उसे क्या बुद्धिजीवी लोग “भटके हुए लोगों द्वारा धांय-धांय” कह पाएंगे? आखिर आतंकवाद पर दोहरा मापदंड क्यों? यहां तक कि यह प्रतिशोध का मामला भी है। विश्व को यह देखना चाहिए कि आतंकवाद की शुरुआत किससे होती है, और फिर पहले उसे सुधारे।

हाल यह है कि दुर्भाग्य से कुछ दिनों पहले अमरीकी कंपनी बोईंग द्वारा निर्मित इथोपिया एयरलाईन्स का विमान क्रेश हुआ। उसमें 150 से अधिक लोग मारे गए। यह हादसा उसी सेंसर की खराबी की वजह से बताया जा रहा है, जिससे लगभग छः महीने पहले भी एक हादसा हुआ था। यदि समय रहते उसमें सुधार किया गया होता, तो इतने लोगों की जान बच जाती। लगता नहीं है कि न्यूयॉर्क टाईम्स ने इस सम्बन्ध में कोई कड़ा लेख लिखा होगा।

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Blog’s relevance in today’s time

A day before the resolution was to be proposed in the United Nations against Masood Azhar, an article in New York Times has rekindled the international media agenda. In this, a strange and fact less article has been exposed on the Pulwama incident. At the top of that article, the attack was not described as a terrorist attack, but an explosion. Deepawali and Christmas are celebrated with the explosions through the firecrackers. These do not have any harm to life and property. However, in Pulwama’s terrorist attack, more than 40 soldiers became martyred.

Running agendas filled with prejudices by international and eminent media houses is not new. The news is broken up in its favour. I got the honour of Quora Top writer-2018. Along with that, I was given a free subscription of New York Times for one year. I did not like the contents of that magazine. It appeared to me as filled with eccentricity, useless displaying, arrogance, and agenda. I unsubscribed it after a few days. I expressed my desire to my friends that it had been better if the Quora would give me a Bhagwat Puran (a religious text). The New York Times is considered as the world’s premier magazine. It has also received many awards.

Earlier in this magazine, an Indian space scientist was shown entering the room of the International Space-Community with a cow. Once an Indian train was shown as being dragged by an elephant. India is called the country of snake charmers and magicians. It can also be called a country of Yogis. Why negative? Many negative people are sitting within India itself. Seeing them, foreign media seems to adopt the same approach. Laughing and joke can be anything. However, there is a different way of Joke. These grow friendly relationships, do not decrease. It does not generate a sense of inferiority, but helps to be motivated to move forward with self-pride. If the negative side is repeated repeatedly, then it cannot be called as a Joke.

Conversely, the blog does not have any agenda. There is a personal opinion in it. Most of the bloggers are not professionals. Therefore, they do not participate in the blind race of their campaign. Magazines can do anything for the sake of their publicity. They can pollute the minds of the people. People have a blind faith on them. They do not escape from believing these completely. However, any person can even turn the blog down saying it as personal opinion of blogger. Together, a reader can also contradict a blog article with his comment. With this, knowledge of everyone increases progressively. Blog-articles can be edited or corrected at any time unlike the mass-published magazines. The article of the magazine has to be acknowledged even by one who does not want it, because there is no opportunity given to him for its refutation. Additionally, he has purchased it. It is such a thing that “you do not believe or think it, but you will have to believe it”. Magazines are published in millions of copies that are read by readers almost instantly. When a low voiced answer regarding its mistake arrives, till then it has imprinted its effect on the readers.

Seven people wrote the above pulwama-article. 4 of them are from India. In it, the attacking terrorists have been called as the youth suicide-killer. This article is trying to hide the face of terrorism behind youth. They are called militants by such biased media, not terrorists. Together, it was said without proof that the Indian Army’s campaign in Balakot could have been unsuccessful, and only the Indian Army itself was damaged. The fact is that Pakistan did not allow anyone to check in Balakot. On the other hand, a journalist from Italy told from the secret sources that at least 30-35 dead bodies have been confirmed from there. Many of them were also main terrorists. Together, that article from the New York Times says that Modi ji did that campaign for electoral success. The reality is the opposite. It seems that Pakistan used religion-oriented terrorists to attack people in Pulwama to defeat Modi in the elections. Modi has only done counter-response. I want to make it clear that I am not taking any side of any political party. I am not interested in politics. I am only taking the side of the country and the truth.

India has evidence that Wing Commander Abhinandan dropped Pakistan’s F-16 fighter plane, then why do so many native and foreign magazines claim that the f-16 has not been dropped. If this is not propaganda of the broker media in favour of international companies of arms, then what is this? Pakistan will lie in this case because it has broken the treaty with the United States. How can the world believe its point? In matters of spread of lies, violence, conspiracy, propaganda, and ill advances, Pakistan is a master already.

