शरीरविज्ञान दर्शन- एक आधुनिक कुण्डलिनी तंत्र (एक योगी की प्रेमकथा)

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यदि आप अपने त्वरित आध्यात्मिक विकास और साथ में भौतिक विकास के बारे में वास्तव में गंभीर हैं, तो यह ई-पुस्तक (हिंदी, ऐमजॉन डॉट इन पर*****पांच सितारा प्राप्त; सर्वश्रेष्ठ, सर्वपठनीय व उत्कृष्ट / अत्युत्तम / अनौखी पुस्तक के रूप में निष्पक्षतापूर्वक समीक्षित / रिव्यूड) सिर्फ आपके लिए है। एक अनौपचारिक समीक्षक के द्वारा इसे पुरानी शैली के रुझान वाली कहा गया। परन्तु यह तथ्य ध्यान देने योग्य है कि “कुण्डलिनी” शब्द ही पुराना व संस्कृत का है, इसलिए कोई आश्चर्य की बात नहीं। इसके अतिरिक्त, गूगल प्ले (Google Play) पर इस पुस्तक को चार समीक्षाएँ मिलीं, प्रत्येक में पांच सितारा ग्रेडिंग के साथ।

यह कागज़-मुद्रित रूप में (पोथी.कॉम) भी उपलब्ध है। प्रेमयोगी वज्र ने इस पुस्तक को किसी दैवीय प्रेरणा से  अपने कुंडलिनीजागरण के एकदम बाद लिखा, जिस समय वह उसके पूर्ण सकारात्मक व आनंदमयी प्रभाव के अंदर गोते लगा रहा था। इसीलिए वह प्रभाव इस पुस्तक में भी परिलक्षित होता है। इस पुस्तक का सम्पूर्ण सार इसी वेबसाईट पर उपलब्ध है।परन्तु अधिक विस्तार, सजावट, क्रमबद्धता, सौन्दर्य, मनोरमता व प्रेरणा की प्राप्ति के लिए तो मूल पुस्तक की ही संस्तुति की जाती है।

ई-व्यावसायिक स्थलों पर इस पुस्तक की खरीद के लिंक के लिए, कृपया वेबपेज “शॉप / SHOP” देखें, तथा साथ में इस पुस्तक के निःशुल्क संस्कृत-संस्करण को भी डाऊनलोड करें, ताकि आप पुराण-शैली में रचित इस पुस्तक से संस्कृत सीखकर कालातीत संस्कृत-साहित्य (विशेषकर संस्कृत पुराणों ) का आनंद उठा सकें।

यदि आप एक आत्मप्रबुद्ध व्यक्ति की असली कहानी (आतंरिक लिंक- तांत्रिक वेबपृष्ठ) पढ़ना चाहते हैं, जिसकी कुंडलिनी भी जागृत हो गई है, वह कैसे आत्मप्रबुद्ध हुआ, और कैसे उसकी कुंडलिनी जागृत हुई (आतंरिक लिंक); एक हिंदी / उपन्यास (काल्पनिक, वैज्ञानिक और रोमांचक रूप वाला) के रूप में आसान हिंदी के साथ / व्यावहारिक तरीके से, तो यह ई-बुक सिर्फ आपके लिए है।

पुस्तक क्यों जरूरी है?

यदि आप कुंडलिनी की प्रकृति के बारे में संदिग्ध हैं, और वास्तव में सबसे व्यावहारिक और अनुभवी तरीके से इसके रहस्य को समझना चाहते हैं, तो यह ई-पुस्तक सिर्फ आपके लिए है।

यदि आप देशभक्ति और राष्ट्रवाद के मीठे अमृत में गहरे डूब जाना चाहते हैं, तो ई-बुक सिर्फ आपके लिए है।

अगर आप समझना चाहते हैं कि महर्षि पतंजलिकृत अष्टांग योग (8 अंग-योग, बाह्य वेबसाईट- ज्ञानविज्ञानवाटिका) को पूरी तरह से एक बच्चे के खेल के साथ-साथ पूरी गहराई के साथ, दोनों विपरीत दिखने वाले तरीकों से एकसाथ समझना चाहते हैं, तो यह ई-किताब सिर्फ तुम्हारे लिए है।

यदि आप ज्ञानप्राप्ति के लिए दुनिया को त्यागना नहीं चाहते हैं, तो ई-बुक सिर्फ आपके लिए है।

