वेबसाईट का निर्माण, प्रबंधन व विकास, भाग-8; Website creation, management and development, part-8

वेबसाईट का निर्माण, प्रबंधन व विकास, भाग-8 (please browse down or click here to view this post in English)

मुफ्त के वैबसाईट प्लान में वैबसाईट का मोबाईल के आकार-प्रकार के अनुरूप आकार-प्रकार भी नहीं होता, जिससे ट्रेफिक काफी घट जाती है। कई लोग कहते हैं कि डुप्लीकेट कंटेंट की पेनल्टी से बचने के लिए पोस्ट में केनोनिकल टेग लगाने चाहिए। सच्चाई यह है कि गूगल स्वयं ही वेबपेज / वेब आर्टिकल का सर्वाधिक उपयुक्त रूप सर्च रेंकिंग के लिए चुन लेता है। हाँ, यदि गूगल को डुप्लीकेट कंटेंट का मकसद सर्च रेंकिंग को बढ़ाना लगे, तब वह उस पर पेनल्टी भी लगा सकता है। फिर भी जहाँ तक हो सके, सुरक्षा के लिहाज से डुप्लीकेट कंटेंट से बचना ही चाहिए। गूगल का बोट पोस्ट को डालने के अनुमानित समय पर बार-२ आता रहता है, व नई पोस्ट की खुराक से संतुष्ट होकर ट्रेफिक को बढ़ाता रहता है। इसलिए यदि निर्धारित अंतराल पर पोस्ट न डाली जाए, तो वह भूखा रह जाता है, जिससे वह लम्बे समय तक वापिस नहीं भी आ सकता। इसलिए अच्छा रहता है, यदि निर्धारित समय व अंतराल पर पोस्ट को डालना जारी रखा जाए। सप्ताह में एक दिन व वीकएंड पर जैसे कि शनिवार की शाम को 6 बजे से 9 बजे के बीच में सर्वोपयुक्त समय है, क्योंकि उस समय दुनिया के सभी टाईम जोन के लोग जागते हुए होते हैं, और रिलेक्सड मोड में भी होते हैं। फ्री प्लान में मोबाईल फोन पर वेबसाईट को एडिट भी नहीं किया जा सकता है। वेबसाईट पर पर्सनल पेज भी बनाए जा सकते हैं, जिन्हें कोई और नहीं देख सकता। उस पर अपनी सभी निजी जानकारी डाली जा सकती है।

इसी तरह “नोफोलो” कोड भी नहीं लगाना चाहिए किसी पोस्ट के साथ, क्योंकि इससे लिंक जूस किसी को नहीं मिलता, और नष्ट हो जाता है। यदि लिंक जूस लिंकड वेबसाईट को जाने से रुक भी जाए, तो भी फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि दूसरे ब्लोगर भी इस कोड को लगाएंगे, जिससे उनके ब्लॉग का लिंक जूस हमें नहीं मिल पाएगा। संक्षेप में, ट्रेफिक बढ़ाने के शोर्ट टर्म उपायों से बचना चाहिए। इनमें से अधिकांश उपाय तो अवैध ही होते हैं, जिनके कारण गूगल पेनल्टी लगा सकता है। अगर वैबपोस्ट या वेबपेज के लिए नया कंटेंट लिखने की सामर्थ्य न हो, तो अपने पुराने कंटेंट के शब्दों व वाक्यों में थोड़ा परिवर्तन करके, संभवतः उसको दुबारा भी लिख सकते हैं।  यद्यपि ऐसा दूसरों के कंटेंट को चुरा कर नहीं करना चाहिए।  कई ऐसे जाने-माने इंटरनेट-पुरुष भी हैं, जो दूसरों के कंटेंट से छेड़छाड़ करके ही मशहूर हुए हैं।

