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Website creation, management and development, part-13

Block editor

A new block editor is now available in the WordPress website. Through this, we can edit different paragraphs in different forms. Each paragraph exists as a separate block. ‘Verse’ block is used for poetry. For writing Quotes, writing the source of references and provide other light or special information, Quote ‘block’ is used. It also enhances the beauty of the post. If we have to provide a book or file for download for free, then keep it in the ‘file’ block. How many such files are downloaded, it will also be shown in the website’s ‘stat’ button. Media blocks are used to show a picture or video.

Some other important information related to the website

Buttons like the reader’s tags, likes etc. are stored in the name of the account holder, not in the name of the website. Therefore, by opening the website with two different accounts, they will look different. This happens where there are many members of a website, such as admin, moderator, writer etc.

Initially or for one year, the website service provider collects less payment for hosting and domain. That is, the domain name is given free. There are also many companies giving domain names. Some also offer free service.

To create a pop up follow button one has to sign up on Mailchimp. Only one audience can be made on the free plan. The meaning of the audience is the person visiting the website here. On creating an audience, click the pop up subscribe button from the menu bar. A code is generated.  It is to be copy-pasted in the mailchimp widget of the website. Then press the Final Publish button. It is done.

A header image is one that appears on every page and post. We set it with customizer. A featured image is one that is only for a single page or post. We set it with edit button.

Changing the theme does not necessarily bring all the old settings and styles on the new theme. Many times a lot of hard work has to be done again. If a theme looks wrong, you can also switch to the old theme. The same old setting will be found again. I call this ‘w’ button (at the top of the website, on the left) mostly as the setting button. It can also be called a customizer button. Press the ‘design’ button after pressing the ‘w’ button. There will be a ‘themes’ button under it. It will contain the name and information of your current theme. There will also be information about all other available themes. To see all the old themes and revert them, press the ‘Activity’ button under Tools. All your previous themes will be found there with their prefixed settings / customization.

कृपया इस पोस्ट को हिंदी में पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें (वेबसाईट का निर्माण, प्रबंधन व विकास; भाग-13)

वेबसाईट का निर्माण, प्रबंधन व विकास; भाग-13

ब्लोक एडिटर

वर्डप्रेस वेबसाईट में अब नया ब्लोक एडिटर आ गया है। इसके द्वारा हम अलग-२ पैराग्राफ को अलग-२ रूप में एडिट कर सकते हैं। हरेक पैराग्राफ का एक अलग ब्लोक बनता है। कविता के लिए वर्स ब्लोक का प्रयोग होता है। क्वोट के लिए, रिफरेन्स सोर्स का पता डालने के लिए व अन्य हलकी फुल्की या विशेष जानकारी प्रदान करने के लिए क्वोट ब्लॉग का प्रयोग करते हैं। यह पोस्ट की खूबसूरती को भी बढ़ाता है। यदि हमने मुफ्त में डाऊनलोड के लिए कोई पुस्तक या फाईल उपलब्ध करवानी है, तो उसे फाईल ब्लोक में रखते हैं। ऐसी कितनी फाईलें डाऊनलोड हुईं, ये भी वैबसाईट के स्टेट बटन में शो हो जाएगा। किसी चित्र या वीडियो को दिखाने के लिए मीडिया ब्लोक का प्रयोग करते हैं।

वेबसाईट से सम्बंधित कुछ अन्य महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ

रीडर के लाईक, टैग आदि बटन अकाऊंट होल्डर के नाम से स्टोर होते हैं, वेबसाईट के नाम से नहीं। इसलिए अलग-२ अकाऊंट से वेबसाईट को खोलने से वे अलग-२ दिखेंगे। ऐसा वहां होता है, जहां पर एक वेबसाईट के बहुत से मैम्बर होते हैं, जैसे एडमिन, मोडरेटर, राईटर आदि।

शुरू में या एक साल के लिए वेबसाईट होस्टिंग व डोमेन के लिए इकट्ठा व कम पेमेंट लेती है। अर्थात डोमेन नेम निःशुल्क दिया जाता है। डोमेन नेम देने वाली भी बहुत सी कम्पनियां हैं। कुछ तो निःशुल्क सेवा भी देती हैं।

पॉप अप फोलो बटन को बनाने के लिए मेलचिम्प पर साईन अप करना पड़ता है। फ्री प्लान पर केवल एक ही आडियेंस बना सकते हैं। आडियंस का मतलब यहाँ पर वेबसाईट पर विजिट करने वाला व्यक्ति है। आडियेंस बनाने पर मीनू बार से पॉप अप सब्सक्राईब बटन को क्लिक करते हैं। निर्देशानुसार करने पर एक कोड जेनेरेट होता है। उसे वैबसाईट के मेलचिम्प विजेट में कोपी पेस्ट करना पड़ता है। फिर फाईनल पब्लिश बटन दबा दो। हो गया।

हेडर इमेज वह होती है, जो हरेक पेज व पोस्ट पर छपती है। इसे कस्टमाईजर से सेट करते हैं। फीचर्ड इमेज वह होती है, जो सिर्फ एक पेज या पोस्ट के लिए होती है। इसे एडिट बटन से सेट करते हैं।

थीम बदलने से जरूरी नहीं कि नई थीम पर पुरानी सारी सेटिंग व स्टाईल आ जाए। कई बार तो बहुत मेहनत करनी पड़ती है दुबारा से। यदि कोई थीम गलत लगे, तो पुरानी थीम पर भी जा सकते हैं। वही पुरानी सेटिंग फिर से मिल जाएगी। मैं इस w बटन (वैबसाईट के टॉप पर, लेफ्ट में) को ही अधिकांशतः सेटिंग बटन कहता हूँ। इसे कस्टमाईजर बटन भी कह सकते हैं। w बटन दबा कर डिजाइन बटन दबाएँ। उसके अंतर्गत एक थीम्स बटन होगा। उसमें आपकी करेंट थीम का नाम और उसकी जानकारी होगी। अन्य सभी उपलब्ध थीम्स के बारे में भी जानकारी होगी। पुरानी सभी थीम्स देखने के लिए और उन पर रिवर्ट करने के लिए टूल्स के अंतर्गत एक्टिविटी बटन दबाएँ। आपकी सारी पिछली थीम्स वहां पर अपनी सेटिंग्स/कसटमाईजेशन के साथ स्टोर मिलेंगी।

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Website creation, management and development, part-12 (payment and backup)

Payments in website

The WordPress website pays through PayPal or credit card or debit card, and takes payments to renew the website. Although the card must be international. As such, it does not accept the Indian Rupey card. Internet banking mostly does not pay. The company confirms the card with the bank. The message from the bank comes to the website owner, if his mobile number is recorded in the bank.

Changing host

There are many hosting companies for websites. Everyone is priced and rated differently. If someone is finding his current hosting expensive or inaccurate, then they can also get another hosting for the same website. For this, he has to backup his website and import it on the empty website of another host. For this, he has to create his account in the new host.

Exporting website

One cannot make full backup of website in personal plan. However, you can export it. There is a button (customizer button) under the setting. Clicking on it will bring all the text content in the form of a zipped folder, which can be downloaded right there. It also comes on the email, which stays there for 7 days. It does not contain media and uploaded documents. For that, there is a second button for export media. By the way, all paid websites are very safe. However, if something untoward happens, we can retrieve the website from that export file. Although the theme and website customization has to be done afresh, because there is no backing of theme and customization in it. Therefore, the export file should be stored in several places in the cloud, hard disk etc.

Other ways to protect the website

There is another offline method for this. Make an e-book of your website pages, and self-publish it on KDP. You can start with 10000 words. Store its copy on the cloud too. It is the safest method. You will say that every week you print the post, how will it come in the e-book. For this, collect the posts and create another e-book, and publish it. You keep adding every week’s posts to it, and keep uploading it on KDP. It has become a permanent material, and both of your website and book will grow together.

