Guru can not be defined, praised, described, advertised or forcefully made. Guru is in the form of one’s own self. How can that be praised or described in anyway. Guru can only be experienced.

The same happened to Premyogi vajra. He is totally dumb regarding a Guru. He has only experiential account that he cannot describe in anyway. When he tries to describe Guru as something special, then he loses his essence totally. It is just like as if anyone can taste the sweet but cannot describe the sweetness in a true form. When he tries to describe sweetness, he loses that’s joy suddenly. Guru is a friend, not a friend, both of these and neither of these. Guru is a well wisher, not a well wisher, both of these and neither of these. Guru helps in spiritual progress, not helps in spiritual progress, both of these and neither of these. Guru has a specific age, not has a specific age, both of these and neither of these. Guru has a specific set of qualities, don’t have a specific set of qualities, both of these and neither of these. Guru is spiritually advanced, not spiritually advanced, both of these and neither of these. Guru is beloved, not beloved, both of these and neither of these. Guru is too respected, not too respected, both of these and neither of these. Guru is well known and established socially, not well known and established socially, both of these and neither of these. Guru loves his disciple, don’t love his disciple, both of these and neither of these. Guru showcases himself as a Guru, doesn’t showcase himself as a Guru, both of these and neither of these. Guru can be searched for or one can be made as a Guru deliberately/forcefully, can not be searched for or one can not be made as a Guru deliberately/forcefully, both of these and neither of these. Guru appears in one’s life through his attraction towards one’s tantric consort, it doesn’t happen so, both of these and neither of these. Guru itself searches his disciple, it’s not so, both of these and neither of these. Guru is non dual, he is dual, both of these and neither of these. Guru takes credit of his disciple’s spiritual progress, he doesn’t do so, both of these and neither of these. Guru is a family member, not a family member, both of these and neither of these. Guru is an elder one, not an elder one, both of these and neither of these. Guru is selfish and want to solve his purpose, it’s not like this, both of these and neither of these. Guru is must in life, it’s not so, both of these and neither of these. Guru is a special God gift, it’s not so, both of these and neither of these. Guru is punishing, he is not punishing, both of these and neither of these. Guru is everywhere, he is no where, both of these and neither of these. Guru is one’s second mother for he gives one second birth into an enlightened life, it’s not so, both of these and neither of these. Guru is must for awakening, he is not must for awakening, both of these and neither of these. Guru is everything, he is nothing, both of these and neither of these. Guru accepts one when he is rejected from everywhere, it’s not so, both of these and neither of these. One can be fully sure if who one is his Guru, it’s not so, both of these and neither of these. Guru is one’s Kundalini/focused mental image that can be lifted up most easily through tantra, it’s not so, both of these and neither of these. Guru doesn’t provide mere knowledge but love and mental support too for mere knowledge can also be provided by Google, it’s not so, both of these and neither of these. It is a long list and covers every humanely attributes.

Actually, Guru is indescribable just like God. Majority of people who go on beating the drums outside for Guru actually don’t know even the ABC of Guru. Guru is made in heart. Guru is made in mind. Actually not made deliberately but all happen spontaneously in a love full social environment. People who don’t know what is love, they can’t understand Guru. No one can exposé one that is hardly attached to the heart. No one can exposé one that is hardly attached to the mind.

गुरु को परिभाषित, प्रस्तावित व विज्ञापित नहीं किया जा सकता; और न ही किसी को जबरदस्ती गुरु बनाया जा सकता है। गुरु तो किसी के अपने स्वयं के / आत्मा के रूप में ही होते है। भला अपना रूप कैसे किसी के द्वारा वर्णित या प्रशंसित किया जा सकता है। गुरु केवल अनुभव ही किए जा सकते हैं।

