टाईपिंग आर्ट / टंकण कला- एक अद्भुत शौक (PLEASE BROWSE DOWN OR CLICK HERE TO VIEW POST IN ENGLISH)

लोग सोचते हैं कि टाईपिंग सीखने के लिए किसी विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। व्यावसायिक टाईपिंग / professional typing के लिए यह बात कुछ हद तक सही हो सकती है, पर व्यक्तिगत टाईपिंग के लिए अपनी उपयुक्तता के अनुसार, जैसे मर्जी टाईप / type किया जा सकता है। कई लोग मात्र दो उँगलियों से (एक-२ अंगुली दोनों हाथों की) भी बहुत तेज टाईप कर लेते हैं। ऐसे लोगों में बहुत से तो व्यावसायिक टंकण-कर्ता / professional typists भी होते हैं। टाईप करते हुए, पैराग्राफ / paragraph की पहली लाइन को इंडेंट-स्पेस / indent-space देने के लिए कीबोर्ड / keyboard की टैब की / tab key नहीं दबानी चाहिए, क्योंकि टेब की से बनी हुई स्पेस को ईबुक में स्वीकार नहीं किया जाता। एंटर बटन / enter key केवल नए पैराग्राफ को शुरू करने के लिए ही दबाना चाहिए, अन्यथा नहीं। कईयों को टाईप करते हुए हरेक लाइन के अंत में एंटर की दबाने की गलत आदत होती है। उससे एम एस वर्ड / ms word हरेक लाइन को एक नए पैराग्राफ की तरह लेता है, जिससे पैराग्राफ से सम्बंधित बहुत सी सेटिंग्स / settings गड़बड़ा जाती हैं। पैराग्राफ की पहली लाइन के इंडेंट (पेज के लिखित भाग के बाएँ किनारे से उस विशेष लाईन के प्रारम्भ की दूरी) को पैराग्राफ की सेटिंग से निर्धारित करना चाहिए। उसके लिए इंडेंटेशन / indentation ऑप्शन में जा कर स्पेशल / special के अंतर्गत फर्स्ट  लाइन / first line को सेलेक्ट करना चाहिए, और उसकी इंडेंट स्पेसिंग को 0.5 सेंटीमीटर पर एडजस्ट / adjust कर देना चाहिए। इससे प्रत्येक पैराग्राफ की पहली लाइन 0.5 सेंटीमीटर अन्दर से ही शुरू होगी। वास्तविक पुस्तक के शुरू होने से पहले के पुस्तक-परिचय आदि के भाग में फर्स्ट लाइन इंडेंट अच्छा नहीं लगता, इसलिए उस भाग को सेलेक्ट / select करके फर्स्ट लाइन इंडेंट को शून्य कर देना चाहिए। वहां पर एक पैराग्राफ को दूसरे पैराग्राफ से विभक्त करने के लिए, पैराग्राफज / paragraphs के बीच में अतिरिक्त स्पेस / additional space (लाईनों के बीच में स्पेस से ज्यादा) दे देना चाहिए। इसके लिए पैराग्राफ सेटिंग के इंडेंटस एंड स्पेसिंग / indents and spacing बटन के ऑप्शन स्पेसिंग / spacing के अंतर्गत बिफोर या आफ्टर / before or after को सेलेक्ट करके उसमें यथावश्यक इंडेंट स्पेसिंग भर दी जाती है। कई बार ऐसा करते हुए, पूरे डोकुमेंट / document की पैराग्राफ सेटिंग भी वैसी ही हो जाती है। उसको दूर करने के लिए बार-२ अनडू / undo बटन को दबाते हुए उस नई सेटिंग को सेलेक्ट किए गए, पुस्तक के प्रारम्भिक भाग तक ही सीमित कर देना चाहिए। एमएस वर्ड का फाईन्ड एंड रिप्लेस / find and replace फंक्शन / function भी बहुत लाजवाब होता है। पूरे बुक-डोक्युमेंट / book-document में बारम्बार हुई किसी भी शब्द / लेख की