Website creation, management and development, part-13 (block editor and important tips)

Block editor

A new block editor is now available in the WordPress website. Through this, we can edit different paragraphs in different forms. Each paragraph exists as a separate block. ‘Verse’ block is used for poetry. For writing Quotes, writing the source of references and provide other light or special information, Quote ‘block’ is used. It also enhances the beauty of the post. If we have to provide a book or file for download for free, then keep it in the ‘file’ block. How many such files are downloaded, it will also be shown in the website’s ‘stat’ button. Media blocks are used to show a picture or video.

Some other important information related to the website

Buttons like the reader’s tags, likes etc. are stored in the name of the account holder, not in the name of the website. Therefore, by opening the website with two different accounts, they will look different. This happens where there are many members of a website, such as admin, moderator, writer etc.

Initially or for one year, the website service provider collects less payment for hosting and domain. That is, the domain name is given free. There are also many companies giving domain names. Some also offer free service.

To create a pop up follow button one has to sign up on Mailchimp. Only one audience can be made on the free plan. The meaning of the audience is the person visiting the website here. On creating an audience, click the pop up subscribe button from the menu bar. A code is generated.  It is to be copy-pasted in the mailchimp widget of the website. Then press the Final Publish button. It is done.

A header image is one that appears on every page and post. We set it with customizer. A featured image is one that is only for a single page or post. We set it with edit button.

Changing the theme does not necessarily bring all the old settings and styles on the new theme. Many times a lot of hard work has to be done again. If a theme looks wrong, you can also switch to the old theme. The same old setting will be found again. I call this ‘w’ button (at the top of the website, on the left) mostly as the setting button. It can also be called a customizer button. Press the ‘design’ button after pressing the ‘w’ button. There will be a ‘themes’ button under it. It will contain the name and information of your current theme. There will also be information about all other available themes. To see all the old themes and revert them, press the ‘Activity’ button under Tools. All your previous themes will be found there with their prefixed settings / customization.

कृपया इस पोस्ट को हिंदी में पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें (वेबसाईट का निर्माण, प्रबंधन व विकास; भाग-13)

वेबसाईट का निर्माण, प्रबंधन व विकास; भाग-13 (ब्लोक एडिटर, महत्त्वपूर्ण टिप्स)

ब्लोक एडिटर

वर्डप्रेस वेबसाईट में अब नया ब्लोक एडिटर आ गया है। इसके द्वारा हम अलग-२ पैराग्राफ को अलग-२ रूप में एडिट कर सकते हैं। हरेक पैराग्राफ का एक अलग ब्लोक बनता है। कविता के लिए वर्स ब्लोक का प्रयोग होता है। क्वोट के लिए, रिफरेन्स सोर्स का पता डालने के लिए व अन्य हलकी फुल्की या विशेष जानकारी प्रदान करने के लिए क्वोट ब्लॉग का प्रयोग करते हैं। यह पोस्ट की खूबसूरती को भी बढ़ाता है। यदि हमने मुफ्त में डाऊनलोड के लिए कोई पुस्तक या फाईल उपलब्ध करवानी है, तो उसे फाईल ब्लोक में रखते हैं। ऐसी कितनी फाईलें डाऊनलोड हुईं, ये भी वैबसाईट के स्टेट बटन में शो हो जाएगा। किसी चित्र या वीडियो को दिखाने के लिए मीडिया ब्लोक का प्रयोग करते हैं।

वेबसाईट से सम्बंधित कुछ अन्य महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ

रीडर के लाईक, टैग आदि बटन अकाऊंट होल्डर के नाम से स्टोर होते हैं, वेबसाईट के नाम से नहीं। इसलिए अलग-२ अकाऊंट से वेबसाईट को खोलने से वे अलग-२ दिखेंगे। ऐसा वहां होता है, जहां पर एक वेबसाईट के बहुत से मैम्बर होते हैं, जैसे एडमिन, मोडरेटर, राईटर आदि।

शुरू में या एक साल के लिए वेबसाईट होस्टिंग व डोमेन के लिए इकट्ठा व कम पेमेंट लेती है। अर्थात डोमेन नेम निःशुल्क दिया जाता है। डोमेन नेम देने वाली भी बहुत सी कम्पनियां हैं। कुछ तो निःशुल्क सेवा भी देती हैं।

पॉप अप फोलो बटन को बनाने के लिए मेलचिम्प पर साईन अप करना पड़ता है। फ्री प्लान पर केवल एक ही आडियेंस बना सकते हैं। आडियंस का मतलब यहाँ पर वेबसाईट पर विजिट करने वाला व्यक्ति है। आडियेंस बनाने पर मीनू बार से पॉप अप सब्सक्राईब बटन को क्लिक करते हैं। निर्देशानुसार करने पर एक कोड जेनेरेट होता है। उसे वैबसाईट के मेलचिम्प विजेट में कोपी पेस्ट करना पड़ता है। फिर फाईनल पब्लिश बटन दबा दो। हो गया।

हेडर इमेज वह होती है, जो हरेक पेज व पोस्ट पर छपती है। इसे कस्टमाईजर से सेट करते हैं। फीचर्ड इमेज वह होती है, जो सिर्फ एक पेज या पोस्ट के लिए होती है। इसे एडिट बटन से सेट करते हैं।

थीम बदलने से जरूरी नहीं कि नई थीम पर पुरानी सारी सेटिंग व स्टाईल आ जाए। कई बार तो बहुत मेहनत करनी पड़ती है दुबारा से। यदि कोई थीम गलत लगे, तो पुरानी थीम पर भी जा सकते हैं। वही पुरानी सेटिंग फिर से मिल जाएगी। मैं इस w बटन (वैबसाईट के टॉप पर, लेफ्ट में) को ही अधिकांशतः सेटिंग बटन कहता हूँ। इसे कस्टमाईजर बटन भी कह सकते हैं। w बटन दबा कर डिजाइन बटन दबाएँ। उसके अंतर्गत एक थीम्स बटन होगा। उसमें आपकी करेंट थीम का नाम और उसकी जानकारी होगी। अन्य सभी उपलब्ध थीम्स के बारे में भी जानकारी होगी। पुरानी सभी थीम्स देखने के लिए और उन पर रिवर्ट करने के लिए टूल्स के अंतर्गत एक्टिविटी बटन दबाएँ। आपकी सारी पिछली थीम्स वहां पर अपनी सेटिंग्स/कसटमाईजेशन के साथ स्टोर मिलेंगी।

Please click on this link to view this post in English (Website creation, management and development, part-13)

Website creation, management and development, part-12 (payment and backup)

Payments in website

The WordPress website pays through PayPal or credit card or debit card, and takes payments to renew the website. Although the card must be international. As such, it does not accept the Indian Rupey card. Internet banking mostly does not pay. The company confirms the card with the bank. The message from the bank comes to the website owner, if his mobile number is recorded in the bank.

Changing host

There are many hosting companies for websites. Everyone is priced and rated differently. If someone is finding his current hosting expensive or inaccurate, then they can also get another hosting for the same website. For this, he has to backup his website and import it on the empty website of another host. For this, he has to create his account in the new host.

Exporting website

One cannot make full backup of website in personal plan. However, you can export it. There is a button (customizer button) under the setting. Clicking on it will bring all the text content in the form of a zipped folder, which can be downloaded right there. It also comes on the email, which stays there for 7 days. It does not contain media and uploaded documents. For that, there is a second button for export media. By the way, all paid websites are very safe. However, if something untoward happens, we can retrieve the website from that export file. Although the theme and website customization has to be done afresh, because there is no backing of theme and customization in it. Therefore, the export file should be stored in several places in the cloud, hard disk etc.

Other ways to protect the website

There is another offline method for this. Make an e-book of your website pages, and self-publish it on KDP. You can start with 10000 words. Store its copy on the cloud too. It is the safest method. You will say that every week you print the post, how will it come in the e-book. For this, collect the posts and create another e-book, and publish it. You keep adding every week’s posts to it, and keep uploading it on KDP. It has become a permanent material, and both of your website and book will grow together.

I will tell you another most effective way. The e-world is not as stable as the paper world. When the e-world comes in trouble, even then the paper world will be safe in the boxes lying in the corner of the house. With the help of Print on Demand, you make and maintain print books of your above-mentioned e-books. There will not be any expense for publishing in this. Paper and bindings will only have to be paid with a small commission. If needed, you can recreate the text file from these paper books with the help of OCR. With this, you can make your website stand again and easily from scratch.

In the same manner as above, my following books are made from this website:

1) Kundalini Science – A Spiritual Psychology

2) My website on e-reader

There is also a book from my Quora posts, which is called, “Kundalini demystified – What Premyogi vajra says”.

कृपया इस पोस्ट को हिंदी में पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें [वेबसाईट का निर्माण, प्रबंधन व विकास; भाग-12 (पेमेंट और बैकअप)]

वेबसाईट का निर्माण, प्रबंधन व विकास; भाग-12 (पेमेंट और बैकअप)

वैबसाईट पर पेमेंट

वर्डप्रेस वेबसाईट पेपाल या क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड के थ्रू पेमेंट करती है, और वेबसाईट रिन्यू करने के लिए पेमेंट लेती है। यद्यपि कार्ड अंतर्राष्ट्रीय होना चाहिए। जैसे कि वह भारतीय रुपे कार्ड को एक्सेप्ट नहीं करती। इन्टरनेट बेंकिंग से पेमेंट नहीं होती। कार्ड को कंपनी बैंक से कन्फर्म करती है। बेंक से वह मेसेज वेबसाईट मालिक को आ जाता है, यदि उसका मोबाईल नंबर बेंक में दर्ज हो।

होस्ट को बदलना

वैबसाईट के लिए होस्टिंग (घर/जगह) देने वाली बहुत सी कम्पनियां हैं। सबका अलग-२ रेट है। यदि किसी को अपनी वर्तमान होस्टिंग महंगी या गलत लग रही हो, तो वह अपनी उसी वैबसाईट के लिए दूसरी होस्टिंग भी ले सकता है। इसके लिए उसे अपनी वैबसाईट का बेकप लेकर उसे दूसरे होस्ट की खाली वेबसाईट पर इम्पोर्ट करना पड़ता है। इसके लिए उसे नए होस्ट में अपना अकाऊंट बनाना होता है।

