विषय / About (Please scroll down or click to see in English)

इस वेबसाईट को एक ई-पुस्तक के प्रचार हेतु एक अवरोहण पृष्ठ / landing page के रूप में शुरू किया गया था।वह कुंडलिनी प्रेमयोगी वज्र (एक उपलेखक) को इसलिए भी जागृत रूप में अनुभव हुई, ताकि वह उनके द्वारा एक अनौखी आध्यात्मिक पुस्तक प्रकाशित करने का एजेंडा पूरा कर सकती (उसे उस कुंडलिनी जागृति अनुभव से इतनी शक्तिशाली मानसिक ऊर्जा मिली कि उसने केवल एक वर्ष के भीतर ही 300 पेज की बुक को प्रकाशित कर दिया), क्योंकि उसने एक पोस्ट के माध्यम से उस पुस्तक की एक प्रतिलिपि को एक खूबसूरत पहाड़ी के शीर्ष पर एक जीवंत ऋषि  के द्वारा प्राप्त किए जााते हुए देखा। वह उस स्थान पर एक नरक-काले और मांसपेशियों से भरे-पूरे भैंसे के द्वारा ले जाया गया था, जो उसे सही रास्ता दिखाकर मिडवे / बीच राह में ही दूर चला गया था। सब अजीब था। वैसे भी वह उस समय के दौरान कई दुर्भाग्यपूर्ण खतरों से नाटकीय रूप से बचाया गया था।

फिर इस वेबसाईट के एक सहलेखक को क्वोरा की ओर से शीर्षलेखक-2018 का सम्मान मिलने के बाद इस पर लोगों का आना-जाना / ट्रेफिक / traffic बढ़ गया। लोगों के पसंद किए जाने से उत्साहित होकर, इस वेबसाईट को धीरे-2 बढ़ाया गया। प्रचाराधीन ई-पुस्तक के अन्दर विद्यमान सारी सामग्री को इस पर संक्षिप्त रूप में डाला गया। फिर पूरी सामग्री का हिंदी में अनुवाद करके उसे भी वेबसाईट पर डाला गया। सहलेखक ने ब्रिलिएनो कुण्डलिनी फोरम / brilliano kundalini forum पर डेढ़ वर्षों के दौरान लिखी गई अपनी उन पोस्टों / posts को भी इस वेबसाईट पर डाल दिया, जिससे उसे क्षणिक कुण्डलिनी-जागरण का अनुभव हुआ था। वेबसाईट को अच्छे व्यूज / views मिलने लगे, जिससे सर्च इंजिनों / search engines पर इसकी रेंकिंग / ranking बढ़ती गई। बाद में उपरोक्त ई-पुस्तक का कागजी-प्रतिरूप / print version भी इसी वेबसाईट पर उपलब्ध करवा दिया गया। इससे वेबसाईट-यात्रियों / website visitors के सामने सभी विकल्प खुल गए। जिनके पास कम समय है, और जो पुस्तक पढ़ना पसंद नहीं करते, उनके लिए मूल वेबसाईट पर ही सभी कुछ उपलब्ध हो गया। जो लोग सस्ती पुस्तक पसंद करते हैं, उनके लिए ई-पुस्तक उपलब्ध हो गई। जो लोग निःशुल्क पुस्तक पसंद करते हैं, उनके लिए प्रोमोशनल निःशुल्क पुस्तक ओफर्ज / promotional free books offers दी जाती रहीं। जो लोग महँगी या कागजी पुस्तक पसंद करते हैं, उनके लिए कागजी पुस्तक उपलब्ध हो गई। होना भी ऐसा ही चाहिए, क्योंकि सभी लोगों की प्रकृति अतः उनकी पसंद भिन्न-2 होती है। इस लिंक को क्लिक करके ई-पुस्तकों व ई-रीडरों के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

इस वेबसाईट को बनाने का एक मुख्य उद्देश्य लोगों को कुण्डलिनी के बारे में सही व अनुभवात्मक जानकारी उपलब्ध कराना भी था। इसके एक उपलेखक को बचपन से ही इस बारे भ्रम का सामना करना पड़ा था। कोई कुछ बोलता था, कोई कुछ बोलता था। सभी अपने सम्बंधित अनुभवों को छिपाने जैसे का प्रयत्न करते हुए दिखाई देते थे। जितनी भी उसने पुस्तकें पढीं, उनमें भी ऐसा ही माजरा उसे देखने को मिला। सभी पुस्तकों में कुण्डलिनी के बारे में चित्र-विचित्र बातें लिखी होती थीं, और साथ में उनके लेखक अपना अक्षरशः व विश्वासयोग्य अनुभव भी नहीं लिखते थे। इससे वह अपनी क्रियाशील कुण्डलिनी को भी नहीं समझ पाया, कई वर्षों तक। अंत में जब उसे कुछ खाली समय प्राप्त हुआ, तो उसने सभी प्राचीन व नवीन पुस्तकों को अनेक विधियों (कागजी पुस्तक, ई-रीडर पुस्तक, वेबसाईट आदि के रूप में) खंगाला, और अपना ही अंतिम निष्कर्ष निकाला। पुस्तक में उसे प्रामाणिक व अनुभवात्मक निष्कर्ष कहीं नहीं मिल सका। अतः अपने ही निष्कर्ष पर चलते हुए उसने समर्पित योगाभ्यास प्रारम्भ किया, और लगभग एक साल की अवधि में ही अपनी कुण्डलिनी को जागृत पाया। फिर उसे पता चला कि वह कुण्डलिनी तो उसके मन में बचपन से ही क्रियाशील थी व उससे उसे सुप्तावस्था में क्षणिक आत्मज्ञान भी प्राप्त हुआ था, पर वह उसे आश्चर्यमयी कुण्डलिनी के रूप में पहचान नहीं पा रहा था। कुण्डलिनी-जिज्ञासुओं को उसकी तरह भ्रम, अनिश्चितता व अविश्वास का सामना न करना पड़े, इसके लिए उसने मानवता-हित में अपने अक्षरशः अनुभवात्मक विवरण को निःसंकोच होकर इस सफल वेबसाईट के रूप में ढाल दिया।