I will tell you another most effective way. The e-world is not as stable as the paper world. When the e-world comes in trouble, even then the paper world will be safe in the boxes lying in the corner of the house. With the help of Print on Demand, you make and maintain print books of your above-mentioned e-books. There will not be any expense for publishing in this. Paper and bindings will only have to be paid with a small commission. If needed, you can recreate the text file from these paper books with the help of OCR. With this, you can make your website stand again and easily from scratch.

In the same manner as above, my following books are made from this website:

1) Kundalini Science – A Spiritual Psychology

2) My website on e-reader

There is also a book from my Quora posts, which is called, “Kundalini demystified – What Premyogi vajra says”.

कृपया इस पोस्ट को हिंदी में पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें [वेबसाईट का निर्माण, प्रबंधन व विकास; भाग-12 (पेमेंट और बैकअप)]

वेबसाईट का निर्माण, प्रबंधन व विकास; भाग-12 (पेमेंट और बैकअप)

वैबसाईट पर पेमेंट

वर्डप्रेस वेबसाईट पेपाल या क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड के थ्रू पेमेंट करती है, और वेबसाईट रिन्यू करने के लिए पेमेंट लेती है। यद्यपि कार्ड अंतर्राष्ट्रीय होना चाहिए। जैसे कि वह भारतीय रुपे कार्ड को एक्सेप्ट नहीं करती। इन्टरनेट बेंकिंग से पेमेंट नहीं होती। कार्ड को कंपनी बैंक से कन्फर्म करती है। बेंक से वह मेसेज वेबसाईट मालिक को आ जाता है, यदि उसका मोबाईल नंबर बेंक में दर्ज हो।

होस्ट को बदलना

वैबसाईट के लिए होस्टिंग (घर/जगह) देने वाली बहुत सी कम्पनियां हैं। सबका अलग-२ रेट है। यदि किसी को अपनी वर्तमान होस्टिंग महंगी या गलत लग रही हो, तो वह अपनी उसी वैबसाईट के लिए दूसरी होस्टिंग भी ले सकता है। इसके लिए उसे अपनी वैबसाईट का बेकप लेकर उसे दूसरे होस्ट की खाली वेबसाईट पर इम्पोर्ट करना पड़ता है। इसके लिए उसे नए होस्ट में अपना अकाऊंट बनाना होता है।

वैबसाईट को एक्सपोर्ट करना

पर्सनल प्लान में वैबसाईट का फुल बेकप नहीं बना सकते। पर उसको एक्सपोर्ट कर सकते हैं। सेटिंग के अंतर्गत एक बटन (कस्टमाईजर बटन) होता है। उस पर क्लिक करने से सारा टेक्स्ट कंटेंट एक जिप्ड फोल्डर के रूप में आ जाएगा, जिसे वहीँ पर डाऊनलोड किया जा सकता है। ईमेल पर भी वह आ जाता है, जो वहां 7 दिन तक के लिए रहता है। उसमें मीडिया और अपलोडीड डॉकुमेंट नहीं होते। उसके लिए साथ ही में एक्सपोर्ट मीडिया का एक दूसरा बटन होता है। वैसे तो पेमेंट वाली सभी वैबसाईट्स बहुत सुरक्षित रखी जाती हैं। फिर भी यदि कुछ अनहोनी घटना हो जाए, तो उस एक्सपोर्ट फाईल से हम वैबसाईट को पुनः प्राप्त कर सकते हैं। यद्यपि थीम व वैबसाईट कस्टमाईजेशन नए सिरे से करनी पड़ती है, क्योंकि इसमें कस्टमाईजेशन का बेकप नहीं हो पाता। इसलिए एक्सपोर्ट फाईल को क्लाऊड में, हार्ड डिस्क में आदि कई स्थानों में संभाल कर रखना चाहिए।

वैबसाईट की सुरक्षा के अन्य तरीके

इसके लिए एक और ऑफलाइन तरीका है। अपने वैबसाईट के पेजस की एक इ-बुक बनाओ, और उसे केडीपी पर सेल्फ पब्लिश कर लो। 10000 शब्दों से शुरू कर सकते हो। उसकी कोपी भी क्लाऊड पर स्टोर कर लो। सबसे सुरक्षित तरीका है। आप बोलोगे कि जो हर हफ्ते आप पोस्ट छापते हो, वह कैसे इ-बुक में आएगी। इसके लिए पोस्टों को इकटठा करके आप एक और ई-बुक बना लो, और उसे पब्लिश कर दो। हर हफ्ते की पोस्ट आप उसमें एड करते रहो, और केडीपी पर अपलोड करते रहो। बन गई न बात। आपकी वैबसाईट और पुस्तक, दोनों एक साथ ग्रो करेंगे।

एक और सबसे कारगर तरीका बताता हूँ। ई-दुनिया इतनी स्थिर नहीं है, जितनी कागजी दुनिया। जब ई-दुनिया संकट में आएगी, उस समय भी कागजी दुनिया घर के कोने में पड़े संदूकों में सही-सलामत रहेगी। आप प्रिंट ओन डिमांड की सहायता से अपनी उपरोक्त ई-पुस्तकों की प्रिंट पुस्तकें बनाकर संभाल कर रख लो। इसमें पब्लिशिंग का खर्चा भी नहीं लगेगा। केवल कुछ थोड़े से कमीशन के साथ कागज़ व बाइंडिंग की कीमत ही चुकानी होगी। जरूरत पड़ने पर इन कागजी पुस्तकों से आप ओसीआर की मदद से टेक्स्ट फाईल पुनः बना सकते हो। इससे आप अपनी वैबसाईट स्क्रेच से पुनः व आसानी से खड़ी कर सकते हो।

उपरोक्त तरीके से ही मेरी निम्नलिखित पुस्तकें मेरी इसी वैबसाईट से बनी हैं-

1) कुण्डलिनी विज्ञान- एक आध्यात्मिक मनोविज्ञान

2) ई-रीडर पर मेरी वैबसाईट

एक पुस्तक तो मेरी क्वोरा पोस्ट से भी बनी है, जिसका नाम है, “कुण्डलिनी रहस्योद्घाटित- प्रेमयोगी वज्र क्या कहता है”।

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ਕੁੰਡਲਨੀ ਤੋਂ ਸੁਹਾਵਣੇ ਸੁਪਨੇ

ਦੋਸਤੋ, ਹੁਣ ਮੈਂ ਆਪਣੇ ਆਪ ਨੂੰ ਹਰ ਹਫਤੇ ਨਵੀਆਂ ਪੋਸਟਾਂ ਲਿਖਣ ਲਈ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਦਾ ਹਾਂ, ਅਤੇ ਨਵੇਂ ਪ੍ਰੋਗਰਾਮ ਵੀ। ਅੱਜ ਰਾਤ ਮੈਂ ਇੱਕ ਤੰਤਰ ਪ੍ਰਣਾਲੀ ਦਾ ਸੁਪਨਾ ਲਿਆ। ਉਹ ਰੋਚਕ, ਸਪਸ਼ਟ ਅਤੇ ਅਸਲ ਦਿਖਾਈ ਦਿੰਦਾ ਸੀ। ਉਹ ਸੁਪਨਾ ਸਵੇਰੇ ਆਇਆ। ਅਜਿਹਾ ਲਗਦਾ ਸੀ ਕਿ ਉਹ ਮੇਰੇ ਪਿਛਲੇ ਜਨਮ ਦੀ ਇਕ ਘਟਨਾ ‘ਤੇ ਅਧਾਰਤ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ। ਇਸ ਲਈ ਮੈਂ ਬਹੁਤ ਜ਼ਿਆਦਾ ਭਾਵਨਾਤਮਕ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਇਸ ਵਿੱਚ ਵਹਿ ਗਿਆ, ਅਤੇ ਮੈਂ ਇਸਦਾ ਅਨੰਦ ਵੀ ਲਿਆ। ਉਸ ਸੁਪਨੇ ਤੋਂ ਮੇਰੇ ਦਿਮਾਗ ਵਿਚ ਪੁਰਾਣੀ ਸਮੇਂ ਦੀ ਤੰਤਰ ਵਿਧੀ ਬਾਰੇ ਤਸਵੀਰ ਸਪਸ਼ਟ ਹੋ ਗਈ। ਜਿਵੇਂ ਕਿ, ਇੱਕ ਕੁੰਡਲਨੀ ਯੋਗੀ ਆਪਣੇ ਸੁਪਨੇ ਵਿੱਚ ਪੁਰਾਣੀਆਂ ਜਾਂ ਉਸਦੀਆਂ ਪਿਛਲੀਆਂ ਜਿੰਦਗੀ ਦੀਆਂ ਘਟਨਾਵਾਂ ਦਾ ਸਾਹਮਣਾ ਕਰਨਾ ਜਾਰੀ ਰੱਖਦਾ ਹੈ। ਉਹ ਸਾਰੇ ਸੁਪਨੇ ਬਹੁਤ ਸਾਰਥਕ ਹੁੰਦੇ ਹਨ।

