Kundalini versus Hypnotism/कुंडलिनी एक सम्मोहक

Kundalini/kundalini yoga is the best preventive measure and antidote for the effect of hypnotism. We think that hypnotism is a special thing, but it’s not so. All of us are hypnotizers to little or more extent. When some one is trying to become over influential among others, actually he is hypnotizing others unknowingly. In this way, all great leaders, rulers, artists etc. all are hypnotizers. Positive hypnotism leads to progress but negative hypnotism leads to downfall. Positive hypnotism means that hypnotizer is positively oriented and leads to positivity inside the hypnotized beings too. Negative hypnotism is just the reverse of it. Actually kundalini is also a positive hypnotizer and Kundalini yoga is an artificial means to amplify it. Kundalini is the mental image of a positively hypnotizing being/guru/devata/god/lover/consort inside one’s mind/brain. Therefore kundalini doesn’t allow the mental image of different street hypnotizers to occupy one’s brain for that kundalini has already occupied most of the space inside the brain of a kundalini yogi keeping no space vacant for the others/negative hypnotizers. Nondual hypnotizers like qualified guru or diety or god produces spiritual as well as material progress. Beings having uncontrolled and duality filled mind produce mostly downfall in both of these. Five Ms of tantra produce enhanced hypnotizing effect of any being. So, if used properly and under guidance, they produce very strong positive hypnotism otherwise negative one. The improper use of 5 Ms of tantra resulted into the defamation of tantra, the real science of mind/spiritualism. Religious extremism/terrorism is one of the best example of this misuse. If we take it in a positive way, stray hypnotisms give a tough competition to kundalini, so kundalini becomes more and more stronger.

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कुंडलिनी/कुंडलिनी योग सम्मोहन से बचाने वाली सबसे अच्छी युक्ति है। हम सोचते हैं कि सम्मोहन एक विशेष चीज है, पर ऐसा नहीं है। वास्तव में हम सभी एक-दूसरे को कम-अधिक मात्रा में सम्मोहित करते रहते हैं। जब कोई व्यक्ति दूसरों के बीच में अधिक ही प्रभावशाली बनने का प्रयत्न करता है, तब वह वास्तव में अनजाने में ही दूसरों को सम्मोहित कर रहा होता है। इस तरह से सभी महान नेता, शासक, कलाकार, धर्म गुरु आदि सम्मोहनकर्ता ही हैं। सकारात्मक सम्मोहन उन्नति की ओर ले जाता है, परंतु नकारात्मक सम्मोहन पतन की ओर। सकारात्मक सम्मोहन का अर्थ है कि सम्मोहनकर्ता सकारात्मक मानसिकता वाला है, जिससे वह अपने द्वारा सम्मोहित लोगों में भी सकारात्मकता भर देता है। नकारात्मक सम्मोहन इसके ठीक विपरीत होता है। वास्तव में कुण्डलिनी भी एक सकारात्मक सम्मोहक है, और कुण्डलिनी योग उसकी सम्मोहकता को बढ़ाने वाला एक अर्धकृत्रिम उपाय। कुण्डलिनी एक सकारात्मक सम्मोहनकर्ता/योग्य गुरु/देवता/प्रेमी/यौनप्रेमी का मन/मस्तिष्क में बना हुआ एक प्रगाढ़ चित्र ही है। इसलिए वह कुण्डलिनी चित्र इधर-उधर के सम्मोहनकर्ताओं के चित्रों को मन में घुसने नहीं देता, क्योंकि उस कुण्डलिनी ने पहले ही मन-मस्तिष्क की अधिकांश खाली जगह को भरा होता है, अतः नए चित्र के लिए स्थान ही नहीं बचता। अद्वैतमयी सम्मोहनकर्ता, जैसे कि गुणवान गुरु या इष्ट या देवता , आध्यात्मिक व भौतिक, दोनों प्रकार की उन्नति करवाते हैं। परंतु जिन सम्मोहनकर्ताओं का मन अनियंत्रित, अमानवीय व द्वैतपूर्ण है, वे ज्यादातर पतन ही करवाते हैं। तन्त्र के पंचमकार किसी व्यक्ति की सम्मोहकता में अत्यधिक वृद्धि करते हैं। इसलिए यदि ये ढंग से व उचित दिशा निर्देशन में प्रयोग किए जाएं, तब ये बहुत बलवान व सकारात्मक सम्मोहकता को उत्पन्न करते हैं, अन्यथा केवल नकारात्मक। इन पंचमकारों के दुरुपयोग से ही वह तंत्र दुनिया में बदनाम हुआ है, वास्तव में जो मन/आध्यात्मिकता का वास्तविक विज्ञान है। धार्मिक अतिकट्टरता/आतंकवाद इस दुरुपयोग का एक अच्छा उदाहरण है। यदि इसे सकारात्मक रूप में लें, तो इधर-उधर के सम्मोहन कुण्डलिनी को कड़ा मुकाबला देते हैं, जिससे कुण्डलिनी मजबूत होती रहती है।