A day after the publication of this article, the proposal brought against the Masood Azhar in the United States fell. This means that the big countries of the world have hands in glove, and they had already met among themselves. At first, they created an atmosphere in favor of the terrorists through the articles-journals, which provided additional support in saving Masood Azhar. The countries of the world fight only the verbal war against the terrorism. The real battle must be fought by India itself. And yes, unfortunately, regarding the latest condemterrorist attack in New Zealand, will the intellectuals be able to say, “Fire play by the strayed people”? After all, why double standards on terrorism? Even that is the case of retaliation. World should see what initiates the terrorism, and then correct that first.

It is a matter of unfortunate time that the crash of the Ethiopia Airlines’ plane that was manufactured by American company Boing occurred a few days ago. More than 150 people died in that. This incidence is being reported because of the same sensor’s malfunction, which resulted in an accident almost six months earlier. If there had been improvement in time, then the lives of so many people would be saved. It does not seem to be that the New York Times wrote a hard article about this.

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पुलवामा के आतंकी हमले में शहीद सैनिकों के लिए सैद्धांतिक श्रद्धांजलि- Theological tribute to martyr soldiers in the Pulwama terror attack

पुलवामा के आतंकी हमले में शहीद सैनिकों के लिए सैद्धांतिक श्रद्धांजलि (please browse down or click here to view this post in English)

इतिहास गवाह है कि हमलावर ही अधिकाँश मामलों में विजयी हुआ है। यदि वह जीतता है, तब तो उसकी कामयाबी सबके सामने ही है, परन्तु यदि वह हारता है, तब भी वह कामयाब ही होता है। इसके पीछे गहरा तांत्रिक रहस्य छिपा हुआ है। हमला करने से पहले आदमी ने मन को पूरी तरह से तैयार किया होता है। हमले के लिए मन की पूरी तैयारी का मतलब है कि वह मृत्यु के भय को समाप्त कर देता है। मृत्यु का भय वह तभी समाप्त कर पाएगा, यदि उसे जीवन व मरण, दोनों बराबर लगेंगे। जीवन-मरण उसे तभी बराबर लगेंगे, जब वह मृत्यु में भी जीवन को देखेगा, अर्थात मृत्यु के बाद जन्नत मिलने की बात को दिल से स्वीकार करेगा। दूसरे शब्दों में, यही तो अद्वैत है, जो सभी दर्शनों व धर्मों का एकमात्र सार है। उसी अद्वैतभाव को कई लोग भगवान्, अल्लाह आदि के नाम से भी पुकारते हैं। तब सीधी सी बात है कि हरेक हमलावर अल्लाह का बन्दा स्वयं ही बन जाता है, चाहे वह अल्लाह को माने, या ना माने। अगर तो वह भगवान या अल्लाह को भी माने, तब तो सोने पे सुहागा हो जाएगा, और दुगुना फल हासिल होगा।

अब हमला झेलने वाले की बात करते हैं। वह मानसिक रूप से कभी भी तैयार नहीं होता है, लड़ने व मरने-मारने के लिए। इसका अर्थ है कि वह द्वैतभाव में स्थित होता है, क्योंकि वह मृत्यु से डरता है। वह जीवन के प्रति आसक्ति में डूबा होता है। इसका सीधा सा प्रभाव यह पड़ता है कि वह खुल कर नहीं लड़ पाता। इसलिए अधिकाँश मामलों में वह हार जाता है। यदि कभी वह जीत भी जाए, तो भी उसका डर व द्वैतभाव बना रहता है, क्योंकि विजयकारक द्वैत पर उसका विश्वास बना रहता है। सीधा सा अर्थ है कि वह हार कर भी हारता है, और जीत कर भी हार जाता है। बेहतरी से अचानक का हमला झेलने में वही सक्षम हो सकता है, जो अपने मन में हर घड़ी, हर पल अद्वैतभाव बना कर रखता है। अर्थात जो मन से साधु-संन्यासी की तरह की अनासक्ति से भरा हुआ जीवन जीता है, समर्थ होते हुए भी हमले की शुरुआत नहीं करता, और अचानक हुए हमले का सर्वोत्तम जवाब भी देता है। वैसा आदमी तो भगवान को सर्वप्रिय होता है। तभी तो भारत ने हजारों सालों तक ऐसे हमले झेले, और हमलावरों को नाकों चने भी चबाए। तभी भारत में शुरू से ही धर्म का, विशेषतः अद्वैत-धर्म का बोलबाला रहा है। इसी धर्म-शक्ति के कारण ही भारत को कभी भी किसी के ऊपर हमला करने की आवश्यकता नहीं पड़ी। अपने धर्म को मजबूत करने के लिए हमला करने की आवश्यकता उन्हें पड़ती है, जो अपने दैनिक जीवन में शांतिपूर्वक ढंग से धर्म को धारण नहीं कर पाते। यह केवलमात्र सिद्धांत ही नहीं है, बल्कि तांत्रिक प्रेमयोगी वज्र का अपना स्वयं का अनुभव भी है। जीवन के हरेक पल को अद्वैत से भरी हुई, भगवान की पूजा बनाने के लिए ही उसने इस वेबसाईट को बनाया है।

