वेबसाईट का निर्माण, प्रबंधन व विकास, भाग-3; Website creation, management and development, part-3

वेबसाईट का निर्माण, प्रबंधन व विकास, भाग-3 (please browse down or click here to view this post in English)

(4) साईट पेजस- यह हरेक वेबपेज को एक सूचि में दिखाता है। वहां पर हरेक पेज पर उसके एडिट करने का, उसका स्टेट जानने का व उसे ट्रेश में डालने का विकल्प होता है। ट्रेश एक रिसाईकल बिन की तरह होता है, जहाँ से हम वेबपेज को पुनः प्राप्त कर सकते हैं। इसलिए ट्रेश बिन को कभी खाली नहीं करना चाहिए। उस पर एक पेज को एड (जोड़) करने का भी विकल्प होता है। (5) ब्लॉग posts- वहां पर सभी पोस्टों की सूचि होती है। उन सभी की जांच-परख  (एडिट आदि) भी हम उपरोक्तानुसार ही कर सकते हैं। (6) मीडिया- उस पर वेबसाईट के सभी चित्रों की सूचि  कुछ क्रियाकलापों के साथ दिखती है। (7) कमेंट्स- इसमें सभी कमेंट्स (पिन्जबेक व ट्रेकबेक के साथ) होते हैं। वहां हम उन्हें एप्रूव या डीस्प्रूव कर सकते हैं। यदि कोई कमेन्ट झूठा / स्पाम लगे, तो उसे एप्रूव नहीं करना चाहिए। वैसे भी ऐसे कमेन्ट खुद ही स्पाम फोल्डर में चले जाते हैं। पिन्जबेक व ट्रेकबेक भी कमेन्ट ही होते हैं, जो तब मिलते हैं, जब कोई हमारी वेबसाईट को अपनी वेबसाईट से लिंक करता है (हमारी वेबसाईट के यूआरएल लिंक एड्रेस को अपनी वेबसाईट पर कोपी-पेस्ट करके)। पिंजबेक व ट्रेकबेक की सहायता केवल वर्डप्रेस नामक सेवाप्रदाता कंपनी ही देती है। (8) फीडबेक- इस  पर सभी संदेशों का पूर्ण ब्यौरा होता है, जो कभी भी लोगों ने वेबसाईट को प्रेषित किए हों। (9) वर्डएड्स- जैसा कि पहले भी बताया जा चुका है। (10) शेयरिंग- इस पर वेबसाईट ब्लॉग को अपने फेसबुक, ट्विटर, गूगल अकाऊंट आदि से कनेक्ट या डिसकनेक्ट किया जाता है। कनेक्ट करने से सभी लिखी गईं ब्लॉग पोस्ट एकदम से सभी कनेक्टीड सोशल मीडिया अकाऊंट पर खुद ही शेयर हो जाती हैं।

यह ध्यान रहे कि आजकल पूर्ण वेबसाईट का प्रचलन है। इसमें वेबसाईट व ब्लॉग-पोस्ट, दोनों का लाभ एकसाथ मिलता है। कोई वेबसाईट सिर्फ वेबसाईट ही हो सकती है। इसी तरह कोई ब्लॉग साईट सिर्फ ब्लॉग साईट ही भी हो सकती है। यद्यपि ये कुछ सस्ती हो सकती हैं, पर इनसे मन नहीं भरता। वर्डप्रेस पूर्ण वेबसाईट की सुविधा देती है। उसमें कुछ स्टेटिक पेज वेबसाईट को निर्मित करते हैं, और अन्य पेज ब्लॉग पोस्ट के लिए रखे होते हैं। (11) पीपल- इसमें ये सूचि होती है- टीम (इसमें एडमिन, एडिटर, औथर, कन्ट्रीब्यूटर लोगों का ब्यौरा होता है। हम इन्हें विस्तार दे सकते हैं), फोलोवर (सभी फोलोवर लोगों का ब्यौरा), इन्वाईटी (बाहर से निमंत्रित किए गए लोग व उनके रोल का ब्यौरा। हम कभी भी किसी को भी इनवाईट करके उसे उपर्युक्त कोई भी रोल दे सकते हैं)।