यदि बढ़ी हुई ट्रेफिक को निरंतर प्राप्त करना चाहें, तो सप्ताह में दो बार नई पोस्ट डालें।परन्तु इससे यह नुकसान होता है कि पाठकों को नई पोस्ट पढ़ने के लिए अधिक समय नहीं मिलता। ट्रेफिक को निर्बाध रूप से बढ़ा हुआ रखने के लिए भी सप्ताह में दो बार पोस्ट लिखी जा सकती है, परन्तु इससे बार-2 नोटिफिकेशन को प्राप्त करने वाले ई-मेल फोलोवर परेशान हो सकते हैं। यह भी हो सकता है कि वे मानसिक बोझ के कारण पोस्ट को पढ़े ही न।

वैबसाईट को ट्रांसफर भी किया जा सकता है। वेबसाईट को किसी दूसरे आदमी के नाम भी बनाया जा सकता है। कई लोग स्वयं वेबसाईट के मालिकाना हक़ से दूर रहना चाहते हैं, विशेषकर जिन पर पैसों का लेन-देन होता है। सार्वजनिक क्षेत्र के कामगारों को ऐसी वेबसाईट से समस्या आती है, विशेषकर आयकर दाखिले के समय। अन्य कानूनी बाध्यताएं भी होती हैं। ऐसे में वे पत्नी के नाम से वेबसाईट बनाते हैं, और स्वयं उसके एडमिन बन जाते हैं। मालिक (यहाँ पर पत्नि) तो वैसे भी एडमिन होता ही है। कई लोग अपनी वेबसाईट के प्रसिद्ध होने पर उसे पत्नि आदि के नाम ट्रांसफर कर देते हैं। उसके लिए पत्नि का वर्डप्रेस अकाऊंट (वर्डप्रेस प्लेटफोर्म के लिए) बनाना पड़ता है। पत्नि आदि का अंतर्राष्ट्रीय डेबिट कार्ड भी बनाना पड़ता है, जिससे वेबसाईट को रिचार्ज या अपग्रेड किया जा सके। साधारण वेबसाईट को तो सरकारी कर्मचारी भी चला सकते हैं, जिसमें पैसों का लेन-देन न हो, राजनीतिक बयानबाजी न हो, और सरकार की नापसंदगी के लेख न लिखे गए हों। विचारों की अभिव्यक्ति का अधिकार तो सबको है, यद्यपि एक सरकारी कर्मचारी के लिए कुछ शर्तों के साथ। उन विचारों से उसका सरकारी कार्य दुष्प्रभावित नहीं होना चाहिए। यदि लाभान्वित होए, तब तो बहुत अच्छा है।

वर्डप्रेस के टॉप बार के रीडर बटन को क्लिक करके ड्रापडाऊन मीनू खुलता है। उसमें पहला बटन “फोलोड साईट्स” का होता है। उस पर सभी फोलोड साईट्स की पोस्टस दिखती हैं, क्रमवार, सबसे नयी वाली सबसे पहले। उससे निचला बटन “कन्वर्जेशन” का होता है। उस पर जिस किसी भी पोस्ट के कमेन्ट को लाईक किया गया हो, उस पोस्ट के सभी कमेन्ट दिखाई देते हैं, क्रमवार, लाईक्ड कमेन्ट वाली सबसे नयी पोस्ट के कमेन्ट सबसे पहले। उससे निचला बटन “डिस्कवर” का होता है। उस पर वर्डप्रेस-पाठकों द्वारा चुनी गई बेहतरीन पोस्टस दिखाई जाती हैं। उससे निचला बटन “सर्च” का होता है। उस पर बहुत सी रिकमंड की गई पोस्टस होती हैं। सबसे ज्यादा रेकमंड की गई पोस्टस सबसे पहले होती हैं। उसमें एक सर्च बार भी होती है, जिस पर हम पोस्टस को सर्च कर सकते हैं। उससे निचला बटन “माय लाईक्स” का होता है। उस पर वे सभी पोस्टस होती हैं, जिन्हें लाईक किया गया होता है, क्रमवार, सबसे नयी लाईक की गई पोस्ट सबसे पहले। सबसे नीचे “टेगस” बटन होता है। इस पर हम अपने मनचाहे टेग को एड कर सकते हैं, ताकि हर बार उस टेग पर क्लिक करने से उस टेग वाली पोस्टस खुलती रहें। उदाहरण के लिए, यदि किसी को “कुण्डलिनी” से सम्बंधित विषय पसंद हैं, तो वह “कुण्डलिनी” शब्द को एड कर सकता है।