गलती एक बार में ही वहां से दूर हो जाती है। यहाँ तक कि कॉमा, पूर्णविराम-डंडे के पहले या बाद के स्पेस को भी वहां से ठीक किया जा सकता है। गूगल हिंदी इनपुट / google hindi input में हिंदी के पूर्णविराम-डंडे का चिन्ह नहीं होता, इसलिए अंग्रेजी के डॉट से काम चलाना पड़ता है। हम फाईन्ड एंड रिप्लेस फंक्शन में फाईन्ड / find के स्थान पर डॉट / dot व रिप्लेस / replace के स्थान पर पूर्णविराम-डंडे / full stop bar  को टाईप करके ‘रिप्लेस आल’ / replace all के बटन को क्लिक करते हैं, तो पूरी पुस्तक-फाईल की हजारों रिप्लेसमेंटे / replacements पलक झपकते ही हो जाती हैं। एमएस वर्ड में अंग्रेजी भाषा के लिए तो इनबिल्ट / inbuilt ‘स्पेलिंग एंड ग्रामर’ / spelling and grammer बना होता है, जिसकी मदद से करेक्शन / correction की जा सकती है, पर हिंदी के लिए ऐसा सोफ्टवेयर / software अभी बना नहीं है। हिंदी टाईपिंग के लिए सबसे अच्छा तरीका है कि बिना मोनिटर स्क्रीन / monitor screen को देखे ही, कीबोर्ड को देखते हुए टाईप करते रहें। कुछ पैराग्राफ टाईप हो जाने पर, उन्हें पढ़ते हुए एकसाथ करेक्शन / correction कर लो। इससे टाईपिंग की स्पीड / speed भी बढ़ जाती है। Ctrl और A कुंजी दोनों को एक साथ दबाकर पूरा दस्तावेज़ चुना जाता है। पाठ / लेख / टेक्स्ट की प्रतिलिपि बनाने के लिए Ctrl और C कुंजी दबाए जाते हैं, और कॉपी किए गए टेक्स्ट को चिपकाने के लिए V कुंजी के साथ Ctrl कुंजी को दबाया जाता है। टाइप किए गए पदार्थ को हटाने के लिए ‘पूर्ववत करें / अनडू / undo’ बटन दबाएं। लेख को बेहतर या बड़े आकार में देखने के लिए शीर्ष मेनू पट्टी से फ़ॉन्ट आकार को न बदलें, क्योंकि ऐसा करने से हर बार फ़ाइल सेटिंग बदलती रहेगी, जो कुछ झंझट पैदा करेगी। बेस बार से ज़ूम करके केवल सिंगल बैठक के लिए ही फ़ॉन्ट आकार बढ़ेगा, फॉण्ट सेटिंग में बदलाव नहीं होगा। हर बार जब आप उस फ़ाइल का उपयोग करते हैं, तो भ्रम से बचने के लिए मामले के अनुसार ईबुक या प्रिंट बुक को सेटिंग्स / settings / फोर्मेटिंग / formatting के साथ बैकअप में स्टोर करके रखें, ताकि आपको बार-२ सेटिंग्स को एप्लाई न करना पड़े। कई बार तो पुरानी सेटिंग्स याद भी नहीं रहती, जिन्हें ढूँढने में काफी समय लग जाता है। किसी दूसरे से टाईपिंग कराने की बजाय खुद टाईप करना अच्छा रहता है। औरों को हस्तलेख पढ़ने में कठिनाई हो सकती है, और वे लेख को परिष्कृत भी नहीं कर सकते। खुद टाईपिंग करते हुए, पुस्तक की कमियां भी ध्यान में आती रहती हैं, पुस्तक को विस्तार मिलता रहता है, नए-2 विचार उमड़ते हैं, और पुस्तक पर अच्छी पकड़ बनती है। टाईपिंग भी एक होबी / hobby की तरह ही है। उसे करते हुए मजा आता है, तनाव हल्का हो जाता है, और मन भी शांत हो जाता है। इसी तरह का लाभ दूसरों से अपनी बुक को पब्लिश / publish करवाने की बजाय सेल्फ-पब्लिशिंग / self publishing के माध्यम से खुद पब्लिश करने से मिलता है।

