Understanding non-dual Tantric Kundalini Yoga, Patanjali Yogasutras, Kundalini awakening, Self-realization, and spiritual liberation through experiential, philosophical, and scientific insight. कुण्डलिनी का रहस्योद्घाटन: अद्वैत तांत्रिक कुण्डलिनी योग, पतंजलि योगसूत्र, कुण्डलिनी जागरण, आत्मज्ञान और मोक्ष को अनुभव, दर्शन और वैज्ञानिक दृष्टि से सरल रूप में समझाया गया है।
जय माता दुर्गे जय माता तारा। हम पापी मानुष को तेरा सहारा।। जय माँ भवानी तेरा जयकारा। भव-सा-गर का तू ही किनारा।। जय माता दुर्गे------ हिंगलाज नानी। जय हो जयकारा तेरे लिए मेरा जीवन पहारा।। जय माता--- भटकूँ अवारा बेघर बिचारा। तेरे सिवा नहीं अब कोई चारा।। जय माता--- जग देख सारा भटका मैं हारा। भूलूँ कभी न तेरा नजारा।। जय माता--- हे अम्बे रानी जय जय जयकारा पागल सुत तेरा नकली खटारा।। जय माता---- तू ही जगमाता तू ही विधाता। तू जो नहीं हमें कुछ भी न आता।। हम थरमामीटर तू उसमें पारा। तू क्षीरसागर हम पानी खारा।। जय माता--- किसमत का मारा जग में नकारा तू जो मिले जग पाए करारा।। हे माता--- जो है हमारा सब है तुम्हारा। दूँ क्या मैं तुझको जो हो हमारा।। जय माता दुर्गे जय माता तारा। हम पापी मानुष को तेरा सहारा।। साभार~भीष्म🙏@bhishmsharma95