जय माता दुर्गे जय माता तारा हम पापी मानुष को तेरा सहारा~भक्तिगीत कविता

जय माता दुर्गे
जय माता तारा।
हम पापी मानुष को
तेरा सहारा।।
जय माँ भवानी
तेरा जयकारा।
भव-सा-गर का
तू ही किनारा।।
जय माता दुर्गे------
हिंगलाज नानी
जय हो जयकारा
तेरे लिए मेरा
जीवन पहारा।।
जय माता---
भटकूँ अवारा
बेघर बिचारा।
तेरे सिवा नहीं
अब कोई चारा।।
जय माता---
जग देख सारा
भटका मैं हारा।
भूलूँ कभी न
तेरा नजारा।।
जय माता---
हे अम्बे रानी
जय जय जयकारा
पागल सुत तेरा
नकली खटारा।।
जय माता----
तू ही जगमाता
तू ही विधाता।
तू जो नहीं हमें
कुछ भी न आता।।
हम थरमामीटर
तू उसमें पारा
तू क्षीरसागर
हम पानी खारा।।
जय माता---
किसमत का मारा
जग में नकारा
तू जो मिले जग
पाए करारा।।
हे माता---
जो है हमारा
सब है तुम्हारा।
दूँ क्या मैं तुझको
जो हो हमारा।।
जय माता दुर्गे
जय माता तारा।
हम पापी मानुष को
तेरा सहारा।।
साभार~भीष्म🙏@bhishmsharma95