वेबसाईट का निर्माण, प्रबंधन व विकास, भाग-5; Website creation, management and development, part-5

वेबसाईट का निर्माण, प्रबंधन व विकास, भाग-5 (please browse down or click here to view this post in English)

वर्डप्रेस के तीन प्लान हैं, पर्सनल, प्रीमियम, व बिजनेस। पर्सनल प्लान की कीमत 2400 रुपए प्रतिवर्ष है, प्रीमियम प्लान की लगभग 4000 रुपए, व बिजनेस प्लान की लगभग 8000 रुपए । अधिकाँश लोगों के लिए पर्सनल प्लान पर्याप्त है। जो बहुत अधिक आडियो व विडियो पोस्ट लिखते हैं, इंटरनेट पर कुछ बेचकर पेमेंट रिसीव करते हैं, विज्ञापनों से कमाई करते हैं, व ज्यादा ही तड़क-भड़क वाली वेबसाईट-थीम को पसंद करते हैं, केवल उन्हीं के लिए दूसरे प्लान की आवाश्यकता होती है। छोटे प्लान से ट्रेफिक भी अधिक मिलती है, क्योंकि वह जल्दी लोड होती है, और वह सिंपल भी होती है। मुझे तो पर्सनल प्लान ही सर्वश्रेष्ठ लगा। वर्डप्रेस डॉट कॉम के पास एक निःशुल्क प्लान भी होता है, जिसमें वह अपने विज्ञापन डालती रहती है, और कस्टमर केयर की सपोर्ट भी नहीं देती। निःशुल्क प्लान तो कभी नहीं लेना चाहिए, सीखने के लिए भी नहीं, क्योंकि उसमें डाटा गुम होने का डर हमेशा बना रहता है। मेने तो शुरू के 5-6 महीने के लिए निःशुल्क प्लान ही लिया था। जब मेरी ट्रेफिक कुछ बढ़ गई, और डाटा भी बड़ा हो गया, तब मैंने उसे पर्सनल प्लान में अपग्रेड करवाया। उसमें मुझे एक महीने का विंडो-टाईम मिला, जिसमें पुनः डाऊनग्रेड करने पर मुझे पूरा रिफंड वापिस मिलना था। जब मेरी वेबसाईट पूर्णतः तैयार हो गई, तब मैंने उसे प्रीमियम प्लान में अपग्रेड करवाया (उसमें भी एक महीने का विंडो-टाईम था)। पर मैं उसमें छः महीने तक काम करता रहा, और जब मेरा मन भर गया, और उसे निरर्थक समझा, तब मैंने उसे डाऊनग्रेड करवा दिया। अपवाद–स्वरूप मुझे पूरा रिफंड वापिस मिल गया।

अब हम पोस्ट के व वेबपेज के निर्माण के बारे में बात करते हैं। पोस्ट में केटेगरी व टैग बनाने का विकल्प होता है। केटेगरी से पाठकों / वेबसाईट-विजिटरों के लिए पोस्ट तक पहुँचना आसान हो जाता है। जैसे कि कविताओं के लिए कविता नाम से केटेगरी बना कर उसमें सभी कवितायेँ डाली जाती हैं। एक पोस्ट की एक से अधिक केटेगरी भी हो सकती हैं। टैग के रूप में कीवर्ड को लिखा जाता है। जैसे कि कुण्डलिनी से सम्बंधित पोस्ट के लिए कुण्डलिनी, योग, अध्यात्म आदि शब्द टैग के रूप में डाले जाते हैं। टैग से सर्च इंजन को पोस्ट खोजने में आसानी होती है। इसी तरह कमेन्ट, पिन्जबेक, व ट्रेकबेक को एनेबल या डिसेबल करने का विकल्प भी होता है। वेबसाईट में लिंक बनाना बहुत महत्त्वपूर्ण होता है। लिंक से ही वेबसाईट पूरी दुनिया से जुड़ती है। पोस्ट के एडिट मोड में जाकर सर्वप्रथम एंकर टेक्स्ट को सेलेक्ट किया जाता है। एंकर टेक्स्ट पोस्ट का वह वाक्य या शब्द होता है, जिस पर लिंक की हुई सामग्री जुड़ी होती है, और जिस पर कर्सर रखने से हाथ का निशान बनता है, और जिसको क्लिक करने से लिंकड सामग्री वाला पेज खुल जाता है। एंकर टेक्स्ट को सेलेक्ट करने के बाद टॉप मीनू बार में लिंक के निशान पर क्लिक किया जाता है। उससे वह लिंकड पेज का यू-आर-एल (जो पेज के टॉप वाली गूगल-सर्च-बार में होता है) एड्रेस मांगता है। उस एड्रेस को वहां कोपी-पेस्ट करके सेव कर लिया जाता है। “लिंकड पेज को अलग टेब पर खोलें” वाले विकल्प को न चुनें। इसी लिंक बनाने की कला से ही “नेक्स्ट पेज”, “प्रीवियस पेज” आदि क्लिकेबल बटन बनाए जाते हैं। अगली पोस्ट में हम पेज जम्प लिंक के बारे में बताएँगे——अगली पोस्ट पर जारी——

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Website creation, management and development, part-5

There are three plans of WordPress.com. These are personal, premium, and business. The price of personal plan is 2400 INR per year, about 8000 INR is the price for premium plan, and approximately 8000 inr for the business plan. Personal plan for most people is enough. Those who write a lot of audio and video posts, sell something on the internet, receive payments, earn money from ads, and like more snappy website-themes, they only need another plan. Traffic is also much higher with the simple plan, because it loads quickly, and it is simple in design. I thought it was best to have a personal plan. WordPress.com also has a free plan, in which it keeps sending its ads, and does not even support customer care. Free plans should never be taken, not even for learning, because there is always the fear of losing data. I had only taken a free plan for 5-6 months of the start. When my traffic increased, and the data grew too, then I upgraded it to the personal plan. I got one-month window-time in which I had to get the entire refund back once I again downgraded that. When my website was completely ready, then I upgraded it to the premium plan (it also had a one-month window-time). However, I kept working for six months in it, and when my mind was full, and considered it as nonsensical, then I downgraded it. With the exception, I got the full refund back.

Now we talk about the creation of posts and web pages. Post has the option to create categories and tags. The category makes it easy for readers / website-visitors to access posts. For poetry, ‘poetry’ is named after category and all poems are inserted in it. There may be more than one category for a post. The keywords are written as tags. As for the post related to Kundalini, Kundalini-Yoga, Spirituality etc., kundalini or/and yoga words are put in the form of tags. The tag makes search engines easy to find posts. Similarly, there is an option to enable comment, Pingback, and Trackback. Making a link in the website is very important. The link connects the whole world with the post / website. First, the anchor text is selected by going into the edit mode of the post. The anchor text is the sentence or word of the post that the linked material is attached to, and putting mouse on which the hand mark evolves, and clicking on which opens the page with the link contents. After selecting anchor text, the link mark is clicked in the top editor bar. From that, it asks for the link-page URL (which is in the top of the to be linked page, in Google-search-bar). Copying that address, it is pasted in editor and saved. Do not select the option “Open the link page on a separate tab”. Clickable buttons are created from the art of creating link, like “Next page”, “Previous page” etc. In the next post we will tell about the page jump link —— contd. on next post ——

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demystifyingkundalini

I am as natural as air and water. I take in hand whatever is there to work hard and make a merry. I am fond of Yoga, Tantra, Music and Cinema.

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