गीता सार: हिंदी और बघाटी में अनुवादित स्वनिर्मित संस्कृत श्लोक पुस्तक

श्रीकृष्णाज्ञाभिवंदनम्~ निःशुल्क पीडीएफ ई-पुस्तक

पुस्तक परिचय

यह पुस्तक भगवान् श्रीकृष्ण के गीताज्ञान पर आधारित है। यह एकसाथ तीन भाषाओं में लिखी गई है। मूल संस्कृत श्लोक के साथ उसका हिंदी में और बघाटी  में भी अनुवाद किया गया है। यह पुस्तक निर्लिप्त या अनासक्त रूप से कर्तव्यपरायणता सिखाती है। श्रीमद्भागवत गीता के निचोड़ को आम जनमानस तक पहुंचाने के लिए यह एक उत्कृष्ट प्रयास है। नमो ताभ्यः जननीभ्यः याभिः विश्वस्य शान्तये ।

प्राणप्रियाः सुपुत्राः हि भारताय समर्पिताः ।।

नत्वा गजाननं पूर्वं देवान् च पितरौ तथा ।

कुलदेवान् गुरून् चैव कुर्वे काव्यं मनोहरम् ।।१।।

हिन्दी-  पहले श्री गणेश जी आदि देवों को प्रणाम करके तथा अपने कुल देवताओं, गुरूजनों तथा माता-पिता को प्रणाम करके मैं इस मनोहर काव्य की रचना आरम्भ करता हूँ।

बघाटि- पैले गणेशादि देवते खे माथा टेक रो तथा आपणे कुलदेवते गुरूजना अरो मा-बावा खे डाल कर रो आऊं एस सौणे काव्य रि रचना कर चाला।

लेखक परिचय

लेखक ने शास्त्री की उपाधि प्राप्त की है, तथा भारतीय दर्शन में आचार्य की है। योग दर्शन के ऊपर इन्होंने पी.एच.डी. की है। इन्होंने संस्कृत महाविद्यालय सोलन में 20 वर्षों से अधिक समय तक लगातार अध्यापन कार्य किया है। लेखक ने अपनी सभी पुस्तकें अपनी सेवानिवृत्ति के करीब व उसके बाद लिखी हैं। इसीलिए लेखक के पूरे जीवन के उन्नत अनुभव उनकी पुस्तकों में स्पष्ट रूप से झलकते हैं।

कीवर्ड्स

गीता सार श्लोक भावार्थ सहित हिंदी व पहाड़ी, बघाटी

श्रीकृष्ण भगवान् हिमाचल के सोलन की लोकसंस्कृति में

अर्जुन को महाभारत में उपदेश

कर्मयोग व भक्तियोग व ज्ञानयोग

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भगवद गीता का सार हिंदी बघाटी में

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