यदि आपने इस लेख/पोस्ट को पसंद किया तो कृपया इसे शेयर करें, इस वार्तालाप/ब्लॉग को अनुसृत/फॉलो करें, व साथ में अपना विद्युतसंवाद पता/ई-मेल एड्रेस भी दर्ज करें, ताकि इस ब्लॉग के सभी नए लेख एकदम से सीधे आपतक पहुंच सकें। कमेन्ट सैक्शन में अपनी राय जाहिर करना न भूलें।

 

Website creation, management and development, part-8

In a free website plan, the website does not have any size-type according to the size-type of mobile, which reduces traffic significantly. Many people say that in order to avoid the penalty of duplicate content, it is necessary to put a canonical tag in the post. The truth is that Google automatically chooses the best form of webpage / web article for search rankings. Yes, if Google finds it as a tactic to increase search rankings, then it can also penalize it. However, as far as possible, for security purpose, duplicate content must be avoided. Google’s bot keeps coming at the estimated time of posting, and satisfied with the new post dose, keeps increasing traffic. So if the post is not put at the fixed interval, then he is hungry, so that he may not return for a long time. It is therefore good, if continuing to post is kept at set time and interval. Weekly posting, on the day of weekend, such as on Saturday, and at time between 6 pm and 9 pm is the best, because at that time all the people of the world are awake and also in the Relaxed mode. The website cannot be edited on the mobile phone in the free plan. Personal pages can also be made on the website, which nobody else can see. All your personal information can be inserted on it.

Similarly, the “nofollow” code should not be included in any post as it does not make available link juice to anyone, and is destroyed. Even if the link juice is being blocked from going to the Linked website, there is no benefit as other bloggers will also apply this code, so that the link juice of their blog is not available to us. In short, short-term measures should be avoided to increase traffic. Most of these measures are illegal, due to which Google can penalize. If one does not have the ability to write new content for his webpost or webpage, then by changing slightly the words and sentences of their old content, they can possibly write it again. Although it should not be stolen from others’ content. There are many well-known internet-men, who have become famous only by tinkering with others’ content.

If you want to get increased traffic continuously, then add new posts twice a week. But this can be a loss for readers do not get much time to read new posts. Posting a post twice a week can also be practiced to keep the traffic uninterrupted, but the e-mail followers who receive frequent notifications may be upset. It may also be that they did not read the post because of the mental burden.

The website can also be transferred. The website can also be named with another man. Many people want to stay away from the ownership of the website themselves, especially on which money transactions happen. Public sector workers face problems from such websites, especially during the time of income tax return. There are also other legal obligations. In such a way, they make websites in the name of their wives, and become their administrators. The owner (the wife on here) is also the admin itself. Many people transfer their website to others’ account when they are famous. For that, the WordPress account (for wordpress platform) has to be created for the new website owner. The international debit card of the wife etc. has to be created so that the website can be recharged or upgraded. The general informative website can also be run by government employees, in which there is no money transaction, no political rhetoric, and the articles of government’s dislikes have not been written. The right to express thoughts is for everyone, even though with some conditions for a government employee. With his ideas, his official work should not be affected. If beneficial to his official work, then it is very good.