वैबसाईट को एक्सपोर्ट करना

पर्सनल प्लान में वैबसाईट का फुल बेकप नहीं बना सकते। पर उसको एक्सपोर्ट कर सकते हैं। सेटिंग के अंतर्गत एक बटन (कस्टमाईजर बटन) होता है। उस पर क्लिक करने से सारा टेक्स्ट कंटेंट एक जिप्ड फोल्डर के रूप में आ जाएगा, जिसे वहीँ पर डाऊनलोड किया जा सकता है। ईमेल पर भी वह आ जाता है, जो वहां 7 दिन तक के लिए रहता है। उसमें मीडिया और अपलोडीड डॉकुमेंट नहीं होते। उसके लिए साथ ही में एक्सपोर्ट मीडिया का एक दूसरा बटन होता है। वैसे तो पेमेंट वाली सभी वैबसाईट्स बहुत सुरक्षित रखी जाती हैं। फिर भी यदि कुछ अनहोनी घटना हो जाए, तो उस एक्सपोर्ट फाईल से हम वैबसाईट को पुनः प्राप्त कर सकते हैं। यद्यपि थीम व वैबसाईट कस्टमाईजेशन नए सिरे से करनी पड़ती है, क्योंकि इसमें कस्टमाईजेशन का बेकप नहीं हो पाता। इसलिए एक्सपोर्ट फाईल को क्लाऊड में, हार्ड डिस्क में आदि कई स्थानों में संभाल कर रखना चाहिए।

वैबसाईट की सुरक्षा के अन्य तरीके

इसके लिए एक और ऑफलाइन तरीका है। अपने वैबसाईट के पेजस की एक इ-बुक बनाओ, और उसे केडीपी पर सेल्फ पब्लिश कर लो। 10000 शब्दों से शुरू कर सकते हो। उसकी कोपी भी क्लाऊड पर स्टोर कर लो। सबसे सुरक्षित तरीका है। आप बोलोगे कि जो हर हफ्ते आप पोस्ट छापते हो, वह कैसे इ-बुक में आएगी। इसके लिए पोस्टों को इकटठा करके आप एक और ई-बुक बना लो, और उसे पब्लिश कर दो। हर हफ्ते की पोस्ट आप उसमें एड करते रहो, और केडीपी पर अपलोड करते रहो। बन गई न बात। आपकी वैबसाईट और पुस्तक, दोनों एक साथ ग्रो करेंगे।

एक और सबसे कारगर तरीका बताता हूँ। ई-दुनिया इतनी स्थिर नहीं है, जितनी कागजी दुनिया। जब ई-दुनिया संकट में आएगी, उस समय भी कागजी दुनिया घर के कोने में पड़े संदूकों में सही-सलामत रहेगी। आप प्रिंट ओन डिमांड की सहायता से अपनी उपरोक्त ई-पुस्तकों की प्रिंट पुस्तकें बनाकर संभाल कर रख लो। इसमें पब्लिशिंग का खर्चा भी नहीं लगेगा। केवल कुछ थोड़े से कमीशन के साथ कागज़ व बाइंडिंग की कीमत ही चुकानी होगी। जरूरत पड़ने पर इन कागजी पुस्तकों से आप ओसीआर की मदद से टेक्स्ट फाईल पुनः बना सकते हो। इससे आप अपनी वैबसाईट स्क्रेच से पुनः व आसानी से खड़ी कर सकते हो।

उपरोक्त तरीके से ही मेरी निम्नलिखित पुस्तकें मेरी इसी वैबसाईट से बनी हैं-

1) कुण्डलिनी विज्ञान- एक आध्यात्मिक मनोविज्ञान

2) ई-रीडर पर मेरी वैबसाईट

एक पुस्तक तो मेरी क्वोरा पोस्ट से भी बनी है, जिसका नाम है, “कुण्डलिनी रहस्योद्घाटित- प्रेमयोगी वज्र क्या कहता है”।

  Please click on this link to view this post in English (Website creation, management and development, part-12)