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Tantralaya in place of Vaishyalaya/वैश्यालय के स्थान पर तंत्रालय

Prostitute centres/vaishyalaya should be socialised and channelized/transformed into the spiritual/kundalini realm with help of tantra, just as the household sexual activities are transformed by it. In this way, number one misconduct would become as a number one kundalini uplifting machine. Honor of woman would also be saved, she being appearing as tantra-godess in this way. With help of the present time health screening and health check ups, tantra yoga would become fully safe unlike that in old times when diseases used to spread to each others during such tantric feasts. There should be appointed well qualified tantric gurus in those community tantra centres. Illegal sexual relationships with accompanied crimes would automatically come down. Many psychological diseases due to restricted sexuality would come down. There would be done nothing additional to the present scenario but the proustite centres already existing would be transformed only.

वेश्यालय केंद्र / वैश्यालय को सामाजिक सहायता और चैनलिंग की मदद से आध्यात्मिक / कुंडलिनी क्षेत्र में परिवर्तित / रूपांतरित किया जाना चाहिए, जैसे कि घरेलू यौन गतिविधियों को इसके द्वारा बदल दिया जा सकता है। इस तरह, नंबर एक दुर्व्यवहार एक कुंडलिनी उत्थान मशीन के रूप में बन जाएगा। महिला का सम्मान भी बचाया जाएगा, वह इस तरह से तंत्र-देवी के रूप में दिखाई देगी। वर्तमान समय में स्वास्थ्य जांच और स्वास्थ्य जांच की सहायता से, तंत्र योग उस पुराने समय की अपेक्षा पूरी तरह से सुरक्षित हो जाएगा, जब यौनसंबंध बीमारियों को एक दूसरे के बीच में फैलाता था। उन समुदाय-तंत्र-केंद्रों में अच्छी तरह से योग्य तांत्रिक गुरु नियुक्त किया जाना चाहिए। इसके साथ ही अपराधों के साथ अवैध यौन संबंध नीचे आ जाएंगे। प्रतिबंधित कामुकता के कारण होने वाले कई मनोवैज्ञानिक रोग नीचे आ जाएंगे। वर्तमान परिदृश्य के लिए कुछ भी अतिरिक्त नहीं किया जाएगा, लेकिन पहले से मौजूद वैश्यावृत्ति-केंद्र केवल तब्दील हो जाएंगे।

 

Tantric Guru and tantric consort- तांत्रिक गुरु और तांत्रिक प्रेमिका

The permanent stationing of guru inside one’s mind is best achieved through sexual tantra, just as happened with Premyogi vajra as described on Home-2 webpage. His first exposure with his sexual consort(non marital)/Queen during he being in loving company of his guru(the same spiritual old man) was pure mental/one time indirect initiation/indirect tantra based as told in detail on webpages, love story of a yogi, scattered throughout. Therein queen was as if his activated kundalini and was led through the wonderful/too rich romantic lures in his mind to his enlightenment in too short time of 2 years by the spontaneous grace of his pauranic(who reads puranas/collections of ancient Indian spiritual stories in Sanskrit, daily) guru’s company, even without her awakening. On second occasion, his that and then demised physical guru’s mental image as his second kundalini was enriched too much with his non dual life style and that image’s connection with the repeatedly remembered image of the first consort(indirectly sexual) in about 15 years. Then in the last, Premyogi vajra lifted up that kundalini to  her awakening with the help of the direct sexual tantra with his second consort(marital), as described on the same homepage in brief and love story of a yogi-7 in detail.

