कुंडलिनी योग से आदमी में अदृश्य हो जाने की शक्ति पैदा हो जाती है

दोस्तों शिव पुराण में शिव पार्वती को काल को हराकर अमर और मुक्त होने का तरीका बताते हैं। वह कहते हैं कि तीन तरीके हैं ध्यान के। आकाश मतलब अनाहत नाद पर ध्यान, वायु पर ध्यान मतलब प्राणायाम और अग्नि पर ध्यान मतलब आज्ञा चक्र बिंदु पर सूर्य, प्रकाशमान देवचित्र आदि का ध्यान। यहां यह बात गौर करने लायक है कि यह वर्णन उस वर्णन के बाद आता है जिसमें तथाकथित अजीबोगरीब मृत्यु के लक्षण बताए गए हैं। जैसे कि बाया अंग कई दिन तक लगातार फड़कने से मृत्यु होना या गिद्धों के द्वारा हमला होने को मृत्यु का लक्षण आदि। हालांकि शिव ने यह भी साफ कहा है कि लोगों की भलाई के लिए और उनमें वैराग्य की वृद्धि के लिए ही वह ऐसा वर्णन कर रहे हैं। मतलब साफ है कि यह प्रयास मृत्यु का भय पैदा करने के लिए है ताकि लोग योग आदि का सहारा लेकर जल्दी से मृत्यु पर विजय पा सकें। इसके बाद जो योग का वर्णन है उसके फलस्वरूप तथाकथित पारलौकिक सिद्धियों का वर्णन भी योग के प्रति आकर्षण पैदा करने के लिए ही किया गया है। मतलब एक तरफ मृत्यु का काल्पनिक भय पैदा किया गया है तो दूसरी ओर योग की काल्पनिक उपलब्धियां दर्शाई गई हैं। काल्पनिक मतलब द्विअर्थी सी, कोरी काल्पनिक नहीं। उदाहरण के लिए योगी का अदृश्य हो जाना। ऐसा नहीं होता कि योगी का शरीर किसी को दिखता ही नहीं। इसका मतलब है कि वह कुंडलिनी योग से इतना शांत, निरपेक्ष और अपने आप में स्थित सा हो जाता है कि लोगों की भीड़ में भी उसकी तरफ ध्यान ही नहीं जाता। मेरा एक योगी मित्र है। वह दस सालों से एक अपरिचित से समाज के लोगों के बीच बसा हुआ था। पर उस समाज के लोगों को उसके बारे में पता ही नहीं था। गुप्तचर भी तो ऐसे ही होते हैं।

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demystifyingkundalini by Premyogi vajra- प्रेमयोगी वज्र-कृत कुण्डलिनी-रहस्योद्घाटन

I am as natural as air and water. I take in hand whatever is there to work hard and make a merry. I am fond of Yoga, Tantra, Music and Cinema. मैं हवा और पानी की तरह प्राकृतिक हूं। मैं कड़ी मेहनत करने और रंगरलियाँ मनाने के लिए जो कुछ भी काम देखता हूँ, उसे हाथ में ले लेता हूं। मुझे योग, तंत्र, संगीत और सिनेमा का शौक है।

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