कुंडलिनी ही मन की वह ट्यूनिंग फ्रेकवेंसी है, जो मामूली सी लौकिक और पारलौकिक हलचल को भी आसानी से पकड़ लेती है

भगवान करे कि क्रिसमस के साथ कुंडलिनी बढ़े। सभी को क्रिसमस की शुभकामनाएं।

Photo by Victoria Borodinova from Pexels

दोस्तों, पिछली पोस्ट में मैंने बताया कि कैसे ग्रहों के साथ ट्यूनिंग बना लेने से उनके दुष्प्रभाव को कम किया जा सकता है। इस पोस्ट में हम इस बात पर चर्चा करेंगे कि वह ट्यूनिंग क्या है, और वह कैसे कुण्डलिनी सिद्धांत से जुड़ी हुई है।

कुंडलिनी ही मन की वह फ्रेक्वेंसी है, जिस पर हम ग्रहों के साथ ट्यून हो सकते हैं

हम रेडियो की ट्यूनिंग को नोट करके रखते हैं, और उसी फ्रेक्वेंसी पर हम रेडियो को चलाते हैं। दूसरी फ्रेक्वेंसी पर चलाने से रेडियो नहीं चलेगा। इसी तरह हमें अपनी कुंडलिनी का बखूबी पता होता है, और उसे हम कभी भूलते नहीं। वह मन का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण चित्र होता है। उसको योगी लोग प्रतिदिन योगसाधना से भी याद करते रहते हैं। यदि किसी जन्मकुंडली-योग के कारण ग्रहों से आने वाला प्रकाश कम हो जाए, तो उसे संतुलित करने के लिए हमारे मन की कुंडलिनी की चमक बढ़ने लगती है। ऐसा महसूस होने पर हम कुंडलिनी योगसाधना को भी बढ़ा देते हैं। मन के दूसरे चित्रों की चमक बढ़ाने से हमें उतना लाभ नहीं मिलता, क्योंकि हमने उन्हें ग्रह पूजा आदि धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से ग्रहों के साथ व उनके प्रकाश के साथ नहीं जोड़ा होता है। दूसरे शब्दों में कहें तो उनकी ट्यूनिंग ग्रहों के साथ नहीं की होती है। वास्तव में, धार्मिक अनुष्ठानों से केवल मन की कुंडलिनी ही ऊर्जावान बनती है। अन्य गतिविधियों से विचारों की बाढ़ में शक्ति बंट जाती है। इससे कोई एक विचार ट्यूनिंग फ्रेक्वेंसी की ऊर्जा प्राप्त नहीं कर पाता। ट्यूनिंग विचार की ऊर्जा जितनी अच्छी हो, उतनी अच्छी ट्यूनिंग होगी, क्योंकि अंदर-बाहर, यहाँ-वहाँ सभी कुछ ऊर्जा से भरपूर है। इसे हम ऑटो सर्च फंक्शन भी कह सकते हैं। ग्रहों के साथ पहले से ट्यून होई हुई कुंडलिनी खुद ही एक्टिवेट हो जाती है। ग्रहों के प्रकाश में किसी भी प्रकार के बदलाव के होने पर कुंडलिनी क्रियाशील हो जाती है। वह एक बफर का काम करते हुए उन बदलाओं के झटकों से सुरक्षा प्रदान करती है। 

ग्रहों के ऊपर कुण्डलिनी के ध्यान से वह ट्यूनिंग फ्रेक्वेंसी बन जाती है

ऐसा ग्रहों के पूजन से, सूर्य को अर्घ्य देने से, प्रतिदिन ध्यानपूर्वक पंचांग पढ़ने से और अन्य विविध धार्मिक अनुष्ठानों से होता है। तभी तो शास्त्रों में आता है कि प्रतिदिन ध्यानपूर्वक पंचांग को पढ़ने वाले पर कभी कोई विपत्ति नहीं आती। किसी आदमी के लिए ग्रहों के प्रकाशमान होने पर उसकी कुंडलिनी उस प्रकाश को ग्रहण करके चमकने लगती है। जब वे ग्रह उस आदमी के लिए अंधकारमय बनते हैं, तब वही कुंडलिनी उस आदमी को प्रकाश प्रदान करती रहती है। इस प्रकार से कुंडलिनी एक बैटरी या phosphorescent/ स्‍फुरदीप्‍त पदार्थ की तरह काम करती है, जो चार्ज और डिस्चार्ज होती रहती है, और अंधकार से बचाती है। प्रतिदिन के कुंडलिनी योग से भी उसे चार्ज किया जाता रहता है।

ग्रह-शांति के उपाय कुंडलिनी को रिचार्ज करते हैं

ग्रह-शांति के लिए नवग्रह पूजन, दान, जप-तप, व्रत, यज्ञ आदि धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। ये सभी उपाय मन को प्रकाशित करते हैं। सबसे अधिक प्रकाशित कुंडलिनी होती है, क्योंकि वही मन में सर्वाधिक महत्वपूर्ण चित्र के रूप में होती है। उस कुंडलिनी से निकलने वाला प्रकाश ग्रहों के प्रकाश की कमी को पूरा कर देता है।

जीवन की प्रत्येक परिस्थिति ग्रहनिर्मित ही होती है

हरेक घटना सूर्य के प्रकाश में होती है। क्योंकि सभी आकाशीय पिंड एक-दूसरे से जुड़े हैं, इसलिए अन्य सभी ग्रहों का भी उनमें योगदान होता है। इसलिए यह स्वाभाविक है कि कुंडलिनी जीवन की प्रत्येक परिस्थिति में हितकारक होती है। यदि किसी आदमी को उन्नत होने के लिए उन्न्त होने के लिए उपयुक्त घटनाओं का सहयोग मिल रहा हो, तो हम कह सकते हैं कि उसके ग्रह शुभ हैं। इसी तरह यदि किसी आदमी को उन्नत होने के लिए घटनाएँ न मिल रही हों या अनुपयुक्त घटनाएं मिल रही हों, तो कह सकते हैं कि उसके ग्रह अशुभ हैं।

इस पोस्ट की विश्लेषणात्मक विवेचना यही है कि जिस तरह एक रेडियो सेट से हमेशा अच्छा संगीत प्राप्त करने के लिए उसे हमेशा ट्यूनिंग फ्रेकवेंसी पर ऑन रखना जरूरी है, उसी तरह हमेशा आनंदमयी बने रहने के लिए मन में हमेशा कुण्डलिनी को बसा कर रखना जरूरी है। 

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demystifyingkundalini by Premyogi vajra- प्रेमयोगी वज्र-कृत कुण्डलिनी-रहस्योद्घाटन

I am as natural as air and water. I take in hand whatever is there to work hard and make a merry. I am fond of Yoga, Tantra, Music and Cinema. मैं हवा और पानी की तरह प्राकृतिक हूं। मैं कड़ी मेहनत करने और रंगरलियाँ मनाने के लिए जो कुछ भी काम देखता हूँ, उसे हाथ में ले लेता हूं। मुझे योग, तंत्र, संगीत और सिनेमा का शौक है।

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