ਕੁੰਡਲਨੀ ਤੋਂ ਹੁਨਰ ਵਿਕਾਸ

ਅੱਜ ਦਾ ਯੁੱਗ ਵਿਗਿਆਨਕ ਯੁੱਗ ਹੈ। ਹੁਨਰ ਅਤੇ ਵਿਗਿਆਨ ਇਕ ਦੂਜੇ ਲਈ ਪ੍ਰਮੁੱਖ ਯੋਗਦਾਨ ਪਾਉਣ ਵਾਲੇ ਹਨ। ਵਿਗਿਆਨ ਹੁਨਰ ਤੋਂ ਬਿਨਾਂ ਅਧੂਰਾ ਹੈ, ਅਤੇ ਵਿਗਿਆਨ ਤੋਂ ਬਿਨਾਂ ਹੁਨਰ ਅਧੂਰਾ ਹੈ। ਕਿਸੇ ਵੀ ਕੰਮ ਵਿੱਚ ਵਿਗਿਆਨਕ ਤਕਨੀਕਾਂ ਅਸਫਲ ਜਾਂ ਨੁਕਸਾਨਦੇਹ / ਘਾਤਕ ਹੋ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ਜੇ ਹੁਨਰ ਦੀ ਘਾਟ ਹੈ। ਵਿਗਿਆਨ ਲਗਭਗ ਹਰ ਜਗ੍ਹਾ ਮੌਜੂਦ ਹੈ, ਪਰ ਹੁਨਰ ਕਿਤੇ ਵੀ ਮੌਜੂਦ ਨਹੀਂ ਹੈ। ਪਛੜੇ ਦੇਸ਼ਾਂ ਵਿਚ ਬਹੁਤੀਆਂ ਥਾਵਾਂ ‘ਤੇ ਹੁਨਰਾਂ ਦੀ ਘਾਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ। ਇਸੇ ਤਰ੍ਹਾਂ ਵਿਕਸਤ ਦੇਸ਼ਾਂ ਦੇ ਦੂਰ ਦੁਰਾਡੇ ਅਤੇ ਕਬਾਇਲੀ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿਚ ਕੁਸ਼ਲਤਾ ਦੀ ਘਾਟ ਹੈ। ਹਰ ਰੋਜ਼ ਜਦੋਂ ਮੈਂ ਆਸ ਪਾਸ ਵੇਖਦਾ ਹਾਂ, ਮੈਨੂੰ ਹੁਨਰ ਦੀ ਭਾਰੀ ਘਾਟ ਮਹਿਸੂਸ ਹੁੰਦੀ ਹੈ। ਮਿਸਾਲ ਲਈ, ਚਿਕਿਤਸਕ ਦਾ ਕੰਮ ਲਓ। ਮੈਂ ਇਹ ਗੁਣ ਕਿਤੇ ਵੀ ਨਹੀਂ ਵੇਖਦਾ। ਛੋਟੀਆਂ ਚੀਜ਼ਾਂ ਦਾ ਧਿਆਨ ਨਹੀਂ ਰੱਖਿਆ ਜਾਂਦਾ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਵੱਡੇ ਨੁਕਸਾਨ ਹੁੰਦੇ ਹਨ। ਬਹੁਤੇ ਮਕੈਨਿਕ-ਮਿਸਤਰੀ ਵਿਗਿਆਨਕ ਤੱਥਾਂ ਤੋਂ ਜਾਣੂ ਨਹੀਂ ਹਨ। ਜਾਣੂ ਲੋਕ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਅਮਲੀ ਰੂਪ ਵਿਚ ਲਾਗੂ ਕਰਨ ਵਿਚ ਆਲਸ ਕਰਦੇ ਹਨ। ਕਈ ਲਾਗੂ ਕਰਨ ਦੀ ਹਿੰਮਤ ਜੁਟਾਉਣ ਵਿਚ ਅਸਮਰਥ ਹਨ। ਕਈਆਂ ਕੋਲ ਸਿਖਲਾਈ ਦੀ ਘਾਟ ਹੈ। ਕਈ ਲੋਕ ਕੱਟੜਪੰਥੀ ਸੋਚ ਕਾਰਨ ਜਾਣ ਬੁੱਝ ਕੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਲਾਗੂ ਨਹੀਂ ਕਰਦੇ।

ਕੁੰਡਲਨੀ ਹੁਨਰ ਦੇ ਵਿਕਾਸ ਵੱਲ ਕਿਵੇਂ ਅਗਵਾਈ ਕਰਦੀ ਹੈ

ਇਹ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਜਾਣਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਕਿ ਅਦਵੈਤ ਦੇ ਨਾਲ ਮਨ ਵਿਚ ਵੱਸਣ ਵਾਲੀ ਤਸਵੀਰ ਨੂੰ ਕੁੰਡਲਨੀ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਇਹ ਗੁਰੂ, ਪ੍ਰੇਮੀ-ਪ੍ਰੇਮਕਾ, ਪੁੱਤਰ, ਮਾਪਿਆਂ, ਦਾਦਾ-ਦਾਦੀ, ਦੋਸਤ, ਕੋਈ ਮਨਪਸੰਦ ਜਗ੍ਹਾ ਜਾਂ ਚੀਜ਼ ਆਦਿ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ।

ਕਿਸੇ ਦੇ ਦਿਮਾਗ ਵਿਚ ਕੁੰਡਲਨੀ ਦੇ ਅਕਸਰ ਪ੍ਰਗਟ ਹੋਣ ਦਾ ਸਿੱਧਾ ਅਰਥ ਹੈ ਕਿ ਉਹ ਕਿਸੇ ਵੀ ਚੀਜ ਦੀ ਡੂੰਘਾਈ ਵਿਚ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਅਤੇ ਉਹ ਉੱਪਰ-ਉੱਪਰ ਦਾ ਗਿਆਨਵਾਨ ਨਹੀਂ ਬਣਦਾ। ਇਸਦੇ ਨਾਲ, ਉਸਦਾ ਡੂੰਘੇ ਜਾਣ ਦਾ ਸੁਭਾਅ ਉਸਦਾ ਆਪਣਾ ਸੁਭਾਅ ਬਣ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਇਹ ਇਸ ਠੰਡੇ ਲਹੂ ਵਾਲੇ ਸੁਭਾਅ ਤੋਂ ਹੈ ਕਿ ਜਦੋਂ ਉਹ ਕੋਈ ਕੰਮ ਕਰਦਾ ਹੈ, ਤਾਂ ਉਹ ਇਸ ਨੂੰ ਪੂਰੇ ਵਿਸਥਾਰ ਨਾਲ ਕਰਦਾ ਹੈ। ਉਹ ਇਸ ਨੂੰ ਛੋਟਾ ਨਹੀਂ ਪੈਣਾ ਚਾਹੁੰਦਾ। ਉਹ ਲੰਬੇ ਸਮੇਂ ਤੋਂ ਉਸ ਕੰਮ ਨਾਲ ਜੁੜਿਆ ਹੋਇਆ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ। ਇਹ ਉਸਨੂੰ ਉਸ ਕੰਮ ਬਾਰੇ ਵੱਧ ਤੋਂ ਵੱਧ ਗਿਆਨ ਅਤੇ ਤਜ਼ਰਬਾ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਦਾ ਮੌਕਾ ਦਿੰਦਾ ਹੈ। ਇਸਦੇ ਨਾਲ, ਉਸ ਦੀ ਕੁੰਡਲਨੀ ਵੀ ਮਜ਼ਬੂਤ ​​ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਕਿਉਂਕਿ ਕੁੰਡਲਨੀ ਨੂੰ ਵੀ ਚਿਪਕੂ ਸੁਭਾਅ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਹੈ। ਇਸ ਨਾਲ, ਦੋਵੇਂ ਸਿਧੀਆਂ ਇਕੋ ਸਮੇਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ। ਇਕ ਪਾਸੇ, ਹੁਨਰਾਂ ਦੇ ਵਿਕਾਸ ਦੇ ਨਾਲ, ਉਹ ਸਰੀਰਕ ਕਾਰਜਾਂ ਦੀ ਉੱਚ ਗੁਣਵੱਤਾ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿਚ ਪਦਾਰਥਕ ਸਿਧੀਆਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰ ਰਿਹਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਦੂਜੇ ਪਾਸੇ, ਕੁੰਡਲਨੀ ਵਿਕਾਸ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿਚ ਅਧਿਆਤਮਿਕ ਸਿਧੀਆਂ ਦੀ ਪ੍ਰਾਪਤੀ।