यदि आप अपनी सांसारिक गतिविधियों को वापिस आकर्षित नहीं करना चाहते हैं, बल्कि इसके बजाय उनको तेज़ करना चाहते हैं, तो वही ई-बुक सिर्फ आपके लिए है।

यदि आप सांसारिक और आध्यात्मिक, दोनों क्षेत्रों का एकसाथ आनंद लेना चाहते हैं, तो ई-पुस्तक सिर्फ आपके लिए तैयार की गई है।

यदि आप अपने सांसारिक कार्यों में बहुत व्यस्त हैं, जिससे अपने आध्यात्मिक विकास के लिए आपके पास समय नहीं है, तो ई-बुक सिर्फ आपको चाहिए।

यदि आप अपनी सांसारिक गतिविधियों के दौरान अपने मानसिक दोलन व तनाव से अधिक परेशान हो जाते हैं, तो यह ई-बुक सिर्फ आपके लिए है।

यदि आप अक्सर मानवता और धर्मों के बारे में उलझन में हैं, तो आपको बस याहन पर अपने प्रवास का आनंद लेना चाहिए।

यदि आपने किसी चीज़ के बारे में संदेह के पहाड़ को इकट्ठा किया है, तो ई-बुक उसको पार करने के लिए आपके विमान की तरह है।

यदि आपको अपनी साधना करने पर उपयोगी परिणाम नहीं मिल रहे हैं, तो ई-बुक आपके लिए एक सही मार्गदर्शिका है।

यदि आप एक ही समय में सभी धर्मों और आध्यात्मिकता की मूल बातें पढ़ना चाहते हैं; सिर्फ एक उपन्यास की तरह की, कथा जैसी, विज्ञान की तरह की, भौतिकवाद की तरह की, कहानी जैसी, जीवनी जैसी, स्वास्थ्य जैसी, योग जैसी, ध्यान जैसी, रोमांस जैसी और कई और प्रकार की शैलियों की तरह, सभी एक साथ; तो ई-बुक सिर्फ आपके लिए है।

यदि आप मानव जीवन के रहस्य और संभवतः अन्य जो कुछ भी संभव हो, उसे एक ही ई-पुस्तक में जानना चाहते हैं, तो आप इस ई-बुक, शरीरविज्ञान दर्शन-एक आधुनिक कुंडलिनी तंत्र (एक योगी की प्रेमकथा) के लिए सही गंतव्य हैं।

यदि आप मुक्ति के मार्ग को बहुत तेज़ी से पार करना चाहते हैं, तो ई-बुक केवल आपके लिए डिज़ाइन किया गया है।

यदि आप खुद को एक पल में सकारात्मक रूप से परिवर्तित करना चाहते हैं, तो ई-बुक सिर्फ आपके लिए बुला रही है।

यदि आप आध्यात्मिक और धार्मिक औपचारिकताओं / अनुष्ठानों के अनावश्यक बोझ से दूर रहना चाहते हैं, और बस व्यावहारिक होना चाहते हैं, तो ई-पुस्तक सिर्फ आपके लिए खोज कर रही है।

यदि आप एक पल में एक धार्मिक सहिष्णु और एक परिपूर्ण इंसान बनना चाहते हैं, तो ई-बुक सिर्फ आपके लिए उम्मीद कर रही है।

यदि आप आध्यात्मिकता के पीछे छिपे वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों को जानना चाहते हैं, तो यह ई-बुक सिर्फ आपकी त्वरित स्वीकृति की उम्मीद कर रही है।

यदि आप अपने नीरस जीवन में कुछ ऊब जैसे गए हैं, और आमतौर पर कम या अधिक रूप से उदास या अवसादग्रस्त हो जाते हैं, तो ई-बुक आपके जीवन में आवश्यक उड़ान-पंख संलग्न करने के लिए तैयार है।

यदि आप प्यार, रोमांटिक रिश्तों और लिंग के पीछे रहस्यों का खुलासा करना चाहते हैं, तो ई-बुक सिर्फ आपके लिए उत्सुक है।

यदि आप एक ही पुस्तक के भीतर सभी प्रकार की मानवीय भावनाओं और शैलियों की तलाश करने की आदत रखते हैं, तो यह वही पुस्तक आपके उद्देश्य को हल करने के लिए यहां है।