Clicking the Reader button in top bar of WordPress opens the dropdown menu. The first button is “Followed Sites”. Posts are displayed from all the followed sites on it, serial wise, the newest first of all. The lower button is of “Conversation”. It shows the comments of all the posts on the comment of which the website owner has put the “like” himself, or a comment has been made by himself, in an orderly fashion, the newest post with liked comment appearing first of all. Still lower button is that of “Discover”. The best posts are selected by WordPress-readers on it. The lower button is that of “Search”. There are so many recommended posts on it. The most recommended posts are the first. There is also a search bar on which we can search the post. The lower button is that of “My Likes”. There are all the posts on it, which have been liked, respectively, the most recently posted posts being first in line. The bottom is the “Tags” button. On this, we can add tags to our liking, so that every time we click on that tag, the posts with that tag continue to open. For example, if someone likes topics related to “Kundalini”, then he can add the word “Kundalini” in the tag.

If you liked this post then please share it, and follow this blog while providing your e-mail address, so that all new posts of this blog could reach to you immediately via your e-mail. Do not forget to express your opinion in the comments section.

वेबसाईट का निर्माण, प्रबंधन व विकास, भाग-2; Website creation, management and development, part-2

वेबसाईट का निर्माण, प्रबंधन व विकास, भाग-2 (please browse down or click here to view this post in English)

सभी मित्रों को भारतीय गणतंत्र दिवस की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएं

