वेबसाईट का निर्माण, प्रबंधन व विकास, भाग-6; Website creation, management and development, part-6

वेबसाईट का निर्माण, प्रबंधन व विकास, भाग-6 (please browse down or click here to view this post in English)

पेज जम्प लिंक भी साधारण लिंक एड्रेस के साथ अतिरिक्त कोड डालकर बनाए जाते हैं। सामान्य तौर पर लिंक को दबाने से लिंकड पेज के टॉप पर ही लेंडिंग होती है। यदि हम पेज के बीच में किसी विशेष पेराग्राफ पर सीधे ही लेंड करना चाहें, तो उसके लिए पेज जम्प लिंक बनाया जाता है। उसके लिए लिंकड पेज के एडिट मोड (एचटीएमएल में, विजुअल में नहीं) में जाकर लक्षित पेराग्राफ के प्रारम्भ में “स्टाईल” अंगरेजी के शब्द के बाद सिंगल स्पेस देकर यह कोड लिखा जाता है, id=“कुछ भी लिखो” सिंगल स्पेस——पोस्ट की सामग्री—। फिर जब उस लिंकड पेज का वेब एड्रेस भरा जाता है, तब उसके अंत में, कहीं पर भी बिना कोई स्पेस दिए, हेशटेग के  निशान के साथ  वही कोड लिखा जाता है, अर्थात #कुछ भी लिखो(जो id के साथ लिखा था)। यह मार्कर कुछ भी व किसी भी भाषा में लिखा जा सकता है, यद्यपि दोनों जगह पर यह एकसमान (समान स्पेसिंग के साथ) होना चाहिए, उपरोक्त लक्षित पेराग्राफ पर भी व उपरोक्त लिंक-निर्माण की एड्रेस बार में भी। अच्छा रहता है यदि पेज से सम्बंधित शब्द ही लिखे जाएं। जैसे कि कुण्डलिनी से सम्बंधित पेज में पहले पेज जम्प लिंक के लिए ‘कुण्डलिनी1’ व दूसरे के लिए ‘कुण्डलिनी2’ आदि-2। इसी पेज जम्प लिंक से ही एक ही पेज पर इधर से उधर एक क्लिक मात्र से जा सकते हैं, आवश्यकता के अनुसार, जैसे कि ‘गो टू टॉप ऑफ़ पेज’ आदि-2।

वेबसाईट का नाम वैसा रखना चाहिए, जो वेबसाईट की सामग्री से सर्वाधिक जुड़ा हुआ हो। हफ्ते-दस दिन के अंतराल पर नई व पर्याप्त लम्बी पोस्ट को डालते रहना चाहिए। उससे पाठकों की संख्या बढ़ी हुई रहती है। एक पोस्ट कम से कम 500 सब्दों की तो होनी ही चाहिए। वर्डप्रेस की यदि एक पोस्ट 1500 शब्दों से बड़ी हो, तो उसके टेग में ‘Longreads’ शब्द जोड़ देना चाहिए, क्योंकि लम्बी पोस्टों के अलग ही दीवाने होते हैं। आप किसी  भी आदमी को अपनी वेबसाईट से जुड़ने के लिए न्यौता दे सकते हैं। आप उसे फोलोवर, राईटर, एडमिन आदि कुछ भी बना सकते हैं।

मुझे तो लगता है कि सभी लोगों को अपनी एक वेबसाईट व एक पुस्तक बनानी चाहिए। इससे एक-दूसरे के विचारों का व जिन्दगी का पूरा पता चलता है। वेबसाईट किसी भी त्रुटि से पूर्णतया सुरक्षित रहती है। यदि लिखने में कोई त्रुटि हो जाए, तो उसे हम बिना दिक्कत के कभी भी दूर कर सकते हैं। किसी भी वेबपेज के एडिट मोड में टॉप पर एक हिस्टरी बटन बना होता है। उस पर वेबसाईट के कई हफ्तों-महीनों के सभी परिवर्तित रूप विद्यमान रहते हैं। हम किसी भी रूप में कभी भी वापिस लौट सकते हैं। यह सुविधा डेस्कटॉप पर ही विद्यमान होती है, मोबाईल डिवाईस पर नहीं। इसी तरह, हम किसी भी वेबपेज को कभी भी ट्रेश बिन में डाल सकते हैं। वह रिसाईकल बिन की तरह ही होता है, और उससे हम वेबपेज को कभी भी वापिस प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि एक महीने के बाद ट्रेशबिन  खुद ही खाली हो जाता है।

पूर्वोक्तानुसार, टॉप लेफ्ट के मुख्यरूप W-My site बटन के ड्राप डाऊन मीनू के अंत में एक सेटिंग बटन भी होता है। उसमें 5 हैड होते हैं। राईटिंग हैड में जाकर हम अवांछित पोस्ट-केटेगरी को डिलीट कर सकते हैं। डिस्कशन हैड में हम चुन सकते हैं कि हमें कब-२ ई-मेल के माध्यम से नोटिफाई किया जाए—अगली पोस्ट में जारी—

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Website creation, management and development, part-6

Page Jump Links are also created by adding additional code with simple link address. Normally, the link is lending only at the top of the link page by clicking the link. If we want to lend directly to a particular paragraph in the middle of the page, then the page jump link is created for it. For this, by entering the single space after the word “style” in the beginning of the targeted paragraph, in the edit mode of the ‘to be linked page’ (in the HTML, not in visual), this code is written, id=”Write anything” single space– —- Content of the post —. Then when the web address of that ‘to be linked page’ is filled, then at the end of it, the same code is written without any spaces with hash tag, that is, #write anything (which is written with the above said id). This marker can be written in anything and in any language, although it should be in uniform (with the same spacing) in both places, that is, on the targeted paragraph as told above and in the address bar of the above link building. It is good if words related to pages are written. For example, Kundalini 1 for the first page jump link in the page related to Kundalini and ‘Kundalini 2’ for the second etc. The same page can jump from one paragraph to another on the same page from Jump Link only, as per the requirement, such as ‘go to top of page’ etc.

The name of the website should be kept that, which is most linked to the contents of the website. New and substantial long post should be posted in the intervals of ten days. With that, the number of readers keeps increasing. A post must have at least 500 words. If a post is bigger than 1500 words in Word press, then the word ‘longreads’ should be added in its tag, because the long posts have different junkies. You can invite any person to join your website. You can make him a follower, writer, admin etc.

I feel that all people should have their own website and a book. This gives complete understanding of each other’s thoughts and lives. The website is completely secure from any error. If there is an error in writing, then we can overcome it without any difficulty. On top of any webpage in edit mode, there is a history button. There are many variations of the website for several weeks and months. We can return to any form anytime. This feature exists on the desktop, not on the mobile device. Similarly, we can put any webpage in the trash bin anytime. It is like a recycling bin, and we can get it back to the webpage anytime. However, after a month the trash bin itself is empty.

As aforementioned, there is a ‘setting’ button at the end of the drop-down menu of the main ‘W-My site’ button of the top left. There are five heads in it. We can delete unwanted post-category by visiting the Writing Head. In the Discussion Head, we can choose to notify us for which contents via e-mail—-continued in next post—-

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demystifyingkundalini

I am as natural as air and water. I take in hand whatever is there to work hard and make a merry. I am fond of Yoga, Tantra, Music and Cinema.

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