Tantric Guru and tantric consort- तांत्रिक गुरु और तांत्रिक प्रेमिका

The permanent stationing of guru inside one’s mind is best achieved through sexual tantra, just as happened with Premyogi vajra as described on Home-2 webpage. His first exposure with his sexual consort(non marital)/Queen during he being in loving company of his guru(the same spiritual old man) was pure mental/one time indirect initiation/indirect tantra based as told in detail on webpages, love story of a yogi, scattered throughout. Therein queen was as if his activated kundalini and was led through the wonderful/too rich romantic lures in his mind to his enlightenment in too short time of 2 years by the spontaneous grace of his pauranic(who reads puranas/collections of ancient Indian spiritual stories in Sanskrit, daily) guru’s company, even without her awakening. On second occasion, his that and then demised physical guru’s mental image as his second kundalini was enriched too much with his non dual life style and that image’s connection with the repeatedly remembered image of the first consort(indirectly sexual) in about 15 years. Then in the last, Premyogi vajra lifted up that kundalini to  her awakening with the help of the direct sexual tantra with his second consort(marital), as described on the same homepage in brief and love story of a yogi-7 in detail.

मन के अन्दर गुरु के स्थायी रख-रखाव को यौन तंत्र के माध्यम से सबसे अच्छी तरह से हासिल किया जा सकता है, जैसा कि होम -2 वेबपृष्ठ पर वर्णित प्रेमयोगी वज्र के साथ हुआ था। अपनी प्रथम यौनप्रेमिका / प्रथम देवीरानी (अविवाहित) से संपर्क में रहने के दौरान वह अपने गुरु (वही आध्यात्मिक बूढ़े आदमी) की निरंतर प्रेमपूर्ण संगति में भी बना हुआ था। प्रथम देवीरानी के साथ वह संपर्क शुद्ध मानसिक / एकबार के अप्रत्यक्ष तांत्रिक प्रारम्भ (इनिशिएशन) / अप्रत्यक्षतंत्र से प्रेरित था। यह सारा वर्णन वेबपेजिस “love story of a yogi” पर किया गया है। वही देवीरानी उसकी सक्रिय कुंडलिनी के रूप में थी, और उसके दिमाग में उसके उपरोक्त पौराणिक गुरु द्वारा पढ़ी गई कथाओं की सहज कृपा से अत्यद्भुत / बहुत ही समृद्ध रोमांटिक लालचों के माध्यम से, 2 वर्षों के बहुत कम समय में उसके आत्मज्ञान के लिए चरम मानसिक अभिव्यक्ति तक ले जाई गई, उन्हीं गुरु की संगति से, जो प्रतिदिन प्राचीन भारतीय आध्यात्मिक कहानियों के संग्रह / पुराण पढ़ा करते थे, उस कुण्डलिनी की सैद्धांतिक जागृति के बिना ही। दूसरे मौके पर, उन्होंने अपनी दूसरी कुंडलिनी के रूप में अपने उन्हीं भौतिक गुरु की मानसिक छवि को अपनी अद्वैतपूर्ण जीवन शैली के साथ समृद्ध किया, और पहली देवीरानी (परोक्ष रूप से यौनसम्बन्धी) की बार-बार याद की गई छवि के साथ अपने गुरु की छवि का संबंध जुड़ा होने के कारण, गुरु की छवि भी काफी समृद्ध हो गई, लगभग 15 वर्षों में। फिर आखिर में, प्रेमयोगी वज्र ने अपनी दूसरी कंसोर्ट / प्रेमिका (वैवाहिक) के साथ सीधे / प्रत्यक्ष यौनतंत्र की मदद से अंतिम जागृति के लिए उस कुंडलिनी को उठाया, जैसा कि उपरोक्त होमपेज पर ही संक्षेप में और “love story of a yogi-7” में विस्तार से वर्णित है।

 

Psychotropic drugs with meditation-ध्यान के साथ PSYCHOTROPIC / अवसादरोधी ड्रग्स / दवाएं