इस वेबसाईट का विस्तार आज भी जारी है, जो नई-2 व विभिन्न अनुभवात्मक जानकारियों वाली पोस्टों / posts के माध्यम से आगे भी जारी रहेगा। यदि आप इस वेबसाइट को फॉलो / follow करते हैं, तो आप अपनी ईमेल के माध्यम से नई पोस्ट को एकदम से प्राप्त कर सकेंगे।

इस साइट का मुख्य उद्देश्य व्यावहारिक / सच्चा / अनुभव आधारित ज्ञान विशेष रूप से कुंडलिनी आधारित, दुनिया भर में फैलाना है। मैं यह सुनिश्चित करने के लिए अपनी पूरी कोशिश करूंगा कि लिंक सहित सभी जानकारी पोस्टिंग के समय सटीक हों। किसी भी प्रतिक्रिया और सुझाव की अत्यधिक सराहना की जाती है।

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This website was started as a landing page for the promotion of an e-book. That kundalini also came in awakened form to Premyogi vajra (a coauthor) to get her agenda of publishing a unique spiritual book fulfilled through him (he got so much powerful mental energy from that kundalini awakening experience that he published 300 page book within an year only) for he saw a lively sage on a beautiful hill top receiving copy of his book through post. He was carried to that place by a hell black and muscular he Buffalo, who rushed away midway showing him the path to the top. All strange. Anyway he was saved dramatically from many unfortunate hazards in the time being.

After this, another co-author of this website got the honor of Top Writer-2018 on behalf of Quora, after which people’s visits / traffic to this website increased. Encouraged by the rush of people, this website was gradually enhanced. All material contained in the above said e-book under the promotion was summarized on this website. Then the entire contents were translated into Hindi and were also posted on the website. The co-author also posted his own posts written during the one and a half years on the Brilliano Kundalini Forum, from which he experienced the transient kundalini-jagran. The website started getting good views thereafter, increasing its ranking on search engines. Later, the print version of the above e-book was made available on this website. This opened all the options in front of the website visitors. For those who have less time, and who do not like to read the book, everything is available on the original website. E-books are available for those who prefer cheaper books. For those who prefer a free book, promotional free book offers are routinely there. For those who prefer expensive or paper books, a paper book becomes available to them. It should be the same, because the nature of all people, therefore, their choice is different from each other. On clicking this Link you can get complete information about e-books and e-readers.

One of the main objectives of this website was to provide people with accurate and experiential information about Kundalini. One of its sub-writers had confused about this from childhood. Some used to speak something, some used to speak other thing. All were seen trying to hide their respective experiences. The books he read gave the same amount of lightning. All the books were written about strange stories about Kundalini, and together with their writers did not write true and faithful experience. From this he did not even understand his active kundalini for several years. In the end, when he got some free time, he discovered all the ancient and new books in many ways (as a paper book, e-reader book, website etc.), and concluded his own conclusions. The authentic and experiential findings worth deriving any conclusion in the book could not be found anywhere. Therefore, while walking on his own conclusion, he started dedicated yoga, and found his kundalini awakened only in a period of one year. Then he came to know that the Kundalini was active in her mind since childhood and he had got his sleep bound glimpse enlightenment through that, but he could never recognize her as she being the amazing kundalini. Kundalini-inquisitors do not face confusion, uncertainty and disbelief like him, for this, he disclosed his truly experiential explanation word by word in humanitarian interest and transformed it in the form of this beautifully crafted website.

This website continues to be expanded even today, which will continue even further through posts with new and various experiential information. If you follow this website, then you would receive new posts immediately via your e-mail.

The main aim of this site is to gain practical / truthful / experience based knowledge especially Kundalini-related around the World and spread it. I’ll do my best to make sure all the information, including links, are accurate at the time of posting. Any feedback and suggestion are highly appreciated.

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