ਕੁੰਡਲਨੀ ਅਤੇ ਹੁਨਰ ਦੇ ਵਿਕਾਸ ਦੇ ਸੰਬੰਧ ਵਿਚ ਪ੍ਰੇਮਯੋਗੀ ਵਜਰਾ ਦਾ ਆਪਣਾ ਤਜ਼ਰਬਾ

ਜਦੋਂ ਪਹਿਲੀ ਦੇਵੀਰਾਣੀ ਵਜੋਂ ਕੁੰਡਲਨੀ ਉਸਦੇ ਮਨ ਵਿਚ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਭੜਕ ਗਈ ਸੀ, ਤਦ ਉਹ ਸਾਰੇ ਕੰਮ ਬਹੁਤ ਨੇੜਿਓਂ ਕਰਦਾ ਸੀ। ਉਹ ਆਪਣੀ ਅਕਾਦਮਿਕ ਅਧਿਐਨ ਬਹੁਤ ਡੂੰਘੀ ਅਤੇ ਸਪਸ਼ਟ ਤੌਰ ਤੇ ਕਰਦਾ ਸੀ। ਉਹ ਹਰ ਵਿਸ਼ੇ ਦੀ ਜੜ ਤੱਕ ਜਾਂਦਾ ਸੀ। ਉਹ ਦੂਜਿਆਂ ਦੁਆਰਾ ਉੱਪਰ-2 ਤੋਂ ਕੀਤੇ ਕੰਮ ਨੂੰ ਪਸੰਦ ਨਹੀਂ ਕਰਦਾ ਸੀ। ਉਹ ਉਸ ਲਈ ਕਈ ਵਾਰ ਉੰਨਾਂ ਦੀ ਤਾੜਨਾ ਵੀ ਕਰਦਾ ਸੀ, ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਲੋਕ ਉਸ ਨੂੰ ਅਵ ਅਵਿਆਵਿਹਾਰਿਕ, ਆਲੋਚਨਾਤਮਕ, ਨਕਾਰਾਤਮਕ, ਵੱਡੇ-ਭਾਸ਼ਣਕਾਰ ਅਤੇ ਹੰਕਾਰੀ ਮੰਨਦੇ ਸਨ। ਪਰ ਉਹ ਦੂਜਿਆਂ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਤੋਂ ਬਿਨਾਂ ਕੰਮ ਕਰਨ ਦੇ ਤਰੀਕੇ ਨੂੰ ਕਿਵੇਂ ਬਦਲ ਸਕਦਾ ਸੀ। ਇਕੱਲੇ ਚਾਨਾ ਘੜੇ ਨੂੰ ਤੋੜ ਨਹੀਂ ਸਕਦਾ। ਇਸ ਲਈ ਉਸਨੂੰ ਕਈ ਵਾਰ ਸਥਿਤੀ ਨਾਲ ਨਜਿੱਠਣਾ ਪਿਆ।