ਪ੍ਰਾਚੀਨ ਸਮੇਂ ਵਿਚ ਤੰਤਰ ਬਹੁਤ ਉੱਨਤ ਸੀ

ਉਸ ਸੁਪਨੇ ਵਿਚ, ਮੈਂ ਵੇਖਿਆ ਕਿ ਮੈਂ ਆਪਣੇ ਪਰਿਵਾਰ ਨਾਲ ਇਕ ਉੱਚੇ ਪਹਾੜੀ ਅਤੇ ਸੈਰ ਸਪਾਟੇ ਦੀ ਜਗ੍ਹਾ ਵਿਚ ਸੀ, ਜਿਥੇ ਮੈਂ ਤੁਰ ਰਿਹਾ ਸੀ, ਅਤੇ ਮੈਂ ਬਹੁਤ ਅਨੰਦ ਲੈ ਰਿਹਾ ਸੀ। ਮੈਂ ਉਥੇ ਕੁਝ ਪੁਰਾਣੇ ਜਾਣਕਾਰਾਂ ਨੂੰ ਵੀ ਮਿਲਿਆ। ਉਸ ਪਹਾੜ ਦੀਆਂ ਤਲ੍ਹਾਂ ਭੂਰੇ ਵਰਗੇ ਮੈਦਾਨ ਨਾਲ ਜੁੜੀਆਂ ਹੋਈਆਂ ਸਨ। ਉਸ ਜੋੜ ‘ਤੇ ਇਕ ਵਿਸ਼ਾਲ ਮੰਦਰ ਵਰਗਾ ਸਥਾਨ ਸੀ। ਅਸੀਂ ਹੇਠਾਂ ਉਤਰ ਕੇ ਉਸ ਮੰਦਰ ਕੰਪਲੈਕਸ ਵਿੱਚ ਦਾਖਲ ਹੋਏ। ਚਾਰੇ ਪਾਸੇ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਖੂਬਸੂਰਤ ਸੈਰ ਸਨ। ਮੈਂ ਬਹੁਤ ਅਨੰਦ ਲੈ ਰਿਹਾ ਸੀ। ਕੰਪਲੈਕਸ ਵਿਚ ਇਕ ਚਮਕਦਾਰ ਗੁਫਾ ਵਰਗਾ ਸਥਾਨ ਵੀ ਸੀ, ਜਿਸ ਦੇ ਅੰਦਰ ਬਾਜ਼ਾਰਾਂ ਨੂੰ ਵੀ ਸਜਾਇਆ ਗਿਆ ਸੀ। ਮੇਰੀ ਪਤਨੀ ਤੁਰਦਿਆਂ ਅਤੇ ਇਸ ਵਿਚ ਖਰੀਦਦਾਰੀ ਕਰਦੇ ਹੋਏ ਕਿਤੇ ਗੁੰਮ ਗਈ ਸੀ। ਮੈਂ ਉਸ ਦੀ ਵੀ ਭਾਲ ਕਰ ਰਿਹਾ ਸੀ। ਉਸ ਖੋਜ ਵਿਚ, ਮੈਂ ਮੰਦਰ ਵਿਚ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਕਮਰੇ ਵੇਖੇ, ਜੋ ਕਿ ਇਕਸਾਰ ਸਨ। ਹਾਲਾਂਕਿ, ਕੁਝ ਕਮਰੇ ਕੁਝ ਪੌੜੀਆਂ ਦੇ ਉੱਪਰ ਵੀ ਸਨ। ਅਜਿਹਾ ਲਗਦਾ ਸੀ ਜਿਵੇਂ ਸਾਰਾ ਮੰਦਰ ਕੰਪਲੈਕਸ ਇਕ ਵਿਸ਼ਾਲ ਛੱਤ ਹੇਠ ਸੀ। ਮੈਂ ਹੇਠਲੀ ਕਤਾਰ ਵਿਚ ਇਕ ਕਮਰੇ ਵਿਚ ਦਾਖਲ ਹੋਇਆ। ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਲੋਕ ਹੇਠਾਂ ਬੈਠੇ ਸਨ, ਇੱਕ ਦਰੀ ਦੇ ਉੱਪਰ। ਉਥੇ ਵਿਚਕਾਰ, ਜਿਵੇਂ ਮੈਂ ਆਪਣਾ ਬੈਗ ਪਿਛਲੇ ਪਾਸੇ ਤੋਂ ਉਤਾਰਿਆ, ਅਤੇ ਮੈਂ ਵੀ ਬੈਠ ਗਿਆ। ਤਦ ਇੱਕ ਮਹਿਲਾ ਅੰਦਰ ਆਈ, ਅਤੇ ਬਹੁਤ ਪਿਆਰ ਨਾਲ ਮੈਨੂੰ ਗਲੀਆਂ ਦੇ ਨਾਲ ਪੌੜੀਆਂ ਦੇ ਸਿਖਰ ਤੇ ਇੱਕ ਕਮਰੇ ਵਿੱਚ ਲੈ ਗਈ। ਕੁਝ ਪੁਰਾਣੀ ਜਾਣ-ਪਛਾਣ ਉਸ ਦੁਆਰਾ ਮਹਿਸੂਸ ਕੀਤੀ ਗਈ ਸੀ, ਪਰ ਉਹ ਸਪਸ਼ਟ ਨਹੀਂ ਸੀ। ਸ਼ਾਇਦ ਇਸੇ ਲਈ ਮੈਂ ਉਸਦਾ ਅਨੰਦ ਲੈ ਰਿਹਾ ਸੀ। ਉਸ ਨੇ ਮੈਨੂੰ ਇਕ ਜਾਂ ਦੋ ਥਾਵਾਂ ‘ਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਛੂਹਣ ਲਈ ਵੀ ਲਿਆ। ਉਹ ਉਸ ਕਮਰੇ ਵਿਚ ਕੁਰਸੀ ਤੇ ਬੈਠ ਗਈ। ਉਸਦੇ ਸਾਹਮਣੇ ਮੇਜ਼ ਉੱਤੇ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਕਾਗਜ਼ਾਤ ਪਏ ਸਨ। ਉਸ ਦੇ ਕੋਲ ਕੁਰਸੀਆਂ ਉੱਤੇ ਦੋ-ਚਾਰ ਆਦਮੀ ਵੀ ਬੈਠੇ ਸਨ। ਮਹਿਲਾ ਨੇ ਬੀਮਾ ਵਰਗੀ ਯੋਜਨਾ ਦੇ ਕੁਝ ਕਾਗਜ਼ ਦਿਖਾਏ, ਅਤੇ ਮੈਨੂੰ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਮੇਰੀ ਪਤਨੀ ਉਸ ਯੋਜਨਾ ਲਈ ਸਹਿਮਤ ਹੋ ਗਈ ਹੈ। ਜਦੋਂ ਮੈਂ ਪਿੱਛੇ ਮੁੜਨਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕੀਤਾ ਤਾਂ ਉਸਦੇ ਚਿਹਰੇ ‘ਤੇ ਹਲਕੀ ਨਿਰਾਸ਼ਾ ਸੀ। ਫਿਰ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਕੁਝ ਹੋਰ ਗਾਹਕਾਂ ਦੇ ਕੰਮ ਦਾ ਨਿਪਟਾਰਾ ਕਰਨਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੱਤਾ, ਤਾਂ ਜੋ ਮੈਨੂੰ ਮੌਕਾ ਮਿਲਿਆ ਅਤੇ ਚਲ ਗਿਆ। ਮੈਂ ਉਸੇ ਕਮਰੇ ਵਿਚ ਵਾਪਸ ਆਇਆ ਜਿਥੇ ਮੈਂ ਪਹਿਲਾਂ ਬੈਠਾ ਸੀ, ਕਿਉਂਕਿ ਮੈਂ ਆਪਣਾ ਬੈਗ ਉਥੇ ਹੀ ਭੁੱਲ ਗਿਆ। ਪਰ ਮੈਂ ਆਪਣਾ ਬੈਗ ਉਥੇ ਨਹੀਂ ਲੱਭ ਸਕਿਆ। ਮੈਂ ਕਾਫ਼ੀ ਉਦਾਸ ਸੀ ਕਿਉਂਕਿ ਮੇਰੇ ਕੋਲ ਇਸ ਵਿੱਚ ਕੁਝ ਹੋਰ ਮਹੱਤਵਪੂਰਣ ਚੀਜ਼ਾਂ ਦੇ ਨਾਲ ਇੱਕ ਮਹਿੰਗਾ ਕਿੰਡਲ ਈ-ਰੀਡਰ ਸੀ। ਮੈਂ ਬਹੁਤ ਨਿਰਾਸ਼ ਬੈਗ ਦੀ ਭਾਲ ਸ਼ੁਰੂ ਕੀਤੀ। ਮੈਂ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਕਮਰਿਆਂ ਵਿਚ ਤਲਾਸ਼ੀ ਲਈ, ਇਹ ਸੋਚਦਿਆਂ ਕਿ ਕੀ ਮੈਂ ਦੂਜੇ ਕਮਰਿਆਂ ਵਿਚ ਬੈਠਾ ਹੋਇਆ ਸੀ। ਮੈਂ ਫਿਰ ਵਿਚਕਾਰਲੀ ਖੁੱਲੀ ਲਾਬੀ ਵਿਚ ਗਿਆ, ਜਿਸ ਵਿਚ ਉਹ ਕਮਰੇ ਖੁੱਲ੍ਹਦੇ ਸਨ। ਇਹ ਰੇਲਵੇ ਸਟੇਸ਼ਨ ਦੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਬਹੁਤ ਖੁੱਲੀ ਜਗ੍ਹਾ ਸੀ, ਜਿੱਥੇ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀ ਗਤੀਵਿਧੀ ਸੀ। ਉਥੇ ਇਕ-ਦੋ ਪੁਲਿਸ ਵਾਲੇ ਵੀ ਸੀਮੈਂਟ ਬੈਂਚਾਂ ‘ਤੇ ਬੈਠੇ ਸਨ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਪੁੱਛਿਆ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਲਾਪਰਵਾਹੀ ਕਰਦਿਆਂ ਮੈਨੂੰ ਉਨ੍ਹਾਂ ਤੋਂ ਛੁਟਕਾਰਾ ਪਾਉਣ ਲਈ ਕਿਹਾ ਕਿ ਮੇਰਾ ਬੈਗ ਕਦੇ ਨਹੀਂ ਮਿਲੇਗਾ, ਅਤੇ ਕਿਸੇ ਨੇ ਜ਼ਰੂਰ ਇਸ ਨੂੰ ਚੁੱਕਿਆ ਹੋਵੇਗਾ। ਮੈਂ ਫਿਰ ਉਸੇ ਕਮਰੇ ਦਾ ਦਰਵਾਜ਼ਾ ਖੋਲ੍ਹਿਆ ਜਿੱਥੇ ਮੈਂ ਬੈਠਾ ਸੀ। ਰਾਤ ਦੇ ਸੂਟ ਵਿਚ ਦੋ ਕੋਮਲ ਆਦਮੀ ਸ਼ਰਾਬ ਪੀਣ ਦਾ ਅਨੰਦ ਲੈ ਰਹੇ ਸਨ। ਉਹ ਦੋਵੇਂ ਦਰੀ ਤੇ ਆਰਾਮ ਨਾਲ ਬੈਠੇ ਸੀ। ਉਹ ਦਰਮਿਆਨੇ ਆਕਾਰ ਦੇ ਅਤੇ ਕੁਝ ਹਨੇਰੇ ਰੰਗ ਦਿਖਾਈ ਦਿੰਦੇ ਸੀ। ਹਲਕੇ ਨਸ਼ੇ ਦੀ ਖੁਸ਼ਹਾਲ ਮੁਸਕਾਨ ਉੰਨਾਂ ਦੇ ਚਿਹਰੇ ‘ਤੇ ਜ਼ਾਹਰ ਸੀ। ਪੁੱਛਣ ‘ਤੇ ਉੰਨਾਂ ਨੇ ਮੈਨੂੰ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਮੇਰਾ ਬੈਗ ਉਸੇ ਕਮਰੇ ਵਿਚ ਪਿਆ ਸੀ। ਮੈਂ ਬਹੁਤ ਖੁਸ਼ ਹੋਇਆ ਅਤੇ ਉੰਨਾਂ ਨੂੰ ਕਿਹਾ ਕਿ ਸ਼ਰਾਬ ਦੇ ਨਾਲ, ਗਿਆਨ ਦੀ ਅੱਖ ਤੁਹਾਡੇ ਵਿੱਚ ਖੁੱਲ੍ਹ ਗਈ, ਤਾਂ ਜੋ ਤੁਸੀਂ ਮੇਰਾ ਬੈਗ ਲੱਭ ਸਕੋ। ਉਹ ਬੜੀ ਖ਼ੁਸ਼ੀ ਨਾਲ ਮੁਸਕਰਾਏ, ਅਤੇ ਹੱਥ ਵਿਚ ਇਕ ਪੇਗ ਫੜ ਕੇ ਮੈਨੂੰ ਕਿਹਾ ਕਿ ਮੈਂ ਵੀ ਇਸ ਨੂੰ ਦੇਵੀ ਦੇ ਨਾਮ ‘ਤੇ ਪੀਵਾਂਗਾ। ਮੈਂ ਮੁਸਕਰਾਇਆ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਧੰਨਵਾਦ ਕੀਤਾ, ਅਤੇ ਚਲਿਆ ਗਿਆ। ਹਾਲਾਂਕਿ ਮੈਂ ਲਗਾਤਾਰ ਇਹ ਸੋਚ ਰਿਹਾ ਸੀ ਕਿ ਮੈਂ ਦੇਵੀ ਮਾਂ ਦੇ ਨਾਮ ‘ਤੇ ਇਕ ਪੈੱਗ ਲਗਾਵਾਂਗਾ। ਪਰ ਮੈਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਤੋਂ ਇਨਕਾਰ ਕਰ ਦਿੱਤਾ, ਇਸ ਲਈ ਮੈਂ ਪਿੱਛੇ ਮੁੜਨਾ ਨਹੀਂ ਚਾਹੁੰਦਾ ਸੀ। ਦੁਕਾਨਾਂ ਦੀ ਇੱਕ ਕਤਾਰ ਕਾਮ੍ਪ੍ਲੇਕ੍ਸ ਦੇ ਬਾਹਰ ਆਉਂਦੀ ਵੇਖੀ ਗਈ। ਮੈਂ ਕੁਝ ਮਠਿਆਈਆਂ ਖਰੀਦਣ ਲਈ ਇਕ ਮਿੱਠੀ ਦੁਕਾਨ ਵਿਚ ਘੁਸਪੈਠ ਕੀਤੀ। ਦੁਕਾਨ ਦੇ ਬਿਲਕੁਲ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਵਿਚ ਉਥੇ ਖੜ੍ਹੇ, ਮੈਨੂੰ ਕੁਝ ਬਹੁਤ ਜਾਣੂ ਦੋਸਤ ਮਿਲੇ ਜੋ ਖੁਸ਼ੀ ਨਾਲ ਸ਼ਰਾਬ ਬਾਰੇ ਗੱਲ ਕਰਨ ਲੱਗੇ। ਮੈਂ ਕਿਹਾ ਅਜਿਹੀਆਂ ਗੱਲਾਂ ਨਾ ਕਹੋ, ਨਹੀਂ ਤਾਂ ਮੇਰਾ ਮਨ ਵੀ ਦੇਵੀ ਦੇ ਨਾਮ ‘ਤੇ ਪੈੱਗ ਬਣਾ ਦੇਵੇਗਾ। ਇਹ ਸੁਣ ਕੇ ਹਰ ਕੋਈ ਹੱਸਣ ਲੱਗ ਪਿਆ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੁਕਾਨਾਂ ਦੀ ਕਤਾਰ ਵਾਲੀ ਸੜਕ ਚੜ੍ਹਨ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿਚ ਬਾਹਰ ਜਾ ਰਹੀ ਸੀ। ਕੁਝ ਚੜ੍ਹਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ, ਮੈਂ ਹੇਠਾਂ ਸਾਈਡ ‘ਤੇ ਇਕ ਦੁਕਾਨ ਦੇ ਸੀਮੈਂਟ ਦੇ ਬਣੇ ਕੰਕਰੀਟ ਪਲੇਟਫਾਰਮ’ ਤੇ ਚੜ੍ਹਿਆ। ਫਿਰ ਮੈਂ ਅਜੀਬ ਅਤੇ ਦਿਲ ਨੂੰ ਛੂਹਣ ਵਾਲੇ ਸੰਗੀਤ ਦੀਆਂ ਆਵਾਜ਼ਾਂ ਸੁਣਨਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੱਤਾ। ਉਹ ਸਜਾਏ ਗਏ ਰੱਥ ਉੱਤੇ ਮਾਤਾ ਦੇਵੀ ਦੀ ਝਾਂਕੀ ਲੈ ਰਹੀ ਹੋਵੇਗੀ। ਮੈਂ ਦੇਵੀ ਦੇ ਪਿਆਰ ਨਾਲ ਇੰਨਾ ਭੜਕ ਗਿਆ ਸੀ ਕਿ ਮੇਰੀਆਂ ਅੱਖਾਂ ਪਿਆਰ ਦੇ ਹੰਝੂਆਂ ਨਾਲ ਭਰੀਆਂ ਹੋਈਆਂ ਸਨ ਅਤੇ ਮੈਂ ਨਰਮ ਆਵਾਜ਼ ਵਿਚ ਰੋਣਾ ਸ਼ੁਰੁ ਕਰ ਦਿੱਤਾ। ਮੈਂ ਵਾਰ ਵਾਰ ਆਪਣੀ ਸੱਜੀ ਬਾਂਹ ਨੂੰ ਮੋੜ ਰਿਹਾ ਸੀ, ਆਪਣੀਆਂ ਅੱਖਾਂ ਨੂੰ ਇਸ ਤੋਂ ਪੂੰਝ ਰਿਹਾ ਸੀ, ਅਤੇ ਇਥੋਂ ਤਕ ਕਿ ਆਪਣੀਆਂ ਅੱਖਾਂ ਨੂੰ ਢਕ ਰਿਹਾ ਸੀ। ਮੈਂ ਇਹ ਇਸ ਲਈ ਕਰ ਰਿਹਾ ਸੀ ਤਾਂ ਕਿ ਕੋਈ ਵੀ ਮੈਨੂੰ ਰੋਣ ਦੇ ਵੱਜੋਂ ਅਜੀਬ ਨਾ ਸਮਝੇ, ਅਤੇ ਇਹ ਮੈਨੂੰ ਮੇਰੇ ਪਿਆਰ ਦੀ ਭਾਵਨਾ ਵਿੱਚ ਵਹਿਣ ਤੋਂ ਨਹੀਂ ਰੋਕੇ। ਫਿਰ ਮੈਂ ਸੋਚਿਆ ਕਿ ਕੋਈ ਵੀ ਉਸ ਅਜੀਬ ਜਗ੍ਹਾ ਤੇ ਮੈਨੂੰ ਨਹੀਂ ਪਛਾਣੇਗਾ। ਇਸ ਲਈ ਮੈਂ ਖੁੱਲ੍ਹੇ ਦਿਲ ਨਾਲ ਉੱਚੀ-ਉੱਚੀ ਰੋਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੱਤਾ। ਫੇਰ ਮੈਂ ਸੜਕ ਤੇ ਪਿਆ ਇੱਕ ਸ਼ਰਧਾਲੂ ਦੇਖਿਆ, ਜਿਹੜਾ ਘੁੰਮ ਰਿਹਾ ਸੀ ਅਤੇ ਉਪਰ ਵੱਲ ਆ ਰਿਹਾ ਸੀ। ਉਹ ਮਾਂ ਦੇਵੀ ਦਾ ਇੱਕ ਬਹੁਤ ਵੱਡਾ ਭਗਤ ਹੋਵੇਗਾ। ਉਹ ਮੱਧਮ ਗੂੜ੍ਹੇ ਰੰਗ ਦਾ ਵੀ ਸੀ। ਉਹ ਖੜ੍ਹਾ ਹੋ ਗਿਆ ਅਤੇ ਵੱਡੀਆਂ ਅਤੇ ਰੂਹਾਨੀ ਅੱਖਾਂ ਨਾਲ ਮੇਰੇ ਵੱਲ ਵੇਖਿਆ, ਅਤੇ ਉਹ ਵੀ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਰੂਹਾਨੀ ਪਿਆਰ ਵਿੱਚ ਭੜਕ ਗਿਆ। ਫੇਰ ਮੈਂ ਇੱਕ ਹਨੇਰੇ ਅਤੇ ਸ਼ਕਤੀਸ਼ਾਲੀ ਆਦਮੀ ਨੂੰ ਵੇਖਿਆ ਜਿਸਨੇ ਬੱਕਰੇ ਦੇ ਬੱਚੇ ਨੂੰ ਆਪਣੇ ਖੱਬੇ ਹੱਥਾਂ ਨਾਲ ਸੀਧਾ ਉੱਪਰ ਗਰਦਨ ਤੋਂ ਫੜਿਆ ਹੋਇਆ ਸੀ, ਅਤੇ ਉਸਨੂੰ ਗੁੱਸੇ ਅਤੇ ਹਿੰਸਕ ਭਾਵਨਾਵਾਂ ਨਾਲ ਵੇਖਿਆ. ਉਹ ਮਾਤਾ ਦੇਵੀ ਦੀ ਸ਼ਰਧਾ ਨਾਲ ਕੁਝ ਜਾਪ ਰਿਹਾ ਸੀ. ਬੱਚਾ ਮਿਮਿਯਾ ਰਿਹਾ ਸੀ. ਉਸਦਾ ਦੂਸਰਾ ਹੱਥ ਇੱਕ ਵੱਡਾ ਖੰਜਰ ਫੜ ਕੇ ਸਿੱਧਾ ਹੇਠਾਂ ਸੀ. ਉਹ ਵਾਰ ਵਾਰ ਮਾਂ ਦੇਵੀ ਦਾ ਨਾਮ ਲੈ ਰਿਹਾ ਸੀ। ਮੈਂ ਦੁਕਾਨ ਵੱਲ ਪਰਤਿਆ, ਤਾਂ ਜੋ ਮੈਂ ਉਹ ਬੇਰਹਿਮ ਦ੍ਰਿਸ਼ ਨਾ ਵੇਖ ਸਕਾਂ. ਥੋੜ੍ਹੀ ਦੇਰ ਬਾਅਦ, ਮੈਂ ਅੱਗੇ ਵਧਿਆ ਤਾਂ ਜੋ ਮੈਂ ਵੇਖ ਸਕਾਂ ਕਿ ਕੀ ਉਥੇ ਇਕ ਉਜਾੜਿਆ ਹੋਇਆ ਧੜ ਅਤੇ ਬੱਚੇ ਦਾ ਸਿਰ ਸੀ, ਅਤੇ ਚਾਰੇ ਪਾਸੇ ਲਹੂ ਸੀ. ਪਰ ਉਥੇ ਮੌਜੂਦ ਸਾਰੇ ਕਿਡ ਪਹਿਲਾਂ ਦੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਜਿਉਂਦੇ ਸਨ, ਅਤੇ ਖੁਸ਼ੀ ਨਾਲ ਕੰਬ ਰਹੇ ਸਨ. ਮੈਂ ਉਸ ਤੋਂ ਸ਼ਾਂਤੀ ਦਾ ਸਾਹ ਲਿਆ, ਅਤੇ ਖੁਸ਼ ਮਹਿਸੂਸ ਕੀਤਾ. ਸ਼ਾਇਦ ਦੇਵੀ ਮਾਂ ਨੂੰ ਇਕ ਪ੍ਰਤੀਕ ਰੂਪ ਵਿਚ ਪੇਸ਼ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਸੀ. ਫਿਰ ਅਲਾਰਮ ਵੱਜਿਆ, ਅਤੇ ਮੇਰਾ ਸੁਪਨਾ ਟੁੱਟ ਗਿਆ.