होमपेज बनाने के बाद हम जो भी पेज बनाते हैं, वे होमपेज के साथ जोड़े जा सकते हैं, अन्यथा वे स्वतन्त्र पेज के रूप में विद्यमान रहते हैं। वेबसाईट के डिजाइन आदि का सारा निर्माण कस्टमाईज बटन से ही होता है। उस कस्टमाईजर पर एक थीम बटन भी होता है, जिससे हम थीम (बेसिक आऊटले) का चुनाव कर सकते हैं। वेबसाईट के निःशुल्क प्लान में बहुत साधारण मुफ्त के थीम मिलते हैं, जिन पर अक्षरों की चमक व बनावट भी साधारण दर्जे की होती है। सशुल्क प्लान में सबसे सस्ता पर्सनल प्लान होता है, जिसकी थीम कुछ बढ़िया होती है, फिर भी अक्षरों को अधिक बनावट नहीं दे सकते, और न ही वेबसाईट चमक-दमक वाली लगती है। प्रीमियम प्लान में ये कमियाँ नहीं होतीं। उसका शुल्क भी अधिक होता है। वर्डप्रेस कम्पनी में इसका सालाना शुल्क लगभग 4000 रुपए होता है। पर्सनल प्लान का मूल्य 2400 रुपए होता है। प्रीमियम प्लान में सीएसएस कोड का प्रयोग किया जा सकता है, हेडर इमेज व साईडबार आदि की चीजों को भी एडजस्ट किया जा सकता है। सीएसएस कोड कंपनी की कस्टमर केयर सर्विस से प्राप्त किए जा सकते हैं। बिजनेस प्लान में कुछ अधिक नहीं, केवल अधिक बढ़िया बिजनेस थीम मिलती हैं, उसमें विभिन्न प्लगइन (जो छोटे-मोटे काम करते हैं) भी इंस्टाल किए जा सकते हैं, तथा उस पर विज्ञापन भी डाले जा सकते हैं। विज्ञापन तो प्रीमियम प्लान पर भी डाले जा सकते हैं। यद्यपि पैसे कमाने बहुत कठिन हैं उससे। लगभग 280 रुपए प्राप्त करने के लिए लगभग 10000 वियू चाहिए। यदि कोई मशहूर वेबसाईट आपकी किसी पोस्ट को लिंक कर ले, तब तो बल्ले ही बल्ले। इसलिए अच्छी पोस्टें लिखें। इसमें वेबपेज के बेस पर फूटर क्रेडिट (वर्डप्रेस का) भी नहीं होता, पर उससे विशेष फर्क नहीं पड़ता। बिजनेस प्लान बहुत महँगा होता है, लगभग 8000 रुपए प्रतिवर्ष। प्रीमियम व बिजनेस प्लान में पेमेंट बटन भी बनाया जा सकता है, जिससे हम कुछ भी ऑनलाईन बेचकर पेमेंट रिसीव कर सकते हैं। निःशुल्क प्लान में कस्टम डोमेन भी नहीं मिलता। उदाहरण के लिए मेरी वेबसाईट का कस्टम (स्वयं चुना गया) डोमेन demystifyingkundalini.com है। परन्तु जब यह निःशुल्क प्लान में थी, तब इसका डोमेन demystifyingkundalini.wordpress.com था। यदि एक साल वेबसाईट को सब्सक्राईब करके अगले साल पेमेंट न की जाए, तो केवल अतिरिक्त सुविधाएं ही हटेंगी संभवतः, free प्लान वाली सुविधाएं तो हमेशा के लिए रहेंगी। कस्टमाईज को दबाकर निम्नलिखित बटन आते हैं- साईट आईडेंटीटी (इससे वेबसाईट की पहली मुख्य व शीर्ष पंक्ति लिखी जाती है, जो पूरी वेबसाईट का संक्षिप्त व प्रभावशाली विवरण दे), फोंटस (इससे अक्षरों के प्रकार / बनावट को चुना जाता है), कलर्स एंड बेकग्राऊंड (इससे पेज के बेकग्राऊंड का स्टाईल व कलर चुना जाता है), हेडर इमेज (इससे उस मुख्य इमेज को चुना जाता है, जो प्रत्येक वेबपेज पर स्वयं लगी रहती है), मीनू (इस पर पेज व सबपेज को नाम दिए जाते हैं, और सबपेज बनाए जाते हैं), सीएसएस (जिस पर कुछ व्यक्तिगत व इच्छानुसार संरचना के लिए कोड लिखे जाते हैं), विजेट (वेबसाईट के विभिन्न अवयवों जैसे कोपीराईट, डिस्क्लेमर, लिंक, ब्लॉग स्टेट, फोलो ब्लॉग, फोलो अस आदि यहाँ से चुने व बनाए जाते हैं)। ये साईडबार में भी व फुटबार में भी, चुनाव के अनुसार जोड़े जा सकते हैं, होमपेज सेटिंग (यहाँ पूर्वोक्तानुसार होमपेज को ही स्टेटिक बनाया जाता है, लेटेस्ट पोस्ट वाले पेज को नहीं)। सभी पेज यहाँ पर एड किए जा सकते हैं, अन्यथा वेबपेज होमपेज से पृथक ही रहेगा। सबसे मुख्य व प्रथम पेज को ही यहाँ होमपेज बनाया जाता है, अन्य पेज तो उसके बाद उसमें जुड़े होते हैं, जिन्हें विषयानुसार हम कुछ भी नाम दे सकते हैं। वास्तव में एक वेबपेज 1500 शब्दों से अधिक नहीं होना चाहिए, तभी वह इंटरनेट के कम सिग्नल पर भी जल्दी खुल जाता है। यदि होम पेज या अन्य कोई भी वेबपेज बड़ा हो, तो उसे सबपेजों में डिवाईड किया जा सकता है, और नाम ऐसे लिखे जा सकते हैं, जैसे होम 1 (पेज का विषय), होम 2 (—-) आदि-2। वेबसाईट के मूल डोमेन यूआरएल / एड्रेस (जैसे कि demystifyingkundalini.com को सर्च इंजन में डालकर होमपेज ही खुलता है। ये ही मुख्य बटन होते हैं।