यदि आप अपना खुद का शिक्षक बनना चाहते हैं, तो ई-बुक यहां आपको मार्गदर्शन करने के लिए है।

यदि आप अपने लिए कोई आध्यात्मिक गुरु या मास्टर या गाइड नहीं ढूंढ पा रहे हैं, तो ई-बुक इसके लिए आपकी मदद करने के लिए है।

यदि आपके पास मूल भाषा में व विस्तार से महान वेदों-पुराणों (बाह्य वेबसाईट- भारतकोष) को पढ़ने के लिए समय की कमी या विश्वास की कमी है, हालांकि आप उनसे अपने लिए पूर्ण लाभ प्राप्त करना चाहते हैं, तो पुस्तक की पुरजोर संस्तुति की जाती है।

यदि आप चरमपंथी धर्मों के पीछे छिपे शक्ति के संभावित स्रोत को जानना चाहते हैं, तो यह ई-पुस्तक सिर्फ आपके लिए है।

यदि आप हिंदू धर्म या सनातनवाद (बाह्य वेबसाईट- webduniya.com) के पीछे छिपे रहस्य और महानता को उजागर करना चाहते हैं, तो ई-बुक सिर्फ आपके लिए है।

यदि आप अपने शरीर को एक पवित्र मंदिर या यंत्र-मंडल की तरह का बनाना चाहते हैं, तो यह ई-बुक सिर्फ आपके लिए है।

यदि आप अपने खुद के भौतिक शरीर को इस तरह का बनाना चाहते हैं, जैसे कि वह आपका खुद का गुरु या मास्टर हो, तो यह ई-बुक सिर्फ आपके लिए है।

यदि आप सेक्स का एक परिपूर्ण और आनंददायक तरीके से आनंद लेना चाहते हैं, तो यह पुस्तक सिर्फ आपके लिए है।