ਉਸ ਸੁਪਨੇ ਨੇ ਮੈਨੂੰ ਪ੍ਰਾਚੀਨ ਸਮੇਂ ਦੀ ਉੱਨਤ ਤੰਤਰ ਪ੍ਰਣਾਲੀ, ਖ਼ਾਸਕਰ ਕਾਲੀ ਤੰਤਰ ਪ੍ਰਣਾਲੀ ਬਾਰੇ ਸਪਸ਼ਟ ਭਾਵਨਾ ਦਿੱਤੀ. ਤੰਤਰ ਪ੍ਰਾਚੀਨ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਉੱਨਤ ਵਿਗਿਆਨ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਸੀ, ਅਤੇ ਲੋਕਾਂ ਵਿੱਚ ਫੈਲਿਆ. ਪਰ ਉਸ ਵਿਚ ਹਿੰਸਾ, ਵਿਭਚਾਰ ਆਦਿ ਦੇ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਨੁਕਸ ਵੀ ਸਨ, ਖ਼ਾਸਕਰ ਜਦੋਂ ਉਸ ਨੂੰ ਸਹੀ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਨਹੀਂ ਅਪਣਾਇਆ ਗਿਆ ਸੀ. ਸਿਰਫ ਤੰਤਰ ਸਿਸਟਮ ਦੀ ਦੁਰਵਰਤੋਂ ਕਰਕੇ ਹੀ ਇਸ ਦਾ ਨਾਸ਼ ਹੋਇਆ. ਇਸਲਾਮ ਵੀ ਇਕ ਕਿਸਮ ਦਾ ਅਤਿਵਾਦੀ ਤੰਤਰ ਹੈ। ਇਹ ਇੰਨਾ ਕੱਟੜ ਹੈ ਕਿ ਲੋਕ ਇਸ ਬਾਰੇ ਗੱਲ ਕਰਨ ਤੋਂ ਝਿਜਕਦੇ ਹਨ. ਇਸੇ ਲਈ ਇਹ ਇਸ ਤਰਾਂ ਹੈ ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਇਹ ਹੈ. ਪੁਰਾਣੇ ਸਮੇਂ ਵਿਚ ਹਿੰਦੂ ਤੰਤਰ ਪ੍ਰਣਾਲੀ ਵਿਚ ਵੀ ਨਰਬਲੀ ਦੀ ਪ੍ਰਥਾ ਸੀ, ਪਰੰਤੂ ਜਦੋਂ ਇਸ ਦਾ ਵਿਆਪਕ ਵਿਰੋਧ ਹੋਇਆ ਤਾਂ ਇਸ ਨੂੰ ਬੰਦ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ।