ਸਮੇਂ ਦੇ ਨਾਲ, ਜਦੋਂ ਗੁਰੂ ਦੇ ਸਰੂਪ ਦੀ ਕੁੰਡਲਨੀ ਉਸ ਦੇ ਮਨ ਵਿਚ ਚਮਕਣ ਲੱਗੀ, ਤਦ ਉਹ ਬਹੁਤ ਵਿਆਵਹਾਰਕ ਅਤੇ ਸਵੈ-ਸਮਰਥਕ ਬਣ ਗਿਆ। ਤਦ ਉਹ ਸਾਰੇ ਕੰਮ ਜੋ ਉਸਨੇ ਕੀਤੇ ਉਹ ਪੂਰੇ ਕੁਆਲਟੀ ਨਾਲ ਹੋਏ। ਉਹ ਸਾਰੇ ਛੋਟੇ ਕੰਮ ਆਪਣੇ ਆਪ ਕਰਦਾ ਸੀ, ਕਿਉਂਕਿ ਕੋਈ ਵੀ ਉਸ ਦੀਆਂ ਬਰੀਕ ਅਤੇ ਡੂੰਘੀਆਂ ਅੱਖਾਂ ਨੂੰ ਨਹੀਂ ਸਮਝ ਸਕਦਾ ਸੀ। ਜਦੋਂ ਲੋਕਾਂ ਨੇ ਉਸਦੇ ਚਮਤਕਾਰੀ ਨਤੀਜੇ ਵੇਖੇ, ਤਾਂ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਹਕੀਕਤ ਦਾ ਪਤਾ ਲੱਗ ਗਿਆ, ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਉਸਦੀ ਉਸਤਤ ਕਰਨੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੱਤੀ।

ਸੁਹਿਰਦ ਵਾਤਾਵਰਣ ਵਿੱਚ ਹੁਨਰ ਵਧੇਰੇ ਵਿਕਸਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ

ਅਜਿਹੇ ਮਾਹੌਲ ਵਿੱਚ ਲੋਕ ਇਕ ਦੂਜੇ ਨਾਲ ਚੀਜ਼ਾਂ ਅਤੇ ਸੇਵਾਵਾਂ ਅਤੇ ਵਿਵਹਾਰਕ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਾ ਆਦਾਨ-ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰਦੇ ਹਨ। ਕੁੰਡਲਨੀ ਦੇ ਵਿਕਾਸ ਲਈ ਵੀ ਸੁਹਿਰਦ ਵਾਤਾਵਰਣ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਹੈ। ਇਹ ਸਾਬਤ ਕਰਦਾ ਹੈ ਕਿ ਕੁੰਡਲਨੀ ਹੁਨਰ ਦੇ ਵਿਕਾਸ ਵਿਚ ਸਹਾਇਤਾ ਕਰਦਾ ਹੈ।

ਇਸ ਲਈ ਕੁੰਡਲਨੀ ਯੋਗਾ ਨੂੰ ਹੁਨਰ ਵਿਕਾਸ ਸਿਖਲਾਈ ਵਿੱਚ ਸ਼ਾਮਲ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ।

ਪ੍ਰੇਮਯੋਗੀ ਵਜਰਾ ਨੂੰ ਕੁਦਰਤੀ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਇੰਨਾ ਪਿਆਰ ਮਿਲਿਆ ਕਿ ਕੁੰਡਲਨੀ ਨੇ ਆਪਣੇ ਆਪ ਵਿਕਾਸ ਕੀਤਾ। ਉਸਨੂੰ ਯੋਗਾ ਕਰਨ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਨਹੀਂ ਪੈਈ। ਇਹ ਵੱਖਰੀ ਗੱਲ ਹੈ ਕਿ ਬਾਅਦ ਵਿਚ ਉਸ ਨੇ ਦੂਜਿਆਂ ਦੇ ਫਾਇਦੇ ਲਈ ਕੁੰਡਲਨੀ ਯੋਗ ਤੋਂ ਕੁੰਡਲਨੀ ਜਾਗ੍ਰਿਤ ਕੀਤੀ, ਤਾਂ ਜੋ ਸਾਰੇ ਲੋਕ ਕੁੰਡਲਨੀ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰ ਸਕਣ। ਸਾਰੇ ਲੋਕ ਉਸ ਜਿੰਨੇ ਖੁਸ਼ਕਿਸਮਤ ਨਹੀਂ ਹਨ।

ਸਭ ਤੋਂ ਪਿਆਰੀ ਚੀਜ਼ ਨੂੰ ਕੁੰਡਲਨੀ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਜਦੋਂ ਹੁਨਰ ਸਿਖਲਾਈ ਨੂੰ ਕੁੰਡਲਨੀ ਨਾਲ ਜੋੜਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਤਾਂ ਇਹ ਕੰਮ ਵੀ ਕੁੰਡਲਨੀ ਵਰਗਾ ਸਭ ਤੋਂ ਪਿਆਰਾ ਬਣ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਇਹ ਕੁਸ਼ਲਤਾ ਅਤੇ ਕੁੰਡਲਨੀ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਆਪਸੀ ਗੱਠਜੋੜ ਦਾ ਬੁਨਿਆਦੀ ਸਿਧਾਂਤ ਹੈ। ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਹੁਨਰ ਅਤੇ ਕੁੰਡਲਨੀ ਇੱਕ ਦੂਜੇ ਨਾਲ ਜੀਵਨ ਭਰ ਵਧਦੇ ਰਹਿੰਦੇ ਹਨ, ਅਤੇ ਉੱਚਿਆਂ ਨੂੰ ਇੱਕਠੇ ਛੂਹਦੇ ਹਨ।   

कृपया इस पोस्ट को हिंदी में पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें (कुण्डलिनी से कौशल विकास ).

Please click on this link to view this post in English (Kundalini for skill development ).