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पुस्तक परिचय

यह ई-पुस्तक एक प्रकार की आध्यात्मिक-भौतिक प्रकार की मिश्रित कल्पना पर आधारित है। यह हमारे शरीर में प्रतिक्षण हो रहे भौतिक व आध्यात्मिक चमत्कारों पर आधारित है। यह दर्शन हमारे शरीर का वर्णन आध्यात्मिकता का पुट देते हुए, पूरी तरह से शरीरविज्ञान व विज्ञान के अनुसार करता है। इसी से यह आम जनधारणा के अनुसार नीरस चिकित्सा विज्ञान को भी बाल-सुलभ सरल व रुचिकर बना देता है। यह पाठकों की हर प्रकार की आध्यात्मिक व भौतिक जिज्ञासाओं को शांत करने में सक्षम है। यह सृष्टि में विद्यमान प्रत्येक स्तर की स्थूलता व सूक्ष्मता को एक करके दिखाता है, अर्थात यह द्वैताद्वैत/विशिष्टाद्वैत की ओर ले जाता है। यह दर्शन एक उपन्यास की तरह ही है, जिसमें भिन्न-२ अध्याय नहीं हैं। प्रेमयोगी वज्र ने इसे किसी पर आधारित करके नहीं, अपितु अपने ज्ञान, अनुभव व अपनी अंतरात्मा की प्रेरणा से रचा है; यद्यपि बाद में यह स्वयं ही उन मूलभूत सिद्धांतों पर आधारित प्रतीत हुआ, जिन पर पहले की बनी हुई बहुत सी रचनाएं विद्यमान हैं। यह दर्शन कर्मयोग, तंत्र, अद्वैत, द्वैताद्वैत, ताओवाद(taoism) व अनासक्ति के आध्यात्मिक सिद्धांतों पर आधारित है। इस दर्शन में कनफ्यूसियस के मानवतावादी प्रशासन का समावेश भी है। इस दर्शन में मानवतावादी  राष्ट्रीयता भी कूट-कूट कर भरी हुई है। यह दर्शन वास्तव में लगभग २० वर्षों के दौरान, एक-२ विचार व तर्क को इकट्ठा करके तैयार हुआ, जिनके साथ प्रेमयोगी वज्र का लंबा व व्यस्त जीवन-अनुभव भी जुड़ता गया। इसीसे यह दर्शन जीवंत व प्रेरणादायक प्रतीत होता है। प्रेमयोगी वज्र ने वैसे तो इसे अपने लाभ के लिए, अपने निजी दर्शन के रूप में निर्मित किया था, यद्यपि इसके अभूतपूर्व प्रभाव को देखते हुए, इसे सार्वजनिक करने का निर्णय बाद में लिया गया। प्रेमयोगी वज्र को इस दर्शन से सम्बंधित वस्तुओं को अपने यात्रा-थैले(COMMUTE BAG) में डालने की आदत पड़ गई थी, क्योंकि उससे उसे एक दिव्य, प्रगतिकारक व सुरक्षक शक्ति अपने चारों ओर अनुभव होती थी। इसका अर्थ है कि शविद(शरीर-विज्ञान-दर्शन) को ई-रीडिंग डीवाईसीस पर डाउनलोडिड-रूप(DOWNLOADED FORM) में सदैव साथ रखने से तांत्रिक लाभ की संभावना है। इस दर्शन से प्रेमयोगी वज्र का अध्यात्म व भौतिकता को आपस में जोड़ने का लम्बा स्वपन पूरा होता है। प्रेमयोगी वज्र को पूर्ण विश्वास है कि इस दर्शन की धारणा से मुक्ति प्रत्येक मानवीय स्थिति में पूर्णतया संभव है। ऐसा ही अनुभव प्रेमयोगी वज्र को भी तब हुआ था, जब शविद के पूरा हो जाने पर वह खुद ही कुण्डलिनीयोग के उच्च स्तर पर प्रतिष्ठित हो गया और कुछ अभ्यास के उपरान्त उसकी कुण्डलिनी उसके मस्तिष्क में अचानक से प्रविष्ट हो गई, जिससे उसे क्षणिक समाधि का अनुभव हुआ। अपने क्षणिकात्मज्ञान के बाद जब प्रेमयोगी वज्र की कुण्डलिनी इड़ा(भावनात्मक)नाड़ी में सत्तासीन हो गई थी, तब इसी दर्शन की सहायता से प्रेमयोगी ने उसका प्रवेश पिंगला नाड़ी(कर्मात्मक)में करवा कर उसे संतुलित किया। यह दर्शन सभी के लिए लाभदायक है; यद्यपि स्वास्थ्य व शरीर से सम्बंधित, सुरक्षा से सम्बंधित, कठिन परिश्रमी, उद्योगी, मायामोह में डूबे हुए, अनुशासनप्रिय, भौतिकवादी, वैज्ञानिक, समस्याओं से घिरे हुए लोगों के लिए तथा धर्म, मुक्ति, मानवता, विज्ञान व कैरियर के बारे में भ्रमित लोगों के लिए यह अत्यंत ही लाभदायक है। प्रेमयोगी वज्र को कुण्डलिनी के बारे में हर जगह भ्रम की सी स्थिति दिखी। यहाँ तक कि प्रेमयोगी वज्र स्वयं भी तब तक भ्रम की स्थिति में रहा, जब तक उसने कुण्डलिनी को साक्षात व स्पष्ट रूप में अनुभव नहीं कर लिया। अतःकुण्डलिनीजिज्ञासुओं के लिए तो यह पुस्तक किसी वरदान से कम नहीं है। मूलरूप में शविद संस्कृत भाषा में लिखा गया