ਪ੍ਰੇਮਯੋਗੀ ਵਜਰਾ ਦੇ ਤੰਤਰ ਨਾਲ ਸੰਬੰਧਿਤ ਆਪਣਾ ਤਜ਼ੁਰਬਾ

ਉਸਨੇ ਕੁੰਡਲਨੀ ਦੇ ਵਿਕਾਸ ਲਈ ਕਿਸੇ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਤੰਤਰ ਵਿਧੀ ਦਾ ਸਹਾਰਾ ਨਹੀਂ ਲਿਆ. ਉਸਨੇ ਦੂਸਰੇ ਆਮ ਲੋਕਾਂ ਵਾਂਗ ਉਹੀ ਕੰਮ ਕੀਤੇ, ਪਰ ਉਸਨੇ ਉਹ ਕੰਮ ਇੱਕ ਅਦ੍ਵਿਤ ਭਾਵਵਾਦੀ / ਤਾਂਤ੍ਰਿਕ ਨਜ਼ਰੀਏ ਨਾਲ ਕੀਤੇ. ਇਹ ਤਰੀਕਾ ਹੀ ਉਚਿਤ ਹੈ. ਇਹ ਤੰਤਰ ਸਿਸਟਮ ਦੀ ਦੁਰਵਰਤੋਂ ਨਹੀਂ ਕਰਦਾ.

कृपया इस पोस्ट को हिंदी में पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें (कुण्डलिनी से सुहाने सपने )                                    

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kundalini for pleasant dreams

Friends, now I get myself to write new posts every week, and new events. Tonight I dreamed of a tantric system. That looked lively, clear and real. That dream came in the morning hours. It seemed that it must have been based on an incident of my previous birth. That is why I was very much emotionally swept away in it, and I enjoyed it. From that dream, the picture in my mind about the tantra of ancient times became clear. As such, a Kundalini Yogi keeps on facing the events of old or his past lives in his dream. All those dreams are very meaningful.