Kundalini for skill development and creativity

Today’s era is scientific era. Skills and science are key contributors to each other. Science is incomplete without skill, and without science, skill is incomplete. In any work, scientific techniques also fail or become harmful / fatal if there is lack of skill. Science is present almost everywhere, but skill is not present everywhere. In underdeveloped countries, most places lack skills. Similarly, there is a sense of inefficiency in remote and tribal areas of developed countries. Every day when I look around, I feel a severe lack of skill. Take, for example, Masonry Work. I do not see this as a quality work anywhere. Small things are not taken care of, which lead to big losses. Most masonry workers are not familiar with scientific facts. Those familiar are lazy to apply them in practical terms. Many are unable to muster the courage to implement them. Many lack training. Many do not deliberately implement them due to orthodox thinking.

How does Kundalini lead to skill development?

It is well known that the image that resides in the mind with non-duality is called Kundalini. It can be of Guru, lover, son, parents, grandparents, friends, any favorite place or thing etc.

The frequent appearance of Kundalini in one’s mind simply means that he goes to the depths of anything, and does not leave anything superficial. With this, the nature of going deep becomes as his own. It is from this patient nature that when he does any work, then he performs it in full detail. He does not want to let it fall short. He clings to that work for a long time. This gives him a chance to get maximum knowledge and experience about that work. With this, his Kundalini also gets stronger, because Kundalini also needs a sticky nature. With this, both Siddhis/accomplishments are attained simultaneously. On the one hand, with the development of skills, he is getting material accomplishment in the form of high quality of physical work, on the other hand, spiritual attainment in the form of Kundalini development.

Premyogi vajra’s own experience regarding the relationship between Kundalini and skill development

When Kundalini as the first devirani/goddess was completely blown up in his mind, then he used to do all the work very efficiently and in full detail with self-awareness. He used to do his academic studies very deeply and clearly. He went to the root of every subject. He did not like the work done superficially and haphazardly by others. He also used to taunt them many times for that, causing many people to consider him impractical, critical, negative, big-talker, and arrogant. However, how could he make a change without the help of others? Gram alone cannot break a pot. Hence, he had to compromise with the situation many times.

Over time, when the Kundalini of Guru’s form began to shine in his mind, he became very practical and self-supporting. Then all the works he did were done with full quality. He had to do all the small tasks himself, because no one could understand his fine and deep eyes. When people saw his miraculous results, then people came to know the reality, and they started praising him.

Skill develops more in a cordial environment

In such an environment, people exchange goods and services, and practical information with each other. Kundalini development also requires a cordial environment. This also proves that Kundalini helps in skill development.

Kundalini yoga should be included in skill development training

Premyogi vajra naturally got so much love that Kundalini developed on his own. He did not need to do yoga. It is a different matter that he later got Kundalini awakening from Kundalini Yoga for the benefit of others, so that all people can get Kundalini. Not all people are as lucky like him.

The most loved thing is called Kundalini. When skill training is combined with Kundalini, then that also becomes the most beloved like Kundalini. This is the fundamental principle of mutual alliance between skill and Kundalini. With this, skill and Kundalini keep increasing each other for a lifetime, and keep touching the highs together.

कृपया इस पोस्ट को हिंदी में पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें (कुण्डलिनी से कौशल विकास )

ਇਸ ਪੋਸਟ ਨੂੰ ਪੰਜਾਬੀ ਵਿਚ ਪੜ੍ਹਨ ਲਈ ਇੱਥੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰੋ (ਕੁੰਡਲਨੀ ਤੋਂ ਹੁਨਰ ਵਿਕਾਸ ).

कुण्डलिनी से कौशल विकास एवं रचनात्मकता

आजकल का युग वैज्ञानिक युग है। कौशल व विज्ञान एक दूसरे के प्रमुख सहयोगी हैं। कुशलता के बिना विज्ञान अधूरा है, और विज्ञान के बिना कुशलता अधूरी है। किसी भी काम में वैज्ञानिक तकनीकें भी नाकामयाब या नुकसानदेह/जानलेवा हो जाती हैं, यदि कौशलता का अभाव हो। विज्ञान आज लगभग हर जगह विद्यमान है, परन्तु कुशलता हर जगह विद्यमान नहीं है। अविकसित देशों में अधिकाँश स्थानों पर कुशलता का अभाव होता है। इसी तरह, विकसित देशों के दूर-दराज के व जनजातीय क्षेत्रों में भी कुशलता का भाव होता है। हर रोज जब मैं आसपास नजर दौड़ाता हूँ, तो मुझे कौशल की भारी कमी महसूस होती है। उदाहरण के लिए, मेसनरी वर्क को ही लें। यह मुझे कहीं पर भी गुणवत्तापूर्ण नहीं दिखता। छोटी-२ बातों का ध्यान नहीं रखा जाता, जिससे बड़े-२ नुक्सान हो जाते हैं। अधिकाँश मिस्त्री वैज्ञानिक तथ्यों से परिचित नहीं होते। जो परिचित होते हैं, वे उन्हें व्यावहारिक रूप में लागू करने में आलस करते हैं। कई तो उन्हें लागू करने की हिम्मत ही नहीं जुटा पाते। कईयों को प्रशिक्षण का अभाव खलता है। कई रूढ़ीवादी सोच के कारण उन्हें जानबूझ कर लागू नहीं करते।

कुण्डलिनी से कौशल विकास कैसे होता है

यह तो सर्वविदित ही है कि अद्वैतभाव के साथ मन में बसी रहने वाली छवि को ही कुण्डलिनी कहते हैं। यह गुरु की, प्रेमी-प्रेमिका की, पुत्र की, माता-पिता की, दादा-दादी की, मित्र की, किसी मनपसंद स्थान या वस्तु आदि किसी की भी हो सकती है।