था, परन्तु आम पाठकों के द्वारा समझने में आ रही परेशानियों व ई-छपाई कंपनियों द्वारा वर्तमान में संस्कृत भाषा को सपोर्ट न किये जाने के कारण इसका हिंदी में अनुवाद करना पड़ा। यह अन्य मिथक साहित्यों से इसलिए भी भिन्न है, क्योंकि यह मिथक होने के साथ-२ सत्यता से भी भरा हुआ है, अर्थात एक साथ दो भावों से युक्त है, बहुत कुछ पौराणिक साहित्य से मिलता-जुलता। इसे पढ़कर पाठक शरीर-विज्ञान के अनुसार शरीर की अधिकाँश जानकारी प्राप्त कर लेता है; वह भी रुचिकर, प्रगतिशील व आध्यात्मिक ढंग से। इस पुस्तक में प्रेमयोगी वज्र ने अपने अद्वितीय आध्यात्मिक व तांत्रिक अनुभवों के साथ अपनी सम्बन्धित जीवनी पर भी थोड़ा प्रकाश डाला है। इसमें जिज्ञासु व प्रारम्भिक साधकों के लिए भी आधारभूत व साधारण कुण्डलिनीयोग-तकनीक का वर्णन किया गया है। आधारभूत यौनयोग पर भी सामाजिकता के साथ सूक्ष्म प्रकाश डाला गया है। प्रेमयोगी ने इसमें अपने क्षणिकात्मज्ञान(GLIMPSE ENLIGHTENMENT) व सम्बंधित परिस्थितियों का भी बखूबी वर्णन किया है। प्रेमयोगी ने विभिन्न धर्मों, वेदों, पुराणों, उपनिषदों, दर्शनों व अन्य धर्मशास्त्रों का भी अध्ययन किया है, मूल भाषा में; अतः अत्यावश्यकतानुसार ही शविद(शरीरविज्ञान दर्शन)से जुड़े हुए उनके कुछेक विचार-बिंदु भी इस पुस्तक में सम्मिलित किए गए हैं। पुस्तक के प्रारम्भ के आधे भाग में, शरीर में हो रही घटनाओं का सरल व दार्शनिक विधि से वर्णन किया गया है। प्रेमयोगी वज्र एक आध्यात्मिक रहस्यों से भरा हुआ व्यक्ति है। वह आत्मज्ञानी(ENLIGHTENED) है व उसकी कुण्डलिनी भी जागृत हो चुकी है। उसने प्राकृतिक रूप से भी योगसिद्धि प्राप्त की है व कृत्रिमविधि अर्थात कुण्डलिनीयोग के अभ्यास से भी। उसके आध्यात्मिक अनुभवों को उपलेखक ने पुस्तक में, उत्तम प्रकार से कलमबद्ध किया है। जो लोग योग के पीछे छुपे हुए मनोविज्ञान को समझना चाहते हैं, उनके लिए यह पुस्तक किसी वरदान से कम नहीं है। इस पुस्तक में स्त्री-पुरुष संबंधों का आधारभूत सैद्धांतिक रहस्य भी छुपा हुआ है। यदि कोई प्रेमामृत का पान करना चाहता है, तो इस पुस्तक से बढ़िया कोई भी उपाय प्रतीत नहीं होता। इस पुस्तक में सामाजिकता व अद्वैतवाद के पीछे छुपे हुए रहस्यों को भी उजागर किया गया है। वास्तव में यह पुस्तक सभी क्षेत्रों का स्पर्ष करती है। अगर कोई हिन्दुवाद को गहराई से समझना चाहे, तो इस ई-पुस्तक के समान कोई दूसरी पुस्तक प्रतीत नहीं होती। यदि दुर्भाग्यवश किसी का पारिवारिक या सामाजिक जीवन समस्याग्रस्त है, तो भी मार्गदर्शन हेतु इस पुस्तक का कोई मुकाबला नजर नहीं आता। यह पुस्तक साधारण लोगों(यहाँ तक कि तथाकथित उत्पथगामी व साधनाहीन भी)से लेकर उच्च कोटि के साधकों तक, सभी श्रेणी के लोगों के लिए उपयुक्त व लाभदायक है। उपन्यास के शौकीनों को भी यह ई-पुस्तक रोमांचित कर देती है। इस पुस्तक को बने बनाए क्रम में ही सम्पूर्ण रूप से पढ़ना चाहिए और बीच में कुछ भी छोड़ना नहीं चाहिए, क्योंकि इसे उचित क्रम में ही श्रृंखलाबद्ध किया गया है। एक बार पढ़ना शुरू करने के बाद पाठकगण तब तक पीछे मुड़कर नहीं देखते, जब तक कि इस पुस्तक को पूरा नहीं पढ़ लेते। इसको पढ़कर पाठक गण अवश्य ही अपने अन्दर एक सकारात्मक परिवर्तन महसूस करेंगे। ऐसा प्रतीत होता है कि इस ई-पुस्तक में मानव जीवन का सार व रहस्य छुपा हुआ है। आशा है कि प्रस्तुत ई-पुस्तक पाठकों की अपेक्षाओं पर बहुत खरा उतरेगी।

एक पुस्तक-पाठक की कलम से

भाइयो, बहुत से लोग अपने अहंकारपूर्ण जीवन में व्यस्त हैं, जो नरक के लिए एक साक्षात द्वार है। इसी तरह, कुछ लोग त्याग-भावना के बहकावे में आ जाते हैं। उपरोक्त दोनों ही प्रकार के लोग आंशिक सत्य पर चलने वाले प्रतीत होते हैं——

एक पुस्तक-पाठक की कलम से

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