Tantra was very advanced in ancient times

In that dream, I saw that I was in a place like a high mountain tourist place with my family, where I was walking, and I was enjoying a lot. I also met some old acquaintances there. The foothills of that mountain were connected to a plain like terrain. There was a place like a giant temple on that joint. We got down and entered that temple complex. There were many beautiful walks around. I was enjoying a lot. The complex also had a luminous cave-like structure, inside which the markets were also adorned. My wife was lost somewhere while walking and shopping in it. I was looking for her too. In that research, I saw many rooms in the temple, which were in line. However, some rooms were also up some stairs. It seemed as if the entire temple complex was under a giant roof. I entered a room in the bottom row. Many people were sitting on the floor carpet. In the middle of room, I took off my bag from the back, and I sat down. Then a woman came in, and with great love and belongingness took me to a room at the top of the stairs, along the streets. Some old acquaintance was also felt with her, but that was not clear. Maybe that is why I was enjoying her. She even got me to touch her at one or two places. She sat in a chair in that room. Many papers were lying on the table in front of her. Two-four men were also sitting on chairs near her. The woman showed some papers of an insurance-like scheme, and told me that my wife had agreed to that plan. When I started to turn back, there was a slight disappointment on her face. Then they started settling the work of some other customers, so that I got the chance and moved away. I came back to the same room where I was sitting earlier, because I forgot my bag right there. However, I did not find my bag there. I was quite depressed because I had an expensive Kindle e-reader along with some other important things in it. I started searching the bag very disappointed. I searched in many rooms, wondering if I was sitting in other rooms. I then went to the open lobby in the middle, in which those rooms used to open. It was a very open space like a railway station, where there was a lot of activity. There, one or two policemen were also sitting on a cement bench. I asked them, but they casually replied to get rid of me that my bag would never be found, and someone must had picked that up. I again opened the door to the same room where I was sitting. There were two gentle men enjoying and drinking wine in night suits. Both of them were sitting in squatting posture comfortably. They looked of somewhat medium size with belly little out and somewhat dark. Happy smile due to light sedation was visible on their face. On asking, they told me that my bag was lying in the same room. I was very happy and told them that with alcohol, the eye of knowledge opened in them, so that they could find my bag. They smiled very happily, and holding a peg in their hand said to me that I too should have drunk that in the name of Mother Goddess. I smiled, thanked them, and walked away. Although I was constantly thinking that I would put a peg in the name of Devimata/mother goddess. However, I refused them, so I did not want to turn back. A queue of shops was seen coming out of the premises. I sneaked into a sweet shop to buy some sweets. Standing there at the very beginning of the shop, I found some very familiar friends who happily started talking about alcohol. I said do not say such things, otherwise, my mind will also make a peg in the name of Mother Goddess. Hearing this, everyone started laughing. The road lined with those shops was going out in the direction of climbing. After some climbing, I climbed a concrete platform in front of a shop on the valley side of road. Then I started hearing the sounds of bizarre and heart touching music. People would be taking a tableau of Mother Goddess on a decorated chariot. I was so swept away by the love of Mother Goddess that I was flooded with tears of love in my eyes, and I started crying in a soft voice. I was repeatedly folding my right arm, wiping my eyes with it, and even covering my eyes. I was doing this so that no one knows me as weeping and weird, and that does not distract me from flowing in my feeling of love. Then I thought that nobody would recognize me in that strange place. Therefore, I started crying loudly with an open heart. Then I saw a lying devotee on the road, who was rolling and coming upwards. She would be a great devotee of Mother Goddess. He was also medium dark colored. He stood up and looked at me with big and soulful eyes, and he too was carried away as if in spirit. Then I saw a dark and powerful man holding a goat kid with his left hand straight above his head, catching its neck, and watching it with anger and violent expressions mixed with devotion to the Mother Goddess. Kid was screaming with fear.

His other right hand was straight down, holding a large dagger. He was repeatedly taking the name of Mother Goddess. I retreated to the shop, so that I would not see that ruthless scene. After a while, I moved forward so that I could see if there was a dislocated trunk and head of the kid, and there was blood all around. However, all the kids there were alive as before, and were happily moving around. I breathed peace with that, and felt happy. Perhaps offering was made to the Goddess Mother in a symbolic form. Then the alarm sounded, and my dream broke.

That dream gave me a clear feeling about the advanced tantra, especially black tantra of ancient times. Tantra was in the form of an advanced science in ancient times, and was well spread among people. However, that also had many defects like violence, adultery etc., especially when that was not adopted properly. It was only due to misuse of the tantra that it declined. Islam is also a kind of extremist tantra. It is so fanatical that people shy away from talking about it. That is why it remains as it is. The Hindu system also had the practice of Narbali/human sacrifice in ancient times, but it was discontinued when there was widespread opposition to it.

Own experience of Premyogi vajra related to Tantra

He did not resort to any special or dedicated tantra for the development of his Kundalini. He did the same things as other ordinary people do, but he did those tasks with a non-dual / tantric point of view. This method appears appropriate. This does not abuse the tantra.

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कुण्डलिनी से सुहाने सपने

दोस्तों, अब मुझे हर हफ्ते नई पोस्ट लिखने के लिए खुद ही हिंट मिल जाती है, और नई घटना भी। आज रात को मैंने एक तंत्र से सम्बंधित स्वप्न देखा। वह जीवंत, स्पष्ट व असली लग रहा था। वह स्वप्न सुबह के समय आया। ऐसा लग रहा था कि वह मेरी किसी पूर्वजन्म की घटना पर आधारित रहा होगा। तभी तो मैं उसमें भावनात्मक रूप से बहुत ज्यादा बह गया था, और मुझे आनंद भी आया। उस स्वप्न से प्राचीनकाल के तंत्र के बारे में मेरे मन में तस्वीर स्पष्ट हो गई। वैसे भी एक कुण्डलिनी योगी का पुरानी या अपने पूर्वजन्मों की घटनाओं से सामना उसके स्वप्न में होता ही रहता है। वे सारे स्वप्न बहुत मीनिंगफुल होते हैं।