प्रेमयोगी वज्र के साथ भी यही हुआ। वह गुरु के बारे में पूरी तरह से गूंगा है। उसके पास केवल अनुभवात्मक विवरण है, जिसे वह किसी भी तरह से वर्णित नहीं कर सकता है। जब वह गुरु को किसी विशेष रूप में वर्णित करने का प्रयास करता है, तो वह उसका सार पूरी तरह से खो देता है। यह ऐसे होता है, जैसे कोई भी व्यक्ति मीठा स्वाद तो ले सकता है, लेकिन मिठास को एक वास्तविक रूप में वर्णित नहीं कर सकता है। जब वह व्यक्ति मधुरता का वर्णन करने की कोशिश करता है, तो वह अचानक उसकी खुशी / मिठास को खो देता है। गुरु एक दोस्त है, दोस्त भी नहीं, इनमें से दोनों भी है, और इनमें से कोई भी नहीं। गुरु एक शुभचिंतक है, नहीं भी है, दोनों भी है, और इन दोनों में से कोई भी नहीं। गुरु आध्यात्मिक प्रगति में मदद करता है, नहीं भी करता है, दोनों भी सत्य हैं, इन दोनों में से कोई भी सत्य नहीं है। गुरु की एक विशिष्ट उम्र है, उसकी कोई भी विशिष्ट उम्र नहीं है, इनमें से दोनों भी, और कोई भी नहीं। गुरु के अन्दर विशिष्ट गुणों का एक समूह होता है, नहीं भी होता है, इनमें से दोनों भी, और इनमें से कोई भी नहीं है। गुरु आध्यात्मिक रूप से उन्नत है, आध्यात्मिक रूप से उन्नत नहीं भी है, इनमें से दोनों भी है, और इनमें से कोई भी नहीं। गुरु प्रिय हैं, प्रिय नहीं भी हैं, इनमें से दोनों, और इनमें से कोई भी नहीं। गुरू बहुत सम्मानित हैं, नहीं भी हैं, इनमें से दोनों भी हैं, और इनमें से कोई भी नहीं है। गुरु अच्छी तरह से जाना-माना होता है, और सामाजिक रूप से अच्छी तरह से स्थापित होता है, अच्छी तरह से ज्ञात और सामाजिक रूप से स्थापित नहीं भी होता, इनमें से दोनों भी, और इनमें से कोई भी नहीं। गुरु अपने शिष्य से प्यार करते हैं, प्यार नहीं भी करते, इनमें से दोनों भी, और इनमें से कोई भी नहीं। गुरु खुद को गुरु के रूप में दिखाता है, नहीं भी दिखाता है, इन दोनों में से दोनों ही, और इनमें से कोई भी नहीं। गुरु की खोज की जा सकती है, या किसी को जानबूझकर / बलपूर्वक गुरु के रूप में बनाया जा सकता है; उसे नहीं भी खोजा जा सकता है, या जानबूझकर / बलपूर्वक नहीं भी बनाया जा सकता है, इन दोनों में से दोनों ही, और दोनों में से कोई भी नहीं। गुरु किसीके जीवन में उसकी तांत्रिक प्रेमिका / प्रेमी के प्रति आकर्षण के माध्यम से प्रकट होता है, ऐसा नहीं भी होता है, इनमें से दोनों भी, और इनमें से कोई भी नहीं। गुरु स्वयं ही अपने शिष्य की खोज करता है, ऐसा नहीं है, इनमें से दोनों भी, और इनमें से कोई भी नहीं। गुरु द्वैतमयी नहीं है, वह द्वैतमयी है भी, इनमें से दोनों भी, और इनमें से कोई भी नहीं। गुरु अपने शिष्य की आध्यात्मिक प्रगति का श्रेय स्वयं को देते हैं, वह ऐसा नहीं करते हैं, इनमें से दोनों भी, और इनमें से कोई भी नहीं। गुरु एक परिवार का सदस्य है, वह शिष्य के परिवार का सदस्य नहीं है, इनमें से दोनों भी, और इनमें से कोई भी नहीं। गुरु एक वृद्ध व्यक्ति हैं, ऐसा नहीं है, इनमें से दोनों भी, और इनमें से कोई भी नहीं। गुरु स्वार्थी हैं, और अपने उद्देश्य को हल करना चाहते हैं; ऐसा नहीं है, इनमें से दोनों भी, और इनमें से कोई भी नहीं। गुरु जीवन में जरूरी है, ऐसा नहीं है, इनमें से दोनों भी, और इनमें से कोई भी नहीं। गुरु भगवान का दिया हुआ एक विशेष उपहार है, ऐसा नहीं है, इनमें से दोनों भी, और इनमें से कोई भी नहीं। गुरु दंडित करते हैं, वह दण्डित नहीं करते हैं, इनमें से दोनों, और इनमें से कोई भी नहीं। गुरु हर जगह है, वह कहीं नहीं है, इनमें से दोनों भी, और इनमें से कोई भी नहीं है। गुरु एक दूसरी मां है, क्योंकि वह एक दूसरे जन्म को एक प्रबुद्ध जीवन के रूप में देता है, ऐसा नहीं है, इनमें से दोनों भी, और इनमें से कोई भी नहीं। गुरु आत्मजागृति के लिए जरूरी है, जरूरी नहीं है,  इन दोनों में से दोनों भी, और इनमें से कोई भी नहीं। गुरु सब कुछ है, वह सब कुछ नहीं है, इनमें से दोनों भी है, और इनमें से कुछ भी नहीं है। जब कोई व्यक्ति हर जगह से खारिज कर दिया जाता है, तो गुरु उसको स्वीकार करता है, ऐसा नहीं है, इनमें से दोनों भी, और इनमें से कोई भी नहीं। कोई पूरी तरह से सुनिश्चित कर सकता है कि कौन उसका गुरु है, ऐसा नहीं है, इनमें से दोनों भी, और इनमें से कोई भी नहीं। गुरु एक कुंडलिनी / केंद्रित मानसिक छवि है, जिसे तंत्र के माध्यम से मूलाधार से सबसे आसानी से उठाया जा सकता है, ऐसा नहीं है, इनमें से दोनों भी हैं, और इनमें से कोई भी नहीं है। गुरु केवल ज्ञान ही प्रदान नहीं करते हैं, बल्कि ज्ञान के साथ प्यार और मानसिक सहायता / सहानुभूति भी, क्योंकि खाली ज्ञान तो Google / गूगल के द्वारा भी प्रदान किया जा सकता है; ऐसा नहीं है, इनमें से दोनों बातें भी सत्य हैं, और इनमें से कोई भी सत्य नहीं। यह एक लंबी सूची है, जो हर मानवीय विशेषताओं को शामिल करती है।

दरअसल, गुरु भगवान की तरह अवर्णनीय है। गुरु के मामले में बाहरी प्रचार के ड्रम / ढोल को बजाने वाले अधिकांश लोग वास्तव में गुरु के एबीसी / कखग को भी नहीं जानते हैं। गुरु दिल में बना होता है। गुरु को दिमाग में बनाया गया होता है। वास्तव में गुरु को जानबूझकर नहीं बनाया गया होता है, लेकिन वे एक पूर्ण सामाजिक व प्रेमभरे वातावरण में सहजता से स्वयं ही मस्तिष्क में प्रतिष्ठित हुए होते हैं। जो लोग नहीं जानते कि प्यार क्या है, वे गुरु को नहीं समझ सकते हैं। कोई भी उस व्यक्ति को उजागर नहीं कर सकता, जो दिल से मजबूती के साथ जुड़ा हुआ होता है। कोई भी उस व्यक्ति को एक्सपोज़ नहीं कर सकता है, जो दिमाग / मन से मजबूती के साथ जुड़ा हुआ होता है।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s