यदि आपको इस पोस्ट से कुछ लाभ प्रतीत हुआ, तो कृपया इसके अनुसार तैयार की गई उपरोक्त अनुपम ई-पुस्तक (हिंदी भाषा में, 5 स्टार प्राप्त, सर्वश्रेष्ठ व सर्वपठनीय उत्कृष्ट / अत्युत्तम / अनौखीरूप में समीक्षित / रिव्यूड ) को यहाँ क्लिक करके डाऊनलोड करें। यदि मुद्रित पुस्तक ही आपके अनुकूल है, तो भी, क्योंकि इलेक्ट्रोनिक डीवाईसिस / फोन आदि पर पुस्तक का निरीक्षण करने के उपरांत ही उसका मुद्रित-रूप / print version मंगवाना चाहिए, जो इस पुस्तक के लिए इस लिंक पर उपलब्ध है। इस पुस्तक की संक्षिप्त रूप में सम्पूर्ण जानकारी आपको इसी पोस्ट की होस्टिंग वेबसाईट / hosting website पर ही मिल जाएगी। धन्यवाद।

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Typing art- a wonderful hobby

 

People think that special training is needed to learn typing. For professional typing, this may be true to some extent, but for personal typing, according to one’s suitability, one can type with any style. Many people just type just with two fingers (one of each hand) faster than others. Many of these are even professional typists. While typing, to give the indent-space to the first line of paragraph, do not press the tab key on the keyboard, because space made by this key is not accepted in ebook. Enter key should only be pressed to start new paragraphs, otherwise not. Adopted by several people, it is the wrong habit of pressing Enter at the end of each line. From this, MS Word takes each line as a new paragraph, so that many settings related to the paragraph are messed up. Indent of the first line of the paragraph (the distance of the beginning of that special first line from the left edge of the written part of the page) should be determined by the paragraph setting. For this, going to the indentation option, the ‘first line’ should be selected under ‘special’, and its indented spacing should be adjusted at 0.5 centimeters. From this, the first line of each paragraph will start from 0.5 centimeters inside. The first line indent does not look good in the part of book-introduction etc. before the start of the actual book, so that the first line indent should be zero by selecting that part. Therefore to divide one paragraph from the second paragraph of that initial part, there should be an extra space (more than the space between the adjacent lines) between adjacent paragraphs. For this, ‘indents and spacing’ of the paragraph setting is selected and then the option ‘spacing’ under that and ‘before’ or ‘after’ under that, and then the indent spacing is filled in as required. In many cases, while doing this the paragraph setting of the entire document becomes the same. To remove it, pressing the ‘undo’ icon again and again as per manipulative need limit that new setting to the initial part of the book as was selected. ‘Find and replace’ function  of MS Word is also very great. The mistake of any word / article recurrent in the entire book-document goes away at a time. Even the extra or less space before or after comma, full stop etc. can also be cured from there. Google Hindi input does not have a full-stop punctuation of Hindi, hence the dot in English has to be run. In the Find and Replace Function, we click the ‘Replace All’ button by typing the full stop bar of Hindi in place of the replace and dot in place of find button, so thousands of replacements of the file are in the blink of an eye. In MS Word, there is inbuilt ‘spelling and grammar’ for the English language, which can make corrections. This software for Hindi is not created anymore. The best way to type in Hindi is by not watching the monitor screen, just keep typing while watching the keyboard. After some paragraphs are typed, make a correction with them while reading them altogether. This also increases the speed of typing.  Whole document is selected by pressing Ctrl and A keys both together. Ctrl and C keys are pressed together for copying the text, and Ctrl key with V key is pressed for pasting the copied text. To remove typed matter press ‘undo’ button. Don’t change font size from top menu bar for better viewing and typing for that will change file setting every time, but zoom from base bar for that will increase font size for single sitting only. Keep documents in backup along with settings / formatting for eBook or print book as per the case to avoid confusion every time you use that file. It’s a good idea to type yourself instead of making typing by someone else. Others may have difficulty reading handwriting, and they cannot refine the article. While typing yourself, the drawbacks of the book also come in mind, the book gets expanded, the new ideas get energized, and the book gets a good grip. Typing is also like a hobby. It is fun to do it, the tension gets relaxed, and the mind also becomes calm. Instead of publishing the book with others, these above psychic benefit are received in a pronounced form from publishing the book by one / writer through his own / self-publishing.

In the next post we will share the self experienced matters during a website development.

If you have found some benefit from this post, please download here the above mentioned e-book (in Hindi language, 5 star rated, reviewed as the best, excellent and must read by everyone) made with steps as told above. If only print version suits you, then too print version should only be got after testing that’s e- version on the electronic devices / phone etc., that is available on this link for this book. You can also find the complete information about this book, both in English as well as Hindi languages on the hosting website of this post. Thank you.

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