किसी के मन में कुण्डलिनी के बारम्बार प्रकट होने का सीधा सा अर्थ है कि वह किसी भी चीज की गहराई तक जाता है, और उसे ऊपर-२ से जानकार छोड़ नहीं देता। इससे गहराई तक जाने का उसका स्वभाव स्वयं ही बन जाता है। इस धीर स्वभाव से यह होता है कि जब वह कोई भी काम करता है, तब उसे पूरे विस्तार के साथ सम्पादित करता है। वह उसमें कोई कमी नहीं रहने देना चाहता। वह उस काम से लम्बे समय तक चिपका रहता है। इससे उसे उस काम के बारे में ज्यादा से ज्यादा ज्ञान व अनुभव प्राप्त करने का मौक़ा मिल जाता है। इससे उसकी कुण्डलिनी भी मजबूत होती रहती है, क्योंकि कुण्डलिनी को भी तो चिपकू स्वभाव की ही जरूरत होती है। इससे दोनों सिद्धियाँ एकसाथ प्राप्त हो रही होती हैं। एकतरफ उसे कौशल विकास के साथ भौतिक काम की उच्च गुणवत्ता के रूप में भौतिक सिद्धि प्राप्त हो रही होती है, तो दूसरी तरफ कुण्डलिनी विकास के रूप में आध्यात्मिक सिद्धि भी।

कुण्डलिनी व कौशल विकास के आपसी रिश्ते के बारे में प्रेमयोगी वज्र का अपना अनुभव

जब प्रथम देविरानी के रूप की कुण्डलिनी उसके मन में फुली ब्लोन अप थी, तब वह सभी काम बड़ी बारीकी से करता था। वह अपना अकादैमिक अध्ययन बहुत गहरी व स्पष्टता से करता था। वह हरेक विषय की जड़ तक चला जाता था। उसे औरों के द्वारा ऊपर-२ से किया गया काम पसंद नहीं आता था। वह उसके लिए उन्हें कई बार ताने भी मार देता था, जिससे बहुत से लोग उसे अव्यावहारिक, आलोचक, नकारात्मक, बड़ी-२ बातें बनाने वाला, व घमंडी मानने लग गए थे। परन्तु वह औरों की सहायता के बिना कैसे बदलाव ला सकता था। अकेला चना भांड नहीं फोड़ सकता। अतः उसे अनेकों बार परिस्थिति के साथ समझौता करना पड़ता था।

कालान्तर में जब उसके मन में गुरु के रूप की कुण्डलिनी चमकने लगी, तब वह बहुत ज्यादा व्यावहारिक व स्वावलंबी बन गया। तब उसने जो भी काम किए, वे पूरी गुणवत्ता के साथ किए। वह छोटे-२ सभी काम स्वयं कर लेता था, क्योंकि उसकी बारीक और गहरी नजर को कोई समझ ही नहीं पाता था। जब लोगों ने उसके चमत्कारिक परिणाम देखे, तब लोगों को असलियत का पता चला, और वे उसकी तारीफ करने लगे।

सौहार्दपूर्ण वातावरण में कौशल अधिक विकसित होता है

ऐसे वातावरण में लोग एक-दूसरों को वस्तु-सेवाओं व व्यावहारिक जानकारियों का आदान-प्रदान करते रहते हैं। कुण्डलिनी विकास के लिए भी सौहार्दपूर्ण वातावरण की आवश्यकता होती है। इससे भी यही सिद्ध होता है कि कुण्डलिनी कौशल विकास में मदद करती है।

कुण्डलिनी योग को कौशल विकास के प्रशिक्षण में शामिल किया जाना चाहिए

प्रेमयोगी वज्र को प्राकृतिक रूप से इतना अधिक प्यार मिला कि उसके मन में स्वयं ही कुण्डलिनी विकसित हो गई। उसे योग करने की जरूरत ही नहीं पड़ी। यह अलग बात है कि उसने बाद में दूसरों के लाभ के लिए कुण्डलिनी योग से भी कुण्डलिनी जागरण प्राप्त किया, ताकि सभी लोगों को कुण्डलिनी की उपलब्धि हो सके। सभी लोग उसकी तरह तो खुशकिस्मत नहीं होते।     

सबसे प्रिय वस्तु को ही कुण्डलिनी कहते हैं। जब कौशल प्रशिक्षण कुण्डलिनी के साथ जुड़ जाता है, तब वह भी कुण्डलिनी की तरह ही सर्वाधिक प्रिय बन जाता है। यही कौशल व कुण्डलिनी के आपसी गठजोड़ का मूलभूत सिद्धांत है। इससे कौशल व कुण्डलिनी आजीवन एक-दूसरे को एकसाथ बढ़ाते रहते हैं, और एकसाथ बुलंदियां छूते रहते हैं।    

Please click on this link to view this post in English (Kundalini for skill development )

ਇਸ ਪੋਸਟ ਨੂੰ ਪੰਜਾਬੀ ਵਿਚ ਪੜ੍ਹਨ ਲਈ ਇੱਥੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰੋ (ਕੁੰਡਲਨੀ ਤੋਂ ਹੁਨਰ ਵਿਕਾਸ).