सभी सशुल्क प्लानों में कस्टमर केयर की अच्छी सुविधा होती है, जिसमें चेटिंग व ईमेल के माध्यम से सभी कुछ पूछा गया विस्तार व स्पष्टता से समझाया जाता है। यहाँ पर वर्डप्रेस नामक वेबसाईट प्लेटफोर्म का विवरण दिया जा रहा है। यह उपरोक्त कस्टमाईज बटन, w बटन को दबाकर आता है। अन्य बटन जो उस लाईन में होते हैं, वे निम्नलिखित हैं- स्टेटस- वेबसाईट के विसिटर, वियूस, लाईक्स, कमेंट्स आदि की पल-पल की जानकारी देता है; एक्टिविटी- जब भी वेबसाईट पर जो भी काम किया गया होता है, उसकी समस्त जानकारी देता है; प्लान- वेबसाईट के चल रहे प्लान व अन्य प्लानों की जानकारी देता है, रिन्यूवल ऑप्शन की जानकारी होती है, व सम्बंधित प्लान पर क्या-क्या किया जा सकता है, वह सब जानकारी वहां होती है। अगली पोस्ट में जारी———

 

Website creation, management and development, part-2

Any page we create after creating the homepage can be added to the homepage, otherwise that remain in the form of free page. All the designs of the website are made from customize button. There is a theme button on that customizer so that we can choose the theme (Basic Outley). The free plan of the website offers a lot of free themes, on which the brightness and texture of the letters are also of normal quality. The paid plan is the cheapest personal plan, whose theme is good, still can not make the text more textured, nor does the website look like glitter. There are no shortcomings in the premium plan. That’s fees are also high. The wordpress company has an annual fee of about Rs 4000 for premium plan. The value of the personal plan is Rs. 2400. The CSS code can be used in the premium plan, through which the header image and sidebar etc. can also be adjusted. CSS codes can be obtained from the company’s Customer Care Service. There is nothing more in business plans, only more great business themes are available, in which various plugins (which work in different minor ways) can be installed and ads can also be placed on it. Advertisements can also be placed on the premium plan. Although money is difficult to earn from website directly. To get around 280 rupees, we need around 10,000 views. If a famous website links to any of your posts, then it’s too good. So write good posts. It does not even have a footer credit (wordpress) on the webpage’s base, but it does not make any difference to it. Business plan is very expensive, around 8000 rupees per year. A payment button can also be made in the premium and business plan, so that we can receive payment by selling anything online. There is no custom domain even in the free plan. For example, the custom (self-chosen) domain of my website is demystifyingkundalini.com. But when it was in the free plan, its domain was demystifyingkundalini.wordpress.com. If one year is subscribed to the website but not paid for next year, then only the extra features will be deleted Probably, facilities of free plans will remain forever. On pressing the Customize button there comes the following buttons: – Site Identity (This is written as the first, main and top line of the website, giving brief and effective details of the entire website); fonts (by this, type of text / texture is selected); Colors End Background (the style and color of the page’s background are selected); header image (this selects the main image that is displayed on each webpage itself); menus (On this pages and subpages are given names, and subpages are created); CSS (code written for some personal and customized structure); Widgets (various content of the website such as copyright, disclaimer, link, blog State, follow blog, follow us etc. are selected and created from here). These can also be added in the Sidebar and Footbar, as per the selection; homepage setting (Here the homepage is made as static, not the latest post page). All pages can be edited here, otherwise the webpage will remain separate from the homepage. The main page and the first page are created here, the other pages are then added to it, which we can name anything by subject. In fact, a webpage should not be more than 1500 words, only then it opens on the Internet with less signals also much quickly. If the home page or any other webpage is large, it can be devided in the subpages, and the names can be written such as Home 1 (the topic of the page), Home 2 (—-) etc. The homepage is opened by entering the website’s original domain URL / address (such as demystifyingkundalini.com in the search engine). These are the main buttons.

All the paid plans have good customer care, in which all queries asked through chatting and email are explained in detail and clarity. Here’s a description of the website platform named WordPress. This above told customize button pops on pressing the w button. The other buttons that are in that line are the following: Stats – gives the information of the visitors of the website, views, likes, comments etc.; Activity – gives information about any work done on the website whenever it has been done; Plan- Provides information about the ongoing plans and running plan of the website, information about the renewal option, and all the information about what can be done on the respective plan. Continuing in next post ———