मन के अन्दर गुरु के स्थायी रख-रखाव को यौन तंत्र के माध्यम से सबसे अच्छी तरह से हासिल किया जा सकता है, जैसा कि होम -2 वेबपृष्ठ पर वर्णित प्रेमयोगी वज्र के साथ हुआ था। अपनी प्रथम यौनप्रेमिका / प्रथम देवीरानी (अविवाहित) से संपर्क में रहने के दौरान वह अपने गुरु (वही आध्यात्मिक बूढ़े आदमी) की निरंतर प्रेमपूर्ण संगति में भी बना हुआ था। प्रथम देवीरानी के साथ वह संपर्क शुद्ध मानसिक / एकबार के अप्रत्यक्ष तांत्रिक प्रारम्भ (इनिशिएशन) / अप्रत्यक्षतंत्र से प्रेरित था। यह सारा वर्णन वेबपेजिस “love story of a yogi” पर किया गया है। वही देवीरानी उसकी सक्रिय कुंडलिनी के रूप में थी, और उसके दिमाग में उसके उपरोक्त पौराणिक गुरु द्वारा पढ़ी गई कथाओं की सहज कृपा से अत्यद्भुत / बहुत ही समृद्ध रोमांटिक लालचों के माध्यम से, 2 वर्षों के बहुत कम समय में उसके आत्मज्ञान के लिए चरम मानसिक अभिव्यक्ति तक ले जाई गई, उन्हीं गुरु की संगति से, जो प्रतिदिन प्राचीन भारतीय आध्यात्मिक कहानियों के संग्रह / पुराण पढ़ा करते थे, उस कुण्डलिनी की सैद्धांतिक जागृति के बिना ही। दूसरे मौके पर, उन्होंने अपनी दूसरी कुंडलिनी के रूप में अपने उन्हीं भौतिक गुरु की मानसिक छवि को अपनी अद्वैतपूर्ण जीवन शैली के साथ समृद्ध किया, और पहली देवीरानी (परोक्ष रूप से यौनसम्बन्धी) की बार-बार याद की गई छवि के साथ अपने गुरु की छवि का संबंध जुड़ा होने के कारण, गुरु की छवि भी काफी समृद्ध हो गई, लगभग 15 वर्षों में। फिर आखिर में, प्रेमयोगी वज्र ने अपनी दूसरी कंसोर्ट / प्रेमिका (वैवाहिक) के साथ सीधे / प्रत्यक्ष यौनतंत्र की मदद से अंतिम जागृति के लिए उस कुंडलिनी को उठाया, जैसा कि उपरोक्त होमपेज पर ही संक्षेप में और “love story of a yogi-7” में विस्तार से वर्णित है।

 

SHAVID versus Taoism- शविद और ताओवाद

SHAVID(shareervigyaan darshan/body science philosophy- SHAVID-Shareeravigyaan darshan/Body science philosophy) may be termed as the theistic Taoism for it also incorporates God inside it, although not in a religious way. This aids up in the quick spiritual growth just as Patanjali has also pointed out that a Proper belief in God reinforcers the yogic practices.