I think as if natural psychic drugs have become developed spontaneously to solve some specific purpose at this time. If these are taken at right time and in right schedule during the meditation, it can help in Kundalini awakening. But the present research is not concluding enough. In ancient days, sages used to consume bhaang(Hindi), a narcotic plant to get psychic help in their meditation. Perhaps they knew the right doze, right course and right time of that’s use. People today misuse psychotropic drugs, so get harm instead of any benefit. Premyogi vajra(The hero of demystifyingkundalini) had used a prescribed psychotropic drug continuously for one month that produced a change in his personality. He started meditation after one year of that’s use and got a kundalini awakening. I think, these drugs prime a person for meditation by making him cool, peaceful and satisfied. These qualities are there in meditating being too. This appears as the only role of these drugs for the success is only achieved through the meditation itself. May be that these drugs give additional boost to the meditation if used properly and cautiously, avoiding their side effects. Enough research is there to be done regarding this.

Rest of the detail can be found at Quora, Advising someone who has got kundalini awakening with drugs but relapsing.

ध्यान के साथ PSYCHOTROPIC / अवसादरोधी ड्रग्स / दवाएं

मुझे लगता है कि इस समय कुछ विशिष्ट उद्देश्य को हल करने के लिए ही प्राकृतिक मानसिक दवाएं स्वचालित रूप से विकसित हो गई हैं। यदि ध्यान के दौरान सही समय पर, सही मात्रा में और सही schedule / नियम के साथ इन्हें लिया जाता है, तो ये कुंडलिनी-जागृति में मदद कर सकती हैं। लेकिन वर्तमान शोध पर्याप्त निष्कर्ष नहीं निकाल पा रहा है। प्राचीन दिनों में ऋषि विशेषतः शैव सम्प्रदाय के योगी-बाबा लोग भांग (हिंदी), एक नशीले पदार्थ के पौधे का उपयोग करते थे, ताकि वे उससे ध्यान में मानसिक सहायता प्राप्त कर सकते। शायद वे उसके सही उपयोग, उसके उपयोग के सही तरीके, और उसके उपयोग के सही समय को जानते थे। लोग आज मनोविज्ञान दवाओं का दुरुपयोग करते हैं, इसलिए किसी भी लाभ के बजाय अक्सर नुकसान ही प्राप्त करते हैं। प्रेमयोगी वज्र (डेमिस्टिफाइंगकुंडलिनी / demystifyingkundalini के नायक) ने एक महीने के लिए एक निर्धारित मनोविज्ञान दवा का उपयोग किया था, जिसने उसके व्यक्तित्व में बदलाव कर दिया था। फिर उन्होंने उसके उपयोग के एक वर्ष बाद ध्यान-साधना / कुण्डलिनी-साधना को शुरू किया, और अंततः कुंडलिनी-जागृति प्राप्त की। मुझे लगता है, ये दवाएं एक व्यक्ति को शांत, अवसादरहित और संतुष्ट बना कर, ध्यान-साधना में उसकी मदद करती हैं। ये गुण ध्यान-साधना करने वालों में भी विद्यमान होते हैं। ऐसा लगता है कि इन दवाओं का यही प्रेरणादायक व सहायक रोल होता है, क्योंकि आध्यात्मिक सफलता तो केवल ध्यान-साधना के माध्यम से ही हासिल की जाती है। हो सकता है कि ये दवाएं ध्यान के लिए अतिरिक्त बढ़ावा भी दें, अगर इनके दुष्प्रभावों से परहेज करते हुए, कोई इनका सही ढंग से और सतर्कता से उपयोग करता है। इसके बारे में पर्याप्त शोध किया जाना अभी बाकि है।

शेष विवरण क्वोरा में मिल सकता है, जो कि उसे एक सलाह के रूप में है, जिसकी कुंडलिनी अवसादरोधी दवाओं के साथ जागृत हो गई हो, लेकिन वह फिर से दवा के दुष्प्रभाव में आ गया हो।