अब एक सर्वोत्तम तरीका बताते हैं। यदि अद्वैत-धर्म का निरंतर पालन करने वाले लोग दुष्टों पर हमला करके भी अद्वैत-धर्म की शक्ति प्राप्त करने लग जाए, तब तो सोने पर सुहागे वाली बात हो जाएगी। विशेषकर उन पर तो हमला किया ही जा सकता है, जिनसे अपने को खतरा हो, और जो अपने ऊपर हमला कर सकते हों। हमारा देश आज ऐसे ही मोड़ पर है। यहाँ यह तरीका सबसे सफल सिद्ध हो सकता है। भारत के सभी लोगों को ऋषियों की तरह जीवन बिताना चाहिए। भारत के सैनिकों को भी ऋषि बन जाना चाहिए, और हर-हर महादेव के साथ उन आततायियों पर हमले करने चाहिए, जो धोखे से हमला करके देश को नुक्सान पहुंचाते रहते हैं। एक बार परख लिया, दो बार परख लिया, चार बार परख लिया। देश कब तक ऐसे उग्रपंथियों को परखता रहेगा?

आतंकवादियों के आश्रयस्थान के ऊपर जितने अधिक प्रतिबन्ध संभव हो, उतने लगा देने चाहिए, अतिशीघ्रतापूर्वक। उन प्रतिबंधों में शामिल हैं, नदी-जल  को रोकना, व्यापार को रोकना, संयुक्त राष्ट्र संघ में आतंकवादी देश घोषित करवाना आदि-2।

एक सैद्धांतिक व प्रेमयोगी वज्र के द्वारा अनुभूत सत्य यह भी है कि जब मन में समस्या (कुण्डलिनी चक्र अवरुद्ध) हो, तभी संसार में भी दिखती है। यही बात यदि उग्रपंथी समझें, तो वे दुनिया को सुधारने की अंधी दौड़ को छोड़ दें।

भगवान करे, उन वीरगति-प्राप्त सैनिकों की आत्मा को शांति मिले।

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https://demystifyingkundalini.com/2018/12/23/योग-व-तंत्र-एक-तुलनात्मक-अ

https://demystifyingkundalini.com/2018/07/18/religious-extremism

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Theological tribute to martyr soldiers in the Pulwama terror attack

History is the witness that the attacker has won in most of the cases. If he wins, then his success is in front of everyone, but if he loses, he still succeeds. The deep tantric mystery is hidden behind this. Before attacking other, man had prepared the mind completely. The complete preparation of the mind for the attack means that he eliminates the fear of death. He will be able to destroy the fear of death only if both life and death will be equal for him. Life and death will be equal to him, when he will see life in death also, that means, after death, he will accept the matter of getting the Paradise. In other words, this is the Advaita (non-duality), which is the only essence of all philosophies and religions. Many people call the same adwaita as the name of God, Allah etc. Then it is a straightforward thing that every attacker is the man of Allah itself, whether he believe in Allah or does not believe. If he also obeys God or Allah, then he will be blessed with borax on gold, means double reward will be achieved.

Now talk about the attacked. He is never mentally prepared regarding fighting and do or die. This means that he is present inside duality, because he is afraid of death. He is immersed in attachment to life. Its direct effect is that he does not openly fight. Therefore, in most cases he loses. Even if he wins, even then his fear and duality will remain, because his faith remains on the victorious duality. Straightforward it means that he loses even after defeating, and also loses by winning. He can be able to withstand the sudden attack better, who keeps non-duality in his mind at each moment of his life. That means, the mind that lives in a way filled with non-attachment like a Sage-Sannyasi. Even when capable, he does not start the attack, and gives a most appropriate answer to the sudden attack. Such a person is most loved by God. Only then did India take such attacks for thousands of years, and even shown stars in the daytime to the attackers. Only then India has religion dominated, especially Advaita Dharma (non duality-religion). Because of this same power, India never needed to attack anyone. Those need to attack to strengthen their own religion, who cannot hold religion in peace in their daily life. It is not only a mere theory, but also a tantric, Premyogi Vajra has this type of own experience. He has created this website to make every moment of one’s life full of Advaita, the unique and real worship of God.

Now tell a best way. If people, who constantly follow the Advaita Dharma, also continue to get the power of Advaita Dharma by attacking the evil ones, then there will be again borax over the gold. Especially those attackers can be attacked, who are a threat to one’s security, and those who can attack suddenly. Our country is on the same twist today. Here this method can be proven most successful. All people of India should spend life like sages. The soldiers of India should become sages, and with slogan of Har- Har Mahadev, they should attack those terrorists, who continue to harm the country by attacking deceptively. Once those have been tested, tested twice, tested four times. How long will the country test such extremists?

The restrictions on the shelter of the terrorists should be imposed as much as possible, in the fastest way possible. Those restrictions include stopping river-water, preventing trade, declaring a terrorist country in the United Nations etc.

The truth that is perceived by Premyogi vajra is that when there is a problem in the mind (Kundalini Chakra is blocked), then only in the world it is also visible. If extremists understand the same thing, then they should leave the blind race to improve the world.

May God bestow peace to the departed soul of those martyrs.

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