शविद और ताओवाद

शविद (शरीरविज्ञान दर्शन) को ईश्वरवादी ताओवाद भी कहा जा सकता है, क्योंकि इसमें भगवान को भी शामिल किया जाता है, हालांकि धार्मिक तरीके से नहीं। यह त्वरित आध्यात्मिक विकास में सहायता करता है, जैसे कि पतंजलि ने भी बताया है कि भगवान में उचित विश्वास योगाभ्यास-क्रियाओं को मजबूत करता है।

Is vegetarianism must for awakening- क्या आत्मजागरण के लिए शाकाहारी होना जरूरी है

Many people ask me such questions if they should continue or leave the non veg  to get awakened. Actually it’s not the non vegetarianism that is harmful but mental attitude adopted with that. This is tantra if attitude is nondual. You can read  Understanding non duality. Panchmakaras ie. Five Ms of tantra including the non vegetarianism are the most powerful source of mental energy. That energy if directed with the nondual attitude to the kundalini, then awaken her, otherwise bury her further deep. Nondual attitude demands a balance in life and likewise makes a life balanced too if adopted. So then a man with it uses the non veg as per his minimum body needs and not as per his two inches long tongue only.

क्या आत्मजागरण के लिए शाकाहारी होना जरूरी है

बहुत से लोग मुझसे ऐसे प्रश्न पूछते हैं कि क्या उन्हें जागृत होने के लिए नॉनवेज / मांसाहार को जारी रखना चाहिए या छोड़ देना चाहिए। दरअसल यह मांसाहार नहीं है, जो अधिक हानिकारक है, अपितु यह मानसिक द्वैत-दृष्टिकोण है, जो खराब है। यदि इसके साथ रवैया अद्वैतात्मक है, तब यह तंत्र है। आप अद्वैत को समझना चाहते हैं, तो इस पूर्वोक्त लिंक पर पढ़ सकते हैं। पंचमाकर यानी मांसाहार समेत तंत्र के पांच एम मानसिक ऊर्जा के सबसे शक्तिशाली स्रोत हैं। उनसे उद्भूत वह प्रचंड मानसिक ऊर्जा अगर अद्वैतपूर्ण दृष्टिकोण के साथ कुंडलिनी के ऊपर निर्देशित होती है, तो उसे जागृत कर देती है, अन्यथा उसे और अधिक गहराई में दफन कर देती है। अद्वैतपूर्ण रवैया जीवन में संतुलन की मांग करता है, और इसी तरह वह जीवन को भी संतुलित बना देता है, यदि उसे अपनाया जाए। इसलिए उस अद्वैतपूर्ण-दृष्टिकोण के साथ एक आदमी अपने शरीर की न्यूनतम जरूरतों के अनुसार ही आमिषाहार का उपयोग करता है, न कि केवल दो इंच की लंबी अपनी जीभ के अनुसार।

Women is revered in tantra- महिलाओं को तन्त्र में पूजित किया जाता है

There is a misbelief that in the tantra, woman is exploited and used as a toy to work for the spiritual uplifting of a man (Woman in Tantra). Actually in tantra a man becomes fully sage like in every respect. Can a sage even think of exploiting anyone? Taoism also recommends for a sage to be a sexual sage, not a simple sage due to the same reason. Actually, religiously extremist people who misused tantric powers for the inhumane practices, they exploited the woman violently but the blame came to the real tantra.

महिलाओं को तन्त्र में पूजित किया जाता है

एक मिथ्या विश्वास है कि तंत्र में महिला का शोषण किया जाता है, और एक पुरुष के आध्यात्मिक उत्थान (तंत्र में महिला) के लिए उसका एक खिलौने के रूप में उपयोग किया जाता है। असल में तंत्र में एक आदमी पूरी तरह से ऋषि के समान बन जाता है। क्या ऋषि किसी का भी शोषण करने के बारे में कभी सोच भी सकता है? ताओवाद भी ऋषि के लिए एक यौन-क्रियाशील ऋषि बनने की सिफारिश करता है, एक साधारण ऋषि बनने की नहीं। असल में, धार्मिक रूप से चरमपंथी लोग, जिन्होंने अमानवीय प्रथाओं के लिए तांत्रिक शक्तियों का दुरुपयोग किया, उन्होंने ही महिला का हिंसक तरीके से शोषण किया, लेकिन दोष वास्तविक तंत्र के ऊपर आ गया।