प्राचीनकाल में तंत्र बहुत उन्नत था

उस सपने में मैंने देखा कि मैं अपने परिवार सहित एक ऊंचे पहाड़ के किसी पर्यटक स्थल जैसे स्थान पर था, जहां पर चहल-पहल थी, व बहुत आनंद आ रहा था। कुछ पुराने परिचितों से भी वहां मेरी मुलाक़ात हुई। उस पहाड़ की तलहटी एक मैदानी जैसे भूभाग से जुड़ी हुई थी। उस जोड़ पर एक विशालकाय मंदिर जैसा स्थान था। हम नीचे उतर कर उस मंदिर परिसर में प्रविष्ट हो गए। चारों और बहुत सुन्दर चहल-पहल थी। बहुत आनंद आ रहा था। परिसर में एक प्रकाशमान गुफा जैसी संरचना भी थी, जिसके अन्दर भी बाजार सजे हुए थे। मेरी पत्नी उसमें घुमते-फिरते और शौपिंग करते हुए कहीं मुझसे खो गई थी। मैं उसे भी खोज रहा था। उस खोजबीन में मैंने मंदिर के बहुत से कमरे देखे, जो लाइन में थे. हालांकि कुछ कमरे सीढ़ियों से कुछ ऊपर चढ़कर भी थे। ऐसा लग रहा था, जैसे कि सारा मंदिर परिसर किसी विशालकाय छत के नीचे था। नीचे की पंक्ति के एक कमरे में मैं घुस गया। वहां पर बहुत से लोग नीचे, एक दरी पर बैठे थे। वहां पर बीच में जैसे मैंने अपना बैग पीठ से उतार कर रख दिया, और मैं भी बैठ गया। तभी एक महिला अन्दर आई, और मुझे बड़े प्यार व अपनेपन से अपने साथ, गलियों से होते हुए, सीढ़ियों के ऊपर के एक कमरे तक ले गई। उससे कुछ पुरानी जान-पहचान भी महसूस हो रही थी, पर वह स्पष्ट नहीं थी। शायद इसीलिए मुझे उसके साथ आनंद आ रहा था। एक-दो स्थान पर उसने मुझे अपना स्पर्श भी करवाया। वह उस कमरे में एक कुर्सी पर बैठ गई। उसके सामने मेज पर बहुत से कागजात पड़े थे। उसके समीप ही दो-चार पुरुष लोग भी कुर्सियों पर बैठे हुए थे। महिला ने किसी बीमा जैसी योजना के कुछ कागजात जैसे दिखाए, और मुझसे कहा कि मेरी पत्नी ने उस योजना के लिए हामी भरी थी। मैं मुकरने लगा, तो उसके चेहरे पर कुछ हलकी मायूसी जैसी दिखी। तभी वे लोग कुछ अन्य ग्राहकों का काम निपटाने लगे, जिससे मैं मौक़ा पाकर वहां से खिसक गया। मैं वापिस उसी कमरे में आ गया, जहां पहले बैठा था, क्योंकि मैं अपना बैग वहीं भूल गया था। पर मुझे अपना बैग वहां नहीं मिला। मैं काफी उदास हुआ, क्योंकि उसमें कुछ अन्य जरूरी चीजों के साथ मेरा महँगा किन्डल ई-रीडर भी था। मैं बहुत निराश होकर बैग खोजने लगा। मैंने कई कमरों में तलाश की, यह सोचकर कि कहीं मैं दूसरे कमरों में तो नहीं बैठा। मैं फिर बीच वाली खुली लॉबी में गया, जिसके अन्दर वे कमरे खुलते थे। वह एक रेलवे स्टेशन की तरह बहुत खुली-डुली जगह थी, जहाँ पर काफी चहल-पहल थी। वहां एक-दो पुलिस वाले भी सीमेंट के बेंच पर बैठे हुए थे। उनसे पूछा, तो उन्होंने लापरवाही से व मुझसे पीछा छुड़ाने के लिए कहा कि मेरा बैग कभी नहीं मिलेगा, और उसे किसी ने उठा लिया होगा। मैंने फिर से उसी कमरे का दरवाजा खोला, जहां मैं बैठा हुआ था। वहां पर दो भद्र पुरुष नाईट सूट में मदिरा पीने का आनंद ले रहे थे। वे दोनों पालथी लगा कर आराम से बैठे फुए थे। वे मध्यम कद-काठी के और कुछ सांवले लग रहे थे। मदहोशी की ख़ुशी की मुस्कान उनके चेहरे पर साफ झलक रही थी। पूछने पर उन्होंने मुझे बताया कि मेरा बैग वहीं कमरे में पड़ा था। मैं बहुत खुश हुआ और उनसे कहा कि शराब से आपके अन्दर ज्ञान की आँख खुली, जिससे आप मेरा बैग ढूंढ सके। वे बहुत खुश होकर मुस्कुराने लगे, और एक पेग हाथ में पकड़ कर मुझसे बोले कि मैं भी उसे देवी माता के नाम पर पी लेता। मैंने उन्हें मुस्कुराते हुए धन्यवाद कहा, और चल दिया। यद्यपि मेरा मन लगातार कर रहा था कि मैं एक पेग देविमाता के नाम पर लगा लेता। परन्तु मैं उन्हें मना कर चुका था, इसलिए वापिस नहीं मुड़ना चाहता था। परिसर से बाहर निकल कर ही दुकानों की एक कतार लगी हुई देखी। मैं एक मिठाई की दुकान में कुछ मिठाई खरीदने के लिए घुस गया। वहां पर दुकान के शुरू में ही खड़े मुझे कुछ चिर-परिचित दोस्त मिले, जो ख़ुशी के साथ शराब के बारे में कुछ आपसी बातें करने लगे। मैंने कहा कि ऐसी बातें न करो, नहीं तो मेरा मन भी देवी माता के नाम पर एक पेग लगाने का कर जाएगा। ऐसा सुनकर सब हंसने लगे। उन दुकानों की कतार वाली सड़क चढ़ाई की दिशा में बाहर जा रही थी। कुछ चढ़ाई चढ़ कर मैं निचले तरफ की एक दुकान के सीमेंट से बने पक्के प्लेटफोर्म पर चढ़ गया। तभी मुझे विचित्र व दिल को छूने वाले गाजे-बाजे/संगीत की आवाजें सुनाई देने लगीं। वह सजे हुए रथ पर देवी माता की झांकी निकल रही होगी। मैं देवी माता के प्यार मैं इतना बह गया कि मेरी आँखों में प्रेम के आंसुओं की बाढ़ आ गई, और मैं हलकी आवाज में रुक-२ कर रोने लगा। मैं बार-बार अपनी दाहिनी बाजू को फोल्ड करके, उससे अपनी आँखों को पोंछ रहा था, और आँखों को ढक भी रहा था। वह मैं इसलिए कर रहा था, ताकि कोई मुझे रोता हुआ जानकार अजीब न समझे, और उससे मेरे प्यार की भावना में बहने में रुकावट न पैदा हो। फिर मैंने सोचा कि उस अजनबी स्थान पर मुझे कोई नहीं पहचानता होगा। इसलिए मैं खुले दिल से जोर-जोर से रोने लगा। तभी मुझे एक लेटा हुआ भक्त सड़क पर दिखा, जो रोल होकर ऊपर की तरफ आ रहा था। वह देवी माता का कोई महान भक्त होगा। वह भी मध्यम से सांवले रंग का था। उसने खड़े होकर मुझे बड़ी-बड़ी व भावपूर्ण आँखों से देखा, और वह भी मानो भावना में बह गया। तभी मैंने देखा कि एक सांवले व ताकतवर आदमी ने एक बकरी के बच्चे को एक हाथ से सीधा अपने सिर से भी ऊपर, गले से पकड़ कर उठाया हुआ था, और उसे देवी माता की भक्ति के साथ मिश्रित क्रोध व हिंसक भाव के साथ देख रहा था। किड मिमिया रहा था। उसका दूसरा हाथ सीधा नीचे की ओर था, जिसमें उसने एक बड़ा सा खंजर पकड़ा हुआ था। वह बार-बार देवी माता का नाम ले रहा था। मैं पीछे हट कर दुकान की ओट में आ गया, ताकि वह निर्दयी दृश्य मुझे न दिखता। थोड़ी देर बाद, मैं आगे को खिसका ताकि मैं देख सकता कि क्या वहां पर किड के जुदा किए हुए धड़ और सिर थे, और चारों तरफ फैला हुआ खून था। परन्तु वहां पर सभी किड पहले की तरह ज़िंदा थे, और ख़ुशी से हिल-डुल रहे थे। उससे मैंने चैन की सांस ली, और ख़ुशी महसूस की। शायद सांकेतिक रूप में ही देवी माता को भेंट चढ़ा दी गई थी। तभी अलार्म बजा, और मेरा स्वप्न टूट गया।

उस स्वप्न से मुझे प्राचीनकाल के उन्नत तंत्र, विशेषकर काले तंत्र के बारे में स्पष्ट अनुभूति हुई। प्राचीनकाल में तंत्र एक उन्नत विज्ञान के रूप में था, और जन-जन में व्याप्त था। परन्तु उसके साथ हिंसा, व्यभिचार आदि के बहुत से दोष भी बढ़ जाते थे, विशेषतः जब उसे उचित तरीके से नहीं अपनाया जाता था। तंत्र के दुरूपयोग के कारण ही इसकी अवनति हुई। इस्लाम भी एक प्रकार का अतिवादी तंत्र ही है। यह इतना कट्टर है कि लोग इस बारे बात करने से भी कतराते हैं। इसीलिए यह जस का तस बना हुआ है। हिन्दु तंत्र में भी प्राचीनकाल में नरबली की प्रथा था, परन्तु उसका व्यापक विरोध होने पर उसे बंद कर दिया गया।

प्रेमयोगी वज्र का तंत्र सम्बंधित अपना अनुभव

उसने कुण्डलिनी के विकास के लिए किसी विशेष तंत्र का सहारा नहीं लिया। उसने वही काम किए, जो दूसरे सामान्य लोग भी करते हैं, पर उसने उन कामों को अद्वैतपूर्ण/तांत्रिक दृष्टिकोण के साथ किया। यही तरीका उचित भी है। इससे तंत्र का दुरुपयोग नहीं होता।    

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