उपरोक्त ही बटन अधिकाँश व मुख्य होते हैं।

वर्डप्रेस पर ब्लॉग-पोस्ट लिखना- जैसा कि पहले भी बताया जा चुका है कि किसी भी वेबपेज के टॉप पर प्लस के निशान वाले कागज़ को प्रेस करके पोस्ट लिखने के लिए एक खाली वेबपेज खुलता है। उसमें सबसे ऊपर टाईटल के लिए अलग जगह होती है। उस पर लिखे गए शब्द खुद ही बड़े आकार में होते हैं। फिर पोस्ट का पहला पहरा हेडिंग-2 में लिखना चाहिए, यदि हिंदी में हो, अन्यथा केवल ब्लोक लेटर में ही लिखना चाहिए, क्योंकि हेडिंग में आने पर अंगरेजी के शब्द केपिटल बन जाते हैं। पूरे लेख को जस्टीफाईड एलाईनमेंट दें, यदि कविता हो तो सेन्ट्रल अलाईनमेंट दें।  एमएस वर्ड की तरह वहां पर लिखने की सभी सुविधाएं होती हैं। अच्छा रहेगा यदि मूल पोस्ट  को पहले एमएस वर्ड में बना लो, फिर उसे ब्लॉग पेज पर कोपी-पेस्ट करो। फिर छोटी-मोटी कमियाँ वहां पूर्ण करते रहो। ऐसा इसलिए, क्योंकि ब्लॉग पेज पर स्पेलिंग व ग्रामर को ठीक करने की सुविधा नहीं होती, और कई बार तो बीच में लिखने पर पहले से लिखे गए अक्षर कटने भी लग जाते हैं। कुछ —- अगली पोस्ट पर जारी—-

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Website creation, management and development, part-3

(4) Sites pages – This shows each webpage in a list. There is an option to edit it on each page, to know its state and put it in trash. Trash is like a recycling bin, from which we can retrieve the webpage. Therefore, the trash bin should never be made empty. There is also an option to add a page to it. (5) Blog posts – There is a list of all posts on there. We can also examine them all as per the above. (6) Media – The list of all the pictures of the website is displayed on it with some activities. (7) Comments- It contains all the comments (with Pingback and Trackback). We can approve or dispose these pings there. If a statement is false / spam, then it should not be approved. Anyway, such comments themselves go to the spam folder. Pingback and Trackback are also the comments, which are received when someone links our website to his website (by copying the URL link address of our website to his website). PingBack and Trackback is only provided by a service provider named WordPress. (8) Feedback – There is full details of all the messages on this, which have ever been sent to the website. (9) WordAds – as has been said before. (10) Sharing – By this, the website blog is connected to or disconnected to your Facebook, Twitter, Google Account etc. By connecting, all written blog posts are automatically shared on all the connected social media accounts.

Keep in mind that nowadays the full website is famous. In this, the benefits of both the website and the blog get together. Only a website can be a website. Similarly, a blog site can be just a blog site. Although these may be cheap, but do not appeal to mind much. WordPress offers full website support. Some Static Pages make up the website in it, and the other pages are kept for blog posts. (11) People – This list contains – Team (This includes the details of the Admin, Editor, Author, Contributor, We can extend them), Follower (Details of all the Follower people), Invitee (Invited from outside, the details of the invited people and their role, we can give any invitee any role as above).

The above buttons are mostly and main.

Writing a blog-post on WordPress- As already mentioned, a blank webpage opens to write a post by pressing the plus-mark paper on the top of any of the webpage. At the top there is a separate place for the title. The words written on it are themselves in large size. Then the first paragraph of the post should be written in the heading-2, if it is in Hindi, otherwise it should be written in the block letter only, because English words become capitals when in heading. Give the whole article a justified alignment, central if it is a poem. Like MS Word, there are all the facilities for writing. It would be good if you made the original post first in MS Word, then post it on the blog page. Then keep undoing small defects there. That’s because the blog page does not have the ability to fix spelling and grammar, and sometimes it gives a cut in the already written text if some text added afterwards. Something —- Continued on next post—-

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demystifyingkundalini

I am as natural as air and water. I take in hand whatever is there to work hard and make a merry. I am fond of Yoga, Tantra, Music and Cinema.

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